13/08/2026
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि कभी-कभी जीवन में बड़ी बाधाओं को पार करने के लिए हमें अपनी छिपी हुई शक्तियों का अहसास होना आवश्यक होता है।
जैसे जामवंत जी ने हनुमान जी को उनके बल और विवेक का स्मरण कराकर लंका प्रस्थान के लिए प्रेरित किया, वैसे ही सही मार्गदर्शन से व्यक्ति अपने भीतर की अपार क्षमताओं को पहचान सकता है।
चौपाई
कहइ रीछपति सुनु हनुमाना।
का चुप साधि रहेहु बलवाना॥
पवन तनय बल पवन समाना।
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
भावार्थ
ऋक्षराज जाम्बवान ने श्री हनुमान जी से कहा- हे हनुमान्! हे बलवान्! सुनो, तुमने यह क्या चुप साध रखी है? तुम पवन के पुत्र हो और बल में पवन के समान हो। तुम बुद्धि-विवेक और विज्ञान की खान हो॥