Devta sahib vishnu narayan jundi

Devta sahib vishnu narayan jundi kilbalu_empire_

जय हो देवता साहब विष्णु नारायण महराज रोहल🙏
13/10/2022

जय हो देवता साहब विष्णु नारायण महराज रोहल🙏

जय हो देवता साहब बद्री नारायण बायोमेटिंग किल्बा🙏
13/10/2022

जय हो देवता साहब बद्री नारायण बायोमेटिंग किल्बा🙏

जय हो देवता साहब विष्णु नारायण जी रोहल🙏जय हो देवता साहब लक्ष्मी नारायण जी दरकाली🙏पारंपरिक दकलौन मेले की शुरुवात🚩
25/09/2022

जय हो देवता साहब विष्णु नारायण जी रोहल🙏
जय हो देवता साहब लक्ष्मी नारायण जी दरकाली🙏
पारंपरिक दकलौन मेले की शुरुवात🚩

29/08/2022

जागरा महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
जय देवता साहब बोठा महासू🚩
जय चार भाई महासू🚩

पवित्र किल्बा बाऊसभी बायोमेटिंग (किल्बालू) देवता का उदगम स्थान🙇‍♂️
11/08/2022

पवित्र किल्बा बाऊ
सभी बायोमेटिंग (किल्बालू)
देवता का उदगम स्थान🙇‍♂️

02/08/2022

जय हो देवता साहब विष्णु नारायण (बायो मेटींग)
जी जुन्ड़ी व
जय हो देवता साहब बद्री नारायण जी किल्बा
मामा व भांजे
देवता विष्णु नारायण (किलबालू) का संपूर्ण इतिहास, शक्तियां और महत्व

देवता विष्णु नारायण जिनको छौहारा क्षेत्र में किलबालू के नाम से जाना जाता है उनकी उत्पति पवित्र बाऊ किलबा से हुई जो कि किन्नौर जिले में स्थित है।

पवित्र क़िलबा बाऊ {किन्नौर} का रहस्य

किलबा गांव में एक धनी रावत नाम का राजा रहता था जो अत्यंत समृद्ध था,परन्तु गांव में पानी की अत्यंत कमी रहती थी।
देवता विष्णु नारायण का किलबा बाऊ में आगमन किसी जाई (स्त्री ) के साथ हुआ।

किलबा बाऊ (कांकटी नगरी) बाहर से बेखल से घिरी है और उसके अंदर स्वर्ण नगरी है । किलबा के राजा ने देवता विष्णु नारायण को चुनौती दी कि यदि वे गांव में पानी की कमी को दूर करेंगे तो उनकी मान्यता पूरे गांव में होगी। इतना सुनते ही देवता विष्णु नारायण ने अपने खांडे से प्रहार किया और वहीं पर पानी की बड़ी जलधारा उत्पन्न हो गई।विष्णु नारायण ने अपनी पालकी बनाने का हुक्म दिया और किलबा में बायोमाटिंग के नाम से प्रसिद्ध हुए। इसके बाद विष्णु नारायण ने अपना एक अपरूप छौैहारा क्षेत्र की ओर भेजा।

देवता विष्णु नारायण का तपस्या का स्थान

छौहारा क्षेत्र में विष्णु नारायण सर्वप्रथम शातुल घाटी पहुंचे और यहां आकर अपनी शक्तियों का आहवान करने लगे। विष्णु नारायण के तप को देखकर कई सूक्ष्म देव इनकी तपस्या भंग करने आए। उस समय अचानक इनका ध्यान टूटा,और तब तक केवल 18 शक्तियां ही प्रकट हो पाई थी। गुस्से में आकर देवता विष्णु नारायण ने 18 शक्तियों में से एक को चोटी पर तीर के सहारे फेंका। जिसके प्रभाव से सात उपशक्तियां जलधारा के रूप में प्रकट हुई, इस सप्त जलधाराओं के संगम से शिमनिया वीर प्रकट हुए। ये दृश्य देख कर सभी सूक्ष्म देव डर के मारे वापिस चले गए। शिमनिया वीर को साथ लेकर विष्णु नारायण रोहल सेरी की तरफ बड़े। सोलह सावनी काली भी इनकी शक्तियों से प्रभावित होकर इनके साथ हो गई। इनका सामना छौहारा क्षेत्र के कोई भी देव नहीं के सकते थे।
देवता विष्णु नारायण की शक्ति का प्रमाण

यह दृश्य देखकर महाशिव पवासी को स्वयं उतराखंड से शाटूल घाटी आना पड़ा। महाशिव छातन रूप में रोहल सेरी के पवा सरू पहुंचे। महाशिव ने विष्णु नारायण की शक्तियों को छिंग करने के लिए चारों महासुओं की शक्तियों का आहवान किया। तब जाकर विष्णु नारायण को शांत किया जा सका।
उसके बाद विष्णु नारायण पवासी महाराज के साथ रोहल गए,जहां आज भी इन दोनों देवताओं की एक साथ पूजा की जाती है।

जय हो देवता साहब किलबालु महाराजव शोकवीर महाराज डोडरा🙏
31/07/2022

जय हो देवता साहब किलबालु महाराज
व शोकवीर महाराज डोडरा🙏

31/07/2022

रघुनाथ पवासी महाराज की चौरास के शाही स्नान के लिए जाती हुई महाराज की निरोल की झलक.....
टिक्करी/कंदरौंण
अगुवाई करते हुए देउ वन के रक्षक कैलाथ वीर एवँ विष्णु नारायण साहब कंदरौंण...

तू ता देवा बडा सतियाल: शूके पानुये जला उमेटाल:।।मूल विष्णू  नारायण (किल्बालू) महराज रथ रूप रोहल।मान्यता व बार के  आखरो क...
31/07/2022

तू ता देवा बडा सतियाल:
शूके पानुये जला उमेटाल:।।

मूल विष्णू नारायण (किल्बालू) महराज रथ रूप रोहल।
मान्यता व बार के आखरो के अनुसार विष्णुनारायण किलबा जीतकर शातूल घाटी पर अपनी नारायणी शक्तिओं सहित आये। विष्णुनारायण को देवाधिदेव पबासी महाराज ने छलित कर उनकी पवित्रता खंडित जनकल्याण हेतु किया। विष्णुनारायण ने कुपित होकर अपने वीर भंखर प्रकट करवाये,साथ मे अपना एक दिव्य हर स्थान,मुल्क, समुदाय में खपने वाला रूप प्रकट करवाया जिसे किलबालू नाम से जाना व माना जाता है

किलबालू देवता जेठे थान रोहल से बहुत जगहों,गांवो में पूजित है,सबका मूल रोहल (गिड़सा) माना गया है।

24/07/2022

जय श्री बद्री नारायण जी और श्री बायो माटींग जी दोनों मामा भाजे किलबा गांव मे देवता साहेब ‌'युगेंदंग'जो यहां के गुप्त देवता है जो रथ रूप मे नही है उनके साथ मिलकर गांव कि सुख समृधी के लिए जाप कर रहे है।

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Shimla
171207

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