22/12/2025
प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।।
त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।
जो उग्र और साहसी हैं, जो श्रेष्ठ और अखंड है, जो अजन्मे हैं, जो सहस्त्र सूर्य के सामान प्रकाशवान हैं, जो त्रिशूल रखते है, जिनका कोई मूल नहीं हैं, जिनमे किसी भी असुर का नाश करने की शक्ति हैं, जो त्रिशूल धारण करके त्रिविध दुखों की जड़ को फाड़ देते हैं, और जो प्रेम से ही प्राप्त होता है, उन्हें मैं नमन करता हूँ।
Shri Vishweshwar Dev Sthanam
#श्रीविश्वेश्वरदेवस्थानम