JAI Ishwari MAA Dharech

JAI Ishwari MAA Dharech Jai Ishwari Maa Dharech is a Religious Center in a local community. Jai Maa Durga Temple.
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16/07/2026

।। जय ईश्वरी माँ धरेच ।।

​ आओ हम सब मिलकर आए ओर माँ के चरणों में शीश झुकाएं,

जय ईश्वरी माँ धरेच।!
10/07/2026

जय ईश्वरी माँ धरेच।!

17/06/2026

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जय ईश्वरी माँ धरेच।   #जय  #माँ❤️  #ईश्वरी
16/06/2026

जय ईश्वरी माँ धरेच।

#जय #माँ❤️ #ईश्वरी

03/05/2026

।। जय माँ जैईश्वरी ।।

​एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल का साक्षी बनें! लगभग 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, माँ जैईश्वरी धरेच मंदिर के प्रांगण में 3 और 4 मई को पावन 'भुंडा महायज्ञ' का भव्य आयोजन होने जा रहा है।
​इस शुभ अवसर पर माता के सभी 'कलेने' मंदिर में अपनी हाजिरी भरकर माँ का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। माँ जैईश्वरी हम सब पर अपनी असीम कृपा और आशीर्वाद बनाए रखें।
​जय माता दी! 🙏🙏

जय ईश्वरी माँ धरेच। घुटनों से चलते-चलते,कब पैरों पर खड़ा हुआ,तेरी ममता की छाँव में,जाने कब मैं बड़ा हुआ।​जब भी आई कोई मुसी...
29/04/2026

जय ईश्वरी माँ धरेच।

घुटनों से चलते-चलते,
कब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छाँव में,
जाने कब मैं बड़ा हुआ।
​जब भी आई कोई मुसीबत,
तूने हँसकर झेला है,
मेरी खुशी की खातिर माँ,
तूने हर दुख झेला है।
​तेरी उंगली थाम के सीखा,
जग की राहों पर चलना,
तूने ही सिखाया मुझको,
गिर कर फिर से संभलना।
​ईश्वर का वरदान है तू,
घर की प्यारी मूरत है,
सच कहूँ तो इस दुनिया में,
तू सबसे खूबसूरत है।
​लबों पे जिसके दुआ रहती है,
वो कोई और नहीं... बस माँ होती है।

27/03/2026

जय ईश्वरी माँ धरेच।

​राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है, जो अक्सर मार्च या अप्रैल के महीने में पड़ता है।

​अयोध्या का महत्व: इसी दिन त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था।
​चैत्र नवरात्रि का समापन: राम नवमी का दिन चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है, जिसे कई लोग 'महानवमी' के रूप में मनाते हैं और कन्या पूजन करते हैं।
​धर्म की विजय: श्री राम का जीवन सत्य, धर्म और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने रावण जैसे अधर्मियों का नाश कर समाज में आदर्श स्थापित किए।

​पूजा-पाठ: भक्त सुबह जल्दी स्नान करके श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा करते हैं।
​रामायण पाठ: घरों और मंदिरों में 'रामचरितमानस' या 'रामायण' का पाठ किया जाता है। "भये प्रगट कृपाला" जैसे भजन गाए जाते हैं।
​व्रत और दान: कई लोग इस दिन उपवास रखते हैं और गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करते हैं।
​शोभा यात्रा: कई शहरों में प्रभु राम की भव्य झाँकियाँ और रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें जय श्री राम के नारे गूँजते हैं।

​वर्ष 2026 में राम नवमी 27 मार्च (शुक्रवार) को मनाई जा रही है।
​सीख: श्री राम का चरित्र हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांतों का त्याग नहीं करना चाहिए।

जय ईश्वरी माँ धरेच। ​आज का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये संयम, शुद्धता और ईश्वर के प्रति समर्पण ...
25/03/2026

जय ईश्वरी माँ धरेच।

​आज का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये संयम, शुद्धता और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक भी हैं।

​माँ महागौरी (अष्टमी): माँ महागौरी की पूजा से जीवन में शांति और प्रसन्नता का आगमन होता है। कहा जाता है कि इनकी कृपा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

​माँ सिद्धिदात्री (नवमी): माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं। नवमी के दिन इनकी पूजा से व्यक्ति को अलौकिक शक्तियों और ज्ञान का वरदान मिलता है। यह नवरात्रि का अंतिम चरण होता है, जिससे मन में एक नई ऊर्जा का संचार होता है।

​रामनवमी: चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। इसलिए, यह दिन विशेष रूप से राम दरबार की पूजा, रामचरितमानस के पाठ और भजन-कीर्तन के लिए जाना जाता है।
​कुछ पारंपरिक अनुष्ठान

​हवन: नवरात्रि के अंतिम दिन (नवमी) बहुत से घरों और मंदिरों में हवन का आयोजन किया जाता है। अग्नि देव के माध्यम से देवी माँ को आहुति दी जाती है, जो नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मकता फैलाने के लिए की जाती है।

​भोजन: कन्या पूजन में आमतौर पर हलवा, चना और पूरी का भोग लगाया जाता है। यह सात्विक भोजन देवी माँ को अति प्रिय माना जाता है।
​विसर्जन (कलश विसर्जन): यदि आपने नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित किया था, तो दशमी तिथि को विधि-विधान के साथ उसका विसर्जन किया
जाता है। कलश के जल को पूरे घर में छिड़कना बहुत शुभ माना जाता है।

जय ईश्वरी माँ धरेच। आज के दिन मां कालरात्रि (काल का नाश करने वाली) की पूजा की जाती है, जो दुष्टों का विनाश और भक्तों का ...
25/03/2026

जय ईश्वरी माँ धरेच।

आज के दिन मां कालरात्रि (काल का नाश करने वाली) की पूजा की जाती है, जो दुष्टों का विनाश और भक्तों का कल्याण करती हैं।

24/03/2026

जय ईश्वरी माँ धरेच।

​"शक्ति और साहस की प्रतीक माँ कात्यायनी आपके जीवन से सभी संकटों का नाश करें और आपको सफलता का मार्ग दिखाएं। नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं!"

​माँ कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने दुष्ट राक्षस महिषासुर का वध किया था। वे साहस, वीरता और विजय की प्रतीक हैं।

​दिव्य स्वरूप: माँ कात्यायनी का रंग स्वर्ण की तरह चमकता हुआ है। उनकी चार भुजाएँ हैं। दाहिने हाथों में वे अभय और वरद मुद्रा धारण करती हैं, जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल का फूल होता है। उनका वाहन सिंह (शेर) है।
​साधना का केंद्र: योग साधना में आज का दिन 'आज्ञा चक्र' (दोनों भौंहों के बीच स्थित) पर ध्यान केंद्रित करने का होता है। यह अंतर्दृष्टि और मानसिक स्पष्टता प्रदान करता है।
​आशीर्वाद: उनकी पूजा से भक्तों के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। विवाह संबंधी अड़चनों को दूर करने के लिए भी इनकी विशेष पूजा की जाती है।

​शुभ रंग: नीला – यह शांति, वीरता और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है।
​प्रिय भोग: माँ कात्यायनी को शहद का भोग लगाना अत्यंत प्रिय है।

​"चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥"

Address

Village/P. O/Dharech, Tehsil Theog Distt/Shimla
Shimla
171209

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