सिरसा शहर कि स्थापना बाबा सरसाई नाथ जी ने अपने करकमलों से चैत्र प्रतिपदा ( पहले नवरात्रे) पर 700 या 800 सदी में कि थी
सरसाई नाथ जी नाथ सम्प्रदाय से है और नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख गुरु गोरक्ष नाथ जी को माना जाता है ।
नाथ सम्प्रदाय में 9 नाथ और 84 सिद्ध प्रमुख हुये है सरसाई नाथ जी गुरु गोरक्ष नाथ जी के शिष्य थे। सरसाई नाथ जी 84 सिद्धों में से एक थे नाथ सम्प्रदाय के बारह पंथ है और सरसाई नाथ आई पंथ
के साधु थे सरसाई नाथ जी और लधाई नाथ जी दो गुरु भाई थे सरसाई नाथ जी ने सिरसा शहर कि स्थापना कि और लधाई नाथ जी कोथ की स्थापना की माना जाता है कि 1100 और 1200 सदी के बीच चन्देल राजा परमर्दिदेव (परमल के रुप में जाना जाता है) सिरसा परगना उनके राज्य का हिस्सा था और सिरसा परगना में मादोगढ नामक एक किला बना हुआ था जिसमे मलखान विराजमान थेे सिरसा परगना पर पृृृथ्वीराज चौहान ने अपनी विशाल सेना के साथ हमला किया मलखान के पास सेना कम थी पर उनके साथ आल्हा और उदल जेसै वीर भाईयों का सहयोग था उन सब ने मिल कर पृथ्वी राज के साथ युद्ध किया पर मलखान और उदल इस युद्ध मे मारेे गये उसके बाद आल्हा ने सरसाई नाथ जी की शरण ली और पृथ्वी राज चौहान को युद्ध में बुरी तरह हराया और (उस समय जो साधु विराजमान थे) साधुओं के कहने पृथ्वी राज चौहान को जीवनदान दिया। उस भयानक युद्ध के बाद अपने भाई उदल के मारे जाने का उनको बहुुत दुख हुआ और और इस युद्ध ने उनकी आत्मा को झकझोर कर रख दिया फिर उन्होंने ग्ररहस्थ जीवन का त्याग कर डेरा बाबा सरसाई नाथ में नाथ सम्प्रदाय की दीक्षा ली और अपना बचा हुआ जीवन वैराग्य धारण कर यही व्यतीत किया। और पीढ़ी दर पीढ़ी साधुओं के कथन अनुसार मुख्य गुमद में बाई तरफ आल्हा की समाधी बनी हुई है।
डेरा बाबा सरसाई नाथ बहुत प्राचीन है शाहजहां के बङे बेटे दाराशिकोह जो शाहजहां के अत्यंत प्रिय पुत्र थे बाल अवस्था में एक भयानक बीमारी ने उनको घेर लिया बङे बङे वेद हकीमों से इलाज करवाया गया पर कोई फाइदा नहीं हुआ बचना बिल्कुल ही नामुमकिन लग रहा था उस समय किसी ने शाहजहां को डेरा बाबा सरसाई नाथ जी के बारे मे जानकारी दी और कि वहां से कोई आज खाली हाथ नहीं लौटा फिर शाहजहां दाराशिकोह को लेकर बाबा सरसाई नाथ के समाधी पर दारा के स्वस्थ्य होने की मन्नत मांगी कुछ ही समय में दाराशिकोह बिल्कुल स्वस्थ हो गये। फिर शाहजहां ने खुश होकर समाधी स्थल पर भव्य गुमद का निर्माण करवाया और आलीशान फरमान लिख कर दिये जमीन और जायदाद इनाम स्वरूप भेट की। वो आलीशान फरमान आज भी चंडीगढ़ पुरातत्व विभाग में जमा है।स्थानीय लोगों की मान्यता अनुसार आज भी बाबा सरसाई नाथ जी सिरसा शहर कि रक्षा करते है।सिरसा पर कभी कोई मुसीबत नहीं आने देते।।
अजमेर के ख्वाजा पीर ने बाबा सरसाई नाथ जी का चमत्कार स्वीकार किया और बाबा जी ने उनकों वरदान दिया कि आप यहाँ (तीन मील निकट) अपना स्थान बनाओ आपको हिन्दू मुस्लिम सब आपकी पुजा अर्चना करेगें और आज भी खाजाखेङा में ख्वाजा शरीफ की दरगाह है और उनकी हिन्दू मुस्लिम सब पुजा अर्चना करते है।।
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