Islam in India.

Islam in India. This article is about Islam in the Republic of India. Some Of Most Popular Muslims of India
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Abdul Kalam· Qurratulain Hyder· M. J. R.

Akbar·Javed Akhtar Irfan Habib· Zakir Hussain· Azim Premji· Abdul Hamid Maulana Azad· M. Hidayatullah· Sania Mirza· Bismillah Khan Aamir Khan· Salim Ali· Shahrukh Khan· Zakir Hussain A. Rahman· Nargis· Mammootty· Hamid Ansari
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Total population approx. 160.9 million (2009) Regions with significant populations Large concentration in Jammu and Kashmir,Assam and West Bengal. Large populations in Ut

tar Pradesh, Bihar, Maharashtra and Kerala
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Languages
Urdu, Hindi, Bengali, Malayalam, Kashmiri, Indian English
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Religion
Sunni Barelvi Hanafi, Deobandi Hanafi, Ahl al-Hadith, and Shia.
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Islamis the second-most practiced religion in theRepublic of India after Hinduism, with more than 13.4% of the country's population (over 138 million as per 2001 census). Islam came to with the newly Islamised Arab merchants and traders on the Malabar Coastin the 7th century. Islam arrived in north India in the 12th century and has since become a part of India's rich religious and cultural heritage. Over the years, there has been significant integration of Hindu and Muslim cultures across India and the Muslims have played a prominent role in India's economic riseand cultural influence. Matters of jurisdiction involving Muslims in India related to marriage, inheritance and properties are governed by the Muslim Personal Law, and the courts have ruled that Shariaor Muslim law, holds precedence for Muslims over Indian civil law in such matters. India's Muslim population is the world's third largest and the world's largest Muslim-minority population. Most of the Muslims in India belong to Indian ethnic groups, with minor to obvious levels of gene flow from outside, primarily from Persia and Central Asia. The largest concentrations-about 47% of all Muslims in India, according to the 2001 census—live in the 3 states of Utter pradesh (30.7 million) (18.5%),West Bengal(20.2 million) (25%), and Bihar(13.7 million) (16.5%). Muslims represent a majority of the local population in Lakshadweep (93% in 2001) and Jammu and Kashmir (67% in 2001). High concentrations of Muslims are found in the eastern states ofAssam(31%) and West Bengal (25%), and in the southern states of Kerala(24.7%) and Andhra Pradesh Kerala(24.7%) and Andhra Pradesh(14%). Officially, India has the third largest Muslim population (after Indonesia and Pakistan). Population growth rate Muslims in India have a much higher total fertility rate(TFR) compared to that of other religious communities in the country. Because of higher birthrates and an influx of migrants from neighboring Bangladesh, the percentage of Muslims in India has risen from about 10% in 1991 to 13% in 2001.

मोहम्मद शमी को क्रिकेट विश्व कप 2023 में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार मिला ।
10/01/2024

मोहम्मद शमी को क्रिकेट विश्व कप 2023 में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार मिला ।

 #झांसी के क़िले के अंदर तीन मज़ार भी हैं, जिसमे 2 मर्द हैं, और एक महिला हैं। #रानी_लक्ष्मी बाई के साथ कंधे कंधे मिला कर...
26/12/2023

#झांसी के क़िले के अंदर तीन मज़ार भी हैं, जिसमे 2 मर्द हैं, और एक महिला हैं।

#रानी_लक्ष्मी बाई के साथ कंधे कंधे मिला कर लड़ते हुए ग़ुलाम ग़ौस ख़ान, ख़ुदा बख़्श के साथ मोती बाई भी 4 अप्रैल 1858 को शहीद हुई थीं।

ये सारे लोग तोपची थे। इनके टोप की तारीफ़ अंग्रेज़ों तक ने अपने रिपोर्ट में रखा है।

क्या आपको पता है मैसूर के सुल्तान हैदर अली और उनके बेटे शहीद टीपू सुल्तान की खुद की जल सेना थी और ये  पहली सल्तनत थी जिस...
26/11/2023

क्या आपको पता है मैसूर के सुल्तान हैदर अली और उनके बेटे शहीद टीपू सुल्तान की खुद की जल सेना थी और ये पहली सल्तनत थी जिसकी खुद की नेवी फोर्स थी।

1763 में हैदर अली और टीपू सुल्तान ने मालाबार तट पर अपने पहले जंगी बेड़े की स्थापना की थी जिसकी कमान सौंपी गई थी अली राजा कुन्ही को, हिंद महासागर में तैनात ये जंगी बेड़ा उस वक़्त के घातक और आधुनिक हथियारों से लैस था इस के ज़रिये हैदर अली ने कई वो द्वीप जीत लिये जिन तक मुग़्लो की पहुंच नामुमकिन थी क्यों मुग़लो के पास कोई जल सैना नहीं थी।

1763 में ही सुल्तान हैदर अली और बेटे टीपू सुल्तान ने अली राजा के कमांड में लक्षद्वीप और मालदीव पर भी कब्ज़ा कर लिया था इस जीत की खुश खबरी देने नेवी कमांडर अलीराजा मैसुर पहुंचा और सुल्तान के सामने मालदीव के सुल्तान हसन अज़ीज़ उद्दीन को पेश किया जिनको की अली राजा ने गिरप्तारी के बाद अंधा कर दिया था कमांडर अली राजा के इस वहशीआना अमल पर हैदर अली आग बबूला हो गए और कमांडर अली राजा को अपने ओहदे से तुरंत सस्पेंड कर उनसे नेवी की कमांडरी वापस ली और मालदीव के सुल्तान हसन अज़ीज उद्दीन को उनका राज पाट वापस देकर बाइज़्ज़त वापस भेज दिया

1786 में, टीपू सुल्तान ने अपने वालिद के नक़्शे क़दम पर चलते हुए, 72 तोपों के 20 युद्धपोत और 62 तोपों के 20 फ़्रिगेट्स से मिलकर एक और नौसेना बनाने का फैसला किया। वर्ष 1790 में, उन्होंने कमालुद्दीन को अपना मीर बहार नियुक्त किया और जमालबाद और मजीदाबाद में बड़े पैमाने पर Dockyard स्थापित किये। टीपू सुल्तान के बोर्ड ऑफ एडमिरलिटी में मीर याम की सेवा में 11 कमांडर शामिल थे। एक मीर याम ने 30 एडमिरल्स को कमांड किया और उनमें से प्रत्येक के पास दो जहाज थे। जहाज़ बनते वक़्त टीपू सुल्तान ने ये हुक्म दिया की जहाज़ो के फ्लोर तांबे का हो जिससे जहाज़ की उम्र ज़्यादा होगी टीपू सुल्तान को ये आईडिया फ्रेंच एडमिरल सैफ्रन ने दिया था।

#इतिहास

जिन मंगोलो ने हार का मुंह नही देखा आख़िर मे वो हिन्दुस्तान की ज़मीन पर बुरी तरह पिट गए...  और मंगोलो को हराने का शर्फ़ ज...
19/11/2023

जिन मंगोलो ने हार का मुंह नही देखा आख़िर मे वो हिन्दुस्तान की ज़मीन पर बुरी तरह पिट गए... और मंगोलो को हराने का शर्फ़ जाता है हिन्दुस्तान की तारीख़ के सबसे ताक़तवर बादशाहों में से एक अलाउद्दीन ख़िलजी को और उनके सबसे ख़ास सिपाहसालार मलिक हिज़बरुद्दीन युसुफ़ जो ख़ुद को ज़फ़र ख़ान कहते थे.

ज़फ़र ख़ान दुनिया के ऐसे चंद सिपाहसालारों (कमांडर) में भी शामिल थे जिन्होंने मंगोल आक्रमणों को ना सिर्फ़ नाकाम कर अपने रियासत और अवाम की हिफ़ाज़त (रक्षा) की बल्के अजीवन अजय रहे, उन्होने कभी हार का मुंह नही देखा...

उन्होंने न सिर्फ़ बड़ी मंगोल सेनाओं को हराया बल्कि मध्य एशिया में मंगोलों के ख़िलाफ़ अभियान भी चलाया. ताक़तवर मंगोल सेना को उन्होंने एक नहीं कई बार हराया.

जालंधर मे 1297 को हुई मंगोलो से पहली जंग मे ज़फ़र ख़ान ने ना सिर्फ़ उन्हे हराया बल्के बीस हज़ार से अधिक मगोंल सिपाहीयों को मार डाला और बाक़ी को पकड़ देल्ही मे अलाउद्दीन ख़िलजी के पास भेज दिया जिनमे से अधिकतर के सर को धड़े से अलग कर दिया गए या जिनकी तादाद तीन हज़ार से अधिक थी और इनके सर को देल्ही मे दफ़ना दिया गया और फिर बाद मे उस जगह पर अलाउद्दीन ख़िलजी ने एक क़िला तामीर करवाया जिसे "सीरी क़िला" के नाम से जाना गया और ये नाम 'सर' से ही आया है..

1298 मे ज़फ़र ख़ान का मंगोल फ़ौज से मुक़ाबला सिंध मे हुआ जहां मंगोलो ने कई जगह पर क़ब्ज़ा रखा था और इस जंग मे एक बार फिर मंगोलो को हार सामना करना पड़ा और दो हजार से अधिक सिपाहीयों के साथ उनके जनरलों को क़ब्ज़े में ले लिया गया.

अगले साल 1299 को मंगोलो ने पिछले दो हार का बदला लेने की नियत से देल्ही सलतनत के दारुलहुकुमत पर ही हमला करने की नियत से कुच किया..

अलाउद्दीन ख़िलजी ने अपने वज़ीरों से मशवरा किया सबने समझौते करने की ही बात की पर अलाउद्दीन ने इन सबकी बात काटते हुए कहा :- " के अगर मै तुम्हारी बात को मान लेता हुं तो कल किसी को मुंह दिखामे के लाएक़ नही रहुंगा, मुझे मैदान ए जंग मे जाना ही होगा "... इसके बाद अलाउद्दीन ख़िलजी ने इस जंग की कमान एक बार फिर से ज़फ़र ख़ान को सौंप दी और मंगोलो को फिर से हार का सामना करना पड़ा ... पर इस जंग मे दुशमानो का छक्का छुड़ाते छुड़ाते ज़फ़र ख़ान ख़ुद शहीद हो गए...
बुरी तरह हार का सामना कर रहे मंगोलो मे ज़फ़र ख़ान के नाम का ख़ौफ़ इस तरह तारी हो गया था के जब भी उनका घोड़ा पानी नही पीता था तो उन्हे लगता था शायद इसने "ज़फ़र" को देख लिया हो और वो जिन्दा हो...

ज़फ़र ख़ान की क़बर ग़्यासुद्दीन तुग़लक़ के क़बर के ठीक बग़ल मे है.

15/11/2023

आज सेमीफाइनल नहीं
शमी'फाइनल जीता है
Ind vs NZ

अशोक (औरंगजेब): भारतीय उपमहाद्वीप के दो सम्राटों की कहानी। पिता बिन्दुसार (शाहजहाँ) चाहते थे कि उनका पुत्र सुसीमा (दारा ...
14/11/2023

अशोक (औरंगजेब): भारतीय उपमहाद्वीप के दो सम्राटों की कहानी।

पिता बिन्दुसार (शाहजहाँ) चाहते थे कि उनका पुत्र सुसीमा (दारा शिकोह) उनका उत्तराधिकारी बने। अशोक (औरंगजेब) को उसकी सेना और पिता के मंत्रियों का समर्थन प्राप्त था, जिसने सुसीमा (दारा शिकोह) को एक अयोग्य उत्तराधिकारी पाया। उन्होंने बिन्दुसार (शाहजहाँ) के निर्णय का विरोध किया। सेना की सहायता से अशोक (औरंगजेब) बाद में 99 (2) भाइयों को मारकर सिंहासन पर बैठा। अशोक, एक हिंदू (औरंगजेब, एक मुस्लिम) शासक ने बाद में अपने साम्राज्य का विस्तार करने पर विचार किया और दक्षिण की ओर चला गया और हिंदू राज्य कलिंग/ओडिसा (गोलकुंडा/बीजापुर का एक मुस्लिम राज्य) पर हमला किया। युद्ध के दौरान अशोक (औरंगजेब) ने 100,000 (???) लोगों को मार डाला और 150,000 (???) लोगों को विस्थापित कर दिया। अशोक (औरंगजेब) ने 40 (49) वर्षों तक शासन किया। अशोक से पहले कभी भी उपमहाद्वीप के किसी भी शासक ने इतनी लंबाई और चौड़ाई के क्षेत्र पर नियंत्रण नहीं किया था। यह औरंगजेब ही था जिसने बाद में वह हासिल किया जो अशोक ने लगभग 1800 साल पहले किया था।

(मानचित्र देखें)
(जैसा कि आपने नोट किया होगा कि औरंगजेब से संबंधित तथ्य कोष्ठक में लिखे गए हैं)।

अशोक की मृत्यु के लगभग पचास वर्ष बाद अंतिम मौर्य राजा की हत्या कर दी गई और इसके साथ ही मौर्य साम्राज्य का अंत हो गया। दूसरी ओर औरंगजेब की मृत्यु के ठीक 150 साल बाद अंतिम मुगल सम्राट को अंग्रेजों द्वारा बर्मा में निर्वासित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल साम्राज्य का अंत हो गया।

तथ्य कितने समान हैं और अशोक और औरंगजेब की हमारी व्याख्या कितनी भिन्न है। हम अशोक द्वारा किये गये अपराधों को नजरअंदाज क्यों करते हैं? औरंगजेब के विपरीत, अशोक ने उपमहाद्वीप में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए राज्य के धन और अपने परिवार का उपयोग किया। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप से हिंदू धर्म को लगभग ख़त्म कर दिया। ऐतिहासिक तथ्यों और चांडाल अशोक (उसके अपराधों के कारण उसे उपनाम दिया गया था) द्वारा किए गए अपराधों को देखते हुए, क्या भारतीय उसके नाम पर कई सड़कों और संस्थानों को दिए गए नामों को बदलने के लिए तैयार हैं या क्या भारतीय अपने ध्वज के केंद्र में अशोक चक्र पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हैं? ?

हममें से अधिकांश लोग यह जानने के लिए ऐतिहासिक घटनाओं का अध्ययन करते हैं कि 'क्या' हुआ था; वास्तव में इतिहास का अध्ययन करने का हमारा कारण यह होना चाहिए कि ऐसा 'क्यों' हुआ। जब हम इसे "क्या" जानने के लिए पढ़ते हैं तो यह केवल एक कहानी है तथापि जब हम "क्यों" समझते हैं तो यह एक विज्ञान बन जाती है। जो लोग औरंगजेब को देवदूत मानते हैं वे भी गलत हैं और जो लोग उसे राक्षस मानते हैं वे भी गलत हैं। वह एक ऐसा शासक था जिसने अन्य शासकों की तरह गलतियाँ कीं।

हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां अज्ञानता आसानी से हमारी भावनाओं को जकड़ लेती है, शुरू में हम एक व्यक्ति (औरंगजेब) से नफरत करने लगते हैं और बाद में एक समुदाय (मुसलमानों) से नफरत करने लगते हैं। क्या हमें प्रचार के लिए दूसरों को दोष देना चाहिए? या क्या हमारे पास अपने मन को प्रबुद्ध करने का अधिकार और संसाधन उपलब्ध हैं? मुझे यकीन है कि हमारे पास है।

अज्ञानता एक अभिशाप है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना अपराध है। इस समय हम दोनों द्वारा चालाकी की जा रही है।

नवाब शेर मोहम्मद खान मलेरकोटलागुरु गोबिंद सिंह जी महाराज और मुगल सेना संघर्ष को अंग्रेजों के समय से लेकर आज तक अलगाववादी...
29/10/2023

नवाब शेर मोहम्मद खान मलेरकोटला

गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज और मुगल सेना संघर्ष को अंग्रेजों के समय से लेकर आज तक अलगाववादी तत्व प्रचारित करते हैं कि वो संघर्ष औरंगज़ेब द्वारा हिंदुओं के जबरन धर्मपरिवर्तन के विरोध में हुआ
हिंदुओं की रक्षा के लिए सिखों ने मुगलों से युद्ध किया और औरंगजेब ने गुरु महाराज के साहिबज़ादों को इस्लाम स्वीकार न करने के कारण शहीद कर दिया था... इसलिये सिखों और इस्लाम में हमेशा का बैर है........ लेकिन सच इन सब बातों के उलट है, न वो औरंगजेब के साथ हुई लड़ाई थी, और न इस्लाम के कारण हुई लड़ाई थी, और न हिन्दू इस लड़ाई में सिखों का एहसान मान रहे थे या सिखों के साथ थे, बल्कि लड़ाई तो पहाड़ी हिन्दू राजा ही सिखों के साथ कर रहे थे,
दूसरी तरफ पीर बूद्दू शाह एक मुसलमान सन्त थे जो पहाड़ी राजाओं के ख़िलाफ़ युद्ध मे गुरु गोबिंद सिंह जी का साथ दे रहे थे...
चमकौर के युद्ध के बाद माता गूजरी के साथ छल करके उन्हें गिरफ्तार करवाने वाला गंगू एक हिन्दू था, कचहरी में नन्हे साहिबज़ादों के विरुद्ध मौत की सजा का सुझाव देने वाला सुच्चानन्द एक हिन्दू था... .. ऐसे में आज जो कहानियां सुनाई जाती हैं कि हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए सिख मुग़ल संघर्ष हुए, ये कहानियां कहाँ तक सही बैठती हैं ??

सच्चाई ये है कि औरंगज़ेब ने अपने किसी निजी स्वार्थ में नही, बल्कि किसी अन्य (पहाड़ी राजाओं) की झूटी बातों में आकर मुग़ल सेना सिखों के विरुद्ध भेजी थी और ये बात गुरु महाराज ने जफरनामा में स्पष्ट की है,

"मनम कुश्तहम कोहियां पुरफितन,
के आँ बुतपरस्तां दूं मन बुत शिकन" (95)
.... यानि गुरु महाराज ने लिखा है कि मैंने जिन पहाड़ी राजाओं से युद्ध किये थे,वो उपद्रवी हैं, वे मूर्तिपूजक हैं, और मैं मूर्तिभंजक...!!! यानी गुरु महाराज का तात्पर्य था कि इस युद्ध के बीच में औरंगजेब ने मूर्तिपूजको का साथ क्यों दिया ?
दरअसल सिख गुरुओं द्वारा चलाई गई धार्मिक पाखंड विरोधी मुहीम से रूढ़िवादी पहाड़ी राजा गुरु महाराज के शत्रु बन गए थे, लेकिन ये राजे खुद इतने शक्तिशाली नही थे कि सिखों से लड़कर उनका दमन कर सकते इसलिये उन्होंने मुग़ल राज को सिखों से लड़ाने की साज़िशें रचनी शुरू कर दीं, और दक्कन में व्यस्त औरंगज़ेब के पास बार बार ये सन्देश भिजवाने शुरू कर दिए कि ये सिख गुरु जनता को मुग़ल राज से बगावत के लिये उकसा रहे हैं, उस वक्त औरंगजेब के उत्तर भारत आकर सही वस्तुस्थिति पता करने की संभावना नही थी, यही देखकर सूबेदारों ने ये झूठे पत्र औरंगजेब के पास भेजे, तब मजबूरन औरंगज़ेब ने सिखों के खिलाफ लड़ने के लिये पहाड़ी राजाओं को अनुमति दे दी, इन पहाड़ी राजाओं ने सरहिंद के भ्रष्ट नवाब वज़ीर खान को भी अपने साथ मिला लिया था, वज़ीर खान की कचहरी में ही चमकौर युद्ध के कैदियों का मुकदमा सुनाया जाना था...... वज़ीर खान ने मुनादी करवा दी थी कि छोटे साहिबज़ादों को गिरफ्तार कराने वाले व्यक्ति को बहुत ईनाम दिया जाएगा, ये सुनकर कभी गुरु की रसोई में सेवादार रहे एक व्यक्ति गंगू, यानी गंगाराम ने एक चाल चली और माता गूजरी और नन्हे साहिबज़ादों को शरण देने की पेशकश की, जिस रात माताजी इसके घर में शरण लेने रुकीं, उसी रात गंगू ने माता गूजरी की सोने के सिक्कों से भरी थैली चुरा ली, और अगली ही सुबह उन्हें मुरिन्डे के कोतवाल को सौंप दिया
जहां से इन्हें यातनाएं देते हुए वज़ीर खान की कचहरी में ले जाया गया था, जहां बच्चों के वीरतापूर्ण जवाबों से क्रोधित हो कर दीवान सुच्चानन्द ने इन बच्चों को मौत की सज़ा देने की सलाह वज़ीर खान को दी, और वज़ीर खान ने उस सलाह पर अमल किया... जब गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के दोनों छोटे साहिबजादों जोरावर सिंह और फ़तेह सिंह को सरहिंद की कचहरी में मौत का फरमान सुनाया जा रहा था तो उस कचहरी में मलेर कोटला के नवाब शेर मुहम्मद खां भी मौजूद थे। उन्होंने इस पाप के खिलाफ आवाज़ उठाई और सरहिंद के सूबेदार वज़ीर खान के इस फैसले का डट कर विरोध किया।
नवाब मलेरकोटला को वज़ीर खान द्वारा याद दिलाया गया कि कैसे सिक्खों के साथ जंग में उनका सगा भाई मारा गया । नवाब साहब ने कहा कि जंग दो सेनाओं में होती है। जब सैनिक आमने सामने होते हैं तो दोनों तरफ से लोग मरते हैं, उसमे इन मासूम बच्चों का क्या कसूर। हां, मैं जंग का बदला जंग में लूंगा, इन नन्हें बच्चों को मार कर नही। ये इस्लाम के खिलाफ है, कि नाबालिग बच्चों को किसी भी तरह की सज़ा दी जाए। फिर भी सूबेदार सरहिंद वज़ीर खां नही माना। उसने गुरु गोबिंद सिंह के दोनों पुत्रों की सजा बरकरार रखी। यह देख सुन कर नवाब साहब " हा दा नारा" यानी हक़ की आवाज़ (अल्लाह हक़) बोल कर वहां से बाहर चले गए। ये हा दा नारा सिख कौम के लिए एक अमर नारा बन गया।
जब इस घटना की जानकारी गुरु गोबिंद सिह जी महाराज को हुई तो उन्होंने पत्र लिखकर नवाब शेर मुहम्मद खान के प्रति आभार जताया।
.. बाद के दिनों में सन 1783 ई में जब सरदार जस्सा सिंह अहलूवालिया और सरदार बघेल सिंह के नेतृत्व में सिख राज्य का विस्तार दिल्ली से लेकर कैथल, करनाल, दर्रा खैबर तक फैला, तब भी मलेर कोटला की ओर आँख उठा कर भी सिखों ने नहीं देखा। मलेर कोटला के नवाब साहब ने जो अहसान सिखों पर किया, वो आज भी सिख समुदाय मानता है। 1947 में बंटवारे के वक़्त एक भी मुस्लिम परिवार यहां से पलायन कर पाकिस्तान नही गया ।
आज भी मलेर कोटला नवाब शेर मुहम्मद खान की यादगार और हा के नारे को अमर बनाने के लिए सिख क़ौम ने शहीदी स्थान गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब का मुख्य द्वार का नाम, शेर मुहम्मद खान के नाम पर है जो सिख मुस्लिम भाईचारे की अद्भुत मिसाल है। ये तसवीर उन्ही नवाब शेर मोहम्मद खान की है

  में   ने एक ही मैच खेला है और टॉप पर है
23/10/2023

में ने एक ही मैच खेला है और टॉप पर है

23/10/2023
 #मोहम्मद_शमी ने अब तक इससे पहले 2  #वर्ल्डकप 2015, 2019 में खेले थे, उन दोनों वर्ल्डकप में भी मोहम्मद शमी का रिकॉर्ड बह...
23/10/2023

#मोहम्मद_शमी ने अब तक इससे पहले 2 #वर्ल्डकप 2015, 2019 में खेले थे, उन दोनों वर्ल्डकप में भी मोहम्मद शमी का रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है।

2015 वर्ल्डकप में मोहम्मद शमी ने 7 मैचों में 17 विकेट लिए थे, जिसमें पाकिस्तान के अगेंस्ट लिए 4 विकेट भी शामिल हैं। 2015 वर्ल्डकप में शमी का गेंदबाजी एवरेज मात्र 17 का था जो कि वनडे क्रिकेट में बहुत बेहतरीन माना जाता है।

2019 वर्ल्डकप में भी मोहम्मद शमी को शुरुआती 4 मैचों में मौका नहीं दिया, लेकिन जब उन्हें मौका मिला तो पहले मैच में ही अफगानिस्तान के खिलाफ हैट्रिक समेत 4 विकेट, फिर वेस्टइंडीज के अगेंस्ट 4 विकेट और इंग्लैंड के अगेंस्ट 5 विकेट लिए थे। उनका उस वर्ल्डकप में सिर्फ एक मैच बांग्लादेश के अगेंस्ट खराब गया था, उसमें भी उन्होंने 1 विकेट प्राप्त किया था, उसके बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया। 2019 वर्ल्डकप में शमी ने 4 मैचों में 14 विकेट हासिल किया थे।

इस वर्ल्डकप में शमी की जगह शार्दुल को खिलाया गया, लेकिन जब शमी को मौका दिया गया है तब उन्होंने उसे दोनों हाथों से पकड़ा है।

शमी भारतीय टीम के पहले ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने वर्ल्डकप में 2 बार 5 विकेट हॉल पूरा किया है।

शमी पहले ऐसे भारतीय गेंदबाज भी हैं जिन्होंने 5 बार एक पारी में 4 विकेट लिए हैं।

शमी ने वर्ल्डकप में मात्र 12 पारियों में गेंदबाजी की है, सोचो 12 में से 5 बार जो गेंदबाज 4 विकेट ले जाए वो कितना खतरनाक होगा। कोई और भारतीय गेंदबाज वर्ल्डकप में 2 बार से ज्यादा 4 विकेट नहीं ले पाया है।

शमी वर्ल्डकप मैचों में इंडिया के लिए 12 मैचों में 36 विकेट लेकर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं, उनसे ऊपर सिर्फ जहीर खान और जवागल श्रीनाथ हैं, उन दोनों ने 44-44 विकेट लिए हैं।

अब बताइए ऐसे बोलर को कौन बाहर करना चाहेगा?

इतिहासकार Francis Robinson अपनी किताब The Mughal Emperors में लिखते हैं।अलाउद्दीन ख़िलजी की जुर्रत ऐसी थी की जब एक बार म...
21/10/2023

इतिहासकार Francis Robinson अपनी किताब The Mughal Emperors में लिखते हैं।

अलाउद्दीन ख़िलजी की जुर्रत ऐसी थी की जब एक बार मंगोल सरदार ओलजेतू खान ने अलाउद्दीन ख़िलजी के दरबार में एक मंगोलो का समूह भेजा उनकी मांग थी कि अलाउद्दीन ख़िलजी अपनी शहज़ादी को उनके साथ कर दें, क्योंकी मंगोल सरदार उनकी शहज़ादी को अपनी बीवी बनाना चाहता है तब अलाउद्दीन खिल्जी ने जवाब कुछ इस तरह जवाब दिया की उसके दरबार में आए सभी 18 मंगोलो के सर हाथियो के पांवो से कुचलवा दिये और ये पैग़ाम मंगोलो तक पहुंचा दिया गया की यह अलाउद्दीन खिलजी का जवाब है।

इसके बाद कभी मंगोलो ने भारत की तरफ़ पलटने की हिम्मत नहीं की यह बात सही है कि उस दौर में मंगोलो से ज़्यादा बर्बर कोई नहीं था उन्होने संपूर्ण एशिया को रौंद दिया था लेकिन हिंदोस्तान आने पर उनका मुक़ाबला अलाउद्दीन ख़िलजी और उनके बहादुर सिपहसालार ज़फर से मुक़ाबला हुआ और यही वो सिपहसालार जो अपनी तमाम ज़िंदगी मंगोलो से लड़ते रहे अगर इन्होने मंगोलो को ना खदेड़ा होता तो आज यहां का इतिहास और भूगोल कुछ और होता। अलाउद्दीन आज ही के दिन 21 अक्टूबर को 1296 को गद्दीनशीन हुआ

#मुग़लिया_सल्तनत #अल्लाउद्दीन_खिलजी #मंगोल

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