06/02/2024
🚩देवता साहिब गोलीनाग 🚩की चांदी की ढाली जो की रथ पर आसीन मां काली (मोरशे पाज )के मोहरे के ऊपर अपनी शोभा बढ़ाती है , उस पर उकेरे गए ऐतिहासिक शब्द जिसमे लिखा गया है की 20 भादो 1910. ई o में पुजारली के धनु (माली) और सनेसी (कारदार, पुजारी)पुजारो (ब्राह्मण )ने अकाल के समय रोहरू जाते देवता गोलीनाग की ढाली का निर्माण कराया था।
🚩👉 पुजारा/पुजारे माफीदार ब्राह्मण पुजारली के (देवब्राह्मण पुराने समय में किसी भी प्रकार के करो से मुक्त होते थे )पुराने समय में देवताओं के संरक्षक होते थे ये पूजारी ,माली गुर,भंडारी और मुख्य कारदार होते थे।
भ्रांशी में देवता के पुजारे ही रथ या पालकी को उठाते थे, अन्य लोगों के लिए ये कार्य वर्जित थे ये देव ब्राह्मणों की श्रेणी में आते है, मुख्य मंदिरों मे देव कार्य इनके होते थे ।में किसी भी प्रकार के करो से मुक्त होते थे )पुराने समय में देवताओं के संरक्षक होते थे ये पूजारी ,माली गुर,भंडारी और मुख्य कारदार होते थे।पुराने समय में इनका भरण पोषण देव कार्यों से होता था ,पुजारे देवता के परिवार के के माने जाते है।
भ्रांशी में देवता के पुजारे ही रथ या पालकी को उठाते थे जिस एवेज में ये पैसे दिए जाते थे ,ये देव ब्राह्मणों की श्रेणी में आते है, मुख्य मंदिरों के पजाशली आस पास रहते थे सभी देव कार्य इनके होते थे एवम् ये शुद्ध व सरल होते थे ,देव और पुजारे एक दूसरे के पूरक माने जाते है। कारदार के रूप में ये रूपये प्राप्त करते थे,रामसुख 25 पैसे अंग्रेजी हकुमत के समय मुख्य कारदार के रूप मैं प्राप्त करते थे उस समय केवल 4 कारदार थे, संन्यासी(पुजारी) , गुरसा(माली), अमर (खजांची) (चूंटू), केशव बंटा (भंडारी), आदि मुख्य रूप से भण्डारी, कारदार, खजांची के रूप में कार्य कर चूके है। धनु ,सुरजू, हुमी, विद्याचंद शर्मा,रोशन शर्मा , दीना लाल शर्मा (वर्तमान) मे गुर माली के रूप में वर्णन आता है।
🚩जय देवता गोली नाग🚩
जय मां कोट काली🚩
𝓝𝓲𝓻𝓿𝓪𝓷𝓪 𝓝𝓲𝓽𝓲𝓼𝓱