पुराण अंग्रेजों के शासन में अंग्रेजी शासन खुदाई का कार्य करण करवा रहे थे उसी समय फावड़े से खुदाई करते समय लाल रंग आया तो उन्होंने सोचा की जड़ होगी और गहरा खोदा तब खून की धार निकलने लगी।
यह देखकर लेबर वह स्थान छोड़कर भाग गए तब लेवरों ने इसकी जानकारी प्रशासन को दी कि खून की धार बह रही है। अंग्रेजों ने खुदाई करवाकर शिवलिंग को निकलवाया और वहाँ पर चबूतरा बनाकर उसपे शिवलिंग रख दिया। वहां पर सभी लोगों ने
पूजा-अर्चना प्रारंभ कर दी थी तथा कुछ पंडितों को शिवलिंग की देखरेख के लिए निर्धारित किया। फिर आगे चलकर एक मठिया का निर्माण करवाया फिर पूजा अर्चना बढ़ने लगी और आस्था बढ़ती गई तभी वहां एक वृद्ध राज मिस्त्री जवाहर लाल आया जो दोनों आंखों से अंधा था। उसने वहां मन्नत मांगी की आप अगर सच्चे होंगे तो मेरी आँखें वापस आ जाएंगी तो मैं मंदिर बनवाऊँगा।
पूजा करके बाहर निकलते ही उसके चारों ओर रोशनी आने लगी और उसे दिखाई देने लगा तथा उस राज मिस्त्री ने अपने हाथों से मंदिर का निर्माण किया। 1918 में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ
शिवलिंग काले रंग का होने के कारण उस स्थान का नाम श्यामनाथ कहा जाने लगा। उस शिवलिंग पर फावड़े के निशान आज भी उपस्थित है श्रावण के महीने में मेले का आयोजन होता है और लाखों श्रद्धालु दर्शन प्राप्त करते है। समय समय पर मन्दिर में रामायण, रुद्राभिषेक, शिव कथा होती रहती है।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर शहर के मध्य स्थित बाबा श्याम नाथ मंदिर 200 सो वर्षो से भी अधिक समय से लोगों की आस्था का केंद्र बना है। यहां श्रावण मास भर आस्था का सैलाब उमड़ता है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुगण भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं।
समिति- श्री श्यामनाथ मेला समिति
अध्यक्ष - योगेश अवधेश, शिव, मुन्नालाल