सिवान, बिहार का एक छोटा सा शहर हैं जो पश्चिमी बिहार में पड़ता हैं। यह भारत के प्रथम राष्ट्रपति के पावन जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्व हैं। डॉo राजेंद्र प्रसाद (भारत के प्रथम राष्ट्रपति) का जन्म जीरादेई में हुआ था जो कि सिवान से 4 किलोमीटर पश्चिम पड़ता हैं. भोजपुरी में सिवान आर्थात सिमा या सिधाई होता हैं। एक समय था जब सिवान ग्रेटर नेपाल का दक्षिण सीमान्त हुआ करता था तभी से इसका नाम सिवान पड़ा I इस शहर का पुराना नाम "अलीगंज" था, जिसे बाद में बदल के "सिवान" रखा गया। अभी फिलहाल ये सीमा पर नही पडता किंतु वही से यह नाम प्रचलित हैं। सिवान छोटा मगर बहुत ही सुंदर जगह हैं। 📷👍 यहाँ के प्रमुख त्योहार एवं पर्व होली,दीवाली,दासहरा, छठ पूजा, ईद,बकरीद और मुहर्रम हैं.। यहां का मौसम भारत का अन्य जगहों की ही तरह हैं। गर्मी में गर्म और ठंडी में ठंड पड़ती हैं, यहाँ के लोगों का मुख्य पेशा खेती करना हैं।
★महत्वपूर्ण व्यक्ति--> डॉo राजेन्द्र प्रसाद- महात्मा गाँधी के सहयोगी, स्वतंत्रता सेनानी एवं भारत के प्रथम राष्ट्रपति ★मौलाना मजहरूल हक़-->महात्मा गाँधी के सहयोगी, स्वतंत्रता सेनानी एवं हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक, सदाकत आश्रम तथा बिहार विद्यापीठ के संस्थापक
★फुलेना प्रसाद- स्वतंत्रता सेनानी
★ब्रज किशोर प्रसाद--> स्वतंत्रता सेनानी एवं पर्दा-प्रथा विरोध आन्दोलन के जन्मदाता
★उमाकान्त सिंह--> 1 अगस्त 1942 को बिहार सचिवालय के सामने शहीद हुए क्रांतिकारियों में एक
★दारोगा प्रसाद राय--> बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री
★प्रभावती देवी--> 1971-1972 में छात्र आंदोलन के अगुवा रह चुके डॉo जयप्रकाश नारायण की पत्नी ★पैगाम अफाकी--> मशहूर उर्दू साहित्यकार, मकान, माफिया, दरिंदा जैसी किताबों के रचयिता
★नटवर लाल--> सिवान के दरौली प्रखंड में बरई बंगरा गाँव में जन्मे मशहूर ठग शैक्षणिक संस्थान
★डीग्री महाविद्यालय:- डी० ए० वी० कॉलेज, जेड ए इस्लामिया कॉलेज, दारोगा प्रसाद राय कॉलेज, राजेन्द्र कॉलेज, वी एम इंटर कॉलेज, प्रभावती देवी बालिका महाविद्यालय
★व्यवसायिक शिक्षा:- इंजिनियरिंग कॉलेज, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज, आई टी आई कालेज
★ मॉल--> विशाल मेगा मार्ट, एम- बाजार, भी2, भी-मार्ट, आदित्य विजन, इंडिया बाजार इत्यादि।
★रेल मार्ग--> दिल्ली-हाजीपुर-गुवाहाटी रेलमार्ग पर सिवान एक महत्वपूर्ण जंक्शन हैं। यह पूर्व मध्य रेलवे के सोनपुर मंडल में पड़ता हैं जिले में 45 किलोमीटर लंबी रेलमार्ग मैरवा, जीरादेई, पचरुखी, दरौंधा होकर गुजरती हैं। दरौंधा से महराजगंज के बीच एक लूप-लाइन भी मौजूद हैं, जिसका विस्तार मसरख तक प्रस्तावित हैं। सिवान से दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, अमृतसर, कोलकाता और गुवहाटी जैसे महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रैन उपलब्ध हैं।
★वायुमार्ग--> नजदीकी हवाई अड्डा राज्य की राजधानी पटना में हैं। जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई, क्षेत्र से दिल्ली, कोलकाता, राँची आदि शहरों के लिए इंडियन, स्पाई जेड,किंगफिशर, जेटलाइट, इंडिगो आदि विमान सेवाएँ उपलब्ध हैं।
★भीखाबाँध--> महराजगंज प्रखंड में इस जगह पर एक विशाल पेड़ के नीचे भैया-बहिनी का मंदिर बना हैं। कहा जाता हैं कि 14वी सदी में मुगल सेना से लडाई में दोनो भाई बहन मारे गए थे।
★महराजगंज--> उत्तर बिहार के प्रसिद्ध मौनिय बाबा मेला, बताया गया हैं कि यह मेला 1923 से प्रत्येक वर्ष भादो माह की चतुर्दशी से प्रारंभ होता हैं। इस मेला को देखने के लिए कई पड़ोसी जिले के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल से लोग आते हैं। इस मेला में लाखों लोग आते हैं, जगह-जगह दंडाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहती हैं इस मेले की कुछ दिन पहले से ही तैयारी चलने लगती हैं। मौनिय बाबा स्थल पर मिना बाजार,लकड़ी की दुकान, मौत का कुआ, झूला,परचून की दुकान, मिठाई की दुकान समेत अन्य दुकानें मेला में उपलब्ध रहता हैं।
★जीरादेई--> सिवान शहर से 13 किमी पश्चिम में देशरत्न डॉo राजेंद्र प्रसाद का जन्म स्थान।
★फरीदपुर--> बिहार रत्न मौलाना मजहरुल हक़ का जन्म स्थान।
★सहोगरा--> शिव भगवान का मंदिर हैं। जहाँ जाने के लिए गुठनी चौराहा से तेनुआ मोड़ और गाँव नैनिजोर होते हुए सहोगरा मंदिर जाया जाता हैं। यहाँ शिवरात्रि और सावन में भारी भीड़ जुटती हैं।
★हडसर--> यह दरौंधा रेलवे से 2 किलोमीटर अन्दर हैं। यहाँ काली माँ का मंदिर हैं ऐसी मान्यता है कि जो देविथवे मंदिर में हैं। वह अपने भक्त रहसु भगत की पुकार पर कलकते से चली और कलकत्ता से थावे जाते समय इनका यही अंतिम पड़ाव था। अब यहां कोई मंदिर नही हैं, पर आस्था गहरी हैं।
★पातार--> राम जी बाबा का मंदिर हैं जहाँ पर किसी भी आदमी को साँप कटता हैं तो यहाँ पर आने पर सही हो जाता हैं। ऐसी मान्यता भी हैं और सच्चाई भी इसी गाँव मे श्री विश्वनाथ पाण्डेय जी के सपुत्र प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य मुरारी पाण्डेय जी का जन्मस्थान हैं।
★नरहन--> यह सिवान जिला मुख्यालय से 30 किमीo दक्षिण में अवस्थित हैं यहाँ हिन्दुओ का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान हैं। कार्तिक पूर्णिमा एवं मकर सक्रान्ति के दिन यहाँ मेले का आयोजन होता हैं, जिसमे काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और सरयू नदी के पवित्र जल से स्नान करते हैं। यहाँ आश्रिन पूर्णिमा के दिन दुर्गा पूजा के बाद एक भव्य जुलूस का आयोजन होता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
★पर्यटन स्थल--> दोन स्तूप (दरौली):- दरौली प्रखंड के दोन गाँव में यह एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल है। दरौली नाम मुगल शासक शाहजहाँ के बेटे दारा शिकोह के नाम पर पड़ा है। ऐसी मान्यता है कि दोन में भगवान बुद्ध का अंतिम संस्कार हुआ था। हिंदू लोग यह मानते हैं कि यहाँ किले का अवशेष महाभारत काल का है, जिसे गुरु द्रोणाचार्य ने बनवाया था। उपलब्ध साक्ष्यों को देखने से इस मान्यता को बल नहीं मिलता। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वर्णन में इस स्थान पर एक पुराना स्तूप होने का जिक्र किया है। स्तूप के अवशेष स्थल पर तारा मंदिर बना है, जिसमें नवीं सदी में बनी एक मूर्ति स्थापित है।
★अमरपुर--> दरौली से 3 किलोमीटर पश्चिम में घाघरा नदी के तट पर स्थित इस गाँव में मुगल शाहजहाँ के शासनकाल (1626-1658) में यहाँ के नायब अमर सिंह द्वारा एक मस्जिद का निर्माण शुरु कराया गया, जो अधूरा रहा। लाल पत्थरों से बनी अधूरी मस्जिद को यहाँ देखा जा सकता है।
★नदियाँ--> गंडकी एवं घाघरा यहाँ की प्रमुख नदी है। घाघरा नदी जिले की दक्षिणी सीमा पर बहने वाली सदावाही नदी है। इसके अलावे झरही, दाहा, धमती, सिआही, निकारी और सोना जैसी छोटी नदियाँ भी है। झरही और दाहा घाघरा की सहायक है जबकि गंडकी और धमती गंडक में जा मिलती है।
★मैरवा धाम--> मैरवा प्रखंड में हरि बाबा का स्थान के नाम से प्रचलित झरही नदी के किनारे इस स्थान पर कार्तिक और चैत महीने में मेला लगता है। यह ब्रह्म स्थान एक संत की समाधि पर स्थित है। इस स्थान पर डाक बंग्ला के सामने बने चनानरी डीह (ऊँची भूमि) पर एक अहिरनी औरत के आश्रम को पूजा जाता है।
★मेंहदार--> सिसवां प्रखंड में स्थित इस गाँव के बावन बीघे में बने पोखर के किनारे शिव एवं विश्वकर्मा भगवान का मंदिर बना है। स्थानीय लोगों में इस पोखर को पवित्र माना जाता है। यहाँ शिवरात्रि एवं विश्वकर्मा पूजा (17 सितंबर) को भाड़ी भीड़ जुटती है।
★लकड़ी दरगाह--> पटना के मुस्लिम संत शाह अर्जन के दरगाह पर रब्बी-उस-सानी के 11वें दिन होने वाले उर्स पर भाड़ी मेला लगता है। इस दरगाह पर लकड़ी का बहुत अच्छी कासीदगरी की गयी है। कहा जाता है कि इस स्थान की शांति के चलते शाह अर्जन बस गए थे और उन्होंने 40 दिनों तक यहाँ चिल्ला किया था।
★ हसनपुरा--> हुसैनगंज प्रखंड के इस गाँव में अरब से आए चिश्ती सिलसिले के एक मुस्लिम संत मख्दूम सैय्यद हसन चिश्ती आकर बस गए थे। यहाँ उन्होंने खानकाह भी स्थापित किया था।
★चौकी हसन, मन्नतें पूरी होती हैं मकदुम बाबा के मजार पे--> बड़हरिया (सीवान):- आज समाज में जहां सद्भाव, सहिष्णुता व आपसी सौहार्द की कमी देखी जा रही है. वहीं प्रखंड के चौकी हसन दक्षिण में गंडकी नदी के पश्चिमी छोर पर अवस्थित मकदुम बाबा का मजार आज भी हिंदू-मुसलिम को आज भी एकता का संदेश देने में कामयाब है. करीब पांच बीघे की चार दीवारी के भीतर अवस्थित इस रमणीय मजार मुसलमानों से दा हिंदू श्रद्धालु एकांत चित बैठे व मजार में शिरनी व चादर चढ़ाते देखे जा सकते हैं. कोई मन्नत मांग रहा है, तो कोई मन्नतें पूरी होने पर चादर पोशी कर रहा है. वहीं कोई एकांत हो कर चिंतन कर रहा है. हिंदू-मुसलिम एकता का प्रतीक यह हजरत मकदुम सैयद शाह शहाबुद्दीन कताल जाहिदी का मजार कई दशकों से आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है।
● क्या है मकदुम बाबा के मजार का इतिहास--> मकदुम बाबा के मजार के प्रबंधक पूर्व शिक्षक मुश्ताक अहमद सिद्दकी कहते है कि हजरत मकदुम सैयद शाह शहाबुद्दीन कताल जहिदी के पूर्वज फिरोज शाह तुगलक के दौर में शांति व सौहार्द का पैगाम लेकर मक्का शरीफ से हिंदुस्तान आये थे. मकदुम बाबा के पिता हजरत मकदुम सैयद शाह बदरूदीन बदरे आलम जाहिदी अमन का पैगाम लेकर पहले दिल्ली आये वहां से मेरठ पहुंचे और फिर बिहार आये थे. बिहार में उस वक्त हजरत याहिया मनीरी रहमतुला अल्लैह का दौर था. जब हजरत बदरूदीन बदरे आलम याहिया मनीरी के संपर्क में आये, तो उन्होंने बदरे आलम को शांति का संदेश फैलाने के लिए बंगाल भेज दिया. जहां अलाउदीन की हुकूमत थी. बताया जाता है कि बंगाल के चटगांव में एक पहाड़ पर शैतान व जिन्नात का डेरा था लेकिन उस पहाड़ उन्होंने जैसे हीं चिराग रोशन किया चारों ओर शांतिमय वातावरणहो गया व लोगों को बुरी आत्माओं से निजात मिल गई थी। बहरहाल हजरत मकदुम बाबा ने बिहार शरीफ से सारण की ओर रूख किया व चौकी हसन आते-आते उनका घोड़ा इसी चौकी हसन में थक कर बैठ गया था. उस जमाने में यहां नेपाल राजा का साम्राज्य था नेपाल के पुलिस चौकी हसन में अपनी पुलिस चौकी बना रखी थी. यहां आकर अपने रहने के लिए चौकी मांगी थी. शायद इसलिए इस गांव का नाम चौकी हसन पड़ गया। खैर मकदुम बाबा यहीं रह कर पूरे परिक्षेत्र में आपसी मुहब्बत व अमन का पैगाम फैलाते रहे।
●क्या है प्रसिद्धि का कारण--> जहाँ अभी मकदूम बाबा का मजार है वहीं पर चार रमजान को मकदुम बाबा ने अपना शरीर त्याग दिया था। इसलिए ईद के दिन पूरे इलाके के लोग यहां इकट्ठा होकर ईद की नमाज पढ़ते हैं. ईद के दिन मजार परिसर में भव्य मेला लगता है. मुसलमान दुआएं मांगते हैं. वैसे बकरीद को भी मुसलमान यहीं पर नमाज पढ़ते हैं व मेला लगता है एवं मुहर्रम का भी मेला लगता है। लोग फतिया पढ़ते है और मन्नतें मांगते हैं व फिर मन्नतें पूरी होने पर चादरपोशी करते हैं।
★ प्रशासनिक विभाजन-अनुमंडल~सिवान एवं महाराजगंज
★ प्रखंड--> मैरवा, पचरुखी, रघुनाथपुर, आन्दर, गुठनी, महारजगंज, दरौली, सिसवां, दरौंदा, हुसैनागंज, भगवानपुर, हाट, गोरियाकोठी, बरहरिया, हबीबपुर, बसंतपुर, लकरी, नबीगंज, जिरादेई, नौतन और हसनपुरा
★विधानसभा सीट--> ● सिवान ● जीरादेई ● दरौली ● रघुनाथपुर ● दारौंदा ● बड़हरिया ● गोरियाकोठी ● महाराजगंज सिवान ~
जनसँख्या 2714349 (2001) के अनुसार धनत्व 1223 क्षेत्रफल 2219 ऊँचाई 64 पिन कोड 841226 दूरभाष कोड 91-06154 वाहन कोड BR29