Shri Jain Swetamber Terapanthi Sabha - Secunderabad

Shri Jain Swetamber Terapanthi Sabha - Secunderabad Shri Jain Swetamber Terapanthi Sabha, Secunderabad (2024-2026). President - Shri Sushil Sancheti
Secretary - Shri Hemant Sancheti

30/08/2026

ज्ञानशाला दिवस 2026
ज्ञान वाटिका - ज्ञानशाला के बच्चों द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन तेरापंथ भवन, डी वी कॉलोनी

आचार्य श्री विमलसागर सुरीजी और मुनिश्री दीप कुमारली का हुआ आध्यात्मिक मिलन !हैदराबाद के फीलखाना स्थित श्री महावीर भवन मे...
21/07/2026

आचार्य श्री विमलसागर सुरीजी और मुनिश्री दीप कुमारली का हुआ आध्यात्मिक मिलन !

हैदराबाद के फीलखाना स्थित श्री महावीर भवन में जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ सम्प्रदाय के क्रान्तिकारी आचार्य श्री विमलसागर सुरीजी और तेरापंथ धर्मसंध के आचार्यश्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनिश्री दीप कुमारजी ठाणा 2 का सौहार्दपूर्ण माहौल में आध्यात्मिक मिलन हुआ।

आचार्य श्री विमलसागर सूरीजी ने कहा- वर्तमान युग में सभी जैनों को एकता सौहार्द का परिचय देना जरूरी है। मेरे गुरू महाराज आचार्य श्री पद्मसागत सूरीश्वरजी महाराज साहब और आचार्य श्री तुलसी इन दोनों की विचारधारा समान थी। दोनों ने जैन एकता का बहुत कार्य किया। आचार्य श्री महाश्रमणनी अनुशासन के साथ तेरापंथ का संचालन कर रहा है।

मिलकर हैदराबाद में ऐसे कार्य करने हैं। हमभी आएंगे, आप भी कार्यक्रमों में आते रहना। मुनिश्री दीप कुमारजी ने कहा- जैन शासन में आपस में माधुर्यभाव बना रहे तो जिनशासन की प्रभावना होती है। लाडनूं में जैन विश्व‌भारती में आचार्यश्री महाश्रमणजी की सन्निधि योगक्षेम वर्ष का आयोजन हो रहा इसमें बड़ी संख्या में साधु-साध्वियां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। आचार्यश्री विमलसागर आप जैन धर्म में क्रान्तिकारी आचार्य के रूप में प्रसिद्ध है। आपकी उदारता, प्रमोद भावना आल्हाददायक है।

संतों ने कई विषयों पर विचार विमर्श किए और संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम करने का भाव प्रकट किया। इस अवसर पर श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद के उपाध्यक्ष हुकम चंद जी कोटेचा, सहमंत्री राकेश जी सुराणा, तेरापंथ युवक परिषद्, हैदराबाद के अध्यक्ष विनोद जी दुगड़, उपाध्यक्ष प्रमोद जी भंडारी, सेवाभावी श्रावक प्रेमसुख बेंगानी, अरिहंत गुजरानी, खुशाल भंसाली, विशाल भंडारी व तेरापंथी व श्वेताम्बर तप्पगछ मूर्तिपूजक समाज के श्रावकों की अच्छी उपस्थिति रही।

संप्रसारक
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद

🌸" पास रहकर भी, परायें क्यों ? विषयक दीप मुनि का विशेष प्रवचन ! 🌸⚜️"उठो, जुड़ो ओर इतिहास बना दो⚜️ - मुनि दीप‌ कुमारदि०-3...
04/05/2026

🌸" पास रहकर भी, परायें क्यों ? विषयक दीप मुनि का विशेष प्रवचन ! 🌸

⚜️"उठो, जुड़ो ओर इतिहास बना दो⚜️ - मुनि दीप‌ कुमार

दि०-3/5/2026
हैदराबाद के हिमायतनगर क्षेत्र स्थित "प्रशंसा"अतिथि गृह में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री दीप कुमारजी ठाणा-2 के सान्निध्य में । "पास रहकर भी परायें क्यों ?" विषयक विशेष प्रवचन का आयोजन तेरापंथी सभा- सिकंदराबाद द्वारा किया गया। कार्यक्रम में उपस्थिति अच्छी रही।

🔰 मुनिश्री दीप कुमारजी ने कहा- आज का युग कनेक्टिविटी का युग है। मोबाइल में नेटवर्क फूल है रिश्तों में सिग्नल डाउन है। एक ही घर में रहते हैं, पर दिलों के बीच दीवारे खड़ी है। पहले लोग दूर रहते भी तो भी दिल से करीब थे, आज लोग पास रहते हैं, पर दिल से दूर हो गए है। पास रहकर भी पराए क्यों हो जाते हैं। यह केवल सामाजिक समस्या नहीं, विकट स्थिति है। आज हर गली, हर समाज में एक अदृश्य दिवार खड़ी हो गई है। बात बंद, मिलना बंद, दिलों का जुड़ना बंद। दिल जुड़ जाएं सबके तो समाज एक बन जाता है।

🔥मुनिश्री ने झकझोरते हुए कहा-उठो, जुड़ो ओर इतिहास बना दो । अगर दूरी है तो आज अभी खत्म कर दो, किसी से नाराजगी है, अभी क्षमा कर दो । क्यों कि वक्त नहीं रुकेगा, मोका बार-बार नहीं मिलेगा। मुनि श्री ने सभी को समाज एकता के संकल्प कराएं, लोगों ने खड़े होकर संकल्प लिए ।

🔰मुनि काव्य कुमारजी ने कहा- मानव इतिहास के इस अनुठे कालखंड में हम एक ‌ विचित्र विरोधाभास के साक्षी है एक और हमने ग्लोबल विलेज की परिकल्पना को साकार करते हुए सात समुंदर पार बैठे व्यक्ति से पलक झपकते ही जुड़ने की शक्ति पा ली है। लेकिन विडंबना देखिए एक ही छत के नीचे दो व्यक्तियों के बीच मिलन की खामोशी पसरी हुई है । पास रहकर भी पराया होना केवल एक पंक्ति नहीं अपितु 21वीं सदी के रिश्तों का सबसे बड़ा कड़वा सच है ।

"हैदराबाद में महाश्रमणोत्सव" का हुआ भव्य आयोजन !"स्व और पर कल्याण में रत है- आचार्य महाश्रमण "- मुनि दीप कुमारदि०-26/4/2...
26/04/2026

"हैदराबाद में महाश्रमणोत्सव" का हुआ भव्य आयोजन !

"स्व और पर कल्याण में रत है- आचार्य महाश्रमण "- मुनि दीप कुमार

दि०-26/4/2026 जैन सेवा संघ रामकोट, हैदराबाद के विशाल हॉल में आचार्य श्री महाश्रमणजी के 65वें जन्मदिवस और 17वें पदाभिषेक दिवस का भव्य आयोजन "महाश्रमणोत्सव" के रूप में आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री दीप कुमार जी ठाणा-२ के सानिध्य में तेरापंथी सभा- सिंकदराबाद द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशाल हॉल खचाखच भरा हुआ था, बाहर तक लोग खड़े थे।
मुनि श्री दीप कुमारजी ने कहा -आचार्य श्री महाश्रमण जी स्व और पर कल्याण में रत है। स्वयं की आत्मा के कल्याण की उत्कृष्ट साधना कर रहे हैं तो दूसरों को भी आत्म कल्याण की दिशा में जीने का भारी प्रयत्न करा रहे हैं। आचार्य श्री जहां धर्मसंध के शासक है तो साधक भी हैं। प्रतिकूल स्थितियों में भी शासना करते हुए, साधना की ऊँचाई पर स्थित है। वे कीर्तिमान पुरुष है। यात्राओं के अद्‌भुत कीर्तिमान बनाए है। आचार्य श्री आगम संगायक है। आगम वाणी के साथ प्रवचन कराते हैं, आगमों का संपादन कराते हैं, साधु-साध्वियों को आगम स्वाध्याय की पावन प्रेरणा दिराते हैं। मुनिश्री ने आगे कहा- हम सौभाग्यशाली है कि ऐसे धर्मगुरु हमें प्राप्त हुए हैं। इस अवसर पर संकल्प करते है कि उनका जो आदेश निर्देश होगा उस दिशा में हमारे कदम बढ़ेंगे ।

मुनि श्री काव्य कुमार जी ने संचालन करते हुए कहा - आचार्यश्री अनंत शक्ति के अक्षय स्रोत है । वे संघ के पावर हाउस है एवं पूरे संघ को पावर सप्लाई करते हैं । आचार्य प्रवर का जीवन अनेक विलक्षण विशेषताओं का पुंज है।

कार्यक्रम में मंगलाचरण हैदराबाद कन्यामंडल की कन्याओं ने किया। तेरापंथी सभा सिंकदाबाद के अध्यक्ष सुशीलजी संचेती, ते. यु.प. अध्यक्ष राहुलजी गोलछा , ते.म.म. मंत्री निशाजी सेठिया, टी.पी..फ मंत्री अणुव्रतजी सुराणा, श्री जैन सेवा सेवा संघ के कोषाध्यक्ष सुरेश जी सुराणा , महासभा से लक्ष्मीपतजी बैद, लक्ष्मीपत डूंगरवाल आदि ने विचारों की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ किशोर मंडल द्वारा गीत की प्रस्तुति दी गई । शांताजी बैद, निर्मला जी बैद,और हर्ष लता जी दूधोडिया ने गीतिका प्रस्तुत की जो आकर्षण का केन्द्र रही। ते.म.म और ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं द्वारा गीत की प्रस्तुति जो 65 बहनों द्वारा दी गई। किशोर मंडल के किशोर ने भी गीतिका द्वारा अभिवंदना की|
आभार ज्ञापन सभा मंत्री हेमंतजी संचेती द्वारा किया गया। समापन, संघ- गान के साथ हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनिश्रीकाव्य कुमारजी ने किया।
सभा द्वारा श्री जैन सेवा संघ के अध्यक्ष श्री उमेश जी बागरेचा व पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया ।
कार्यक्रम के संयोजक श्री बाबुलालजी बेंगाणी, श्री हुकमीचंद जी कोटचा, श्री कनकमल जी बैद, श्री दीपक जी सांखला ने सभी व्यवस्थाओं को कुशलता पूर्वक संपादित किया ।

अक्षय तृतीया पर्व का आयोजन ! वर्षीतप के हुए पारणे।"भारतीय संस्कृति का मूल-तप - मुनि दीप कुमार 20/4/2026नेक्लेस प्राइड।सि...
26/04/2026

अक्षय तृतीया पर्व का आयोजन !

वर्षीतप के हुए पारणे।

"भारतीय संस्कृति का मूल-तप
- मुनि दीप कुमार

20/4/2026

नेक्लेस प्राइड।

सिकंदराबाद स्थित नेकलेस प्राइड के क्लब हाउस में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री दीप कुमारजी के सानिध्य में अक्षय तृतीया पर्व का आयोजन वर्षीतप करने वाले पारणे के रूप में तेरापंथी सभा सिंकदराबाद द्वारा किया गया । महेन्द्रजी लूणावत, मोहनीदेवी कोठारी, मधुदेवी कोठारी ने वर्षीतप के पारणे किए। सभी-संस्थाओं द्वारा वर्षीतप करने वालो का सम्मान किया गया मुनिश्री दीप कुमारनी ने कहा- भारतीय संस्कृतिका मूल तप है। संसार की जितनी समस्याएं हैं तपस्या में उसका समाधान संभव है। तपस्या बहुत पवित्र कार्य है। वर्षीतप एक बड़ी साधना है। जहां आज आदमी खाने के प्रति इतना आसक्त है वहां वर्षीतप किसी आश्चर्य से कम नहीं। आज का दिन भगवान ऋषभ के साथ जुड़ा हुआ है। करीब 13 महिनों की तपस्या पारणा हुआ था आज के दिन पड़पोते श्रेयांश कुमार के हाथों से इक्षु रस के द्वारा। भगवान के पारणे के साथ ही भिक्षा विधि का भी प्रवर्तन हो गया। भगवान ऋषभ का जीवन समग्र था। जिन्होंने समाज के लिए भी अपना समय लगाया बाद में साधना में भी समय लगाया। इस युग के प्रथम राजा, प्रथम मुनि, प्रथम भिक्षाचर, प्रथम तीर्थंकर कहलाए । मुनिश्री ने आगे कहा- भगवान ऋषभ का अनुगमन करते हुए हजारों लोग वर्षीतप करते हैं। यह अनुमोदिनीय है। 6 महिने तपस्या के और 6 महिने पारणे के । यथानुकूलता वर्षीतप लक्ष्य बनाना चाहिए। वाणी संयम का वर्षीतप भी करना चाहिए।

संचालन करते हुए मुनि श्री काव्य कुमार जी ने कहा - समय बदलता है हालात बदलते हैं लेकिन कुछ आदर्श ऐसे होते हैं जो हजारों वर्षों बाद भी राह दिखाते हैं और ऐसे ही एक आदर्श है भगवान श्री ऋषभदेव ।

कर्यक्रम में मंगलाचरण कवाडी़गुडा की महिलाओं द्वारा किया गया। ते. म. म. हैदरावाद के द्वारा गीत → संगान किया गया। तेरापंथी सभा अध्यक्ष सुशीलजी संचेती एवं तेरापंथी महासभा की ओर से लक्ष्मीपतजी बैद के विचार प्रकट किए एवं स्वागत किया। आभार ज्ञापन ऋषभजी दुगड़ ने किया।

मुनिश्री दीप कुमारजी व मुनिश्री काव्य कुमार जी का नगर प्रवेश स्वागत समारोह व तेरापंथ - मेरापंथ कार्यशाला का आयोजनआज हैबि...
26/04/2026

मुनिश्री दीप कुमारजी व मुनिश्री काव्य कुमार जी का नगर प्रवेश स्वागत समारोह व तेरापंथ - मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

आज हैबिटेट एलीट, कवाडीगुड़ा में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणणी के सुशिष्य मुनि श्री दीप कुमारजी ठाणा-२ हैदराबाद नगर प्रवेश के उपलक्ष्य में स्वागत समारोह का आयोजन तेरापंथी सभा-सिंकदराबाद द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल की बहनों द्वारा मंगलाचरण के रूप में हुआ । तत्पश्चात सभा, सिकंदराबाद के अध्यक्ष श्री सुशील संचेती, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री राहुल गोलछा, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र घोसल, महिला मंडल की उपाध्यक्ष श्रीमती संगीता गोलछा, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र बोथरा ने मुनिश्री के स्वागत में अपने भावों की अभव्यक्ति दी ।
कवाडीगुड़ा की बहनों द्वारा स्वागत गीतिका व ज्ञानशाला के बच्चों द्वारा रोचक प्रस्तुति दी गई ।

मुनिश्री दीप कुमारजी ने कहा-संत आते हैं तब अपने साथ संयम, साधना और संस्कारों की गंगा लेकर आते है।
हम हैदराबाद में गुरु आज्ञा से आए हैं। हैदराबाद की श्रद्धा, भक्ति और प्रेम देखकर मेरा मन आल्हादित है। हैदराबाद में अच्छी संख्या में श्रद्धालु परिवार बसते हैं। हम यहां श्रावक समाज की सार- संभाल के लिए आए हैं। हमारी आत्म-साधना अच्छे से चले और श्रावक समाज भी लाभान्वित हो ऐसा प्रयास रहेगा।

हम सौभाग्यशाली हैं हमे जिनशासन मिला उसमें तेरापंथ मिला । एक गुरु की अनुशासना में सम्पूर्ण धर्मसंघ गतिमान है। हम दो केन्द्रों की आराधना निरन्तर करते रहे। आत्मा के केन्द्र और गुरु के केन्द्र की ।

मुनि श्री काव्य कुमार जी ने कहा - आज देव गुरु धर्म के पुण्य प्रताप से गुरु महाश्रमण के आशीर्वाद से मुनि श्री दीप कुमार जी के श्रम से और हैदराबाद श्रावक समाज की जागरूक सेवा से मुनिश्री का हैदराबाद में निर्विघ्न रूप से पधारणा हुआ है । हैदराबाद के संपूर्ण श्रावक समाज में आपसी सौहार्द
और सहयोग की भावना निरंतर बढ़ती रहे ।
जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा के तत्वावधान में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद द्वारा “तेरापंथ - मेरा पंथ” विषय पर एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला के मुख्य वक्ता उपासक एवं प्रशिक्षक सूरत से समागत *श्री राहुल जी खोखावत* ने अपनी सरल, प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी शैली में आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दि वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला में तेरापंथ के सिध्दान्त, मान्यताओं, मर्यादा एवं दान दया पुण्य पाप संवर निर्जराआदि अनेक विषयों पर विस्तृत प्रकाश डाला। पूरे सत्र के दौरान विभिन्न विषयों को प्रसंगों एवं रोचक दृष्टांतो के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
सभा द्वारा श्री राहुल जी खोखावत का सम्मान भी किया गया ।
आभार ज्ञापन मंत्री श्री हेमंत संचेती ने किया।
संचालन श्री लक्ष्मीपत बैद ने किया।

प्रेक्षा प्रणेता, युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर भावभीना आयोजन"करुणा के सागर थे आचार्य महा...
26/04/2026

प्रेक्षा प्रणेता, युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर भावभीना आयोजन
"करुणा के सागर थे आचार्य महाप्रज्ञ" — मुनि दीप कुमार
📍 दिनांक: 13 अप्रैल 2026
📍 स्थान: अनाजपुर, तेलंगाना
तेलंगाना के अनाजपुर ग्राम स्थित जिला परिषद् हाई स्कूल में प्रेक्षा प्रणेता, युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री दीप कुमारजी (ठाणा-2) के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ किशोर मंडल तथा हैदराबाद-सिकंदराबाद क्षेत्र के अनेक गणमान्य श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर था।
मुनि श्री दीप कुमारजी ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा—
"आचार्य महाप्रज्ञ करुणा के सागर थे। उनके नयनों में करुणा का सतत प्रवाह था। जो भी उनके सान्निध्य में आता, वह उनकी करुणा से आप्लावित हुए बिना नहीं रह पाता था।"
उन्होंने आगे कहा कि आचार्य महाप्रज्ञजी का जीवन "बूँद से सागर" बनने की अद्भुत यात्रा है—एक छोटे से गांव से उठकर वे ज्ञान, साधना और प्रज्ञा के ऐसे विराट स्वरूप बने, जो स्वयं एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय थे।
उनके जीवन में विद्वता और विनम्रता का अद्वितीय संगम था। संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान होते हुए भी उनकी विनयशीलता अनुपम थी। गुरु के प्रति उनका समर्पण और विनय ही उन्हें महानता के शिखर तक ले गया। आज वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमणजी में हम आचार्य महाप्रज्ञजी की ही दिव्य झलक का अनुभव करते हैं।
मुनि श्री काव्य कुमारजी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा—
"आचार्य महाप्रज्ञ केवल एक नाम नहीं, बल्कि प्रज्ञा का महासागर हैं। उनका जीवन बिंदु से सिंधु बनने की जीवंत प्रेरक गाथा है।"
कार्यक्रम के अंतर्गत अ.भा.ते.यु.प की ओर से श्री राहुल जी श्यामसुखा एवं ते.यु.प अध्यक्ष राहुल जी गोलछा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। युवाओं द्वारा भक्ति गीतों का सुमधुर संगान किया गया, जिसने वातावरण को और अधिक भावविभोर बना दिया।
आभार ज्ञापन श्री खुशहालजी भंसाली द्वारा किया गया।
📌 विशेष सूचना:
मुनि श्री दीप कुमारजी का चातुर्मास इस वर्ष सिकंदराबाद में घोषित किया गया है।
दिनांक 15 अप्रैल को प्रातः 7:51 बजे मुनिवृंदों का हैदराबाद नगर सीमा में मंगल प्रवेश होगा, जिसके उपरांत नगर भ्रमण का कार्यक्रम निरंतर जारी रहेगा।

15/04/2026

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Terapanth Bhavan, DV Colony, Secunderabad/, Telangana
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