आओ सब जैन मिलकर एक ही दिन संवत्सरी मनाते है।

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आओ सब जैन मिलकर एक ही दिन संवत्सरी मनाते है। एकता में ही शक्ति है।

*Great Initiative taken by Patri Mumbai Mahajan community*  *श्री पत्री मुंबई महाजन* *श्री पत्री विशा ओशवाल जैन महाजन*हम...
24/06/2026

*Great Initiative taken by Patri Mumbai Mahajan community*

*श्री पत्री मुंबई महाजन*
*श्री पत्री विशा ओशवाल जैन महाजन*
हमारे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है, जिसके कारण विवाह देरी से हो रहे हैं। बढ़ती उम्र और लगातार *BUSY LIFE (व्यस्त जीवन)* तथा *TENSION (चिंतामय जीवन)* के कारण हमारी आबादी तेजी से घट रही है।
इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, *श्री पत्री मुंबई महाजन* की ओर से *समाज में पहली बार* लड़कों के जल्दी विवाह और बच्चों के जल्दी जन्म को बढ़ावा देने के लिए, *श्री पत्री मुंबई महाजन* द्वारा दाताओं (donors) के सहयोग से एक योजना शुरू की जा रही है:
*(१) जल्दी विवाह प्रोत्साहन:*
अगर पत्री महाजन का कोई लड़का *२५ वर्ष की उम्र से पहले* विवाह करता है, तो उसके परिवार को ₹ २,५०,०००/- *मातुश्री अमृतबेन (कुंवरजीभाई) के. के. शाह परिवार के सौजन्य से श्रीमती रसीलाबेन अशोकभाई के. शाह की ओर से दिए जाएंगे।*
*(२) पहले बच्चे के जन्म पर प्रोत्साहन:*
समाज में जन्म दर बढ़ाने के लिए, यदि पिता की *२७ वर्ष तक की उम्र* में पहला बच्चा जन्म लेता है, तो उस बच्चे को *₹ २,५०,०००/-* *मातुश्री भाणबाई मगनलाल नरशी धरोड (भावना रोडवेज) के सौजन्य से नीरुबेन प्रवीणभाई और नीताबेन मणीलाल की ओर से मिलेंगे।*
*(३) दूसरे बच्चे के जन्म पर प्रोत्साहन:*
यदि पिता की *३० वर्ष तक की उम्र* में दूसरा बच्चा जन्म लेता है, तो उसे *₹ ५,००,०००/- (पाँच लाख रुपये) का प्रोत्साहन मातुश्री अमृतबेन (कुंवरजीभाई) के. के. शाह परिवार के सौजन्य से श्रीमती रसीलाबेन अशोकभाई के. शाह की ओर से दिया जाएगा।*
*विनीत,*
*श्री पत्री मुंबई महाजन के ट्रस्टी और पदाधिकारी।*

18/06/2026

🙏🙏🙏जय जिनेंद्र सा🙏🙏🙏
नागेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु की कृपा बनी रहे, क्या सकल जैन समाज अब एक होगा.......?
*साम्प्रदायिक उन्माद इंसान को भी शैतान बना देता है। यही हाल आज जैन समाज का है। जिस समाज ने अहिंसा, मैत्री और सह-अस्तित्व को जीवन का आधार बनाया, वही सकल जैन समाज आज पंथवाद और संतवाद की संकीर्णता में बंटकर अपने ही अस्तित्व पर चोट कर रहा है।*
*पंथवाद की जकड़न*
जैन धर्म मूल रूप से सत्य और संयम का धर्म है, परंतु समय के साथ इसमें पंथों की दीवारें खड़ी कर दी गईं। श्वेतांबर, दिगंबर, तेरापंथ, स्थानकवासी आदि अनेक धड़े बनाकर हम स्वयं को कमजोर करते गए। परिणाम यह हुआ कि एक ही धर्म के भीतर आपसी संवाद और सहयोग की जगह टकराव और अविश्वास ने घर कर लिया।
आज हालत यह है कि पंथ विशेष की श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए साधु-साध्वी, विद्वान और आम श्रावक तक एक-दूसरे की निंदा करने से पीछे नहीं हटते। यह प्रवृत्ति धर्म के मूल स्वरूप को धूमिल करती है और बाहरी दुनिया में हमें हंसी का पात्र बना देती है।
*संतवाद का भ्रमजाल*
दूसरी ओर संतवाद ने जैन समाज को और भी गहरे संकट में डाल दिया है। अनेक संत और मुनि अपने-अपने अनुयायियों का अलग गुट बनाकर व्यक्तिगत प्रभाव बढ़ाने में लगे हैं। धर्मसभा और प्रवचन मंच अब आध्यात्मिक शुद्धि के बजाय व्यक्तिगत प्रचार और भीड़ जुटाने का माध्यम बनते जा रहे हैं।
श्रावक वर्ग भी आंख मूंदकर किसी एक संत को ही “सर्वश्रेष्ठ” मानकर बाकी को अपमानित करने लगता है। यह अंधभक्ति न केवल समाज को विभाजित करती है बल्कि संत-परंपरा की गरिमा को भी धूमिल कर देती है।
*परिणामस्वरूप विखंडन*
जब पंथवाद और संतवाद का जाल मिल जाता है, तो पूरा समाज असंख्य छोटे-छोटे खांचों में बंट जाता है। आपसी सहयोग, सामूहिक कार्य और संगठन शक्ति खत्म हो जाती है। आज यही कारण है कि जैन समाज संख्याबल में होते हुए भी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक प्रभाव में नगण्य होता जा रहा है।
धर्म का नाम लेकर हम अपने ही धर्म को दुर्बल कर रहे हैं। समाज के भीतर की यह कलह बाहर वालों के लिए अवसर बन जाती है और वे हमें आसानी से तोड़-मरोड़कर उपयोग करते हैं।
*समाधान की राह*
इस विकट स्थिति से बाहर निकलने के लिए जैन समाज को सबसे पहले आत्ममंथन करना होगा। पंथ से ऊपर उठकर धर्म को देखना होगा और संत से ऊपर उठकर सिद्धांत को मानना होगा।
जब तक हम अपने भीतर भाईचारे, सहिष्णुता और एकता की भावना नहीं जगाते, तब तक किसी भी पंथ या संत की आड़ में हम केवल भ्रमित होते रहेंगे। असली जैन वही है जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की साधना करे, न कि जो केवल पंथ या संत की अंधभक्ति में फंसा हो.

एकता में ही शक्ति है ✊🤝
18/06/2026

एकता में ही शक्ति है ✊🤝

सफेद पट्टा =======ये उस व्यक्ति का अकाउंट हे जिसने सफेद पट्टे पर बैठकर मांस खाने की बात की थी*रिपोर्ट करके बतादो की कभी ...
12/06/2026

सफेद पट्टा
=======

ये उस व्यक्ति का अकाउंट हे जिसने सफेद पट्टे पर बैठकर मांस खाने की बात की थी

*रिपोर्ट करके बतादो की कभी प्रसिद्धि के चक्कर में ऐसी गलत बातें ना करे*

🚨 *ONE SIMPLE REPORT ON INSTAGRAM CAN END THE CONTROVERSY 🚨*

*Don’t argue. Don’t engage. Act.*

Steps:
1️⃣ Visit Instagram account
2️⃣ Tap ••• (three dots)
3️⃣ Select “Report”
4️⃣ Choose “Something about this account”
5️⃣ Select “Something Else”
6️⃣ Choose “Voilence,Hate”
7. Choose ,"Hate speech or symbol"
8. Done.

When thousands act together, It loses its reach.

Be Silent. Act Smartly. ✅

*Join the Movement.*
*Report Instagram Account*
*

11/06/2026

*ऊपर के मेसेज को समझकर इस अकाउंट को रिपोर्ट करो*

ये उस व्यक्ति का अकाउंट हे जिसने सफेद पट्टे पर बैठकर मांस खाने की बात की थी

*रिपोर्ट करके बतादो की कभी प्रसिद्धि के चक्कर में ऐसी गलत बातें ना करे*

🚨 *ONE SIMPLE REPORT ON INSTAGRAM CAN END THE CONTROVERSY 🚨*

*Don’t argue. Don’t engage. Act.*

Steps:
1️⃣ Visit Instagram account
2️⃣ Tap ••• (three dots)
3️⃣ Select “Report”
4️⃣ Choose “Something about this account”
5️⃣ Select “Something Else”
6️⃣ Choose “Voilence,Hate”
7. Choose ,"Hate speech or symbol"
8. Done.

When thousands act together, It loses its reach.

Be Silent. Act Smartly. ✅

*Join the Movement.*
*Report Instagram Account*
**

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दानवीर भामाशाह (1547-1600) भारतीय इतिहास के एक ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिनका नाम त्याग, देशभक्ति और अटूट स्वामिभक्ति का...
30/04/2026

दानवीर भामाशाह (1547-1600) भारतीय इतिहास के एक ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिनका नाम त्याग, देशभक्ति और अटूट स्वामिभक्ति का प्रतीक बन गया है। उनके बारे में विस्तृत विवरण यहाँ दिया गया है:
1. जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
जन्म: उनका जन्म 29 अप्रैल, 1547 को राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में हुआ था।
धर्म और जाति: वह जैन धर्म के अनुयायी थे और कवाड़िया' गोत्र से ताल्लुक रखते थे।
विरासत: उनके पिता भारमल कवाड़िया रणथंभौर के किलेदार थे और महाराणा सांगा व महाराणा उदय सिंह के समय में उच्च पदों पर रहे थे। उनके भाई ताराचंद भी एक वीर योद्धा थे।

2. महाराणा प्रताप के साथ ऐतिहासिक दान
भामाशाह का सबसे बड़ा योगदान तब आया जब 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
आर्थिक संकट: मुगलों से लगातार युद्ध और संसाधनों की कमी के कारण महाराणा प्रताप की सेना बिखर रही थी।
दान की राशि: 1578 में चुलिया ग्राम में भामाशाह ने महाराणा प्रताप से भेंट की और अपनी पूर्वजों द्वारा संचित पूरी संपत्ति उनके चरणों में रख दी। इतिहासकारों के अनुसार, यह संपत्ति 25 लाख रुपये और 20,000 अशर्फियाँ (सोने के सिक्के) थी।
महत्व: यह राशि इतनी विशाल थी कि महाराणा प्रताप की 25,000 सैनिकों की विशाल सेना का खर्च 12 वर्षों तक उठाया जा सकता था। इसी मदद से प्रताप ने अपनी सेना फिर से संगठित की और मेवाड़ के बड़े हिस्से को मुगलों से मुक्त कराया।

3. एक कुशल योद्धा और राजनीतिज्ञ
भामाशाह केवल धन के ही दानी नहीं थे, बल्कि वे तलवार के भी धनी थे:
सेनापति: वे मेवाड़ के सेनापति और प्रधानमंत्री (प्रधान) भी रहे। उन्होंने कई युद्धों में खुद सेना का नेतृत्व किया।
प्रशासन: वे महाराणा प्रताप के सबसे भरोसेमंद सलाहकार थे और राज्य की अर्थव्यवस्था व कूटनीति संभालने में माहिर थे।

4. जैन धर्म के आदर्शों का पालन
भामाशाह के जीवन में जैन धर्म के मूल्यों की स्पष्ट झलक मिलती है:
अपरिग्रह: जैन धर्म का सिद्धांत 'अपरिग्रह' (मोह और संग्रह का त्याग) उन्होंने चरितार्थ किया। उन्होंने अपनी पूरी निजी संपत्ति राष्ट्र के लिए समर्पित कर दी।
निर्माण कार्य: उन्होंने अपने भाई ताराचंद के साथ मिलकर कई जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया और धार्मिक स्थलों के लिए काफी दान दिया।

5. सम्मान और विरासत
भामाशाह योजना: राजस्थान सरकार ने उनके सम्मान में भामाशाह कार्ड और योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन था।
सम्मान: भारत सरकार ने साल 2000 में उनकी याद में एक डाक टिकट जारी किया था।
मुहावरा: आज भी भारत में जब कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से बहुत बड़ी मदद करता है, तो उसे समाज में "भामाशाह" की उपाधि दी जाती है।
मेवाड़ की धरती पर भामाशाह का योगदान उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना कि महाराणा प्रताप का, क्योंकि बिना उनके सहयोग के स्वतंत्रता की लड़ाई को जारी रखना असंभव था।

गोपीपुरा, सूरत में स्थित कई जैन मंदिर पर ❌खतरा❌मंडरा रहा है।ऊर्जाभूमि रक्षा टैक्स विज़न 1ऐसा सारावली प्रकीर्णक आगम सूत्र...
25/04/2026

गोपीपुरा, सूरत में स्थित कई जैन मंदिर पर ❌खतरा❌
मंडरा रहा है।

ऊर्जाभूमि रक्षा टैक्स

विज़न 1

ऐसा सारावली प्रकीर्णक आगम सूत्र में कहा गया है।

पूजा करने से एक गुना पुण्य मिलता है, मूर्ति भराने से सौ गुना पुण्य मिलता है, मंदिर बनाने से हजार गुना पुण्य मिलता है और उसकी रक्षा करने से अनंत पुण्य मिलता है।

आर्य भूमि भारत...

यहां तक कि पूरे विस्तार में फैले मंदिरों की कतारें भी
,आसपास रहने वाले विधर्मियों की बढ़ती संख्या को रोकने में असमर्थ है।

ऊर्जाभूमि रक्षा टैक्स

वर्तमान में, गोपीपुरा में विधर्मियों की संख्या बढ़ रही है। भविष्य में हमारे जिनालयों पर खतरा मंडरा रहा है। प्राचीन इतिहास में भी यह ज्ञात है कि कई जिनालयों को अन्य पूजा स्थलों में परिवर्तित कर दिया गया है।

सूरत के गोपीपुरा, नानावत, रांदेर जैसे इलाकों में स्थिति बेहद नाजुक है।

संपूर्ण जैन समाज के विकास के लिए, सभी जैन संघों को सहयोग देना होगा।

बैंक का विवरण

शाखा का नाम: आईसीआईसीआई बैंक सूरत,
अठवां लाइन्स

खाताधारक का नाम: श्री सिद्धि चंद्र सेवा ट्रस्ट

खाता संख्या: 005201046401

IFSC कोड: ICIC0000052

80G उपलब्ध, सीएसआर उपलब्ध

हर महीने मेरे परिवार द्वारा एक लाख रुपये से शुरू होकर

75,000
50,000
25,000
10,000
5000
3000
2000
1000
500
300
200
100₹
यह हर महीने (एक वर्ष) के लिए इस प्रकार के संकल्प के साथ भुगतान किया जाएगा।

अपनी क्षमता के अनुसार आप जितनी राशि लिखेंगे, उसका भुगतान करना होगा।

उदाहरण 1000*12=12000
पूरे वर्ष में भरने होंगे।

सूरत में 20,000 से अधिक परिवार रहते हैं। और भारत भर में 10 लाख परिवार,
सभी से अनुरोध है कि वे कर के रूप में न्यूनतम 100 रुपये यानी कुल 1200 रुपये का भुगतान करें।

श्री उर्जातीर्थ उद्धार उत्सव महासमिति -
United Jains of Surat

श्री परेशभाई दाढ़ी उमरा 9825125092

श्री प्रणवभाई मेहता उमरा 7228981333

M-15,न्यू सहजानंद-2
पिपलाशेरी महिधरपुरा।
सूरत।

2,500 Japanese travelled to Tharad in Gujarat and spent a week there with the disciples of JayantSen suriswarji Maharaj ...
10/04/2026

2,500 Japanese travelled to Tharad in Gujarat and spent a week there with the disciples of JayantSen suriswarji Maharaj Saheb.
“There are a number of Japanese coming here in large numbers. They follow all our rules, pray with us, eat Satvik food before the sun sets, mediate and go back home to follow the same lifestyle,” said Acharya Nityasen Suriswarji Maharaj Saheb

07/04/2026

जैन समाज के सदस्यों से एक विनम्र अनुरोध🙏

हाल ही में, मुंबई में हमारे एक जैन भाई गंभीर बीमारी के इलाज के लिए एक प्रसिद्ध अस्पताल गए थे। वहाँ डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए लगभग ₹36 लाख का खर्च बताया और स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया।
इसके बाद, अहमदाबाद, पाटन और दक्षिण भारत के अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेने पर वही ऑपरेशन गुजरात में लगभग ₹3.3 लाख में, दवाइयों सहित सफलतापूर्वक किया गया। अब मरीज स्वस्थ हैं और संतुष्ट हैं।

कृपया निम्न बातों का विशेष ध्यान रखें:
बिना कई विशेषज्ञों की राय लिए महंगे इलाज के लिए तुरंत निर्णय न लें।

गंभीर परिस्थितियों में भावुक होकर निर्णय लेने से बचें। घबराहट में लिया गया निर्णय अनावश्यक खर्च बढ़ा सकता है।

छोटी या प्राथमिक बीमारियों के लिए सरकारी अस्पतालों में भी परामर्श अवश्य लें

सर्जरी की आवश्यकता में सरकारी राहत कार्ड का उपयोग टाले।

आपका गभराना आपके और आपकी सहायता में जुटे समाज - संघ - शासन की राहत सामग्री पर बोझ बनता है।

बायोप्सी रिपोर्ट मेमोग्राफी- सोनोग्राफी आदि संस्था के ज़रिए करवाइये।, बिना कारन दवाई और रिपोर्ट निकालते रहने की मानसिक बीमारी से बचे।

आयुर्वेद पर थोड़ा जुकाव बढाइये

आइए, हम समझदारी और जिम्मेदारी से निर्णय लें।

Most Common Surnames in the UPSC Civil Services Examination (CSE) 2025 Final Result:🥇 Jain – 26🥈 Meena – 25🥉 Yadav – 20G...
07/03/2026

Most Common Surnames in the UPSC Civil Services Examination (CSE) 2025 Final Result:

🥇 Jain – 26
🥈 Meena – 25
🥉 Yadav – 20

Gupta – 19
Verma – 16
Sharma – 15
Choudhary - 12
Chauhan – 12
Agrawal – 11
Khan – 9
Mishra – 8
Patil - 8
Pandey – 7
Kaur – 6

Congratulations to all candidates 🎉💐

Different spellings of the same surname have been counted together.

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Surat
395009

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