अनेक स्नेही स्वजनों ने पञ्च मुखी प्रभु श्री हनुमान के विषय में जानकारी मांगी थी, यथासंभव प्रस्तुत है पंचमुखी श्री हनुमान की महत्ता एवं यशोगाथा.
---------श्री राम की रक्षा के लिए हनुमान जी ने धरा पंचमुखी रूप
अंजनीसुत महावीर श्रीराम भक्त हनुमान ऐसे भारतीय पौराणिक चरित्र हैं जिनके व्यक्तित्व के सम्मुख युक्ति, भक्ति, साहस एवं बल स्वयं ही बौने नजर आते हैं। संपूर्ण रामायण महाकाव्य के वह केंद्री
य पात्र हैं। श्री राम के प्रत्येक कष्टï को दूर करने में उनकी प्रमुख भूमिका है। इन्हीं हनुमान जी का एक रूप है पंचमुखी हनुमान। यह रूप उन्होंने कब क्यों और किस उद्देश्य से धारण किया इसके संदर्भ में पुराणों में एक अद्भुत कथा वर्णित है।
श्रीराम-रावण युद्ध के मध्य एक समय ऐसा आया जब रावण को अपनी सहायता के लिए अपने भाई अहिरावण का स्मरण करना पड़ा। वह तंत्र-मंत्र का प्रकांड पंडित एवं मां भवानी का अनन्य भक्त था। अपने भाई रावण के संकट को दूर करने का उसने एक सहज उपाय निकाल लिया। यदि श्रीराम एवं लक्ष्मण का ही अपहरण कर लिया जाए तो युद्ध तो स्वत: ही समाप्त हो जाएगा। उसने ऐसी माया रची कि सारी सेना प्रगाढ़ निद्रा में निमग्न हो गयी और वह श्री राम और लक्ष्मण का अपहरण करके उन्हें निद्रावस्था में ही पाताल-लोक ले गया।
जागने पर जब इस संकट का भान हुआ और विभीषण ने यह रहस्य खोला कि ऐसा दु:साहस केवल अहिरावण ही कर सकता है तो सदा की भांति सबकी आंखें संकट मोचन हनुमानजी पर ही जा टिकीं। हनुमान जी तत्काल पाताल लोक पहुंचे। द्वार पर रक्षक के रूप में मकरध्वज से युद्ध कर और उसे हराकर जब वह पातालपुरी के महल में पहुंचे तो श्रीराम एवं लक्ष्मण जी को बंधक-अवस्था में पाया। वहां भिन्न-भिन्न दिशाओं में पांच दीपक जल रहे थे और मां भवानी के सम्मुख श्रीराम एवं लक्ष्मण की बलि देने की पूरी तैयारी थी। अहिरावण का अंत करना है तो इन पांच दीपकों को एक साथ एक ही समय में बुझाना होगा। यह रहस्य ज्ञात होते ही हनुमान जी ने पंचमुखी हनुमान का रूप धारण किया। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिम्ह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की ओर हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इन पांच मुखों को धारण कर उन्होंने एक साथ सारे दीपकों को बुझाकर अहिरावण का अंत किया और श्रीराम-लक्ष्मण को मुक्त किया। सागर पार करते समय एक मछली ने उनके स्वेद की एक बूंद ग्रहण कर लेने से गर्भ धारण कर मकरध्वज को जन्म दिया था अत: मकरध्वज हनुमान जी का पुत्र है, ऐसा जानकर श्रीराम ने मकरध्वज को पातालपुरी का राज्य सौंपने का हनुमान जी को आदेश दिया। हनुमान जी ने उनकी आज्ञा का पालन किया और वापस उन दोनों को लेकर सागर तट पर युद्धस्थल पर लौट आये।
हनुमान जी के इस अद्भुत स्वरूप के विग्रह देश में कई स्थानों पर स्थापित किए गए हैं। इनमें रामेश्वर में स्थापित पंचमुखी हनुमान मंदिर में इनके भव्य विग्रह के संबंध में एक भिन्न कथा है। पुराण में ही वर्णित इस कथा के अनुसार एकार एक असुर, जिसका नाम मायिल-रावण था, भगवान विष्णु का चक्र ही चुरा ले गया। जब आंजनेय हनुमान जी को यह ज्ञात हुआ तो उनके हृदय में सुदर्शन चक्र को वापस लाकर विष्णु जी को सौंपने की इच्छा जाग्रत हुई। मायिल अपना रूप बदलने में माहिर था। हनुमान जी के संकल्प को जानकर भगवान विष्णु ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया, साथ ही इच्छानुसार वायुगमन की शक्ति के साथ गरुड़-मुख, भय उत्पन्न करने वाला नरसिम्ह-मुख तथा हयग्रीव एवं वराह मुख प्रदान किया। पार्वती जी ने उन्हें कमल पुष्प एवं यम-धर्मराज ने उन्हें पाश नामक अस्त्र प्रदान किया। यह आशीर्वाद एवं इन सबकी शक्तियों के साथ हनुमान जी मायिल पर विजय प्राप्त करने में सफल रहे। तभी से उनके इस पंचमुखी स्वरूप को भी मान्यता प्राप्त हुई। ऐसा विश्वास किया जाता है कि उनके इस पंचमुखी विग्रह की आराधना से कोई भी व्यक्ति नरसिम्ह मुख की सहायता से शत्रु पर विजय, गुरुड़ मुख की सहायता से सभी दोषों पर विजय वराहमुख की सहायता से समस्त प्रकार की समृद्धि एवं संपत्ति तथा हयग्रीव मुख की सहायता से ज्ञान को प्राप्त कर सकता है। हनुमान स्वयं साहस एवं आत्मविश्वास पैदा करते हैं।
इस स्वरूप का मंदिर प्रख्यात संत राघवेंद्र स्वामी के ध्यान स्थल कुंभकोरण-तमिलनाडु में है। तमिलनाडु के ही थिरुबेल्लूर नगर में पंचमुखी हनुमान जी की 12 मीटर ऊंची हरे ग्रेनाइट की प्रतिमा है।और राजस्थान में सिंघाना ग्राम में पहाड़ी पर श्री दक्षिणमुख के संकटहरण पञ्चमुखी हनुमान जी का मन्दिर है
जब भगवान श्री रामचन्द्र जी और लक्षमण जी को अहिरावण पाताल लोक ले गया था तब भगवान के संकटो का नाश करने के लिए श्री हनुमान जी ने लंका( दक्षिण में) में पञ्चमुखी अवतार लिया और भगवान श्री रामचन्द्र जी और लक्षमण जी के संकटो का नाश किया इस मन्दिर दक्षिणमुखी हनुमान जी पूजा आराधना का विशेष महत्व है
मंगलवार व् शनिवार को बाबा के दरबार में सुन्दरकाण्ड पाठ किया जाता है अन्य कई स्थानों पर भी पंचमुखी स्वरूप के छोटे-बड़े मंदिर हैं। शक्ति, आत्मविश्वास, विनम्रता, भक्ति, विश्वसनीयता एवं ज्ञान के अपार भंडार हनुमान ही वास्तव में ऐसे पुराण-पुरुष हैं जो न केवल अपने आराधकों वरन् संपूर्ण विश्व को भय एवं संकटों से मुक्त करते हैं और उनका संपूर्ण चरित्र एक ही संदेश देता है महावीर बनना है तो पहले हनुमान बनना होगा। हनुमान अर्थात् वह जिसने अपने अभिमान का हनन कर लिया है।
----------कल्याणकारी पंचमुखी हनुमान
मान्यता है कि भक्तों का कल्याण करने के लिए ही पंचमुखी हनुमान का अवतार हुआ।
पंचमुखी हनुमानजी का अवतार मार्गशीर्ष कृष्णाष्टमी को माना जाता है। शंकर के अवतार हनुमान ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं। इसकी आराधना से बल, कीर्ति, आरोग्य और निर्भीकता बढती है। आनंद रामायण के अनुसार, विराट स्वरूप वाले हनुमान पांच मुख, पंद्रह नेत्र और दस भुजाओं से सुशोभित हैं। हनुमान के पांच मुख क्रमश:पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और ऊर्ध्व दिशा में प्रतिष्ठित हैं।
पंचमुख हनुमान के पूर्व की ओर का मुख वानर का है। जिसकी प्रभा करोडों सूर्यो के समान है। पूर्व मुख वाले हनुमान का स्मरण करने से समस्त शत्रुओं का नाश हो जाता है। पश्चिम दिशा वाला मुख गरुड का है। ये विघ्न निवारक माने जाते हैं। गरुड की तरह हनुमानजी भी अजर-अमर माने जाते हैं। हनुमानजी का उत्तर की ओर मुख शूकर का है। इनकी आराधना करने से सकल सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए हनुमान भगवान नृसिंह के रूप में स्तंभ से प्रकट हुए और हिरण्यकश्यपुका वध किया। यही उनका दक्षिणमुखहै। उनका यह रूप भक्तों के भय को दूर
मान्यता है कि पंचमुखीहनुमान की पूजा-अर्चना से सभी देवताओं की उपासना का फल मिलता है। हनुमान के पांचों मुखों में तीन-तीन सुंदर आंखें आध्यात्मिक, आधिदैविक तथा आधिभौतिक तीनों तापों को छुडाने वाली हैं। ये मनुष्य के सभी विकारों को दूर करने वाले माने जाते हैं। शत्रुओं का नाश करने वाले हनुमानजी का हमेशा स्मरण करना चाहिए।
" अस्य श्री पंचमुख हनुममंत्रस्य ब्रह्माऋषि गायत्री छंद पंचमुख विराट हनुमान देवता ह्रीं बीजं श्रीं शक्तिहि क्रों कीलकम क्रुं कवचम क्रें अस्त्राय फट इति दिग्वन्धह "
यह भी एक बीज मन्त्र है
"ॐ ऐं भ्रीम हनुमते, श्री राम दूताय नम:"
दक्षिणामुखी पंचमुखी हनुमान की बीजमंत्र से आराधना की विधि-----
मंगल वार या शनिवार के दिन दक्षिण दिशा में मुख करके प्रातः(या रात्रि ९ से ३ के बीच) लाल वस्त्र पहनकर लाल आसन पर बैठ कर वज्रासन या वीरासन में यथाशक्ति जोर से पंचमुखी बीज मंत्र का पाठ करें तथा जोर से निम्न मन्त्र बोल कर अंत में हवन करें."
॥ ऊं पंचवक्त्राय हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा ॥"
पंचमुखी श्री हनुमान की मूर्ति अगर उपलब्ध है तो मूर्ति के सामने बैठ कर यह क्रिया करें,प्रभु श्री हनुमान कल्याण करेंगे जय श्री हनुमान,जय श्री राम ----^---
शनि की साढ़े साती ढैया वक्र दृष्टि से व राहु केतु की दशा से बचने के लिए दक्षिणामुखी पंचमुखी हनुमान जी की पूजा आराधना बहुत पुण्यफलदायी होती है ।
शनिवार व मंगलवार को पीपल के 7 पतो पर जय श्री राम लिख कर हनुमानजी को अर्पित करे व हनुमान चलीसा का पाठ करे या सुन्दरकाण्ड का नियमित पाठ करें व लाल बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। कपूर से आरती करें।
वास्तुशास्त्र में भी जिस घर मे या दुकान में कोई वास्तु दोष हो या उसका मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में हो उस दुकान या घर पर पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा लगानी चाहिए।
ॐ अंजनाये विदमहे पञ्च्वक्त्राए धीमही तन्नो हनुमान प्रचोदयात ।।
आप भी समस्त भगतजन चाहे तो मंदिर प्रांगण में होने वाले आयोजनों में भागीदार बन सकते हो जैसे ,अखण्ड श्री रामचरितमानस पाठ , श्री सुन्दरकाण्ड पाठ, नवरात्री पर्व पर और हवन
सभी धार्मिक कार्यो में
आप अपना नाम, गोत्र, पिता का नाम और शहर का नाम
और आपकी मनोकामना सहित निचे दिए गए पते पर पत्र द्वारा भेज सकते है पत्र प्राप्ति के बाद प्रत्येक आयोजनों पर आप भी इन धार्मिक अनुष्ठान पुजा हवन पूजन में गोत्र व संकल्प से विधि पूर्वक शामिल होंगे । व आपकी मनोकामना पूर्ण हो प्रभु से पुजा अरदास की जाएगी ��� जय जय सियाराम जय जय सियाराम
पता
श्री दक्षिणामुखी संकटमोचन पंचमुखी हनुमान जी
सिंघाना / पं उमेश जी शर्मा
बाबा स्वरूपनाथ जी की पहाड़ी पर सिंघाना
ग्राम -सिंघाना
पिन कोड 333516
तहसील - बुहाना
जिला - झुंझुनू
राज्य - राजस्थान
address. Aanand sharma c/o shree purushottam lal sharma
Gopinath ji ke mandir ke pass singhana
Village, singhana
Tehsil , buhana
District jhunjhunu
Pin code 333516
State , rajsthan