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21/03/2023
 #खग्रास_चन्द्रग्रहण🌘🌘〰️〰️🌼〰️〰️🌼🌼〰️〰️🌼〰️〰️कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा 8 नवम्बर 2022 मंगलवार को यह ग्रहण सम्पूर्ण भारत में ग्र...
08/11/2022

#खग्रास_चन्द्रग्रहण🌘🌘
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कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा 8 नवम्बर 2022 मंगलवार को यह ग्रहण सम्पूर्ण भारत में ग्रस्तोदय रूप में दिखाई देगा। इस ग्रहण का आरम्भ (स्पर्श) भारत में कही भी दिखाई नहीं देगा। क्योंकि यह ग्रहण चन्द्रोदय से पहले ही आरम्भ हो जायेगा। ग्रहण का मोक्ष केवल पूर्वी भारत में दिखाई देगा। देश के बाकी भाग में मोक्ष का आशिंक रूप ही दिखेगा। ग्रहण का सूतक 8 नवम्बर 2022 ई. को सूर्योदय के साथ ही प्रारम्भ हो जायेगा। सामान्यतः चन्द्रग्रहण का सूतक स्पर्श से 9 घण्टे पूर्व माना जाता है। परन्तु ग्रस्तोदय चन्द्र ग्रहण होने से पूरे दिन सूतक माना जायेगा। ग्रस्तोदय चन्द्र ग्रहण में चन्द्रोदय से ग्रहण समाप्ति तक के काल को ही पर्व काल माना जाता हैं अतः चन्द्रोदय को ही ग्रहण आरम्भ मानकर सभी धार्मिक क्रियाओं का सम्पादन व अनुष्ठान ग्रहण मोक्ष पर करना चाहिये। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यह ग्रहण घटित होने से कार्तिक पूर्णिमा के स्नान व दान का महत्व अनन्त हो जायेगा।

ग्रहण (स्पर्श) प्रारम्भ👉 दिन 2 बजकर 39 मिनट से।

खग्रास प्रारम्भ👉 दिन 3 बजकर 46 मिनट से।

ग्रहण मध्य👉 सायं 4 बजकर 29 मिनट से।

खग्रास समाप्त 👉 सायं 5 बजकर 12 मिनट पर।

ग्रहण मोक्ष 👉 सायं 6 बजकर 19 मिनट पर।

दीपावली  का  यह  त्यौहार लक्ष्मीजी  विराजें  आपके  द्वार 🙏🙏दीपावली सुख, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लाये आपके परिवार के ल...
24/10/2022

दीपावली का यह त्यौहार
लक्ष्मीजी विराजें आपके द्वार 🙏🙏

दीपावली सुख, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लाये आपके परिवार के लिए, आप सभी को Jyotish Temple की तरफ से शुभकामनाये 🙏🙏🙏🙏🙏

*धनतेरस 2022* दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं पंच दिवसीय दीपावली   पर्व का प्रारंभ धनतेरस से होता है। *पंच दिवसीय दीप...
20/10/2022

*धनतेरस 2022*
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं पंच दिवसीय दीपावली पर्व का प्रारंभ धनतेरस से होता है।
*पंच दिवसीय दीपोत्सव की तिथियां कुछ इस प्रकार होंगी*—:
दिनांक 23 अक्टूबर 2022—धनतेरस, यमदीप दान, छोटी दीपावली पर्व। (छोटी दीपावली प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी दिनांक 23 अक्टूबर 2022 को मनाना शास्त्र सम्मत)
दिनांक 24 अक्टूबर 2022—श्री महालक्ष्मी पूजन, बड़ी दीपावली पर्व।
दिनांक 25 अक्टूबर 2022 — सूर्य ग्रहण।
दिनांक 26 अक्टूबर 2022— गोवर्धन पूजा।
दिनांक 27 अक्टूबर 2022—यम द्वितीया, भैया दूज।
प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष पर कुछ विशेष योग बन रहे हैं जो कि धनतेरस पर्व को और भी विशेष बना देते हैं ।
1–सर्वार्थ सिद्धि योग
2—अमृत सिद्धि योग
धार्मिक मान्यतानुसार धनतेरस मनाने का रहस्य यह है कि समुंद्र मंथन से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में कलश लेकर समुंद्र से प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार माना जाता है। विश्व में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धन्वंतरि का अवतार लिया था। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस का पर्व धन, धान्य, समृद्धि के अतिरिक्त स्वास्थ्य,आरोग्यता से जुड़ा हुआ होता है। इसलिए इस दिन धन के लिए देवी लक्ष्मी व कुबेर और आरोग्य के लिए भगवान धनवन्तरि की पूजा अर्चना की जाती है।

*धनतेरस पूजन का शुभ मुहूर्त*
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ- 22 अक्टूबर 2022 सायं काल 06: 55 मिनट से 23 अक्टूबर 2022 सायं काल 6:05 तक तत्पश्चात चतुर्दशी तिथि प्रारंभ।
धनतेरस पूजा मुहूर्त– मुहूर्त सायं 05:31 पर प्रारम्भ होगा व रात्रि 08:04 तक रहेगा।
वृषभ काल पूजा— सायं 6:54 से रात्रि 8:49 तक।

*धनतेरस पर क्या खरीदें*:
लक्ष्मी गणेश की मूर्ति, सोना, चांदी, पीतल, मिट्टी के दीए ,झाड़ू खरीदना, तांबे का दीपक अति शुभ फल कारक।
*धनतेरस पर क्या न खरीदें*
धनतेरस पर इन वस्तुओं को खरीदने से बचना चाहिए–
एल्यूमिनियम का सामान,लोहे की वस्तुएं,नुकीली या धारदार वस्तुएं,प्लास्टिक का सामान,कांच के बर्तन,काले रंग की चीजें इत्यादि।

शरद पूर्णिमा - 9 Oct 2022,  करें चंद्र ग्रह की शांति के उपायज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा को मन का कारक माना जाता ह...
09/10/2022

शरद पूर्णिमा - 9 Oct 2022, करें चंद्र ग्रह की शांति के उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में चंद्रमा अशुभ हो तो जातक को मानसिक समस्याओं, नींद की कमी, निर्णय लेने में मुश्किल होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। साथ ही व्यक्ति मानसिक रूप से अशांत रहता है और आसानी से तनाव का शिकार हो जाता है। यदि आपकी भी कुंडली में चंद्र ग्रह अशुभ या नकारात्मक रूप से विराजमान हैं,या आप पर शनि की दशा साढ़ेसाती और पनौती चल रही है, चंद्रमा की दशा चल रही है तो इस शरद पूर्णिमा पर आपको अपनी कुंडली के चंद्रमा के शुभ परिणाम पाने के लिए कुछ उपाय जरूर करने चाहिए। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के बेहद निकट होता है और चंद्रमा की 16 कलाओं की आभा पृथ्वी के प्रत्येक जीव को प्रभावित करती है।चंद्र ग्रह के दुष्प्रभाव में कमी लाने हेतु शरद पूर्णिमा को रात में गाय के दूध से बनी खीर में घी और चीनी मिलाकर खुले आसमान के नीचे रख दें।चंद्र देव के द्वारा बरसायी जा रही अमृत की बूंदें खीर को अमृत से भर देती है. दूसरे दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इससे चंद्रमा को मजबूती मिलती है। यदि आपको मानसिक कष्ट या डिप्रेशन की समस्या है तो आपको शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को टकटकी लगाकर देखना चाहिए। इस रात मध्य आकाश में स्थित चंद्रमा की पूजा करने का विधान भी है,जिसमें उन्हें पूजा के अन्त में चांदी के पात्र से अर्ध्य भी दिया जाता है.ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये उपाय आपके चंद्र को मजबूत बनता है।

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