सनातनी योद्धा

सनातनी योद्धा हर लम्हा मेरे जीवन का सिर्फ, हिन्दुत्?

27/10/2020

हिमाचल प्रदेश में दुर्गाष्टमी के दिन दिन एक IAS अधिकारी रितिका जिंदल सोलन स्थित माँ शूलिनी देवी के मंदिर में आ धमकती है। वो मंदिर में 'निरीक्षण' करने गई थी और 'व्यवस्थाओं का जायजा' भी लेना था। जाए भी क्यों ना, आखिर IAS-IPS अधिकारियों के बाप-दादाओं के ही तो गुलाम हैं हिन्दू और और ये सारी सम्पत्तियाँ उनकी ही तो है। वहाँ IAS अधिकारी मंदिर में घुस कर पंडितो से बहस करती है और जबरन हवन में बैठ जाती है। फिर मीडिया में आकर Patriarchy और हिन्दुओं के 'रूढ़िवाद' पर ज्ञान देती है। जनता वाह-वाह कर उठती है।

क्या उस IAS अधिकारी ने ये जानने का प्रयास किया कि अगर उन्हें महिला होने के कारण हवन में बैठने से रोका गया है, जैसा कि उनका दावा है, तो इसके पीछे का कारण क्या रहा होगा? शूलिनी देवी मंदिर में तो महिलाओं के प्रवेश या पूजा-पाठ पर कोई पाबन्दी तो है ही नहीं। फिर बात का बतंगड़ क्यों बनाया गए? वहाँ पंडितों को 'समानता के अधिकार' का ज्ञान देने वाली रितिका जिंदल 'मंदिर अधिकारी' भी हैं और उसी हैसियत से वहाँ गई थी। ये 'मंदिर अधिकारी' क्या होता है? हर मंदिरों पर अधिकारियों-नेताओं का कब्ज़ा क्यों है?

कैसी समानता? कहाँ की समानता? इन भ्रष्टाचारी, निकम्मे, नकारे, सुस्त, आत्ममुग्ध और धर्मद्रोही अधिकारियों ने सालों से दफ्तरों में फाइलें घिस-घिस कर ब्यूरोक्रेसी को बर्बाद कर दिया। ये 'मस्जिद अधिकारी' क्यों नहीं बनते? ये 'चर्च अधिकारी' क्यों नहीं बनते? मंदिरों में चढ़ाए रुपए को हपचने वाले ये कीड़े मौलवियों को जाकर समानता का ज्ञान क्यों नहीं देते? मस्जिदों में क्यों नहीं जाती महिलाएँ? ये चर्चों में जाकर क्यों नहीं कहते कि पादरियों को महिलाओं का यौन शोषण नहीं करना चाहिए। एक दिन में ही लिंचिंग हो जाएगी, साधारण अधिकारी हो या मंत्रालय का सचिव। डरपोक और दोगले हैं ये।

कोई रेहाना फातिमा कहीं से आकर सबरीमाला में घुस जाती है। क्या आस्था है उसकी जो घुस रही है? वो उसके बाप का बनाया हुआ पर्यटन स्थल है क्या? बाद में वही रेहाना फातिमा बच्चों से अपने नंगे बदन पर कलाकारी करवाती हुई पकड़ी जाती है। मतलब, ऐसे-ऐसे घिनौने काम करने वाले भी सिर्फ इसीलिए हीरो बन जाते हैं, क्योंकि उन्होंने किसी हिन्दू मंदिर का अपमान किया। इनकी क्या श्रद्धा थी अयप्पा के प्रति? कुछ भी नहीं। जब वामपंथी ईश्वर अस्तित्व ही नहीं मानते तो इन मंदिरों में घुसना ही क्यों चाहते हैं? और मस्जिद या चर्च नहीं? क्योंकि काट दिए जाएँगे इसीलिए ना। और हिन्दू सब कुछ बर्दाश्त कर लेता है, इसीलिए।

चाहे वो IAS अधिकारी किसी भी पृष्ठभूमि से आई हो, उसका बहिष्कार करो। आंध्र प्रदेश में इस एसपी ने बलात्कारी पादरी के खिलाफ इसीलिए कार्रवाई नहीं की, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद उसे राजनीति में आना था और ईसाईयों के वोट्स के लिए उसे उस पादरी की मदद की ज़रूरत पड़ती। हर मंदिर का बोर्ड बना कर खाने-पकाने के लिए अधिकारियों-नेताओं को डाल दिया गया है और ये हमारा ही अपमान कर के हमें ही ज्ञान देते हैं। हिम्मत है तो रितिका जिंदल किसी मस्जिद में जाकर मौलवियों को ज्ञान दे।

अरे, उन्हें ज्ञान देने की तो औकात ही नहीं है इन नपुंसकों में। एक छोटे से मस्जिद के मौलवी ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान पूरी पुलिस फोर्स के सामने मस्जिद को बंद करने या नमाज न करने के निवेदन को इनकार कर दिया था और उसका कुछ नहीं उखड़ पाया। कितने IAS-IPS अधिकारी गए ज्ञान देने? केरल में एक कार्टूनिस्ट ने चर्च में होने वाले यौन शोषण पर कार्टून बनाया तो उससे अवॉर्ड छीन लिया गया। कितने अधिकारी गए ज्ञान देने? ब्राह्मणों और पंडितों को इनके बाप-दादाओं ने क्या देकर गुलाम बनाया था कि ये संविधान पढ़ाने पहुँच जाते हैं?

जो मंदिर कोरोना में लोगों को भोजन कराने से लेकर उन्हें आश्रय देने का काम कर रहे हैं, जो कायदे से इन नकारे अधिकारियों को करना चाहिए था, जो मंदिर सरकार को रुपए भी दान में दे रहे हैं ताकि सरकारी खजाने पर बोझ न पड़े, जो मंदिर सरकारी दिशानिर्देशों को लेकर जागरूकता भी फैला रहे हैं, जिस मंदिर में जाने वाला चढ़ावा भी सरकार को जाता है - उन्हें ही आप बदनाम कर रहे हो? अब क्या चाहते हो इन मंदिरों से? कितने मंदिरों के पुजारियों को वेतन मिलता है? भूखे-नंगे जमीन पर खेलते हैं उनके बच्चे। ऊपर से शोषण का भी आरोप लगाते हो?

और ऊपर से Patriarchy का आरोप? गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर में कुछ दिनों तक पुरुषों की एंट्री नहीं होती। महिलाओं के लिए प्राइवेसी हो, इसीलिए ऐसा किया जाता है। पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में शादीशुदा पुरुषों को जाने की अनुमति नहीं है। मुजफ्फरपुर के माता मंदिर में तो कुछ समय के लिए पुरुष पुजारी तक नहीं घुस सकते, केवल महिलाएँ। ये है हमारी Patriarchy? अगर कहीं पर आपको सदियों पुरानी किसी परंपरा का कारण कुछ चीजों की मनाही है, और उसे किए बिना आपका कोई नुकसान नहीं हो रहा है, तो फिर बिना तह तक गए और कारण जाने ये पब्लिसिटी स्टंट क्यों?

ऐसा क्यों होता है कि कोई भी अधिकारी कभी भी किसी भी मंदिर में घुस जाए और कहने लगे कि फलाँ प्रक्रिया को ऐसे नहीं, ऐसे करो। वो क्या पढ़ कर ऐसा कर रहा है? किस किताब का रिफरेन्स देकर वो ऐसा कर रहा है? क्या उसे सिर्फ इसीलिए ऐसा करने का अधिकार है क्योंकि वो 'मंदिर अधिकारी' है और सारे मंदिर उसके बाप के गुलाम हैं?
Via - Anupam K. Singh

11/09/2020
10/07/2020
28/06/2020

बाबा रामदेव को सलाह देने वालों एक बार ये विडीओ भी देख लेना, बाक़ी कंपनियो ने भी किस तरह लूट मचाई हुई है।
सरदार जी तुस्सी ग्रेट हो।

27/06/2020

मध्यप्रदेश में होशंगाबाद के पिपरिया में गोरक्षा दल के जिला प्रमुख रवि विश्वकर्मा की हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड का वीडियो सामने आया है जिसमें एक कार पर 6-7 हमलावर हमला करते नजर आ रहे हैं. इसी बीच एक आरोपी ने रिवॉल्वर से रवि पर गोली चला दी. इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

घटना के समय वहां से गुजर रहे एक शख्स ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया. शुक्रवार शाम करीब 6 बजे अंडर ब्रिज के नजदीक ही रवि अपने दोस्त के साथ कार से जा रहा था तभी मोटरसाइकिल सवार आरोपियों ने पहले रवि का रास्ता रोका फिर उसपर लाठी डंडों से हमला किया और बाद में गोली मार दी.

विश्व हिन्दू परिषद ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है, पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ आईपीसी की अलग अलग धाराओं सहित आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज किया है.

27/06/2020

देखिए कैसे ऑनलाइन 'वेब सीरीज' के जरिए हिन्दुओं के खिलाफ फैलाया जा रहा है ज़हर l

26/06/2020
जब जब उठेगी ऊंगली हिंदुत्व पे, खून मेरा खौलेगा,जब जब धङकेगा हृदय मेरा, वंदेमातरम् बोलेगा ॥
21/06/2020

जब जब उठेगी ऊंगली हिंदुत्व पे, खून मेरा खौलेगा,
जब जब धङकेगा हृदय मेरा, वंदेमातरम् बोलेगा ॥

20/06/2020

लत हिन्दुगिरी की लगी हैं,
तो नशा अब सरे आम होगा, हर लम्हा मेरे जीवन
का सिर्फ,
हिन्दुत्व के नाम होगा।

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