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29/04/2026

Girnar ki Dhwaja, Jai Neminath

जिनशासन का एक अजीब सा किस्सा:
27/08/2024

जिनशासन का एक अजीब सा किस्सा:

27/08/2024

जिनशासन का एक अजीब सा किस्सा:

सूरत के एक ३० साल के अविवाहित लड़के को छत्तीसगढ़ की एक लड़की का रिश्ता आया, दोनों श्वेताम्बर मूर्तिपूजक ही थे मगर लड़का तपागच्छ को मानता था और लड़की खतरगच्छ को मानती थी | लड़की अपने पिछले जीवन में मुमुक्षु रही थी (वर्तमान में लड़की का कोई दीक्षा का विचार नहीं है) तो उसने अपने गुरु भगवंत श्री जो पायधुनी खरतरगच्छ जैन संघ - मुंबई में चातुर्मास कर रहे थे उनसे सलाह ली, गुरुश्री के मन में कहीना कही आज भी एक आस थी की ये लड़की भविष्य में मेरे पास दीक्षा लेगी | और ये भाव होना गलत नहीं है मगर इसलिए उन्होंने ये बताया की लड़का तपागच्छ का है तो उनके गुरु ही आपके गुरु बनेगे - शायद भविष्य में भाव हुए दीक्षा के तो भी तपागच्छ में ही लेनी पड़ेगी | लड़का अच्छा था मगर लड़की और उनके परिवार सूरत उनके निवासस्थान से दूर होने के कारण विचार कर रहे थे - मगर साध्वी भगवंत श्री की ये बात सुनकर लड़की ने लड़के को सम्पूर्ण तरह से मना कर दिया |

जिनशासन में जैन बेटे-बेटिया की इंटरकास्ट विवाह बढ़ रहे है, तब ऐसे गच्छवाद को बढ़ावा देने की नीति कितनी योग्य पूर्ण है वो एक बड़ा सवाल है |

मेरी करबद्ध विनंती है खतरगच्छ के गच्छाधिपति और साध्वी भगवंत श्री जो पायधुनी खरतरगच्छ जैन संघ - मुंबई में चातुर्मास कर रहे है, और ऐसे विचार रखने वाले सारे व्यक्तिगण को की आज जिनशासन में जितने विकट परिस्थिया और आक्रमण है - हमे गच्छवाद को भूलकर साथ में आगे बढ़ना है तो ऐसे सुझाव देने से पहले इतना जरूर सोचे की जिस इंसानके लिए ऐसा बोला जा रहा है वो गच्छवाद को मानता है? ऐसे सुझाव हम जैनो को पास लाएंगे या दूर लेके जायेगे?

जिनेश्वर भगवंत की आज्ञा के विरोध में कुछ भी लिखा गया हो तो त्रिविधे - त्रिविधे मिच्छामि दुक्कडम |

पति पत्नी ने साथ में दीक्षा ली है। मुमुक्षु स्मितभाई पूज्य मुनि श्री समयसाररत्नविजयजी महाराज साहेब मुमुक्षु ध्वनिबेन पूज...
10/06/2024

पति पत्नी ने साथ में दीक्षा ली है।
मुमुक्षु स्मितभाई
पूज्य मुनि श्री समयसाररत्नविजयजी महाराज साहेब
मुमुक्षु ध्वनिबेन
पूज्य साध्वीजी श्री ध्रुवज्ञानीरेखाश्रीजी महाराज साहेब
दीक्षा - 9/6/2024 रविवार सूरत
नूतन दीक्षित का जय जयकार

22/04/2024
जैन शासन की विशेषताए:-१.पंचम काल में धर्म आराधना करनेवाले मनुष्य चौथे देवलोक तक और पापी जीव दूसरी नर्क तक जा सकते है।२.प...
22/04/2024

जैन शासन की विशेषताए:-
१.पंचम काल में धर्म आराधना करनेवाले मनुष्य चौथे देवलोक तक और पापी जीव दूसरी नर्क तक जा सकते है।
२.प्रथम ऋषभदेव प्रभु का पारणा ईक्षु रस से हुआ था शेष
तीर्थंकरों का पारणा क्षीर से हुआ।
३.जो शुद्धि पूर्वक एक सामायिक करता है वह९२ करोड़,५९ लाख,२५ हजार,९२५ और पल्योपम का आयुष्य बांध सकता है।
४.हाल भरत एरावत क्षेत्र में जन्धाचारण, विद्याचारण तथा अन्य लब्धिधारी मुनि नहीं होते केवल महाविदेह क्षेत्र में ही होते है।
५.छाडा शेठ ने सौ पंखडी वाले कमल की माला से परमात्मा की पूजा की।
६.सनत्कुमार आदि देव सवभाव से ही एकेंद्रिय में उत्पन्न नहीं होते वे गर्भ्ज मनुष्य और तिर्चंय में ही उत्पन्न होते है।
७.नर्क गति में नारकी के जीव जो दुःख प्राप्त करते है उससे अनंत गुणा दुःख निगोद के जीवो को प्राप्त होता है।
८. अवधिज्ञानी तथा मन:पर्यवज्ञानी अपने और दूसरो के संख्यता और अंश्ख्यता भव जान सकता है।
९.उत्सुत्र भाषण में अनंत संसार की वृद्धि होती है।
१०.नारकी के जीवो को क्रोध ज्यादा, तिर्यंच को माया ज्यादा, मनुष्यों को मान ज्यादा, और देवो की लोभ ज्यादा होता है।

श्री महावीर स्वामी भगवान, (जीवित स्वामी)यह प्रतिमाजी महावीर स्वामी के जीवित काल में उनके भाई नंदीवर्धन ने भराई थी । श्री...
22/04/2024

श्री महावीर स्वामी भगवान,
(जीवित स्वामी)
यह प्रतिमाजी महावीर स्वामी के जीवित काल में उनके भाई नंदीवर्धन ने भराई थी ।
श्री नांदिया जी जैन तीर्थ
नांदिया जिला सिरोही राजस्थान

આ કોઈ રીલ નથી કે નથી કોઈ સ્ટોરી આ છે સુરતમાં બનેલી સત્ય હકીકત...વાત એમ બની હતી કે.-સુરતના સિટીલાઈટ વિસ્તારમાંથી એક મહાત્...
22/04/2024

આ કોઈ રીલ નથી કે નથી કોઈ સ્ટોરી આ છે સુરતમાં બનેલી સત્ય હકીકત...
વાત એમ બની હતી કે.-સુરતના સિટીલાઈટ વિસ્તારમાંથી એક મહાત્મા પસાર થઈ રહ્યા હતા વેસુ થી એ મહાત્મા કૈલાશનગર તરફ સમી સાંજે વિહાર કરી રહ્યાં હતાં અને સિટીલાઈટ ખાતે ચોવિહાર નો સમય થતો હોવાથી એમણે દવા લેવાની હોય જેથી એ મહાત્મા રસ્તા પર બેસીને દવા લેવા ગયા પણ ઉકાળેલું પાણી ખૂબ ઓછું હોવાને કારણે એ મહાત્મા રસ્તા પર થોડી વાર બેઠા રહ્યાં એ સમયે ડિમ્પલ ભાઈ અને જિજ્ઞાભાભી તેમના ઘરે થી 99 યાત્રા કરીને આવનાર નાના બાળકોના કાર્યક્રમ માટે એ રોડ ઉપર થી પસાર થઇ રહ્યા હતા તેઓની મહારાજ સાહેબ પર નજર પડતાં તેમણે મહારાજ સાહેબ ને પૂછ્યું સાહેબ કાંઈ ખપ છે તો સાહેબે કહ્યું કે ઉકાળેલું ગરમ પાણી નો ખપ છે જીજ્ઞાભાભી ઉકાળેલું ગરમ પાણી પિતા હોય વોટર બેગમાં ઉકાળેલું ગરમ પાણી હોવાના કારણે તરતજ તેમણે ઉકાળેલું ગરમ પાણી મહાત્મા ને વોહારાવી દીધું હતું આવો નિર્દોષ પાણી વોહારાવાનો લાભ તેમને મળ્યો.
આપ સવોઁને ખાસ આગ્રહ ભરી વિનંતી.....છે કે ..... હાલ ઉનાળાની ઋતુ હોય મહારાજ સાહેબો ના વિહાર પણ ચાલી રહ્યા છે ત્યારે
આપ કોઈ પણ રોડ ઉપર હોવ અને આપની પાસે ગાડી હોય કે પછી ટુ વ્હીલર તો ધ્યાન

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