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23/12/2025

यही संघ है। #शाश्वत_संदेश

09/11/2025

कांग्रेस ने RSS पर प्रतिबन्ध लगाने का पहले भी प्रयत्न किया था उन्हें पूर्व के अनुभवों से सीखना चाहिए. . #शाश्वत_संदेश

*प्रेरक प्रसंग*आदर्श शिक्षक प्रो. राजेन्द्र सिंहप्रो. राजेन्द्र सिंह जी भी राह चलते विद्यार्थी का चेहरा देख जान लेते कि ...
17/10/2025

*प्रेरक प्रसंग*

आदर्श शिक्षक प्रो. राजेन्द्र सिंह

प्रो. राजेन्द्र सिंह जी भी राह चलते विद्यार्थी का चेहरा देख जान लेते कि उसे कुछ समस्या है। और फिर समस्या का समाधान कर के ही चैन लेते।

एक बार विश्वविद्यालय के बारामदे से होकर वे निकल रहे थे। तभी एक छात्र पर उनकी दृष्टि पड़ी। वे लौटकर उस छात्र के पास पहुंचे और पूछा –

प्रो. राजेन्द्र सिंह – क्या बात है? छात्र – (अचानक उन्हें अपने आगे देख सकपकाकर) जी कुछ नहीं। प्रो. राजेन्द्र सिंह जी ने आत्मीयता से कहा – मेरे साथ आओ।

उनके स्वर के सम्मोहन में बंध वह छात्र उनके पीछे पीछे चलता उनके चैम्बर में पुहंचा। रज्जू भैया ने अपनी सीट पर बैठकर छात्र को समाने कुर्सी पर बैठने को कहा, फिर उसे अत्यन्त आत्मीयता से आश्वस्त करते हुए समस्या पूछी।

छात्र – सर मैं अपने गांव से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर यहां प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने आया हूँ। मैंने गलती से अपने प्रवेश फॉर्म में गलत विषय भर दिया। मुझे जैसे ही अपनी गलती मालूम पड़ी। मैंने कार्यालय पहुंच सभी से अपनी भूल सुधारने के लिए अनुनय विनय की लेकिन सबने मना कर दिया। सबका कहना है कि अब कुछ नहीं हो सकता। जो विषय भर दिया वही पढ़ो। सर मेरा तो यहां आना ही व्यर्थ हो जाएगा। कहते कहते छात्र बहुत परेशान हो उठा। छात्र की बात सुन प्रो. राजेन्द्र सिंह सिंह जी तुरन्त उठे और छात्र को साथ लेकर कार्यालय में पहुंचे और उसकी गलती को ठीक कराया। ये छात्र थे – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.ई.आर.टी.) के पूर्व निदेशक तथा राष्ट्रीय अध्यापक प्रशिक्षण (एन.सी.टी.ई.) के पूर्व अध्यक्ष एवं जाने माने शिक्षाविद पद्मश्री प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत।

प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत कहते है कि मैं आज तक इस घटना को नहीं भूला। रज्जू भैया अपने विद्यार्थी की समस्या को बिना कहे समझ लेते और उसके समाधान के लिये डूबकर प्रयत्न करते इसलिये एक आदर्श शिक्षक के रूप में उनके विद्यार्थी आज तक उन्हें यादकर पुलकित हो उठते है। #शाश्वत_संदेश

14/10/2025
05/10/2025

#शाश्वत_संदेश

 #विस्तारक_प्रचारक....वो जिन पर प्रश्न करना बहुत आसान हैं.....पर वैसा बनना बहुत कठिन....परिवार और घर से दूर .......सदैव ...
01/10/2025

#विस्तारक_प्रचारक....
वो जिन पर प्रश्न करना बहुत आसान हैं.....
पर वैसा बनना बहुत कठिन....
परिवार और घर से दूर .......
सदैव राष्ट्र सेवा में रत......
एक विस्तारक , प्रचारक का पत्र अपनी "माँ " के लिए ......

लगता होगा तुझको माँ मैे
तेरा बहुत निर्दयी बेटा हूँ
चिंता नहीं करता मैं तेरी
मैं ऐसा उद्दंड और हठी हूँ
लगता होगा तुझको ऐसा
मैं दूर सदा तुझसे रहता
महीनो-महीनो दिनों -दिनों तक मैं
बात नहीं हैं तुझसे करता
पर.....माँ.......
मेरा मन भी करता है माँ
मैं पास तेरे रह पाऊँ
मन मेरा कहता है मुझसे
मैं समय तुझे दे पाऊँ
मैं भी खाऊ हाथ की रोटी
चटनी तेरे हाथो की
प्यार से तू जो डाँटे मुझको
सुनु झिड़की तेरी बातों की
मन व्यथित होता जब मेरा
तब आचंल याद बहुत आता
पास जो तू होती मेरे तो माँ
सच गोद में सिर अपना छिपाता
क्रोध कभी जब आता है खुदपर
तब भी तो तू ध्यान में है आती
डांट रही है मुझको कहकर
क्रोध नहीं है तेरा संगी साथी
कभी बहुत मन होता मेरा
बस पास बैठकर तुझे निहारूं
न कुछ तू बोले न मैं ही बोलूं
बिन कहे व्यथा अपनी सुनालूं
पर.........
कर्त्तव्य मेरे प्रण मेरे मुझको
तत्क्षण ये अहसास दिलाते
मार्ग चुना जो मैया मैंने
उसका कर्तव्यबोध मुझे कराते
अपनी इक्छा और तेरे आशीष से
कर्तव्यपथ जो मैंने अपनाया
तेरे संस्कारों तेरे सपनो को माँ
आचरण में मैंने है बसाया
याद बहुत जब आती तेरी
सत्रों-पत्रों में खो जाता हूँ
मिलने का जब मन होता मेरा ,तो
संघ-स्थान पहुँच मैं जाता हूँ
पत्रक ,कार्ययोजना में माँ तेरा
जब चेहरा नजर में आता है
तो योजना सार्थक पूर्णरूपेण होगी
ये स्वतः ही तय हो जाता है
अपने बड़ों का स्नेही हाथ
जब शीश पर मेरे होता है
तो लगता तेरा आँचल मुझको
अन्तश् में अपने भर लेता है
भोजन के लिए परिवारों में जाता
तो अपना परिवार पाता हूँ
सपना तेरा एक छोटे घर का, माँ
मैं विशाल भारत जीता हूँ
शाखा ,वर्गों में व्यस्त जब होता
तो साथ सदा तेरा ही लगता
ध्वज भगवा जब लहराता है तो
माँ आशीष उसमे तेरा ही झलकता
तो चेहरा तेरा सौम्य सा माँ
मुझमे जीवंतता भर देता है
जुट जाता प्राण प्रण से संघ कार्य में मैं
मुझमे इतनी ऊर्जा भर देता है
तो....मत मेरी तू चिंता करना
मैं दूर भले ही तुझसे हूँ
पर तेरे ही सपनो को पूरा करने
तन ,मन और ह्रदय से सलंग्न हूँ

एक ओर अशोक स्तम्भ, दूसरी ओर भारत माता! 🚩आज हर स्वयंसेवक गर्व से भरा हुआ है... 🙌Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)
01/10/2025

एक ओर अशोक स्तम्भ, दूसरी ओर भारत माता! 🚩

आज हर स्वयंसेवक गर्व से भरा हुआ है... 🙌

Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)

22/04/2025

दरिद्रता में संगठन की उपेक्षा होती है; वैभव संपन्न होने पर लोग संगठन से जुड़ते हैं, लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि दशा के साथ दिशा न बदल जाए।

- डॉ मोहन भागवत जी

पहले घूम कर रेकि (पुख्ता-पहचान) कि गई स्याही से मकान पर निशान लगाए गए। तब                        कुछ दिन पहले भाईजान हमा...
17/04/2025

पहले घूम कर रेकि (पुख्ता-पहचान) कि गई स्याही से मकान पर निशान लगाए गए। तब
कुछ दिन पहले भाईजान हमारे घर ईद की सेवइयां लेकर आए थे, उससे पहले हमने भी दिवाली पर उनके यहां मिठाई भेजी थी।
एक अच्छे पड़ोसी की तरह घर की मामूली जरूरतों में भी एक दूसरे के काम आते थे। उनके घर चीनी खत्म हो जाए तो हमारे यहां से ले जाते थे, हमें भी बाजार से कुछ मंगाना हो तो भाईजान ला देते थे।
लेकिन पता नहीं उस दिन क्या हुआ कि एक भीड़ के साथ आए भाईजान ने हमारे घर में आग लगा दी, मेरे भाई को मारा और मेरे कपड़े फाड़ने लगे,मेरे पूरे शरीर को बुरी तरह से कुचला, कई लोगों के साथ मिलकर कुचला नोचा
हमारे पड़ोस के कई लोगों को मार दिया।
मैं समझ नहीं पाई कि यह सब क्यों हो रहा है। हमने तो भाजपा को वोट भी नहीं की थी, दीदी को वोट दी थी।

यह कहानी है मुर्शिदाबाद की एक हिन्दू पीड़िता की।
हजार सालों से ऐसी कहानी या शायद इससे भी अधिक दुर्दांत कहानी हजारों लाखों माता बहनों की है।

सामान्य रूप से भाईचारा निभा रहा व्यक्ति कब जिहाद के सिपाही के रूप में सामने खड़ा हो जाता है लोगों को समझ नहीं आता, जब तक समझ आता है तब तक वें खुद को लुटा, पिटा पाते हैं।

हर दंगे, हर हिंसा के बाद ऐसी ही कहानियां सामने आती है।
वर्तमान में बंगाल और बांग्लादेश से ऐसी घटनाएं सबसे ज्यादा आ रही हैं।
बंगाली मानुष का पौरुष कुंद होते होते शायद समाप्त हो चला है ..........

17/03/2025

प्रार्थना में सब कुछ समाहित है प्रार्थना केवल प्रार्थना नहीं प्रत्येक दिन निश्चित समय पर सुबह और शाम हजारों कंठो से विगत 99 वर्षों से दोहराते हुए आज अपने में स्वयं सिद्ध मंत्र है।।

 #प्रचारक एक तरफ सरकारी कर्मचारी हो या और कोई अपने स्थानांतरण के लिए हजारों चक्कर सरकारी कार्यालयों के निकालते रहते है। ...
10/03/2025

#प्रचारक
एक तरफ सरकारी कर्मचारी हो या और कोई अपने स्थानांतरण के लिए हजारों चक्कर सरकारी कार्यालयों के निकालते रहते है। बड़े बड़े नेताओं से सिफारिश जेक, चेक लगवाते अपने घर की और जाने के लिए...!
वहींं दूसरी और #राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ के #प्रचारक जिनका स्थानांतरण संघ की एक सहज प्रक्रिया के तहत होता है , उसको सहर्ष स्वीकार करते हुए अपने पुराने स्थान से एक बैग उठाया जिसमे 2 जोड़ी कपड़े और दैनिक उपयोगी कोई सामान, बाकी उनका जो कुछ भी है वो वंही छोड़कर जाते है। विशेषत उस स्थान के कार्यकर्ताओं का स्नेह, प्रेम जो कार्य के दौरान मिला है।
संघ का प्रचारक अपना घर, मोह माया सब कुछ छोड़कर पूर्णकालिक रूप से संघ कार्य हेतु निकलते है फिर उनके लिए जम्मू कश्मीर हो या जैसलमेर उनके लिए सबकुछ एक जैसा ही है।
एक नए स्थान पर हो सकता है कि वहां कोई पुराना परिचित हो ही नही
फिर भी स्थानांतरण को सहर्ष स्वीकार कर चल पड़ते हैं अपनी मंजिल की और..
"तेरा वैभव अमर रहे मा हम दिन चार रहे न रहे"🙏🏻

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Sitamarhi
843302

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