08/12/2025
देवी धरेच के जांगरा महायज्ञ में उमड़े हज़ारों श्रद्धालु
कुसम्पटी क्षेत्र की सतोग पंचायत के सातल गाँव में आयोजित देवी जयेश्वरी धरेच का जागरा महायज्ञ रविवार देर शाम देव विदाई के साथ सफल हो गया। यज्ञ पूर्णाहुति के बाद देवी जयेश्वरी अपने देवलुओं सहित अपने मूल मंदिर धरेच लौट गईं। इस अवसर पर हज़ारों लोगों ने देवदार की लकड़ी से शहतीरों को जलाकर नैरी रात परेशा यानी अँधेरी रात को उजाली रात करने की रस्म निभाई। इस रस्म का यज्ञ में विशेष महत्व माना जाता है और समस्त श्रद्धालु इस रस्म को निभाने में पुण्य समझते हैं।
करीब बीस क्विंटल चीनी से ये जलेबी का प्रसाद तैयार किया गया था। देवी का यह जागरा महायज्ञ किसी बड़ी वस्तुस्थिति के बाद श्रद्धालु जनों द्वारा दिया जाता है। देवी धरेच के प्रति यह गहन आस्था का जीवंत प्रमाण है कि स्थानीय लोग नैकरी लगाने, संतान प्राप्ति या अन्य मुरादों को पूरा होने पर देवी मां का जागरा आयोजित करवाते हैं। इसमें आसपास की ग्रामीण देवलुओं व परगनों को आमंत्रित किया जाता है। इस महायज्ञ में टियाली धरेच सत्तोग, नहोल सहित कुसम्पटी की दर्जनों पंचायतों सहित ज़िला सिरमौर के गिरीपार इलाक़ों से हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए और देवी धरेच का आशीर्वाद प्राप्त किया। उधर आयोजनकर्त्ता परिवार ने इस यज्ञ में सहयोग के लिए समस्त लोगों का आभार जताया।
कई वर्षों बाद आयोजित होने वाले इस जागरा महायज्ञ में देवी जयईश्वरी धरेच ने उपस्थित कलेशों को अपने गुरु के माध्यम सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया और देव विधात्री का एकमत से पालने करने का निर्देश दिया। देवी मां ने साफ़ शब्दों में एक-दूसरे के प्रति वैर भावना न रखकर एकजुट होकर जीवन यापन करने की जनता को नसीहत दी और कहा कि जो सच्चे मन से भक्ति करेगा उसकी हर इच्छा पूर्ण होगी लेकिन जो देव आदेशों की अवहेलना करेगा उसे देव कोप का भागी अवश्य बनना पड़ेगा। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया और प्रसाद के रूप में जलेबी वितरित की गई, जिसे ददौन कहा जाता है।