03/08/2015
रिश्ते सब छूट गए ...
अपने भी रूठ गए ...
एक तू तो था दिलदार मेरा....
जिसने ये ज़िन्दगी दी है....
मैं किन्नू मनावा मैं किन्नू मनावा
मैं किन्नू दर्द सुनावा मैं किन्नू दर्द सुनावा
अंखिया रो रो बेहाल हुई ...
तेरे प्यार मैं ये निहाल हुई ....
मैं किन्नू मनावा मैं किन्नू मनावा
मैं किन्नू दर्द सुनावा मैं किन्नू दर्द सुनावा
ना खाना चंगा लगदा है ....
ना पीना चंगा लगादा है
मैं किन्नू मनावा मैं किन्नू मनावा
मैं किन्नू दर्द सुनावा मैं किन्नू दर्द सुनावा
भूख तेरे ही प्यार दी .....
बस तेरे ही दीदार दी.....
मैं किन्नू मनावा मैं किन्नू मनावा
मैं किन्नू दर्द सुनावा मैं किन्नू दर्द सुनावा
तू बेदर्दी बालम ऐसा .....
तू बेदर्दी हरजाई है .....
प्यार तेरे ते अंखियां मेरी ....
रोने पे उतराई है .....
मैं किन्नू मनावा मैं किन्नू मनावा
मैं किन्नू दर्द सुनावा मैं किन्नू दर्द सुनावा
क्यूँ इतराए ,
प्रेम क्यूँ ना समझ पाये ....
बस अब तो हद हो आई है ....
ओ बालम तेरी याद आई है ....
ओ हरजाई तेरी याद आई है ....
ओ बालम तेरी याद है .....
हाय .....
....
....
मैं किन्नू मनावा मैं किन्नू मनावा
मैं किन्नू दर्द सुनावा मैं किन्नू दर्द सुनावा
मेरे राम तेरी याद आई है .....................
....बड़ा गौर कलयुग है कोई राम दे नाल जरा सा सिर्फ जरा सा प्रेम भी रख ले ना ....कोई प्यार दे नाल एक लब्ज़ राम भी बोल देना .... वो जान वार देता है गर कोई अहंकारी 50 साल भक्ति लपेटे हो ....वो एक लब्ज़ प्रेम का ...राम.... भारी है चाहे कोई कितना बड़ा पापी क्योंना हो ...रामचरितमानस मैं साफ़ साफ लब्ज़ों मैं लिखा है जिसने मरते वक्त भी राम बोल दिया मोक्ष् दे दरवाजे खोल देता है वो उसके लिए ... जो प्रेम से बोला गया राम ....वो प्रेम है जो दर तेरे ले जाए वो प्रेम है जो लब्ज़ ना होते हुए भी तेरे गीत गाये , वो प्रेम है तैनू राम बना के अपने दिल विच वसा के घर ले आये .... पापी हर कोई है कभी तू मेरी आजमाइश पे कभी मैं तेरी ...बड़ी कशमकश है तेरी मेरी ...50 साल की भक्ति को तू शक्ति दे ..मुझ एक लब्ज़ राम नाम की भक्ति दे ....वो हर बार शक्ति चलाये मैं सबसे बेबश एक भक्ति से सहन करा .... तेरे कदमो ते गिरा ....वो सोहना मीत मेरा जो आके फिर सीने से लगाये ......ना बनेंगे अब तेरे बस रहेंगे सोहने तेरे दास ....बस मेरा घर ही तेरा दवारा होगा ....मेरे राम वो श्याम कहा से लाउ जो इस गरीब के दर साग खाये .....वो राम मेरा खुद माया रचे , कभी दर बुलाये ,कभी सेवा कराये , कभी गीत गवाए , कभी एक गरीब दास की और एक अहंकारी की भक्ति आजमाए ...फिर वो भजन दे नाल गिरे हुओ को सीने लाये .....वो ही माया फेरे वो ही हटाये .... राम मेरे राज तेरा ना कोई जाने ...या तू जाने या मैं जानू .....हे सांवरे ना धन दी दरकार ना दौलत दी बस तेरे जरा से सिर्फ जरा बस जरा प्रेम की दरकार ...तेरी भक्ति बकसीस हो जाए ...मैं जहा भी रहू बस तेरा रहु..... बस मेरा घर ही अब मेरा तन ही अब मेरा मन ही अब तेरा मंदिर हो जाए......
जय सीताराम....🌹
यहाँ हर कोई पापी है बस प्रेम से अर्ज अरदासे करो..कोई हनुमान नही बन सकता ..लेकिन हनुमान वर्गा प्रेम रख के अपने राम से अर्ज तो कर ही सकता है .....