श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान

  • Home
  • India
  • Siwan
  • श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान

श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान के ऑफिसियल फेसबुक पेज पर आपका स्वागत है। 🙏

🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳श्री गढ़ी धाम स्थित जन सेवा ट्रस्ट कार्यालय परिसर में आज स्वतंत्रता दिवस के प...
15/08/2026

🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳

श्री गढ़ी धाम स्थित जन सेवा ट्रस्ट कार्यालय परिसर में आज स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर झंडा तोलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी सम्मानित अभिभावकों, बुजुर्गों एवं युवा साथियों ने राष्ट्रध्वज को सलामी देते हुए देश की एकता, अखंडता एवं गौरव को बनाए रखने का संकल्प लिया।

🇮🇳 जय हिन्द!
🇮🇳 वन्दे मातरम्!

🇮🇳 जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान की ओर से समस्त देशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हा...
15/08/2026

🇮🇳 जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳

श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान की ओर से समस्त देशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 🙏🇮🇳

आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी देश की एकता, अखंडता, शांति एवं समृद्धि के लिए संकल्प लें और अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें।

🇮🇳 वंदे मातरम्! 🇮🇳
🇮🇳 भारत माता की जय! 🇮🇳

🙏 जय हिंद! 🙏

03/08/2026

🔱 हर हर महादेव 🔱

श्री गढ़ी धाम स्थित श्री ब्रह्म बाबा जी का दिव्य महाश्रृंगार, वैदिक हवन एवं विधि-विधानपूर्वक पूजन ग्राम विशम्भरपुर निवासी परम श्रद्धेय पूज्य आचार्य श्री छोटन तिवारी जी महाराज के पावन सानिध्य एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।

इस पावन अवसर पर श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान के सभी सम्मानित सदस्यों ने श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना में सहभागिता कर बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा समस्त क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।

आयोजक:
श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान

🙏 जय श्री गढ़ी धाम 🙏श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान के सम्मानित सदस्यों द्वारा आपसी प्रेम, सौहार्द एवं संगठनात्...
26/07/2026

🙏 जय श्री गढ़ी धाम 🙏

श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान के सम्मानित सदस्यों द्वारा आपसी प्रेम, सौहार्द एवं संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिट्टी-चोखा सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में आगामी श्री गढ़ी धाम स्थित शिव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठात्मक रुद्र महायज्ञ–2027 के भव्य एवं दिव्य आयोजन को सफल बनाने हेतु सभी सदस्यों ने अपने बहुमूल्य विचार, सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रस्तुत किए। महायज्ञ की रूपरेखा, जनसहभागिता, व्यवस्था, प्रचार-प्रसार तथा विभिन्न समितियों के दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई।

समिति का संकल्प है कि आप सभी श्रद्धालुओं एवं ग्रामवासियों के सहयोग से यह महायज्ञ धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनेगा।

आप सभी का सहयोग, सुझाव एवं आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

हर हर महादेव! 🔱
जय श्री गढ़ी धाम! 🙏

कैराताल गढ़ी धाम की गौरवगाथा:बीघों में फैला बबूल के घने पेड़ों का रहस्य: आस्था का वो गुप्त धाम!जय श्री गढ़ी धाम | जय ब्र...
08/07/2026

कैराताल गढ़ी धाम की गौरवगाथा:
बीघों में फैला बबूल के घने पेड़ों का रहस्य: आस्था का वो गुप्त धाम!

जय श्री गढ़ी धाम | जय ब्रह्म बाबा

सिवान के भाइयों-बहनों और भोजपुरी माटी के सनातनी प्रेमियों,
आज हम श्री गढ़ी धाम की उस साक्षात सच पर बात करेंगे, जो सरकारी दस्तावेजों मे दर्ज है, जिसे हमारे बीच के ही बुजुर्गों ने अपनी आँखों से देखा और जिया है।
आज की इस कड़ी में, हम गढ़ी धाम के उस असली और ऐतिहासिक स्वरूप को सामने ला रहे हैं, जिसे जानने के बाद आपका मन आज ही इस पावन मिट्टी को मस्तक पर लगाने के लिए व्याकुल हो उठेगा।

आज की युवा पीढ़ी शायद नहीं जानती कि जिला मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर दूर सिवान सदर प्रखंड के पिठौरी पंचायत के कैराताल गांव का यह गढ़ी धाम कोई छोटा-मोटा स्थान नहीं, बल्कि 2 बीघों के दायरे में फैला एक विशाल और ऐतिहासिक परिसर है।

100 साल पुराने सरकारी दस्तावेजों को उठाकर देख लीजिए, उनमें साफ उल्लेख मिलता है कि इस पूरे बीघों के भू-भाग पर सिर्फ और सिर्फ घने, कटीले बबूल के पेड़ों का साम्राज्य था।
यह दस्तावेज़ इस बात का अकाट्य प्रमाण हैं कि 100 साल पहले के भी कई दशक पूर्व से यह स्थान ऐसे ही स्थापित था। यह कब से स्थापित है? इसका कोई लिखित आदि-अंत नहीं मिलता- यानी यह सनातन काल से हमारी आस्था का केंद्र रहा है। इसी बीघों में फैले कंटीले जंगल के ठीक बीचों-बीच विराजते थे हमारे परम पूज्य ब्रह्म बाबा (जिन्हें आज गढ़ी बाबा के नाम से जानते हैं।)

उस दौर में इस गढ़ी धाम की सीमा में कदम रखने का मतलब था - चारों तरफ तीखे और बड़े-बड़े कांटों का पहरा। लेकिन यहीं से शुरू होता है प्रकृति और परमात्मा का वो अलौकिक चमत्कार, जिसके आगे विज्ञान भी घुटने टेक देता है।

हमारे बुजुर्ग बताते हैं कि उस भयंकर कंटीले जंगल के बीच होने के बावजूद, अगर कोई भी भक्त सच्चे और श्रद्धा भाव से बाबा के दर्शन के लिए आगे बढ़ता था, तो पूरे रास्ते में एक भी कांटा उसके पैर में नहीं चुभता था। भक्तों के आस्था के इस गुप्त धाम को जिसने भी इस गुप्त धाम की महिमा को जाना, उसने बाबा के इस जाग्रत रूप का लोहा माना।

इस अलौकिक सत्य के जीते-जागते गवाह हैं पड़ोसी गाँव 'सरावे' के निवासी बुजुर्ग आचार्य रामचंद्र पांडेय जी। आचार्य जी वर्ष 1965 से लगातार इस पावन गढ़ी धाम पर पूजा-पाठ कराते आ रहे हैं।
जब वे बीते दौर की अपनी स्मृतियों को ताजा करते हैं, तो उनकी आँखें भर आती हैं। वे बताते हैं:
"मैं 1965 से गढ़ी धाम पर पूजा कराने जाता रहा हूँ। उस दौर में धाम पर चारों ओर बीघों में सिर्फ बबूल के पेड़ फैले थे, जमीन पर कांटे ही कांटे दिखते थे। लेकिन मैं हमेशा 'खाली पैर' (नंगे पैर) पूजा कराने जाता था। बाबा की ऐसी असीम कृपा और महिमा थी कि इतने वर्षों में कभी भी एक भी कांटा मेरे पैर में नहीं लगा, और न ही कभी कोई परेशानी हुई। बाबा अपने भक्तों का पहरा खुद करते थे।"

सोचिए, जिस जाग्रत दरबार की रक्षा स्वयं प्रकृति करती थी, जहाँ नंगे पैर चलने वाले भक्तों को कांटे भी छूने से कतराते थे... आज उस दरबार में सन्नाटा क्यों है? पुरानी पीढ़ी अपनी आँखों से इन चमत्कारों को देखकर विदा हो गई, और हम इतिहास के इन पन्नों को भूल गए।
क्या ऐसी जाग्रत भूमि, जहाँ साक्षात ब्रह्म बाबा का वास है, हमारे आने की राह नहीं देख रही? बाबा की महिमा आज भी वही है, वो अलौकिक दरबार आज भी उतना ही जाग्रत है - बस कमी है तो हमारे वहाँ पहुँचने की। समय निकालिए और सपरिवार कैराताल गढ़ी धाम पहुँचकर बाबा के चरणों में शीश नवाइए। विश्वास मानिए, वहाँ की मिट्टी छूते ही मन को वो शांति मिलेगी जो दुनिया के किसी कोने में नहीं मिल सकती।

#श्री_गढ़ी_धाम_कैराताल #सिवान_का_इतिहास #धरोहर_का_सच #ब्रह्म_बाबा #सरावे #जाग्रत_स्थान #सिवान #बिहार #इतिहास_और_आस्था
(संलग्न छाया चित्र काल्पनिक है!)

कैराताल गढ़ी धाम की गौरवगाथा: "कागजात बोलते हैं, नक्शे गवाही देते हैं... सिवान की छाती पर धड़कता सदियों पुराना वो जाग्रत...
06/07/2026

कैराताल गढ़ी धाम की गौरवगाथा: "कागजात बोलते हैं, नक्शे गवाही देते हैं... सिवान की छाती पर धड़कता सदियों पुराना वो जाग्रत सत्य!"

सिवान के भाइयों-बहनों और अपनी मिट्टी के गौरव को सीने में दबाए बैठे सभी साथियों,
कल जब हमने इस पावन गढ़ी धाम के उस शुरुआती दौर की चर्चा की, तो कई लोगों के मन में यह कौतूहल जागा कि आखिर इस स्थान की जड़ें कितनी गहरी हैं? क्या यह सिर्फ सुनी-सुनाई लोककथाएँ हैं या इसके पीछे कोई ठोस ऐतिहासिक सत्य भी है? तो आज इस कड़ी में हम बात करेंगे उन ठोस सबूतों की, जिन्हें न तो समय मिटा सका और न ही इतिहास के थपेड़े धुंधला सके।

आज की युवा पीढ़ी जब इस स्थान को देखती है, तो इसे केवल कुछ दशकों पुराना मान लेती है। लेकिन अगर आप सरकारी अभिलेखागार (रिकॉर्ड रूम) के पन्नों को पलटेंगे, तो 100 साल पुराना इतिहास और रिकॉर्ड तो यहाँ बहुत आसानी से, आम तौर पर मिल जाता है। लेकिन कहानी सिर्फ इतनी सी नहीं है। जब आप इस माटी के इतिहास को और गहराई से खंगालेंगे, तो जिला मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर दूर सिवान सदर प्रखंड का यह कैराताल गांव का गढ़ी धाम आपको 200 वर्ष और उसके आगे के भी सैकड़ों वर्षों तक के प्रामाणिक दस्तावेजों में दर्ज मिलेगा। पुराने रजवाड़ों के समय के शाही फरमान, पुराने बंदोबस्त के कागजात और ब्रिटिश काल के गजेटियर इस पावन भूमि की प्राचीनता और इसके ऐतिहासिक अस्तित्व की गवाही चीख-चीख कर देते मिलेंगे।

उस दौर के जो हाथ से बने पुराने नक्शे (कैडस्ट्रल सर्वे मैप्स) हैं, उनमें इस स्थान को एक सामान्य जमीन नहीं, बल्कि एक विशेष टीलानुमा स्थान पर ब्रह्म स्थान के रूप में चिह्नित किया गया है।
उन नक्शों में गढ़ी के चारों तरफ के उस अभेद्य बबूल के जंगल की को भी दर्शाया गया है, जिसके बीचो-बीच बाबा का स्थान हुआ करता था।
यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि जब सिवान शहर का आधुनिक स्वरूप अस्तित्व में भी नहीं आया था, तब से यह गढ़ी एक बहुत बड़े क्षेत्रीय और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित थी।

सोचिए, जिस भूमि का वजूद सौ साल से भी पहले के सरकारी कागजों और नक्शों में पूरे मान-सम्मान के साथ दर्ज है, जिसके सामने कभी पूरी सारण कमिश्नरी और उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल तक के लोग शीश नवाते थे... आज उसी सिवान के युवा अपनी इस विरासत से बेखबर हैं। सरकारी रिकॉर्ड रूम के बस्तों में तो यह इतिहास सुरक्षित रह गया, लेकिन हमारी नई पीढ़ी के दिमाग की फाइलों से यह गायब हो गया।

पुरानी पीढ़ी के शांत हो जाने के बाद, इस गौरव को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की जो निरंतरता टूट गई थी, आज हमें उसी कड़ी को फिर से जोड़ना है।

भाइयों, इतिहास गवाह है कि जो कौम अपनी विरासत और अपने ऐतिहासिक सबूतों को भूल जाती है, उसका वजूद भी धीरे-धीरे धुंधला हो जाता है। गढ़ी धाम की यह पावन माटी आज हमसे सवाल कर रही है कि जब सरकारी दस्तावेज भी मेरी गवाही दे रहे हैं, तो मेरी अपनी संतानें (नई पीढ़ी) चुप क्यों हैं?

आइए, इस पोस्ट के माध्यम से गढ़ी धाम कैराताल के इस प्रामाणिक इतिहास को सिवान, बिहार और देश के कोने-कोने में बैठे हर सनातनी भाई तक पहुँचाएं। उन्हें बताएं कि हमारी आस्था सिर्फ दीवारों और मूर्तियों में नहीं, बल्कि सदियों पुराने इतिहास के पन्नों में और हमारे पुरखों के खून में रची-बसी है।

स्थान: श्री गढ़ी धाम, कैराताल, सिवान सदर (मुख्यालय से 5 किमी)
#गढ़ी_धाम_कैराताल #सिवान_का_इतिहास #धरोहर_का_सच #सरकारी_दस्तावेज #ऐतिहासिक_नक्शे #ब्रह्म_बाबा #बाबा_भूतनाथ #सांस्कृतिक_पुनरुत्थान #सिवान #बिहार #इतिहास_और_आस्था

🔱 हर हर महादेव 🔱श्री गढ़ी धाम स्थित शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठात्मक रुद्र महायज्ञ 2027 के आयोजन के लिए "महायज्ञ जन जागरूकत...
06/07/2026

🔱 हर हर महादेव 🔱

श्री गढ़ी धाम स्थित शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठात्मक रुद्र महायज्ञ 2027 के आयोजन के लिए "महायज्ञ जन जागरूकता फ्लेक्स" आज अलग- अलग गाँव में लगाया गया। 🖼️

#2027

इतिहास के पन्नों में दफन, सिवान की वो पावन धरा जो कभी नेपाल तक की आस्था का केंद्र थी!क्या हम अपनी ही जड़ों को भूलते जा र...
05/07/2026

इतिहास के पन्नों में दफन, सिवान की वो पावन धरा जो कभी नेपाल तक की आस्था का केंद्र थी!

क्या हम अपनी ही जड़ों को भूलते जा रहे हैं? सिवान सदर प्रखंड के अंतर्गत, जिला मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कैराताल गांव का 'श्री गढ़ी धाम' केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी सभ्यता, इतिहास और अलौकिक शक्तियों का जीवंत प्रमाण है।
आज की युवा पीढ़ी शायद इस बात से अनजान है कि जिस गढ़ी धाम को आज हम एक स्थानीय मंदिर के रूप में देखते हैं, उसका इतिहास कितना गौरवशाली और विहंगम रहा है। सरकारी दस्तावेजों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार 100 वर्ष पुर्व तक का जिक्र आसानी से मिलता है, इसे और खंगाला जाए, तो 200 और उससे आगे के वर्ष पूर्व तक के प्रामाणिक दस्तावेज इस भूमि की प्राचीनता और इसके ऐतिहासिक अस्तित्व की गवाही देते मिलेंगे। यह वह दौर था जब इस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक और आध्यात्मिक संरचना आज से बिल्कुल अलग थी।

बबूल के घने जंगल के बीच जाग्रत स्थान:

बुजुर्ग बताते हैं और इतिहास गवाह है कि एक समय यह पूरा परिसर बबूल के कंटीले और घने पेड़ों से घिरा हुआ करता था। चारों तरफ एक रहस्यमयी और आध्यात्मिक शांति पसरी रहती थी। इसी बबूल के घने जंगल के ठीक बीचों-बीच ब्रह्म बाबा का यह जाग्रत स्थान हुआ करता था, जहाँ कदम रखते ही साक्षात ईश्वरीय ऊर्जा का अहसास होने लगता था। वह प्रकृति का एक ऐसा अद्भुत संतुलन था जहाँ कंटीले वृक्षों के बीच आस्था का सबसे कोमल और शक्तिशाली केंद्र धड़कता था।

जब नेपाल से खिंचे चले आते थे भक्त:

आज यातायात के साधन सुलभ हैं, फिर भी हम अपनी धरोहरों तक नहीं पहुँच पाते। लेकिन एक दौर वह था जब सुख-सुविधाएं न के बराबर थीं, इसके बावजूद कैराताल गढ़ी धाम की महिमा इतनी असीम थी कि यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता था। केवल सिवान या आसपास के गाँव ही नहीं, बल्कि:

नेपाल सरहद के पार से श्रद्धालु यहाँ मन्नत लेकर आते थे।
बेतिया, मोतिहारी, गोपालगंज, छपरा (सारण) जैसे बिहार के सुदूर जिलों से लोग आते थे।
उत्तर प्रदेश के बलिया, मऊ देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज तक के इलाकों से लोग हफ्तों की यात्रा तय कर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुँचते थे।

पीढ़ी बदली, पर क्या आस्था धुंधली हो गई?

समय का चक्र घूमा, पुरानी पीढ़ी के मार्गदर्शक एक-एक कर हमसे विदा होते गए। दुःख की बात यह है कि समय के साथ जो इतिहास और जो कहानियां नई पीढ़ी तक ट्रांसफर होनी चाहिए थीं, वे कहीं खो गईं। आज की आधुनिक पीढ़ी को इस बात का भान ही नहीं है कि उनके घर के इतने पास कितनी बड़ी अलौकिक शक्ति और ऐतिहासिक विरासत मौजूद है। यही कारण है कि जो धाम कभी अंतरप्रांतीय आस्था का केंद्र था, वहाँ आज श्रद्धालुओं की संख्या बेहद सीमित हो गई है।

समय आ गया है पुनर्जागरण का!

इतिहास खुद को दोहराता है। गढ़ी धाम के उस पुराने गौरव, उस आध्यात्मिक आभा और उस भव्य पहचान को वापस लाने का समय अब आ चुका है। यह मिट्टी गवाह है कि यहाँ आज भी वही जाग्रत ऊर्जा मौजूद है, बस आवश्यकता है हमारी सोई हुई चेतना को जगाने की।

अगले कुछ दिनों तक हम लगातार गढ़ी धाम के उन अनसुलझे पहलुओं, गढ़ी बाबा (ब्रह्म बाबा), बाबा भूतनाथ और ब्रह्म बाबा के अलौकिक संबंधों और प्रकृति के उन चमत्कारों की चर्चा करेंगे, जो आपको अचंभित कर देंगे।

आप सभी से निवेदन है कि अपनी इस प्राचीन धरोहर की कहानी को जन-जन तक पहुँचाने में भागीदार बनें। इस पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करें ताकि सिवान की इस ऐतिहासिक गढ़ी का गौरव फिर से बहाल हो सके।

स्थान:श्री गढ़ी धाम, कैराताल, सिवान सदर (मुख्यालय से 5 किमी)
#गढ़ी_धाम_कैराताल #सिवान_का_इतिहास #धरोहर #ब्रह्म_बाबा #बाबा_भूतनाथ #सांस्कृतिक_पुनरुत्थान #सिवान #बिहार

🔱 हर हर महादेव 🔱श्री गढ़ी धाम स्थित शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठात्मक रुद्र महायज्ञ–2027 के पावन आयोजन हेतु अंतरराष्ट्रीय बज...
24/06/2026

🔱 हर हर महादेव 🔱

श्री गढ़ी धाम स्थित शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठात्मक रुद्र महायज्ञ–2027 के पावन आयोजन हेतु अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल, गोपालगंज जिला अध्यक्ष आदरणीय श्री आदित्य श्रीवास्तव जी द्वारा ₹501 (पाँच सौ एक रुपये) की सहयोग राशि प्रदान की गई।

श्री गढ़ी धाम सेवा समिति उनकी इस श्रद्धापूर्ण एवं पुण्य सहयोग के लिए हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती है। 🙏

महादेव की असीम कृपा आप एवं आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।
आप स्वस्थ, सुखी, समृद्ध एवं यशस्वी रहें तथा धर्म एवं समाज सेवा के कार्यों में निरंतर अग्रसर रहें।

कोटि-कोटि धन्यवाद! 🙏

निवेदक:
श्री गढ़ी धाम सेवा समिति
कैराताल, सिवान
मो० +91 99346 05681

Address

Kaira Tal
Siwan
841227

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to श्री गढ़ी धाम सेवा समिति, कैराताल, सिवान:

Shortcuts

Share