GITA GYAN

GITA GYAN “मैं ही सृष्टि का आदि, मध्य और अंत हूँ।”

भगवान श्री कृष्ण ही इस सृष्टि के पालनहार है। वही इस संसार क

30/04/2026

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम्

19/02/2026

Jai Shree Vishnu Ji 🙏

नारायण की कृपा से जीवन में शांति और संतुलन। 💙

जहाँ धर्म है, वहाँ विष्णु जी का वास है। 🌼

पालनहार विष्णु जी की जय हो। 🙏

श्रीहरि की भक्ति, जीवन की सच्ची शक्ति। ✨

नारायण-नारायण… हर कष्ट का समाधान। 🌸

भगवान विष्णु की कृपा से हर दिन मंगलमय हो। 💫

धर्म की रक्षा, अधर्म का नाश — यही है संदेश






10/02/2026

Radha Radha🙏

20/01/2026

“रामो विग्रहवान् धर्मः।”
(श्रीराम धर्म के साकार स्वरूप हैं।)🙏🙏

“राम नाम बिनु गति नहिं कोई।”
(राम नाम के बिना मुक्ति नहीं।)🙏🙏

राम नाम की शक्ति

एक छोटे से गाँव में हरिदास नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास धन-दौलत नहीं थी, लेकिन उसके मन में राम नाम के प्रति गहरी श्रद्धा थी। वह हर काम से पहले “राम-राम” कहता और दिन का आरंभ राम नाम के स्मरण से करता।

एक वर्ष गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। फसलें नष्ट हो गईं और लोग निराश हो गए। हरिदास के पास भी खाने को बहुत कम था, फिर भी वह रोज़ मंदिर जाकर राम नाम का जप करता रहा। उसने विश्वास नहीं छोड़ा।

एक दिन गाँव में एक साधु आए। उन्होंने हरिदास की भक्ति देखकर कहा, “जिसके मन में राम नाम बसता है, उसके जीवन में कभी अंधकार स्थायी नहीं रहता।” साधु के आशीर्वाद से कुछ ही दिनों में बारिश हुई और गाँव फिर से हरा-भरा हो गया।

हरिदास समझ गया कि राम नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि आशा, धैर्य और विश्वास की शक्ति है।
तभी से गाँव के लोग राम नाम का महत्व समझने लगे।










18/01/2026

यह श्रीकृष्ण और गोपियों की रासलीला की पावन कथा है, जो वृंदावन की दिव्य भूमि से जुड़ी हुई है:
वृंदावन की पावन रज में जब चंद्रमा अपनी पूर्णिमा की शीतल चाँदनी बिखेर रहा था, तब यमुना तट पर श्रीकृष्ण ने अपनी मधुर बाँसुरी बजाई। उस बाँसुरी की धुन में ऐसा अलौकिक आकर्षण था कि वृंदावन की सभी गोपियाँ अपने-अपने कार्य छोड़कर उस ध्वनि की ओर खिंची चली आईं। किसी ने दूध उबालना छोड़ दिया, किसी ने घर की देहरी लाँघ दी, क्योंकि वह पुकार केवल कानों से नहीं, आत्मा से सुनी जा रही थी।
यमुना के तट पर पहुँचकर गोपियों ने देखा कि श्रीकृष्ण मंद-मंद मुस्कान के साथ खड़े हैं। उन्होंने गोपियों से कहा कि यह समय गृहस्थ धर्म का है, उन्हें घर लौट जाना चाहिए। पर गोपियों ने विनम्र भाव से उत्तर दिया कि उनका मन, उनका प्राण, सब कुछ तो श्रीकृष्ण में ही समर्पित है। उनके लिए कृष्ण ही पति, कृष्ण ही जीवन और कृष्ण ही परम सत्य हैं।
गोपियों की इस निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने रासलीला आरंभ की। उस दिव्य नृत्य में प्रत्येक गोपी के साथ श्रीकृष्ण स्वयं उपस्थित थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो एक नहीं, अनेक कृष्ण नृत्य कर रहे हों। वृंदावन की वायु सुगंधित हो उठी, यमुना की लहरें थम गईं और देवता भी आकाश से पुष्पवर्षा करने लगे।
रासलीला केवल नृत्य नहीं थी, वह आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक थी। गोपियों का प्रेम सांसारिक नहीं, बल्कि शुद्ध, निःस्वार्थ और पूर्ण समर्पण से भरा हुआ था। उसमें कोई इच्छा नहीं थी, केवल कृष्ण की सेवा और उनका सान्निध्य पाने की लालसा थी।
जब रास समाप्त हुई, तो गोपियाँ आनंद और विरह के मिश्रित भाव से भर उठीं। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि यह लीला उन्हें यह सिखाने के लिए थी कि जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और प्रेम से ईश्वर का स्मरण करता है, वह कभी उनसे दूर नहीं रहता।
आज भी वृंदावन की गलियों में, यमुना के तट पर और कुंज गलियों में ऐसा माना जाता है कि रात्रि के समय श्रीकृष्ण की बाँसुरी की मधुर तान गूँजती है और गोपियों की रासलीला की स्मृति भक्तों के हृदय को प्रेम और भक्ति से भर देती है।
Gita Gyan













18/01/2026

भक्ति का मार्ग
ईश्वर में श्रद्धा और भक्ति से मन शुद्ध होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।🙏🙏

18/01/2026

ईश्वर पर विश्वास
जो व्यक्ति सम्पूर्ण भाव से ईश्वर को समर्पित होता है, उसे भय और चिंता नहीं रहती।

14/01/2026

नौकरी प्राप्ति के लिए हनुमान जी की चौपाई का महत्व

जीवन में नौकरी प्राप्त करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। नौकरी न केवल आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान भी देती है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में योग्य होने के बावजूद कई बार व्यक्ति को असफलताओं और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में आध्यात्मिक शक्ति और विश्वास मनुष्य को संबल प्रदान करते हैं।

हनुमान जी को बल, बुद्धि और विद्या का प्रतीक माना जाता है। तुलसीदास जी द्वारा रचित चौपाई — “बुद्धि हीन तनु जानिके…” — मनुष्य की विनम्रता और आत्मस्वीकृति को दर्शाती है। इस चौपाई के माध्यम से भक्त हनुमान जी से बुद्धि, ज्ञान और विवेक प्रदान करने की प्रार्थना करता है, जो नौकरी प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक गुण हैं।

नौकरी प्राप्ति के लिए हनुमान जी की चौपाई

“बुद्धि हीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥”

👉 यह चौपाई बुद्धि, विद्या, आत्मविश्वास और बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

इस चौपाई का नियमित पाठ करने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और एकाग्रता में वृद्धि होती है। हनुमान जी की कृपा से व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता सुदृढ़ होती है, जिससे वह सही अवसरों को पहचान पाता है। साथ ही, यह चौपाई मानसिक कष्ट, भय और असफलता के डर को दूर करने में भी सहायक मानी जाती है।

अतः कहा जा सकता है कि नौकरी प्राप्ति के प्रयासों के साथ यदि व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की इस चौपाई का पाठ करता है और परिश्रम करता है, तो उसे अवश्य सफलता प्राप्त होती है। श्रद्धा, परिश्रम और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी हैं।
जय बजरंग बली 🙏 शक्ति, भक्ति और विश्वास का नाम हनुमान

जहाँ राम का नाम, वहाँ हनुमान का काम

हनुमान जी की कृपा से हर असंभव संभव है

श्रीराम के दूत, संकटों के नाशक – हनुमान जी🙏🙏🙏🙏

Hare Krishna  💙”“Hare Krishna 🙏”“Forever in Krishna’s grace 🪈”“Where there is Krishna, there is hope. 🙏”“Trust Krishna, ...
11/01/2026

Hare Krishna 💙”

“Hare Krishna 🙏”

“Forever in Krishna’s grace 🪈”

“Where there is Krishna, there is hope. 🙏”

“Trust Krishna, everything will fall into place.”

“Shree Krishna’s blessings are my strength.”

Do your karma, Krishna will take care of the rest.”

“Let Krishna guide your path. ✨”

“Life feels lighter with Krishna in heart.”

Radhe Krishna 💙🌸”

“Lost in Krishna’s leela.”

“Krishna’s love is eternal.”🙏🙏🙏🎉

शिव जी की महिमा🔱 शिव — आदियोगी, आदिनाथभगवान शिव योग के जनक हैं। उन्होंने ही मानव को ध्यान और समाधि का मार्ग दिखाया।🔱 भोल...
29/11/2025

शिव जी की महिमा

🔱 शिव — आदियोगी, आदिनाथ
भगवान शिव योग के जनक हैं। उन्होंने ही मानव को ध्यान और समाधि का मार्ग दिखाया।

🔱 भोलेनाथ — दयालु और सहज प्रसन्न होने वाले
शिव इतने कृपालु हैं कि साधारण जल, बिल्वपत्र, भस्म और सच्ची श्रद्धा से भी प्रसन्न होकर वरदान दे देते हैं।

🔱 नटराज — सृष्टि के नृत्य के स्वामी
उनका तांडव नृत्य सृष्टि के सृजन, पालन और संहार का प्रतीक है—संसार की हर गति के आधार शिव हैं।

🔱 त्रिलोचन — तीन लोकों के स्वामी
तीन नेत्रों वाले शिव भविष्य, वर्तमान और अतीत—सब पर दृष्टि रखते हैं। उनके तृतीय नेत्र के खुलने से अज्ञान और अधर्म का नाश होता है।

🔱 महाकाल — समय के भी स्वामी
शिव को महाकाल कहा जाता है, क्योंकि काल (समय) भी उनके अधीन है। उनके सामने मृत्यु भी असहाय है।

🔱 जटाओं में गंगा — पवित्रता का प्रवाह
भगवान शिव ने मां गंगा को जटाओं में धारण कर पृथ्वी पर शांति और जीवन का मार्ग खोला।

🔱 विषपान करने वाले नीलकंठ
सागर मंथन में निकला विष जब सभी देव-दानवों ने ठुकराया, तब शिव ने संसार की रक्षा के लिए उसे पी लिया—इससे बड़ा त्याग कोई नहीं।

🔱 अर्धनारीश्वर — समरसता का प्रतीक
अर्धनारीश्वर रूप स्त्री और पुरुष के अद्वैत रूप का संकेत देता है—सृष्टि पुरुष और प्रकृति दोनों के संतुलन से चलती है।

🌺 सार

भगवान शिव वह शक्ति हैं जो भक्त की छोटी-सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाती है।
उनकी महिमा समय, शब्द और संसार से परे है।
जो शिव को स्मरण करता है, उसके जीवन में शांति, साहस, संतुलन और सकारात्मकता प्रवाहित होती है।

27/11/2025

श्लोक

महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी
स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः।
अथाऽवाच्या सर्वा स्वमतिपरिणामावधि गृणन्
ममापि त्वं त्रोत्स्येदसि गुणगणो भक्तिगुणितः॥

भावार्थ
हे देव! आपकी महिमा का पार कोई नहीं जान सकता।
आपकी स्तुति करने में ब्रह्मा, विष्णु जैसे देवता भी असमर्थ हो जाते हैं —
उनके शब्द भी आपकी महिमा के सामने छोटे पड़ जाते हैं।

जब इतना महान-बुद्धि वाले देवता भी आपकी पूर्ण महिमा नहीं बता पाते,
तो मैं जैसे सामान्य मनुष्य की वाणी क्या कह सकती है?

फिर भी, मैं अपने सामर्थ्य के अनुसार,
भक्ति-भाव से आपके गुणों का वर्णन करता हूँ।
हे शिव! मेरी इस छोटी सी स्तुति को भी
आप अपनी कृपा से स्वीकार कीजिए।







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