जय श्री बालाजी
देवीपुरा बालाजी धाम (सीकर राजस्थान),वर्तमान समय में जन आस्था का विस्वास है ये देवभूमि,क्योकि चमत्कार को नमस्कार है,कहते है की मन की मुराद पूरी होती मांग कर तो देख झोली मेरे बाबा के दर पर फैला कर तो देख,खुशियों से भर देंगे तेरी झोली ऐसी कृपा बरसती है इस दरबार में.
बहुत से चमत्कार इस दरबार में होते हुये देखे है बहुत से सुने भी है, कहते है की जब ये मूर्ति जयपुर से कहीं रही थी जब ये म
ूर्ति सीकर पहुची तो यहाँ आकर रुक गयी जहा ये मूर्ति रुकी थी ठीक उसके सामने एक पुराना राममंदिर था,बहुत कोशिशो के बावजूद ये मुर्ति वहा सी हिली नहीं, चार हाथियों की ताकत भी मूर्ति को वहा से हिला नहीं सकी,तभी बालाजी महाराज के श्री मुख से ये आवाज़ आई की मेरे राम मुझे मिल गए है मुझे यही इनके चरणों में रहने दो.तब से ये मूर्ति यहाँ से अलग अलग पर्चे दे रही है.
एक ऐसी ही घटना और है की एक बार किसी चोर ने बालाजी महारज की आँख चुरा ली ,ठीक वैसे ही जिस प्रकार एक इंसान को चोट लगने पर दर्द होता है और आँखों से पानी निकलने गिरने लग जाता है उसी प्रकार बालाजी महारज की आँखों अश्रुधारा लगातार २४ घंटे बहती रही जब तक बालाजी महाराज की आँख नहीं मिली.
ऐसे अनेको चमत्कार इस दरबार में होते आये है.
जय श्री बालाजी