Vishwa Hindu Parishad South Gujarat

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28/09/2025

*रसोई – सनातन परिवार व्यवस्था की नाभि*

अमेरिका से भारत के लिए एक सांस्कृतिक चेतावनी

1. जब रसोई मौन हो जाती है, तो परिवार बिखरने लगता है

• क्या आपने कभी सोचा है कि एक शांत रसोई किसी राष्ट्र का भविष्य बदल सकती है?

• यह अमेरिका में हुआ था — और यदि हमने समय रहते सबक नहीं सीखा तो यह भारत में भी हो सकता है।



2. अमेरिका 1970 के दशक में कैसा दिखता था:

• दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते थे।

• हर शाम, परिवार एक साथ घर का बना भोजन खाने के लिए भोजन-टेबल पर बैठता था।

• भोजन केवल आहार नहीं था—यह जुड़ाव और साझा मूल्यों का साधन था।



3. 1980 के बाद: अमेरिका में सांस्कृतिक बदलाव

• फास्ट फूड, टेकअवे और रेस्टोरेंट संस्कृति ने घर के बने भोजन की जगह ले ली।

• माता-पिता काम और पैसा कमाने में व्यस्त हो गए; बच्चे पिज्जा, बर्गर और तरह-तरह के पैकेज्ड भोजन पर निर्भर हो गए।

• दादा-दादी की आवाज़ें धीमी पड़ गईं, पारिवारिक बंधन कमजोर हो गए।



4. अनसुनी चेतावनियाँ और दर्दनाक परिणाम

• विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी:
“यदि आप अपनी रसोई को कॉरपोरेट्स को और परिवार की देखभाल को सरकार को सौंप देंगे, तो परिवार टूट जाएंगे।”

• किसी ने ध्यान नहीं दिया—और भविष्यवाणियाँ सच हो गईं।



5. अमेरिका में पारंपरिक पारिवारिक जीवन का पतन

• 1971 में, 71% अमेरिकी घरों में पारंपरिक परिवार (माता-पिता + बच्चे) रहते थे।

• आज यह केवल 20% रह गया है।

• और क्या बचा है?
• बुजुर्ग वृद्धाश्रमों में,
• युवा किराए के फ्लैट में अकेले,
• टूटती शादियाँ,
• और बच्चे अकेलेपन से जूझते हुए।



6. अमेरिका में तलाक़ की दर

• पहली शादी – 50%
• दूसरी शादी – 67%
• तीसरी शादी – 74%



7. यह केवल संयोग नहीं है – यह मौन रसोई की कीमत है

• घर का बना भोजन केवल कैलोरी नहीं लाता:
• माँ का स्पर्श,
• दादा का ज्ञान,
• दादी की कहानियाँ,
• और साझा भोजन का जादू।

• लेकिन अब भोजन Swiggy और Zomato से आता है।

• रसोई मर जाती है, और घर केवल मकान बन जाता है—परिवार नहीं।



8. स्वास्थ्य पर प्रभाव – एक बढ़ता संकट

• अमेरिका में फास्ट फूड की लत ने जन्म दिया:
• मोटापा,
• डायबिटीज,
• हृदय रोग।

• और स्वास्थ्य उद्योग इस गिरावट से मुनाफा कमाता है।



9. लेकिन अभी देर नहीं हुई है – हम अपनी रसोई को फिर से जगा सकते हैं

• जापान में लोग अब भी घर पर पकाते और साथ बैठकर खाते हैं—और वे सबसे लंबी आयु जीते हैं।

• भूमध्यसागरीय देशों में भोजन पवित्र है—और रिश्ते भी।



10. भारत के लिए चेतावनी – महानगरों में क्लाउड किचन से खाना मंगाना बढ़ रहा है — कृपया रसोई को मरने न दें

• बाहर के भोजन पर बढ़ती निर्भरता खतरनाक है।

• पारिवारिक भोजन का समय घट रहा है।

• अकेलापन और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं।



आज आप क्या कर सकते हैं

• अपनी रसोई का चूल्हा फिर जलाइए।

• एक भोजन स्वयं पकाइए।

• परिवार को भोजन-टेबल पर बुलाइए।

• क्योंकि शयनकक्ष मकान बनाते हैं, लेकिन रसोई परिवार बनाती है।

अंतिम विचार

“क्या आप एक घर बनाना चाहते हैं — या केवल एक लॉज चलाना?
चुनाव आपका है।”
जय गृह माता

20/07/2025

*प्रेस वक्तव्य:*
*झगड़ा शिया-सुन्नी का और हमला हिंदुओं पर; आखिर कब तक! कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो: विहिप*
नई दिल्ली। जुलाई 8 2025। मोहर्रम के जुलूस के दौरान देश के लगभग आधा दर्जन राज्य में, लगभग दो दर्जन स्थानों पर हिंदुओं पर हुए हमले, हिंसा, उत्पात, आगजनी की घटनाएं बेहद निंदनीय चिंतनीय व शासन प्रशासन के लिए एक चुनौती हैं। हिंदू घरों, दुकानों, मान्यताओं के प्रतीक चिन्हों व मंदिरों पर हमले कर 'हिंदू राष्ट्र' के बैनर को आग लगाना और पाक परस्त नारे लगाने व फिलिस्तीन के झंडे लहराने जैसी घटनाएं बेहद शर्मनाक निंदनीय और कठोरता के साथ कुचलने वाली हैं। विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री विजय शंकर तिवारी ने आज यह भी मांग की जो लोग दोषी हैं उनके विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही तथा पीड़ितों को हर प्रकार की मदद और न्याय मिले। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि त्योहार चाहे हिंदुओं का हो या मुसलमान का, उत्पात उन्होंने मचाना ही है। इस मानसिकता से अब इनको बाहर आना होगा और शासन प्रशासन को भी मातम के त्यौहार को हिंदुओं के घरों में मातम बनाने के लिए विवश करने की उनकी रणनीति पर कुठाराघात करना होगा।

श्री तिवारी ने कहा की बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और राजस्थान समय देश के कई राज्य इस मोहर्रम की मातमी हिंसा के शिकार हुए हैं। बात चाहे *बिहार* के कटिहार, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, मोतिहारी व पूर्वी चंपारण की हो, या *झारखंड* के गिरिडीह, पलामू, गोड्डा व डूंगरी की, *उत्तर प्रदेश* के कुशीनगर, बस्ती, बरेली, बहराइच व लखीमपुर खीरी की हो या *मध्य प्रदेश* के उज्जैन व रतलाम की और या फिर राजस्थान के चुरू की, सभी जगह दृश्य एक जैसे ही थे किंतु हमलों के प्रकार अनेक थे। कहीं मंदिर पर हमले, कहीं हिंदू घरों व बस्तियों को टारगेट किया, कहीं फिलिस्तीन झंडे लहराए, तो कहीं पाक परस्त नारे लगे, कहीं रास्ते पर जा रहे यात्रियों को पीटा, तो कहीं वाहनों को तोड़ा, कहीं 'हिंदू राष्ट्र' का बैनर जलाया तो कहीं अजय यादव या कौशल्या देवी जैसे निर्दोष हिंदुओं के प्राण हर लिए।

उन्होंने कहा कि अब मुस्लिम समाज को अपने त्योहारों के नाम पर हिंसक शक्ति प्रदर्शन व हिंदुओं के घरों में मातम फैलाने की अपनी इस जिहादी मानसिकता से तो बाज आना ही होगा साथ ही देशभर के पुलिस प्रशासन व शासन को भी इस हिंसक जमात के विरुद्ध और अधिक कठोर कदम उठाने होंगे।

श्री तिवारी ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं पहली बार नहीं हुई। शायद ऐसा कभी नहीं हुआ कि जब ताजिए के जुलूस निकलें और देश भर में हिंसा की कहीं कोई घटना ना हुई हो। वैसे भी काफिरोफोबिया के शिकार जिहादी कट्टरपंथियों ने शायद एक प्रकार से तय कर रखा है कि त्यौहार किसी का हो, हमें उपद्रव करना ही है।

विश्व हिंदू परिषद मांग करती है कि इन इस्लामिक कट्टरपंथियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए देश भर के शासन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि आगे इस प्रकार की हिंसा की घटनाएं न हों और पीड़ित परिवारों को जन धन की जो हानि हुई है उसकी भरपाई भी इन हमलावरों से हो। साथ ही, हिंदू समाज को भी जिहादी जंगली भेड़ियों के द्वारा बार की जा रही लक्षित हिंसा से सावधान रहना होगा।

जारी कर्ता:
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिंदू परिषद

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