Prabhu Valmiki Ashram Matili Rathan

Prabhu Valmiki Ashram Matili Rathan Jai Valmiki ji
This place is a more historical.
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Since july 1958, Sri Sri 1008 Satguru Gyan Nath ji Maharaj ( Valmiki Ashram Sri Amritsar Sahib ) was cames into "Valmiki Ashram Matli Rathan ".

12/08/2026
॥ ਘਟ ਘਟ ਮੇਂ ਪਰਵੇਸ਼ ਹੈ ਰਿਖੀਕੇਸ਼ ਭਗਵੰਤ ॥ ॥ ਜਿਸ ਮਨ ਤੇਰੀ ਪ੍ਰੀਤ ਹੈ ਸੋ ਵਡਭਾਗੀ ਸੰਤ ॥ ਵਿਆਖਿਆ :-  ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸਾਹਿਬ -ਏ- ਕਮਾਲ ਸਤਿਗ...
02/05/2026

॥ ਘਟ ਘਟ ਮੇਂ ਪਰਵੇਸ਼ ਹੈ ਰਿਖੀਕੇਸ਼ ਭਗਵੰਤ ॥
॥ ਜਿਸ ਮਨ ਤੇਰੀ ਪ੍ਰੀਤ ਹੈ ਸੋ ਵਡਭਾਗੀ ਸੰਤ ॥ ਵਿਆਖਿਆ :- ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸਾਹਿਬ -ਏ- ਕਮਾਲ ਸਤਿਗੁਰੂ ਗਿਆਨ ਨਾਥ ਮਹਾਰਾਜ ਜੀ ਦੇ ਚਰਨ ਸੇਵਕ ਸੰਤ ਗੁਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਜੀ ਗਿੱਲ ਪਾਵਨ ਬਾਣੀ " ਜਗਤਗੁਰੂ ਵਾਲਮੀਕਿ ਮਹਾਰਾਜ ਜੀ ਦੀ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਬਾਣੀ " ਦੇ ਉਪਰੋਕਤ ਸਲੋਕ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਦੀ ਸਰਵ-ਵਿਆਪਕਤਾ ਅਤੇ ਉਸ ਦੀ ਪ੍ਰੇਮ-ਭਗਤੀ ਦੀ ਮਹਿਮਾ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਿਆਂ ਸਮਝਾਉਣਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਕਿ 'ਰਿਖੀਕੇਸ਼' ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਵਾਲਮੀਕਿ ਜੀ ਹਰ ਇੱਕ ਹਿਰਦੇ ਘਟ ਘਟ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਹੈ। ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਕਿਤੇ ਦੂਰ ਨਹੀਂ, ਸਗੋਂ ਉਹ ਇਸ ਸ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਦੇ ਕਣ-ਕਣ ਅਤੇ ਹਰ ਜੀਵ ਦੇ ਅੰਦਰ ਵਸ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਹ ਸਰਵ-ਵਿਆਪਕ ਹੈ ਅਤੇ ਹਰ ਇਨਸਾਨ ਦੇ ਮਨ ਦੀ ਗੱਲ ਜਾਣਦਾ ਹੈ। ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ! ਜਿਸ ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਮਨ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਸੱਚੀ ਪ੍ਰੀਤ (ਪਿਆਰ) ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉਹ ਮਨੁੱਖ ਬਹੁਤ ਵੱਡੇ ਭਾਗਾਂ ਵਾਲਾ ਭਾਵ ਵਡਭਾਗੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਸਹੀ ਅਰਥਾਂ ਵਿੱਚ 'ਸੰਤ' ਹੈ । ਭਾਵ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਖੁਸ਼ਕਿਸਮਤ ਉਹ ਵਿਅਕਤੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਦੀ ਬੰਦਗੀ ਅਤੇ ਮੁਹੱਬਤ ਨਸੀਬ ਹੋਈ ਹੈ। ਅਜਿਹਾ ਇਨਸਾਨ ਹੀ ਅੰਦਰੂਨੀ ਸ਼ਾਂਤੀ ਅਤੇ ਰੂਹਾਨੀ ਉੱਚਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ।

॥ रखो गुर अपने ते डोर ॥॥ प्रीत करो जिउ चंद चकोर ॥अर्थात :- ब्रह्मज्ञानी साहिब-ए-कमाल सतगुरु ज्ञान नाथ महाराज जी के चरण स...
01/05/2026

॥ रखो गुर अपने ते डोर ॥
॥ प्रीत करो जिउ चंद चकोर ॥
अर्थात :- ब्रह्मज्ञानी साहिब-ए-कमाल सतगुरु ज्ञान नाथ महाराज जी के चरण सेवक, संत गुरदेव सिंह जी गिल, पावन बाणी "जगतगुरु वाल्मीकि महाराज जी की अमृत बाणी" के उपरोक्त श्लोक में गुरु पर अटूट भरोसे और निस्वार्थ प्रेम की महिमा को दर्शाते हुए समझाते हैं कि हमें अपने जीवन की बागडोर (डोर) पूरी तरह से अपने गुरु के हाथों में सौंप देनी चाहिए। हमें अपने हर दुख-सुख और कार्य के लिए गुरु पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। 'चकोर' पक्षी और 'चंद्रमा' का उदाहरण देते हुए वे समझाते हैं कि ऐसी मान्यता है कि चकोर पक्षी चंद्रमा से इतना प्रेम करता है कि वह पूरी रात बिना पलक झपकाए केवल चाँद की ओर ही देखता रहता है। ठीक इसी प्रकार, एक शिष्य का अपने गुरु के प्रति प्रेम भी वैसा ही होना चाहिए जिसमें कोई दूरी न हो और जिसकी दृष्टि सदैव अपने प्रीतम (गुरु) पर ही टिकी रहे।

॥ गुरु का नाम जपे बिना ढोला ॥॥ खुस जावेगा माणस चोला ॥अर्थात :- ब्रह्म ज्ञानी साहिब-ए-कमाल सतगुरु ज्ञान नाथ महाराज जी के ...
30/04/2026

॥ गुरु का नाम जपे बिना ढोला ॥
॥ खुस जावेगा माणस चोला ॥
अर्थात :- ब्रह्म ज्ञानी साहिब-ए-कमाल सतगुरु ज्ञान नाथ महाराज जी के चरण सेवक संत गुरदेव सिंह जी गिल पावन वाणी "जगतगुरु वाल्मीकि महाराज जी की अमृत वाणी" के माध्यम से हमें सचेत करते हुए समझाते हैं कि हे प्यारे इंसान! गुरु द्वारा प्रदान किए गए भगवान वाल्मीकि जी के नाम का जाप ही जीवन का असली आधार है। इसके बिना आत्मा को कभी तृप्ति नहीं मिल सकती। यह मानव देह (चोला) एक सीमित समय के लिए मिली है। यह कभी भी हमसे छीनी जा सकती है। यदि हमने इस अनमोल जन्म को केवल दुनियादारी में गंवा दिया और सिमरन नहीं किया, तो हम मुक्ति के मार्ग से भटक जाएंगे।

With Sant Sukhvinder Nath – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
29/04/2026

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॥ अमर भए संसार ते जिन प्रीत लगाई ॥॥ सेवा जगत गुरु की बिरथी नाहीं जाई ॥व्याख्या : -ब्रह्म ज्ञानी साहिब-ए-कमाल सतगुरु ज्ञा...
29/04/2026

॥ अमर भए संसार ते जिन प्रीत लगाई ॥
॥ सेवा जगत गुरु की बिरथी नाहीं जाई ॥
व्याख्या : -ब्रह्म ज्ञानी साहिब-ए-कमाल सतगुरु ज्ञान नाथ महाराज जी के चरण सेवक संत गुरदेव सिंह जी गिल, पावन "जगतगुरु वाल्मीकि महाराज जी की अमृत वाणी" के उपरोक्त श्लोक में गुरु और परमेश्वर की सेवा एवं प्रेम की महिमा का वर्णन करते हुए समझाते हैं कि जिन मनुष्यों ने इस संसार में रहते हुए परमात्मा या मानवता के साथ सच्ची प्रीत जोड़ी है, वे मृत्यु के पश्चात भी समाप्त नहीं होते, बल्कि सदा के लिए अमर हो जाते हैं। जिनके हृदय में निस्वार्थ प्रेम होता है, उनकी स्मृति और उनके द्वारा किए गए परोपकारी कार्य इस संसार में युगों-युगों तक जीवित रहते हैं। जगतगुरु परमात्मा वाल्मीकि जी महाराज और पूर्ण गुरु की भक्ति भाव से की गई सेवा कभी भी व्यर्थ (वृथा) नहीं जाती। गुरु के दिखाए मार्ग पर चलकर की गई निष्काम सेवा का फल निश्चित रूप से प्राप्त होता है। यह सेवा मनुष्य के मन को शांति प्रदान करती है और उसे जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर प्रभु के चरणों में लीन कर देती है।

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Valmiki Ashram Matili Rathan
Sri Ganganagar
335038

Telephone

+918441807241

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