10/09/2018
शहादत व वफादारी का स्मारक -शिम्भु खाँ का चूंतरा :-
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सुजानगढ के पूर्वी इलाके दूलियां की रोही में बोबासर के रास्ते पर एक छोटा सा चबूतरा बना हुआ है जो सुजानगढ के एक कायमखानी सरदार शिम्भु खाँ द्वारा एक ब्राह्मण परिवार की रक्षार्थ दिये बलिदान का स्मारक है । यह स्मारक साम्प्रदायिक सौहार्द एवं हिन्दू -मुस्लिम जायरीन की अकीदत का केंद्र है ।
आज से 130 वर्ष पूर्व विक्रम संवत् 1948 की घटना है । ऊँट - गाड़ा चालक मरहूम शिम्भु खाँ सुजानगढ के तत्कालीन राजमिश्र पंडित जिनकू राम जी,उनकी धर्मपत्नी पारोबाई एवं नन्हे दो पुत्र श्री वल्लभ उर्फ बोदूलाल व गोरूलाल मिश्र को अपने गाडे में बैठा कर नवलगढ से सुजानगढ ला रहे थे। शिम्भु खाँ का ऊँट गाड़ा जब बोबासर गाँव पहुँचा तो वहाँ के राजपूत सरदारों ने मिश्र परिवार का स्वागत किया तत्पश्चात वे सुजानगढ की तरफ रवाना हुए । कुछ दूर निकलने पर शिम्भु खाँ जी ने देखा कि चार ऊँट सवार धाड़वी लूट के इरादे से उनका पीछा कर रहे हैं । उनको मिश्र परिवार की सुरक्षा की चिंता हुई। धाड़वी नजदीक आते जा रहे थे । आपने तुरन्त फैसला लेते हुए कहा " आप चिंता न करे मेरा वफादार ऊँट आपको मेरे घर तक पहुँचा देगा । मैं धाड़वियों को रोकता हूँ । " यह कहकर ऊँट के एक लाठी मार कर सुजानगढ की तरफ दौड़ा दिया और आप धाड़वियों को रोकने के लिए उनसे भिड़ गये ।आपने बहादुरी से मुकाबला किया किन्तु अन्त में शहीद हो गये । अपने प्राण देकर मिश्र परिवार की रक्षा करने वाले शिम्भु खाँ को हमारी खिराजे अकीदत ।
पंडित जिनकू राम के पड़पोते डाॅ.राधेश्याम मिश्र कहते है कि शिम्भु खाँ जी ने अपनी जान देकर हमारे परिवार की रक्षा की इसके लिए हमारी वर्तमान एवं भावी पीढ़ियाँ उनकी ऋणी रहेगी । दिनांक 26 सितम्बर 2011 को डाॅ मिश्र अपने पोते के साथ,वरिष्ठ साहित्यकार श्याम जी गुरु,लीला धर जी प्रधानाचार्य, शम्सुद्दीन स्नेही, पेंशनर जाब्दी खाँ,एडवोकेट बनवारी लाल खीचड़ ,मन्नवर खाँ व तकिया कमेटी के सदर इलियास खाँ व सदस्यों ने सद्भावना यात्रा करके शहीद -स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।
द्वारा -शम्सुद्दीन स्नेही, सुजानगढ