26/03/2026
हल्दी प्रोग्राम या उसके नाम पर एक नया फितना और फक्र से कहते है कि, हल्दी लगाने आना है 😳😳
हल्दी रस्म :- जानकारो के मुताबिक पहले जे समय मे हल्दी सिर्फ इसलिये लगाई जाती थी के दुल्हा दुल्हन का थोड़ा रंग निखर आए... काम काज़ , गर्मी पसीने की वजह से जो पिम्पल, डार्क सर्कल, छाईया हो जाती है वो कम हो जाए क्यूंकि हल्दी में ये गुण होते हैं , थोड़ी पुरानी मार का दर्द भी खींच लेती है। जिस्म की बदबू कम होती है और हल्दी के वजह से बदन में खुशबू रहती है।
बदन पर निखार लाती है, बदन में चिकनाहट होती है।
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लेकिन अब इसको शादी से पहले इसको ऐसी रस्म बना डाला के, ये ना हो तो शादी ही नां हो 😳
कोई पांच दिन, तो कोई दस दिन, कोई तो पंद्रह दिन तक हल्की कार्यक्रम करते हैं। लाखो लाख रुपया लोग हल्दी के कार्यक्रम में फूंक देते है बड़े घराने में तो करोड़ों लगा दिया जाता है इस हल्दी फंक्शन के नाम पर।
जिस रोज हल्दी लगाई जाती है उस रोज पूरे घर में पीलीया फैला दिया जाता है।
सभी को पीले कपड़े पहनना अनिवार्य हो जाता है मानो कोई दूसरा रंग का कपड़ा पहना इसमे जायज ही नही।
हल्दी खेलना, जबरदस्ती एक दूसरे को हल्दी लगाना, एक तरह से हल्दी का होली खेलना। भीड़ इकट्ठा करके डीजे पे नाच गाना करना अश्लील गानों में लड़का लड़की एक साथ नाचना, अस्तगफिरूल्लाह और भीड़ को खाना खिलाना मानो इस्लाम को बुलंदियों में ले जाने के लिये मीटिंग बुलाई हो ...दूर दूर से आए हुए जंगजू ओ का पेट भर कर खाना खिला कर रवाना किया जाना।
ताकी इस्लाम की खातिर लड़ने वाली ज़ंग में भूख की वजह से हार का सामना ना करना पड़े।🤗
कुछ सालों पहले दाल, आलू, सब्जी, रोटी, चांवल खिला दिये जाते थे।
मगर अब कौम तो मालदार हो चुकी है पैसे की क्या कमी है। खूब खर्च करना है हराम और नाजायज तरीके से।
अब एक से बढ़ कर एक आइटम पेश किया जाता है जिसको जो खाना है खाये और जितना बर्बाद करना है करे कोई फर्क नही पड़ता। खूब दबाकर खाया जाता है
काम ही एसा है क्या करो....
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ऐ कौम के लोगो
उन कामों में बर्बाद मत हो जाओ, जिनका शरीयत में करना ना करना कोई हैसियत नहीं रखता ...
वो रस्मे छोड़ो जिनमे माल वक्त की बरबादी होती है
उन कामो में माल वक्त लगाओ जो तुम्हारे लिये आखिरत में फायदा पहुचाए ..
इन्हीं रूपयो से तलबा की मदद कर दो
जरूरतमंद, गरीब मिस्कीनों की मदद करो, या किसी गरीब यतीम बेसहारा लड़की के शादी के लिये मदद कर दो ताकि किसी का घर बस जाए और तुमको ढेर सारा दुआ मिले दीन और दुनिया दोनों कामयाब हो जाये।
अगर ये सब ना कर सको तो,
अपने ही बेहतर मुस्तकबिल के लिये रख लो ... अपनी ही औलाद की तालीम और तरबीयत पर लगा लो।
हल्दी ही लगाना है तो दुल्हा खुद लगा ले और दुल्हन खुद लगा ले।
वैसे ही दूसरी औरते ...औरत की बॉडी देखे गलत ही है
मर्द की बॉडी को कोई औरत टच करे ये भी गलत है।
समझें थोड़ा, और ये भीड़ इकट्ठा करके फिजूल की रस्मे करना बंद करें।
अल्लाह हमे और आपको इस्लाम की सही समझ अता करें और अल्लाह हम सभी को सभी नाजायज फालतू रश्मो से दूर रखें, मेहफूज रखे। आमीन, सुम्मा आमीन