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DeenDunyaदीन-व-दुनिया Iqbal Ahmad, यहां पर हम दीनी बातें जो कुरान व हदीस की रोशनी में होगी वही पहुंचाने की कोशिश करेगें।

Mishkat | मिश्कात- 12 - مشکوٰۃ हज़रत इब्ने-उमर (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   मुझे लोगों से जंग करने...
24/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 12 - مشکوٰۃ
हज़रत इब्ने-उमर (रज़ि०) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : मुझे लोगों से जंग करने का हुक्म दिया गया है। यहाँ तक कि वो गवाही दें कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। और ये कि मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं। और वो नमाज़ क़ायम करें और ज़कात दें जब उन का ये तर्ज़ अमल होगा तो उन्होंने इस्लाम की हदों के अलावा अपनी जानों और अपने मालों को मुझ से बचा लिया। और उन का हिसाब अल्लाह के ज़िम्मे है। (बुख़ारी व मुस्लिम)


Mishkat | मिश्कात- 11 - مشکوٰۃ हज़रत अबू-मूसा अशअरी बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   तीन  क़िस्म के लोगों के ल...
23/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 11 - مشکوٰۃ
हज़रत अबू-मूसा अशअरी बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : तीन क़िस्म के लोगों के लिये दो अज्र हैं। अहले-किताब में से वो शख़्स जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद ﷺ पर ईमान लाया। ममलूक ग़ुलाम जब वो अल्लाह का हक़ अदा करे और अपने मालिकों का भी हक़ अदा करे और एक वो शख़्स जिसके पास कोई लौंडी हो वो उससे हम बिस्तरी करता हो इसलिये वो उसे आदाब सिखाए और अच्छी तरह से अदब के साथ बनाए उसको बेहतरीन ज़ेवरे-तालीम से आरास्ता करे। फिर उसको आज़ाद कर दे। और उसके बाद उससे शादी कर ले तो उसके लिये दो अज्र हैं। (बुख़ारी व मुस्लिम)


Mishkat | मिश्कात- 10 - مشکوٰۃ हज़रत अबू-हुरैरा बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में ...
22/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 10 - مشکوٰۃ
हज़रत अबू-हुरैरा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मुहम्मद ﷺ की जान है। इस उम्मत के जिस यहूदी और ईसाई ने मेरे मुताल्लिक़ सुन लिया। और फिर वो मुझ पर उतारे गए दीन और शरीअत पर ईमान लाए बग़ैर वफ़ात पा जाए तो वो जहन्नमी है। (मुस्लिम)


Mishkat | मिश्कात- 09 - مشکوٰۃ हज़रत अब्बास-बिन-अब्दुल-मुत्तलिब बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   जो शख़्स अल्ल...
21/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 09 - مشکوٰۃ
हज़रत अब्बास-बिन-अब्दुल-मुत्तलिब बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : जो शख़्स अल्लाह के रब होने, इस्लाम के दीन होने और मुहम्मद ﷺ के रसूल होने पर राज़ी हो गया उसने ईमान की लज़्ज़त को पा लिया। (मुस्लिम)


Mishkat | मिश्कात- 08 - مشکوٰۃ हज़रत अनस (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   जिस शख़्स में तीन आदतें हों उ...
20/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 08 - مشکوٰۃ
हज़रत अनस (रज़ि०) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : जिस शख़्स में तीन आदतें हों उसने उन के ज़रिए ईमान की लज़्ज़त और मिठास को पा लिया। जिस को अल्लाह और उसके रसूल सबसे ज़्यादा महबूब हों जो शख़्स किसी से सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा की ख़ातिर मुहब्बत करता हो और जो शख़्स दोबारा काफ़िर बनना उसके बाद कि अल्लाह ने उसे उससे बचा लिया। ऐसे नापसन्द करता हो जैसे वो आग में डाला जाना नापसन्द करता है। (बुख़ारी व मुस्लिम)


Mishkat | मिश्कात- 07 - مشکوٰۃ हज़रत अनस (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   तुममें से कोई मोमिन नहीं हो ...
19/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 07 - مشکوٰۃ
हज़रत अनस (रज़ि०) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : तुममें से कोई मोमिन नहीं हो सकता यहाँ तक कि में उसे उसके वालिद उसकी औलाद और तमाम लोगों से ज़्यादा महबूब न हो जाऊँ। (बुख़ारी व मुस्लिम)


Mishkat | मिश्कात- 06 - مشکوٰۃ हज़रत अब्दुल्लाह-बिन-अम्र (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   मुसलमान वो ह...
18/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 06 - مشکوٰۃ
हज़रत अब्दुल्लाह-बिन-अम्र (रज़ि०) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : मुसलमान वो है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान महफ़ूज़ रहें और मुहाजिर वो है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ों को तर्क कर दे। ये सही बुख़ारी की रिवायत के अलफ़ाज़ हैं। जबकि सही मुस्लिम की रिवायत के अलफ़ाज़ हैं। फ़रमाया कि किसी आदमी ने नबी (सल्ल०) से पूछा कौन-सा मुसलमान बेहतर है? आप ﷺ ने फ़रमाया : जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान महफ़ूज़ हों। (बुख़ारी व मुस्लिम)


Mishkat | मिश्कात- 05 - مشکوٰۃ हज़रत अबू-हुरैरा बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   ईमान की सत्तर से कुछ ज़्यादा ...
17/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 05 - مشکوٰۃ
हज़रत अबू-हुरैरा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : ईमान की सत्तर से कुछ ज़्यादा शाख़ें हैं। उन में से सबसे बेहतर ये कहना है कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। और सबसे मामूली ये है कि रास्ते से तकलीफ़ देनेवाली चीज़ को हटा देना और हया भी ईमान की एक शाख़ है। (बुख़ारी व मुस्लिम)

Mishkat | मिश्कात- 04 - مشکوٰۃ हज़रत इब्ने-उमर (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   इस्लाम की बुनियाद पाँच...
14/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 04 - مشکوٰۃ
हज़रत इब्ने-उमर (रज़ि०) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर रखी गई है। गवाही देना कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। और ये कि मुहम्मद ﷺ उसके बन्दे और उसके रसूल हैं। नमाज़ क़ायम करना, ज़कात अदा करना, हज करना, और रमज़ान के रोज़े रखना। (मुत्तफ़क़ुन-अलैह बुख़ारी और मुस्लिम)
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Mishkat | मिश्कात- 03 - مشکوٰۃ हज़रत अबू-हुरैरा ने इस हदीस को कुछ अलफ़ाज़ के इख़्तिलाफ़ के साथ रिवायत किया है।  इस हदीस में ह...
13/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 03 - مشکوٰۃ
हज़रत अबू-हुरैरा ने इस हदीस को कुछ अलफ़ाज़ के इख़्तिलाफ़ के साथ रिवायत किया है। इस हदीस में है : जब तुम नंगे पाँव नंगे बदन बहरे गूँगे लोगों को मुल्क के बादशाह देखोगे और ये ( होना क़ियामत ) पाँच चीज़ों में से है। जिन्हें सिर्फ़ अल्लाह ही जानता है। फिर आप ﷺ ने ये आयत तिलावत फ़रमाई : बेशक क़ियामत का इल्म अल्लाह ही के पास है और वही बारिश नाज़िल करता है। मुत्तफ़क़ुन-अलैह, बुख़ारी व मुस्लिम


Mishkat | मिश्कात- 02 - مشکوٰۃ हज़रत उमर-बिन-ख़त्ताब बयान करते हैं कि  हम एक दिन रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर थे कि इस ...
12/05/2026

Mishkat | मिश्कात- 02 - مشکوٰۃ
हज़रत उमर-बिन-ख़त्ताब बयान करते हैं कि हम एक दिन रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर थे कि इस दौरान में एक आदमी हमारे पास आया जिसके कपड़े बहुत ही सफ़ेद और बाल बहुत ज़्यादा स्याह थे। उसपर सफ़र के आसार नज़र आते थे। न हममें से कोई उसे जानता था। यहाँ तक कि वो दो ज़ानू हो कर नबी (सल्ल०) के सामने बैठ गया और उसने अपने दोनों हाथ अपनी जाँघों पर रख लिये और कहा : मुहम्मद ﷺ ! इस्लाम के मुताल्लिक़ मुझे बताएँ आप ﷺ ने फ़रमाया : इस्लाम ये है कि तुम गवाही दो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। और ये कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं। नमाज़ क़ायम करो, ज़कात अदा करो, रमज़ान के रोज़े रखो और अगर ताक़त हो तो बैतुल्लाह का हज करो। उसने कहा : आप ने सच फ़रमाया। हमें उससे ताज्जुब हुआ कि वो आप से पूछता है और आप की तस्दीक़ भी करता है। उसने कहा : ईमान के बारे में मुझे बताएँ। आप ﷺ ने फ़रमाया : ये कि तुम अल्लाह पर उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों, उसके रसूलों और आख़िरत के दिन पर ईमान लाओ और तुम तक़दीर के अच्छा और बुरा होने पर ईमान लाओ। उसने कहा : आप ने सच फ़रमाया। फिर उसने कहा : एहसान के बारे में मुझे बताएँ। आप ﷺ ने फ़रमाया : ये कि तुम अल्लाह की इबादत इस तरह करो मानो तुम उसे देख रहे हो और अगर तुम उसे नहीं देख सके तो वो यक़ीनन तुम्हें देख रहा है। उसने कहा : क़ियामत के बारे में मुझे बताएँ। आप ﷺ ने फ़रमाया : जवाबदेह उसके मुताल्लिक़ सवाल करने वाले से ज़्यादा नहीं जानता। उसने कहा : उसकी निशानियों के बारे में मुझे बता दें। आप ﷺ ने फ़रमाया : ये कि लौंडी अपनी मालिका को जन्म देगी और ये कि तुम नंगे पाँव नंगे बदन तंग-हाल बकरियों के चरवाहों को बुलन्द इमारतों की तामीर और उन पर फ़ख़्र करते हुए देखोगे। उमर (रज़ि०) ने फ़रमाया : फिर वो शख़्स चला गया। में कुछ देर ठहरा। फिर आप ﷺ ने मुझ से पूछा : उमर! क्या तुम जानते हो सवाल करने वाला कौन था? मैंने कहा : अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं। आप ﷺ ने फ़रमाया : वो जिब्रील (अलैहि०) थे। वो तुम्हें तुम्हारा दीन सिखाने के लिये तुम्हारे पास तशरीफ़ लाए थे। (मुस्लिम)


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