27/02/2026
#श्री_मौर्विनंदन_खाटू_श्याम_चालीसा
श्रीस्कन्द महापुराण पर आधारित
दोहा :-
श्रीगुरु पदरज शीशधर प्रथम सुमिरू गणेश ॥
ध्यान शारदा ह्रदय धर भजुँ भवानी महेश ॥
चरण शरण विप्लव पड़े हनुमत हरे कलेश ।
श्याम चालीसा भजत हुँ जयति खाटूनरेश ॥
चौपाई :-
वन्दहुँ श्याम प्रभु दुःख भंजन, विपत विमोचन कष्ट निकंदन
सांवल रूप मदन छविहारी, केसर तिलक भाल दुतिकारी
मोर मुकुट केसरिया बागा, गल वैजयंति चित अनुरागा
नील अश्व मोरछडी प्यारी, करतल त्रय बाण दुःखहारी
सूर्यवर्च वैष्णव अवतारे, सुरमुनिनर जन जयति पुकारे
पिता घटोत्कच मोर्वी माता, पाण्डव वंशदीप सुखदाता
बर्बर केश स्वरूप अनूपा, बर्बरीक अतुलित बल भूपा
कृष्ण तुम्हे सुह्रदय पुकारे, नारद मुनि मुदित हो निहारे
मौर्वे पूछत कर अभिवंदन, जीवन लक्ष्य कहो यदुनंदन
गुप्त क्षेत्र देवी अराधना, दुष्ट दमन कर साधु साधना
बर्बरीक बाल ब्रह्मचारी, कृष्ण वचन हर्ष शिरोधारी
तपकर सिद्ध देवियाँ कीन्हा, प्रबल तेज अथाह बल लीन्हा
यज्ञ करे विजय विप्र सुजाना, रक्षा बर्बरीक करे प्राणा
नवकोटि दैत्य पलाशि मारे, नागलोक वासुकि भयहारे
सिद्ध हुआ चँडी अनुष्ठाना, बर्बरीक बलनिधि जग जाना
वीर मौर्वेय निजबल परखन, चले महाभारत रण देखन
माँगत वचन माँ मौर्वि अम्बा, पराजित प्रतिपाद अवलम्बा
आगे मिले माधव मुरारे, पूछे वीर क्युँ समर पधारे
रण देखन अभिलाषा भारी, हारे का सदैव हितकारी
तीर एक तीहुँ लोक हिलाये, बल परख श्रीकृष्ण सँकुचाये
यदुपति ने माया से जाना, पार अपार वीर को पाना
ब्रह्म वाक्य की देत दुहाई, शीश उतार लिये यदुराई
मनसा होगी पूर्ण तिहारी, रण देखोगे कहे मुरारी
शीश बली बर्बरीक दीन्हा, अमृत बर्षा सुरग मुनि कीन्हा
देवी शीश अमृत से सींचत, केशव धरे शिखर जहँ पर्वत
जब तक नभ मण्डल मे तारे, सुरमुनिजन पूजेंगे सारे
दिव्य शीश मुद मंगल मूला, भक्तन हेतु सदा अनुकूला
रण विजयी पाण्डव गर्वाये, बर्बरीक तब न्याय सुनाये
सर काटे था चक्र सुदर्शन, रणचण्डी करती लहू भक्षण
न्याय सुनत हर्षित जन सारे, जग में गूँजे जय जयकारे
सर्वलोक पूजित वर दीन्हा, अजर अमर अविनाशी कीन्हा
जनहित प्रकटे खाटू धामा, लखदाता चंडिल प्रभु नामा
खाटू धाम मौक्ष का द्वारा, श्याम कुण्ड बहे अमृत धारा
शुदी द्वादशी फाल्गुण मेला, खाटू धाम सजे अलबेला
एकादशी व्रत ज्योत द्वादशी, सबल काय परलोक सुधरसी
खीर चूरमा भोग लगत है, दुःख दरिद्र कलेश कटत हैं
श्याम बहादुर सांवल ध्याये, आलुसिँह ह्रदय श्याम बसाये
मोहन मनोज विप्लव भाँखे, श्याम धणी म्हारी पत राखे
नितप्रति जो चालीसा गावे, सकल साध सुख वैभव पावे
श्याम नाम सम सुख जग नाही, भव भय बन्ध कटत पल माही
दोहा :-
त्रिबाण दे त्रिदोष मुक्ति दर्श दे आत्मज्ञान
चालीसा दे प्रभु भुक्ति सुमिरण दे कल्याण
खाटू नगरी धन्य है श्याम नाम जयगान
अगम अगोचर श्याम है विरदहिं स्कन्द पुराण
(इति आचार्य डा. मनोज विप्लव कृत
श्री मौर्वीनंदन खाटू श्याम चालीसा सम्पूर्ण।।)