Jamiat Ulama-i-Mathura

Jamiat Ulama-i-Mathura the official page of Jamiat Ulema District Mathura UP

27/05/2026
उत्तम नगर, तरुण हत्या मामले में बेगुनाह युवक इमरान बंटी रिहाजमीयत उलेमा-ए-हिंद की पैरवी पर अदालत ने पुलिस विभाग को लगाई ...
22/05/2026

उत्तम नगर, तरुण हत्या मामले में बेगुनाह युवक इमरान बंटी रिहा
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की पैरवी पर अदालत ने पुलिस विभाग को लगाई कड़ी फटकार, ईदुल अज़हा से पहले परिवार में खुशी की लहर
इमरान के पिता सैफी मोहम्मद ने जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद असअद मदनी का जताया आभार

नई दिल्ली, 22 मई 2026: उत्तम नगर हत्या मामले (एफआईआर नंबर 122/26) में द्वारका अदालत ने बेगुनाह युवक इमरान उर्फ बंटी पुत्र सैफी मोहम्मद की तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। उसे केवल नाम की समानता के आधार पर गिरफ्तार किया गया था और वह पिछले तीन महीनों से बेगुनाह जेल में बंद था। मामले की पैरवी जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असअद मदनी के निर्देश पर जमीयत के वकील एडवोकेट अब्दुल गफ्फार ने की।

अदालती कार्यवाही के अनुसार 5 मार्च 2026 को घायल मान सिंह के बयान पर मामला दर्ज किया गया था। बाद में घायल तरुण की मृत्यु के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। मृतक की मां की शिकायत पर कई लोगों के नाम सामने आए, जिनमें “इमरान” का नाम भी शामिल था। इसी आधार पर इमरान उर्फ बंटी को 8 मार्च 2026 को उत्तम नगर से गिरफ्तार कर लिया गया।

बाद की जांच, कई गवाहों के बयानों और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो गया कि इमरान उर्फ बंटी घटना में शामिल नहीं था, बल्कि मामला किसी दूसरे इमरान, यानी आरोपी इमरान पुत्र उमरदीन से संबंधित था। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि इमरान उर्फ बंटी के खिलाफ कोई भी विश्वसनीय या आपराधिक साक्ष्य मौजूद नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके बाद अदालत ने उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

अदालत ने अपने कड़े रिमार्क्स में यह भी कहा कि पुलिस को यह जानकारी होने के बावजूद कि इमरान उर्फ बंटी को गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तार किया गया है और वह गैरकानूनी हिरासत में है, उसकी रिहाई के लिए समय रहते कोई कदम नहीं उठाए गए। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए आदेश की प्रति संयुक्त पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया ताकि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

गौरतलब है कि तरुण हत्या के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण हालात पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जहां युवक की हत्या पर दुख व्यक्त किया था, वहीं जमीयत के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सांप्रदायिक तनाव रोकने और स्थानीय बेगुनाह मुसलमानों को परेशान न किए जाने संबंधी ज्ञापन भी सौंपा था।

बाद में जब इमरान बंटी को गिरफ्तार किया गया तो उसके पिता की अपील पर एडवोकेट मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी की निगरानी में युवक को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई।

संपादक महोदय,
कृपया इस प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित कर कृतार्थ करें।

नियाज़ अहमद फारूकी
सचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिंद

India's   Landscape Feb-Mar-Apr 2026 prepared by Justice & Empowerment of Minorities ( ).   Jamiat Ulama Uttar Pradesh
20/05/2026

India's Landscape Feb-Mar-Apr 2026 prepared by Justice & Empowerment of Minorities ( ).


Jamiat Ulama Uttar Pradesh

جمعیۃ علماء اترپردیش کا دو روزہ ضلعی مشورہ و تربیتی ورکشاپ
18/05/2026

جمعیۃ علماء اترپردیش کا دو روزہ ضلعی مشورہ و تربیتی ورکشاپ

 #बाबरी मस्जिद के फैसले और  #पूजास्थल कानून 1991 पर में शोध रिपोर्ट जारी #जमीयत उलेमा-ए-हिंद और सामला के तत्वावधान में  ...
16/05/2026

#बाबरी मस्जिद के फैसले और #पूजास्थल कानून 1991 पर में शोध रिपोर्ट जारी
#जमीयत उलेमा-ए-हिंद और सामला के तत्वावधान में #सेक्युलरिज़्म और #न्यायिक इंसाफ़ पर महत्वपूर्ण विमर्श; बाबरी मस्जिद मामले में मंदिर तोड़े जाने का कोई सबूत नहीं, प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को सख्ती से लागू करने की मांग।
वरिष्ठ वकीलों की बड़ी मौजूदगी; जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा— बाबरी मस्जिद फ़ैसले पर यह रिपोर्ट इतिहास की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ साबित होगी।

नई दिल्ली, 16 मई 2026 : जमीअत उलमा-ए-हिंद की अधिनस्थ संस्था जस्टिस एण्ड एम्पावरमेंट ऑफ माइनॉरिटीज और साउथ एशियन माइनॉरिटीज लायर एसोसिएशन (SAMLA) के संयुक्त तत्वाधान में नई दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के डिप्टी स्पीकर हॉल में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बाबरी मस्जिद पर फैसले और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 पर एक शोध रिपोर्ट जारी की गई।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जमीअत उलमा-ए-हिंद के मौलाना महमूद मदनी ने की, जिसमें देश के प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ताओं, कानूनी विशेषज्ञ, पूर्व न्यायाधीशों और विद्वान शामिल हुए।
जारी की गई रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक स्थिरता की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि ऐतिहासिक विवादों को फिर हवा न दी जा सके। रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों, विशेष रूप से इस्माइल फारूकी मामले (1994) और एम. सिद्दीकी (अयोध्या निर्णय 2019) का विस्तृत विश्लेषण करते हुए यह तर्क दिया गया है कि इस्माइल फारूकी मामले में मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं मानने वाली व्याख्या ने बाद के मामलों पर गहरा प्रभाव डाला है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का सख्ती से कार्यान्वयन किया जाए और संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक समानता के सिद्धांतों को और मजबूत किया जाए।
रिपोर्ट के विमोचन कार्यक्रम के बाद, जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि बाबरी मस्जिद फैसले पर एक गंभीर और गहन अध्ययन की अत्यंत आवश्यक थी ताकि भावी पीढ़ियां यह देख सकें कि एक वर्ग इस फैसले को एक अलग नजरिए से देखते हुए अपने पक्ष को विद्वतापूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। मौलाना मदानी ने कहा कि यह रिपोर्ट वास्तव में भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सद्भाव की रक्षा का एक गंभीर और ईमानदार प्रयास है। बाबरी मस्जिद मामले में कहीं भी यह साबित नहीं हुआ कि मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं अपने फैसले के पैराग्राफ 788 और उसके बाद के हिस्सों में स्पष्ट किया है कि इस दावे के पक्ष में कोई निर्णायक सबूत नहीं है।
उन्होंने कहा कि फैसले के बाद भारतीय मुसलमानों ने धैर्य, जिम्मेदारी और संवैधानिक निष्ठा का प्रदर्शन किया, लेकिन उसके बावजूद ज्ञानवापी, मथुरा ईदगाह, कमाल मौला मस्जिद और अन्य धार्मिक स्थलों से संबंधित नए विवाद खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक वर्ग की समस्या नहीं है, बल्कि भारत की संवैधानिक पहचान, न्यायिक विश्वसनीयता और न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का मामला है और सरकार को अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करने वाली शक्तियों का सहारा बनने से बचना चाहिए।
इससे पूर्व, सामला के महासचिव एडवोकेट फिरोज गाजी ने स्वागत भाषण दिया और कहा कि इतिहास हमेशा उन लोगों को सम्मान देता है जो न्याय, ईमानदारी और मानवीय गरिमा के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संवैधानिक नैतिकता और सत्यमेव जीत का सिद्धांत अंततः विजयी होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि बाबरी मस्जिद निर्णय और पूजा स्थल अधिनियम से संबंधित मामले केवल एक धार्मिक स्थल या विवाद का मामला नहीं हैं, बल्कि यह देश के संवैधानिक भविष्य का प्रश्न है, जो हिंदू और मुसलमान दोनों से समान रूप से संबंधित है। उन्होंने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में, न्यायाधीश का मुख्य कर्तव्य संविधान, कानून और समानता के आधार पर निर्णय लेना है, न कि धार्मिक आस्था के आधार पर, क्योंकि संविधान की दृष्टि में प्रत्येक नागरिक समान है।
चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. फैजान मुस्तफा ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 देश में धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक स्थिति को बनाए रखने का एक संवैधानिक प्रयास है। हालांकि, यह भी सच्चाई है कि किसी कानून की मौजूदगी अपने आप में पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। मूल आवश्यकता यह है कि धार्मिक स्थलों के दस्तावेजों, ऐतिहासिक अभिलेखों और कानूनी स्थिति को मजबूती से संरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में कई ऐतिहासिक और कानूनी पहलू थे जिन्हें अदालत ने स्वीकार भी किया, जबकि कुछ टिप्पणियों पर विद्वतापूर्ण मतभेद की गुंजाइश है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि भविष्य में संवेदनशील धार्मिक विवादों के समाधान के लिए केवल न्यायिक लड़ाई के बजाय, गंभीर संवाद, सुलह और जमीनी सच्चाई को भी ध्यान में रखा जाए, ताकि देश में आपसी विश्वास, शांति और न्याय का माहौल बना रहे।
वरिष्ठ विधिवेत्ता सलमान ख़ुर्शीद ने अपने संबोधन में कहा कि बाबरी मस्जिद मामले के निर्णय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मुसलमानों के कानूनी पक्ष की पुष्टि करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्टों में कहीं भी यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं किया गया कि किसी मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण किया गया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता एम आर शमशाद ने चेताया कि पूजा स्थल अधिनियम को कमजोर करने अथवा एएसआई कानून के माध्यम से नए विवाद खड़े करने की कोशिशें देश के धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकार केवल पुस्तकों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभावी और व्यावहारिक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, न्यायिक व्यवस्था की कमियों पर निरंतर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि अन्याय और विसंगतियों का समय रहते निराकरण हो सके।
अधिवक्ता निज़ाम पाशा ने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में उनका मत बिल्कुल स्पष्ट है कि मस्जिदें केवल ईंट और पत्थर की इमारतें नहीं होतीं, बल्कि वे मुसलमानों की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक होती हैं। इसलिए मुसलमानों का यह दायित्व है कि वह अपनी मस्जिदों और धार्मिक प्रतीकों की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़े हों। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बाबरी मस्जिद विवाद को “आस्था बनाम आस्था” का मामला बताते हैं, जबकि वास्तव में यह “स्थान बनाम स्थान” का विवाद था। न्यायालय ने हिंदू पक्ष की आस्था को उस विशेष स्थल से जुड़ा मानते हुए उसे कानूनी महत्व प्रदान किया, जबकि मुस्लिम पक्ष के दावे को केवल एक उपासना स्थल के रूप में देखा गया। इसी आधार पर मस्जिद की अनिवार्य धार्मिक स्थिति को लेकर बहस सामने आई। उन्होंने आगे कहा कि मुसलमानों की ओर से वक्फ़ और ऐतिहासिक स्वामित्व से संबंधित तर्क पूरी तरह प्रस्तुत किए गए थे, किंतु न्यायालय ने उन पर विस्तार से विचार नहीं किया।
पूर्व न्यायमूर्ति इक़बाल अहमद अंसारी ने बाबरी मस्जिद से संबंधित रिपोर्ट जारी करने के लिए महमूद असद मदनी की सराहना करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट का महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें बाबरी मस्जिद प्रकरण तथा उससे जुड़े न्यायिक और सामाजिक तथ्यों का गहन एवं सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है।
उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश की वास्तविक शक्ति उसका विवेक, निर्भीकता और न्यायप्रियता होती है, क्योंकि यदि न्यायाधीश भयग्रस्त हो जाए तो न्याय प्रभावित होता है। उनके अनुसार, बाबरी मस्जिद मामले में जो हुआ वह न्यायालय का केवल एक “निर्णय” (Decision) था, “न्यायिक फ़ैसला ” (Judgment) नहीं। उन्होंने कहा कि न्यायिक फ़ैसले के लिए ठोस और तर्कसंगत आधार आवश्यक होता है, जबकि मात्र निर्णय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भी दिया जा सकता है, भले ही उसके पीछे पर्याप्त तार्किक आधार न हो।
वरिष्ठ अधिवक्ता एजाज़ मकबूल ने कहा कि इतिहास में यदि कोई भूल या अन्याय हुआ है, तो उसे ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ याद रखना तथा तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक है। उन्होंने जमीअत उलमा-ए-हिंद और महमूद मदनी के संघर्ष और प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मुसलमानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, विशेषकर संविधान के अनुच्छेद 30 के अंतर्गत प्राप्त धार्मिक और शैक्षिक स्वतंत्रताओं के संरक्षण की।
। वहीं, शोधार्थी निजामुद्दीन अहमद सिद्दीकी ने इस रिपोर्ट की पृष्ठभूमि, उसके उद्देश्य तथा उससे जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक और विधिक पहलुओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। अधिवक्ता रऊफ़ रहीम ने कहा कि वर्तमान समय में वक्फ़ की सुरक्षा के लिए संघर्ष अत्यंत आवश्यक हो गया है, जबकि अधिवक्ता ताहिर एम. हकीम ने हर स्तर पर न्याय और निष्पक्षता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
उपरोक्त गणमान्य व्यक्तियों के अलावा, जमीअत उलमा-ए-हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी, जमीअत उलमा-ए-हिंद के सेक्रेटरी मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी, एडवोकेट रुबीना जावेद, सामला के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट जेएच जाफरी, एडवोकेट फुजैल अय्यूबी, एडवोकेट रुखसाना चौधरी, एडवोकेट ए सिराजुद्दीन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली की प्रो. हसीना हाशिया, प्रो. मुजीबुर्र्हमान, एडवोकेट तय्यब खान, एडवोकेट मोहम्मद नूरुल्लाह समेत देश के जाने-माने वकीलों ने आज के प्रोग्राम में हिस्सा लिया। धन्यवाद ज्ञापन एडवोकेट मंसूर अली खान ने दिया। कार्यक्रम का संचालन अध्यक्षता सामला के अध्यक्ष नासिर अज़ीज़ ने की।

08/05/2026

ملک نازک ترین دور سے گزر رہا ہے، مسلمانوں کو حکمت، دور اندیشی اور منظم ’ملی و سماجی جدوجہد‘ کے ساتھ حالات کا مقابلہ کرنا ہوگا: مفتی سید محمد عفان منصورپوری
देश नाजुक दौर से गुजर रहा है, मुसलमानों को हिकमत और संगठित सामाजिक संघर्ष से हालात का सामना करना होगा: मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी

جمعیۃ علماء اتر پردیش کی مجلس عاملہ میں مدارس، مساجد اور اوقاف کے تحفظ، نفرتوں کے خاتمہ کے لئے بین المذاہب ڈائیلاگ اور اصلاح معاشرہ سے متعلق اہم فیصلے لئے گئے برادرانِ وطن کے ساتھ روابط کے لیے صوبہ بھر میں ’سدبھاؤنا کمیٹیوں‘ کے قیام پر زور
जमीयत उलेमा-ए-उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी बैठक में मदरसों, मस्जिदों और वक्फ की सुरक्षा, नफरत के खात्मे के लिए अंतर-धार्मिक संवाद और समाज सुधार पर हुए अहम फैसले

لکھنؤ۔8جنوری 2026ء: لکھنؤ: جمعیۃ علماء اتر پردیش کی مجلس عاملہ کا ایک اہم اجلاس صوبائی صدر مولانا مفتی سید محمد عفان منصورپوری کی زیر صدارت اولیو دی پبلک اسکول گومتی نگر لکھنو? میں منعقد ہوا۔ اجلاس کا آغاز تلاوت اور نعتِ سے ہوا۔ اپنے صدارتی خطاب میں مفتی سید محمد عفان منصورپوری نے ملک کے موجودہ حساس اور دگرگوں حالات پر گہری تشویش کا اظہار کرتے ہوئے فرمایا کہ یہ دور انتہائی نازک ہے اور ایسے میں مسلمانوں، بالخصوص ملی رہنماؤں کو حکمت، دور اندیشی اور منظم ’ملی و سماجی جدوجہد‘ کے ذریعے حالات کا مقابلہ کرنا ہوگا۔ انہوں نے اشتعال انگیزی سے مکمل گریز کی تلقین کرتے ہوئے کہا کہ جمعیۃ علماء ہند کی تاریخ قربانی، اخلاص اور اعتدال سے عبارت ہے۔ مدارس، مساجد اور اوقاف کو اسلامی تہذیب و تمدن کے بقا کا ضامن قرار دیتے ہوئے انہوں نے زور دیا کہ ان اداروں کو قانونی و دستوری اعتبار سے اس قدر مستحکم کیا جائے کہ کوئی شرپسند عنصر ان پر انگلی نہ اٹھا سکے۔ انہوں نے مزید کہا کہ ملک میں بڑھتی ہوئی مذہبی منافرت کے خاتمے کے لیے برادرانِ وطن کے ساتھ رواداری اور محبت کی فضا قائم کرنا وقت کی اہم ترین ضرورت ہے، جس کے لیے نچلی سطح تک ’سدبھاؤنا کمیٹیوں‘ کا قیام عمل میں لایا جا رہا ہے۔
ناظم اعلیٰ جمعیۃ علماء اتر پردیش، مولانا امین الحق عبداللہ قاسمی نے گزشتہ کارروائی کی خواندگی اور توثیق کے ساتھ شعبہ جات کی مفصل کارکردگی رپورٹ اور عزائم پیش کیے۔ اس کے علاوہ 16 /ا ور 17 /مئی کو لہرپور، سیتاپور میں دو روزہ ضلعی مشورہ اور تربیتی ورکشاپ کی تیاریوں کا تفصیلی جائزہ بھی پیش کیا۔
اجلاس میں باہمی مشاورت سے مدارس کو قانونی دستاویزات (زمین کا رجسٹریشن، نقشہ منظوری اور آڈٹ) کی تکمیل میں رہنمائی فراہم کرنے کے لیے ضلعی سطح پر قائم کمیٹیوں کو مزید متحرک کرنے کا فیصلہ ہوا، اور یہ طے کیا گیا کہ ضلعی کمیٹیاں اپنے ضلع کے مدارس کے ذمہ داران سے ملاقات کرکے یا ان کو جمع کرکے قانونی باریکیاں سمجھائیں اور مدارس کو تحفظ فراہم کرنے میں اپنا کردار ادا کریں۔ نیز، مدارس و مساجد کو درپیش قانونی چیلنجز کے دفاع کے لیے ماہر وکلاء پر مشتمل قانونی پینل تشکیل دینے کیلئے سہ رکنی کیمٹی کو کام سپرد کیا گیا۔ڈیلیٹ کئے گئے اوقاف کے تحفظ اور پورٹل پر اندراج کے حوالہ سے مولانا امین الحق عبداللہ نے بتایا کہ صوبہ کے 34 سے حاصل شدہ رپورٹ کے مطابق تقریباً 900 کیمپ لگائے گئے اوقاف کی جائدادوں کا امید پورٹل پر اندارج کرایا گیا مزید اس کام کو منظم کرنے اور حذف شدہ ناموں کا اندراج کرانے اور اوقاف مولیان و کمیٹیوں کے ممبران کو درست معلومات فراہم کرا نے کیلئے ایک ایڈوائزری جاری کرنے پر اتفاق ہوا جس کے لئے سہ رکنی کمیٹی تشکیل دی گئی۔ موجودہ مردم شماری کے آن لائن مرحلے 7 تا 21مئی میں عوام کی بھرپور رہنمائی کی جائے تاکہ ہر خاندان کا سربراہ بغیر کسی دستاویزی الجھن کے آسان اندراج مکمل کر سکے۔ اس اہم قومی عمل میں صد فیصد شمولیت کو یقینی بنانے اور بیداری مہم چلانے کے لیے تمام ضلعی اکائیوں کو خصوصی ہدایتی مراسلہ جاری کیا جائے گا۔ملک میں بڑھتی ہوئی مذہبی منافرت کو روکنے اور قومی یکجہتی کے فروغ کے لیے صوبائی اور ضلعی سطح پر مختلف مذاہب کے نمائندگان پر مشتمل ’سدبھاو?نا کمیٹیاں‘ تشکیل دینے اور ہر سطح پر ملاقات و بین المذاہب ڈائیلاگ شروع کرنے کا خاکہ تیار کیا گیا۔ہر ضلع سے کم از کم 100جدید تعلیم یافتہ نوجوانوں کو جمعیۃ علماء کے تعمیری اور فلاحی پروگراموں سے جوڑنے کا فیصلہ کیا گیا تاکہ وہ ملک و ملت کیلئے نفع بخش بن سکیں۔ ضلعی و مقامی ذمہ داران کی تنظیمی صلاحیتوں کو نکھارنے اور انہیں متحرک کرنے کے لیے ۱۶ اور ۱۷ مئی ۲۰۲۶ء کو قصبہ لہرپور، ضلع سیتاپور میں دو روزہ ضلعی مشورہ اور تربیتی ورکشاپ کے انعقاد کو حتمی شکل دی گئی۔دفتری امور کو مزید منظم اور عصری تقاضوں سے ہم آہنگ کرنے کے لیے لکھنؤکے امین آباد میں واقع جمعیۃ علماء کے صوبائی دفتر کی تعمیرِ نو کا کام فوری طور پر شروع کرنے کی منظوری دینے کے ساتھ ہی ششماہی مجلس منتظمہ کے انعقاد پر بھی اہم اور ٹھوس فیصلے لیے گئے۔
اجلاس میں بطور مدعو خصوصی شریک اسلامک سنٹر آف انڈیا کے سربراہ مولانا خالد رشید فرنگی محلی نے خطاب میں فرمایا کہ مدارس اور مساجد اس امت کی ریڑھ کی ہڈی ہیں۔ انہوں نے اوقاف کے امید پورٹل پر اندراج میں حائل خامیوں اور تکنیکی اغلاط کو بروقت دور کرنے اور ووٹر لسٹ مہم میں بھرپور حصہ لینے کی تلقین کی۔ ان کا خصوصی زور اس بات پر تھا کہ برادران وطن کے ساتھ محض رسمی اور نمائشی تقریبات کے بجائے مختلف مذاہب کے رہنماؤں کے ساتھ ’ان ہاؤس ڈسکشن‘ (براہ راست اور نجی گفتگو) کی جائے تاکہ ان کے دلوں میں موجود شکوک و شبہات اور غلط فہمیوں کا مؤثر اور سنجیدہ ازالہ ہو سکے۔
معروف عالم دین اور المعہد العالی للدراسات الاسلامیہ کے ناظم مولانا محمد یحییٰ نعمانی نے اجلاس کو مخاطب کرتے ہوئے کہا کہ آج امت کو جس سب سے بڑے چیلنج کا سامنا ہے وہ 'نفرت کا منظم پروپیگنڈا‘ ہے۔ انہوں نے فرمایا کہ اس بے بنیاد پروپیگنڈے کو بے اثر کرنے کے لیے جدید تعلیم یافتہ اور باشعور نوجوانوں کو فکری طور پر تیار کر کے رضاکارانہ جذبے کے ساتھ میدانِ عمل میں لانے کی اشد ضرورت ہے۔
اجلاس کے اختتام پر حال ہی میں وفات پانے والے مولانا عبد اللہ مغیثی اجراڑہ میرٹھ، علامہ قمر عثمانی دار العلوم وقف دیوبند، مولانا فخر الدین ہاپوڑ، مولانا محمد عارف ابراہیمی، حکیم اطہر خاں لکھیم پور کھیری، مولانا ریاض الحسن مظاہر علوم وقف سہارنپور اور مولانا زین العابدین صدر جمعیۃ علماء بلند شہر متعدد شخصیات کے انتقال پر تعزیت پیش کی گئی اور ان کے درجات کی بلندی کے لیے دعائے مغفرت کی گئی۔مفتی محمد عفان منصورپوری کی دعا پر مجلس کا اختتام ہوا۔ اس اجلاس میں ریاستی نائبین صدور مفتی محمد بنیامین قاسمی مظفرنگر، مولانا محمد کلیم اللہ قاسمی امبیڈکر نگر، پروفیسر سید محمد نعمان شاہجہانپوری،مغربی زون کے صدر مولانا محمد عاقل گڑھی دولت جنرل سکریٹری قاری محمد یامین امروہہ،وسطی زون کے صدر مولانا اسلام الحق اسجد قاسمی لکھیم پور، جنرل سکریٹری مفتی ظفر احمد قاسمی،مشرقی زون کے صدر حافظ عبد الحئی مؤ،جنرل سکریٹری مفتی جمیل الرحمن قاسمی،مفتی ابوبکر صدیق منصورپوری، حافظ عبید اللہ بنارس، حافظ فرقان اسعدی مظفر نگر،حافظ فرقان اسعدی مظفر نگر،مفتی قاسم رضی فیروزآباد، مفتی شمس الدین بجنور، حافظ اسعداللہ گورکھپور، حافظ معمور احمد جامعی قاضی شہر کانپور، مولانا محمدعثمان قاسمی سلطانپور، مولانا طارق شمشی اٹاوہ، مولانا محمدموسیٰ قاسمی مظفرنگر، مولانا افتخار ہاپوڑ، مولانا اعلم اللہ لکھنؤ، قاری عبدالمعید چودھری کانپور، مفتی محمدصہیب بہرائچ، مولانا نجیب الحسن صدیقی لکھنؤ،مولانا محمد اسعد پڑتاپگڑھ،مولانا عبد المنان شراوستی، مولانا محمد اسجد قاسمی غازی آباد،مولانا محمد طاہرمرادآباد، مولانا عبد الخالق مراد آباد، مولانا مطیع الحق انظرلکھنؤسمیت دیگر اراکینِ عاملہ اور مدعوئین خصوصی نے شرکت کی۔
लखनऊ, 8 मई 2026ः जमीयत उलेमा-ए-उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी (मजलिस-ए-आमिला) की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रांतीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी की अध्यक्षता में ‘ओलिव द पब्लिक स्कूल’, गोमती नगर, लखनऊ में संपन्न हुई। बैठक का शुभारंभ पवित्र कुरान की तिलावत और नात-ए-पाक से हुआ।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने देश के वर्तमान संवेदनशील हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह समय अत्यंत नाजुक है। ऐसे में मुसलमानों और विशेष रूप से सामुदायिक नेतृत्व को हिकमत (बुद्धिमत्ता), दूरदर्शिता और संगठित सामाजिक संघर्ष के माध्यम से स्थितियों का सामना करना होगा। उन्होंने किसी भी प्रकार के उकसावे से बचने की ताकीद करते हुए कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद का इतिहास बलिदान, निष्ठा और उदारवाद पर आधारित है।
उन्होंने मदरसों, मस्जिदों और वक्फ संस्थानों को इस्लामी सभ्यता व संस्कृति के संरक्षण का आधार बताते हुए जोर दिया कि इन संस्थानों को कानूनी और संवैधानिक रूप से इतना मजबूत बनाया जाए कि कोई भी शरारती तत्व उन पर उंगली न उठा सके। उन्होंने आगे कहा कि देश में बढ़ती नफरत को खत्म करने के लिए अन्य समुदायों के साथ प्रेम और भाईचारे का माहौल बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है, जिसके लिए जमीनी स्तर पर ‘सद्भावना समितियों’ का गठन किया जा रहा है।
जमीयत उलेमा-ए-उत्तर प्रदेश के महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी ने पिछले कार्यों की रिपोर्ट और भविष्य के लक्ष्यों को प्रस्तुत किया। उन्होंने 16 और 17 मई को लहरपुर, सीतापुर में होने वाले दो-दिवसीय प्रांतीय परामर्श और प्रशिक्षण कार्यशाला (वर्कशॉप) की तैयारियों का विवरण भी साझा किया।
बैठक में मदरसों को कानूनी दस्तावेजों (भूमि पंजीकरण, मानचित्र स्वीकृति और ऑडिट) को पूरा करने में मार्गदर्शन देने के लिए जिला स्तर की समितियों को सक्रिय करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेषज्ञों और वकीलों का एक पैनल बनाने हेतु तीन-सदस्यीय कमेटी गठित की गई। मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगभग 900 कैंप लगाकर वक्फ संपत्तियों का ‘उम्मीद पोर्टल’ पर पंजीकरण कराया गया है। इस कार्य को और व्यवस्थित करने के लिए एक ‘एडवाइजरी’ जारी की जाएगी।
वर्तमान जनगणना (7 से 21 मई) के ऑनलाइन चरण में जनता का मार्गदर्शन किया जाएगा ताकि हर परिवार का मुखिया बिना किसी दस्तावेजी उलझन के आसानी से पंजीकरण पूरा कर सके। इसके लिए सभी जिला इकाइयों को जागरूकता अभियान चलाने हेतु निर्देश जारी किए जाएंगे।
धार्मिक नफरत को रोकने और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को शामिल कर ‘सद्भावना समितियां’ बनाने और अंतर-धार्मिक संवाद शुरू करने का खाका तैयार किया गया। हर जिले से कम से कम 100 शिक्षित युवाओं को जमीयत उलेमा के रचनात्मक और कल्याणकारी कार्यक्रमों से जोड़ने का निर्णय लिया गया ताकि वे देश और समुदाय के लिए उपयोगी बन सकें। लखनऊ के अमीनाबाद स्थित जमीयत उलेमा के प्रांतीय कार्यालय के पुनर्निर्माण का कार्य तत्काल शुरू करने की मंजूरी दी गई।
बैठक में विशेष अतिथि के रूप में शामिल इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रमुख मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि मदरसे और मस्जिदें इस उम्मत की रीढ़ हैं। उन्होंने वक्फ पंजीकरण और मतदाता सूची अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि औपचारिक कार्यक्रमों के बजाय विभिन्न धर्मों के नेताओं के साथ ‘इन-हाउस चर्चा’ (निजी बातचीत) की जाए ताकि गलतफहमियों का प्रभावी समाधान हो सके।
मशहूर आलिम और ‘अल-मआहदुल आली’ के निदेशक मौलाना मुहम्मद याहया नोमानी ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती ‘नफरत का सुनियोजित दुष्प्रचार’ है। इसे बेअसर करने के लिए शिक्षित और जागरूक युवाओं को तैयार करना समय की मांग है।
बैठक के अंत में हाल ही में दिवंगत हुए प्रमुख विद्वानों, जिनमें मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी (मेरठ), अल्लामा कमर उस्मानी (देवबंद), मौलाना फखरुद्दीन (हापुड़) और अन्य के लिए शोक व्यक्त किया गया और दुआ की गई। बैठक का समापन मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी की दुआ के साथ हुआ।
बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद बिनयामीन कासमी (मुजफ्फरनगर), मौलाना मोहम्मद कलीम उल्लाह कासमी (अंबेडकरनगर), प्रोफेसर सैयद मुहम्मद नोमान (शाहजहांपुर), मौलाना मुहम्मद आक़िल (पश्चिमी जोन अध्यक्ष), कारी मुहम्मद यामीन (अमरोहा), मौलाना इस्लामुल हक असजद कासमी (लखीमपुर), मुफ्ती ज़फर अहमद क़ासमी, हाफिज अब्दुल हई (मऊ), मुफ्ती जमीलुर्रहमान कासमी, मुफ्ती अबूबकर सिद्दीक मंसूरपुरी, हाफिज उबैदुल्लाह (बनारस), हाफिज फुरकान असदी (मुजफ्फरनगर), मुफ्ती क़ासिम रज़ी (फिरोजाबाद), मुफ्ती शम्सुद्दीन (बिजनौर), हाफिज असदुल्लाह (गोरखपुर), हाफिज मामूर अहमद जामई (काज़ी-ए-शहर कानपुर), मौलाना मुहम्मद उस्मान क़ासमी (सुल्तानपुर), मौलाना तारिक शम्सी (इटावा), मौलाना मुहम्मद मूसा क़ासमी (मुजफ्फरनगर), मौलाना इफ्तिखार (हापुड़), मौलाना आलम उल्लाह (लखनऊ), कारी अब्दुल मुईद चैधरी (कानपुर), मुफ्ती मुहम्मद सुहैब (बहराइच), मौलाना नजीबुल हसन सिद्दीकी (लखनऊ), मौलाना मुहम्मद असद (प्रतापगढ़), मौलाना अब्दुल मन्नान (श्रावस्ती), मौलाना मुहम्मद असजद कासमी (गाजियाबाद), मौलाना मुहम्मद ताहिर (मुरादाबाद), मौलाना अब्दुल खालिक (मुरादाबाद) और मौलाना मतीउल हक अंज़र (लखनऊ) सहित अन्य कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।

#जमीयत_उलेमा_यूपी #मदरसा_मस्जिद_संरक्षण #सद्भावना_समिति #साम्प्रदायिक_सौहार्द #मुफ्ती_अफ्फान_मंसूरपुरी #वक्फ_संरक्षण #अंतर_धार्मिक_संवाद #जनगणना_जागरूकता ोड़ो_भारत_जोड़ो

Jamiat Ulama-i-Hind Jamiat Ulama Uttar Pradesh
08/05/2026

Jamiat Ulama-i-Hind
Jamiat Ulama Uttar Pradesh

29/04/2026
*جزائر انڈمان میں جمعیۃ علماء ہند کا مرکزی مشورہ شروع؛ نوجوانوں کی تربیت، مثالی مسجد اور سالانہ کیلنڈر پر زور* *ملک بھر ...
13/04/2026

*جزائر انڈمان میں جمعیۃ علماء ہند کا مرکزی مشورہ شروع؛ نوجوانوں کی تربیت، مثالی مسجد اور سالانہ کیلنڈر پر زور*
*ملک بھر کے صوبائی صدور و نظمائے اعلیٰ کی شرکت، صدر جمعیۃ علما ء ہند مولانا محمود اسعد مدنی کی قیادت میں متعدد نئے پروجیکٹس کا روڈ میپ پیش ہوگا*

پورٹ بلیئر، 13 اپریل:جمعیۃ علماء ہند کے زیر اہتمام ریاستی و علاقائی یونٹوں کے صدور و نظمائے اعلیٰ کا آٹھواں مرکزی ششماہی مشورہ آج جزائر انڈمان و نکوبار کے شہر سر وجے پورم، پورٹ بلیئر میں واقع ہوٹل اے آر پرائیڈ ریزیڈینسی میں باضابطہ طور پر شروع ہوگیا ہے۔ یہ سہ روزہ مرکزی اجلاس صدر جمعیۃ علماء ہند حضرت مولانا محمود اسعد مدنی صاحب دامت برکاتہم کی قیادت میں منعقد ہو رہا ہےجب کہ نظامت کے فرائض مولانا محمد حکیم الدین قاسمی ناظم عمومی جمعیۃ علماء ہند انجام دے رہے ہیں۔ اس اہم موقع پر جمعیۃ علماء ہند کے نائب صدر مولانا محمد سلمان بجنوری استاذ دارالعلوم دیوبند، مولانا قاری محمد امین نائب صدر جمعیۃ علماء ہند سمیت کئی اہم مرکزی شحصیات بھی موجود ہیں ۔یہ مشورہ آئندہ مہینوں میں جمعیۃ علماء ہند کی تنظیمی سمت، سماجی کردار، نوجوانوں کی تربیت اور ملی خدمات کے عملی خاکے کو حتمی شکل دینے کے لیے نہایت اہم تصور کیا جا رہا ہے۔
چنانچہ آج شام 6 بجے پہلی نشست کا آغاز ہوا جس کی صدارت مفتی شرف الدین قاسمی صدر جمعیۃ علماء انڈمان و نکوبار نے کی، جب کہ دوسری نشست کی صدارت مولانا سعید احمد صدر جمعیۃ علماء منی پور نے کی۔
اپنے استقبالیہ خطاب میں صدر جمعیۃ علماء جزائر انڈمان و نکوبار مفتی شرف الدین قاسمی نے کہا کہ جزائر انڈمان ہندستان کی آزادی، قربانی اور استقامت کی زندہ تاریخ ہے۔ انہوں نے کہا کہ یہی وہ سرزمین ہے جہاں کالا پانی کی صعوبتوں نے مجاہدینِ آزادی کی قربانیوں کو ہمیشہ کے لیے تاریخ کا روشن باب بنا دیا۔ انہوں نے اس تاریخی مقام پر مرکزی ششماہی مشورہ کے انعقاد کو نہایت بابرکت اور بامعنی قرار دیا اور آنے والوں مہمانوں کا استقبال کیا۔ انہوں نے مزید کہا کہ جمعیۃ علماء ہند نے ہمیشہ ملک کی دینی، ملی، تعلیمی، رفاہی اور آئینی خدمات میں قائدانہ کردار ادا کیا ہے اور آج بھی تنظیم ملک بھر میں عوامی رہنمائی، سماجی اصلاح اور حقوق کے تحفظ کے لیے سرگرم عمل ہے۔
اس کے بعد مولانا محمد حکیم الدین قاسمی صاحب نے سابقہ کارروائی کی خواندگی کی جس کے بعد مختلف ریاستی یونٹوں کی کارگزاریوں کی تفصیلی پریزنٹیشن پیش کی گئی۔ صدور و نظمائے اعلیٰ حضرات نے اپنے اپنے صوبوں کی تنظیمی پیش رفت، تعلیمی سرگرمیوں، رفاہی منصوبوں اور ملی خدمات کی عددی رپورٹ پیش کی۔
دیر شام دوسری نشست میںصدر جمعیۃ علماء ہند نے جمعیۃ یوتھ کلب کی موجودہ صورت حال اور آئندہ کے اقدامات پر خصوصی گفتگو کی۔ اس موقع پر نوجوانوں کی فکری تربیت، قیادت سازی، سماجی خدمت اور جمعیۃ کے مشن سے مؤثر وابستگی پر زور دیا گیا۔
اسی نشست میں ’’مثالی مسجد‘‘ کے عنوان سے مولانا محمد عمر قاسمی ناظم تنظیم جمعیۃ علماء ہند برائے جنوبی ہند نے رہنما پریزنٹیشن پیش کی جس میں مسجد کو صرف عبادت گاہ نہیں بلکہ اصلاحِ معاشرہ، تعلیمی بیداری، اخلاقی تربیت اور سماجی ہم آہنگی کا مرکز بنانے کے حوالے سے جامع نکات پیش کیے گئے۔
آئندہ کی نشستوں میں جمعیۃ علماء ہند کی مقامی و ضلعی یونٹوں سے لے کر صوبائی یونٹوں کے لیے میٹنگوں کا سالانہ کیلنڈر، نوجوانوں کے لیے تربیتی ورکشاپس، اصلاحِ معاشرہ پروگرام، بالخصوص ائمہ کی ٹریننگ، میرج کاؤنسلنگ، رفیق پروجیکٹ، خیر پروجیکٹ، سیرت کوئز پر تفصیلی گفتگو اور ممکنہ فیصلے متوقع ہیں، جس سے جمعیۃ علماء ہند کی آئندہ سرگرمیوں کی سمت واضح ہوگی۔
آج شام نشست کا آغاز تلاوتِ کلامِ پاک اور نعتِ رسولِ مقبول ﷺ سے ہوا جس کی سعادت مولانا مفتی سید محمد عفان منصور پوری صدر جمعیۃ علماء یوپی اور ناظم اعلیٰ مولانا امین الحق عبداللہ قاسمی کو حاصل ہوئی۔ ازیں قبل آج دوپہر کے وقت شرکاء کی آمد کے بعد نمازِ ظہر اور ظہرانہ کا اہتمام کیا گیا، جس کے بعد معزز مندوبین کے لیے تاریخی راس جزیرہ (Ross Island) کی زیارت کا خصوصی پروگرام رکھا گیا۔ شرکاء نے اس موقع پر جزائر انڈمان کی تاریخی اہمیت، آزادی کی جدوجہد سے وابستہ یادگاروں اور قدرتی حسن کا مشاہدہ کیا۔
۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
مدیر محترم اس پر یس ریلیز کو شائع فرما کر شکر گزار کریں

نیاز احمد فارو قی
سکریٹری جمعیۃ علماء ہند

Address

Shergarh

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Jamiat Ulama-i-Mathura posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Jamiat Ulama-i-Mathura:

Share