06/06/2024
श्री हरिवंश
जय श्रीश्याम जी
सब कह रहे हैं कि हम बाबा से विनती करें कि बाबा इनको अपने चरणों में स्थान दें। और इसे दुखद घटना कह रहे हैं। हम कौन होते हैं बाबा को बुद्धि देने वाले। सद्बुद्धि की आवश्यकता हम सबको है।। जिनके मुख में श्रीश्याम नाम, चरण उनकी राहों में तत्पर, उनकी ओर बढ़ते हुए और कंधे पर वो विराजमान तो और कहा जा सकतीं हैं वो।। और ये दुखद घटना नहीं। वो मृत्यु नहीं महोत्सव है जहां लेने प्रभु आ जाएं।।
लोगों ने उनको घायल होते देखा पर देख नहीं पाए साक्षात बाबा उनको लेने आए। अरे जिसका आसन और चादर बाबा की ध्वजा बन गई ऐसा सौभाग्य ऐसी एहतुकी कृपा किसी खास को ही मिलती है। अद्भुत कृपापात्र हैं वो। मृत्यु निश्चित है, स्थान, समय, कारण सब निश्चित है पर मायने ये रखता है कि लेने यम आए या स्वयं प्रभु।। वो खून नहीं बल्कि वो होली खेल रही थी अपने बाबा के साथ, स्वागत कर रही थी उनके आने पर उनका अपने ही रक्त से।।सूखा नहीं बह गया वो रक्त आखिरी बूंद तक प्रभु के प्रेम में।। धन्य धन्य धन्य ऐसा प्रेम, धन्य है ऐसी मृत्यु जो अमृत बना दे।।
ऐसे श्रीश्याम प्रेमी के श्रीचरणों में मेरा अनंत कोटि नमन।।
जय जय श्रीश्याम
जय जय श्रीहित हरिवंश