श्री श्री 1008 श्री इच्छापूर्ण ईटावा बालाजी

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श्री श्री 1008 श्री इच्छापूर्ण  ईटावा बालाजी यह एक देवस्थान हैं जहा शनिवार और मंगलवार को लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते है
(1)

19/03/2026

*शुप्रभात मित्रों. आपका दिन मंगलमय और आनंदमय हो.
आईए आनेवाले पावन पर्व के बारे में जानें जिससे हम अपनी मां की सेवा और प्रार्थना कर सकें. ⚛️ चैत्र नवरात्र - 2026 ⚛️*
*{19 मार्च 2026 गुरुवार}*

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होता है। पंचांग के अनुसार, 19 मार्च 2026, गुरुवार से चैत्र नवरात्र शुरू होंगे और समापन 27 मार्च को श्री रामनवमी पर होगा। 19 मार्च से ही से हिंदू नववर्ष (2083) की भी शुरुआत होगी। परंपरानुसार, चैत्र नवरात्र के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की उपासना की जाती है, जिससे जातक पर मां दुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है।

* चैत्र नवरात्र का मुख्य उद्देश्य शक्ति की आराधना करना और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान देवी की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इस नवरात्र मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आने वाली है। तो आइए जानते हैं कलश स्थापना इत्यादि के बारे में-:

*🔸चैत्र नवरात्र की तिथि-:*
* पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार को सुबह 6 बजकर 54 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर होगा।

*🔸घट (कलश) स्थापना का शुभ मुहूर्त-:*
{19 मार्च 2026, गुरुवार}
* चैत्र नवरात्र के दिन घटस्थापना का सबसे पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 55 मिनट से सुबह 07 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।

* दूसरा शुभ अभिजीत मुहूर्त रहेगा जिसका समय दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

*🔸नवरात्रि के नौ दिन और देवी के स्वरूप-:*
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है-:

19 मार्च- मां शैलपुत्री
20 मार्च- मां ब्रह्मचारिणी
21 मार्च- मां चंद्रघंटा
22 मार्च- मां कूष्मांडा
23 मार्च- मां स्कंदमाता
24 मार्च- मां कात्यायनी
25 मार्च- मां कालरात्रि
26 मार्च- मां महागौरी (अष्टमी)

27 मार्च- मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)

*🔸चैत्र नवरात्र पूजन विधि-:*
* चैत्र नवरात्र के दिन घर की साफ-सफाई करके पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद कलश स्थापना की जाती है, जिसमें मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश रखा जाता है और उस पर आम या अशोक इत्यादि के पत्ते व नारियल स्थापित किया जाता है. फिर श्रद्धालु संकल्प लेकर व्रत और पूजा का आरंभ करते हैं। नवरात्र के नौ दिनों तक प्रतिदिन दीपक जलाकर, धूप-अगरबत्ती करके, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित कर मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है तथा दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ किया जाता है।

🕉️

सभी भक्तजनों को सनातनी वैदिक नववर्ष की बहुत बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं

@टॉप फ़ैन

.                         एक टके का चमत्कारएक बार राजा अज जंगल में भ्रमण करने के लिए गए थे तो उन्हें एक बहुत ही सुंदर सर...
08/01/2026

. एक टके का चमत्कार

एक बार राजा अज जंगल में भ्रमण करने के लिए गए थे तो उन्हें एक बहुत ही सुंदर सरोवर दिखाई दिया उस सरोवर में एक कमल का फूल था जो अति सुंदर प्रतीत हो रहा था !

उस कमल को प्राप्त करने के लिए राजा अज सरोवर में चले गए किंतु यह क्या राजा अज जितना भी उस कमल के पास जाते वह कमल उनसे उतना ही दूर हो जाता और राजा अज उस कमल को नहीं पकड़ पाया !

अंततः आकाशवाणी हुई कि हे राजन आप नि:संतान है आप इस कमल के योग्य नहीं है इस भविष्यवाणी ने राजा अज के हृदय में एक भयंकर आघात किया !

राजा अज अपने महल में लौट आए और चिंता ग्रस्त रहने लगे क्योंकि उन्हें संतान नही थी जबकि वह भगवान शिव के परम भक्त थे !

भगवान शिव ने उनकी इस चिंता को ध्यान में लिया और उन्होंने धर्मराज को बुलाया और कहा तुम किसी ब्राह्मण को अयोध्या नगरी पहुँचाओ जिससे राजा अज को संतान की प्राप्ति के आसार हो !

एक गरीब ब्राह्मण और ब्राह्मणी सरयू नदी के किनारे कुटिया बनाकर रहते थे !

एक दिन वे ब्राह्मण राजा अज के दरबार में गए और उनसे अपनी दुर्दशा का जिक्र कर भिक्षा मांगने लगे !

राजा अज ने अपने खजाने में से उन्हें सोने की अशर्फियां देनी चाही लेकिन ब्राह्मण नहीं कहते हुए मना कर दिया कि यह प्रजा का है आप अपने पास जो है उसे दीजिए तब राजा अज ने अपने गले का हार उतारा और ब्राह्मण को देने लगे किंतु ब्राह्मण ने मना कर दिया कि यह भी प्रजा की ही संपत्ति है !

इस प्रकार राजा अज को बड़ा दुख हुआ कि आज एक गरीब ब्राह्मण उनके दरबार से खाली हाथ जा रहा है तब राजा अज शाम को एक मजदूर का भेष बना कर नगर में किसी काम के लिए निकल जाते हैं!

चलते -चलते वह एक लौहार के यहाँ पहुंचते है और अपना परिचय दिए बिना ही वहां विनय कर काम करने लग जाते हैं पूरी रात को हथौड़े से लोहे का काम करते हैं जिसके बदले में उन्हें सुबह एक टका मिलता है !

राजा एक टका लेकर ब्राह्मण के घर पहुंचते हैं लेकिन वहां ब्राह्मण नहीं था उन्होंने वह एक टका ब्राह्मण की पत्नी को दे दिया और कहा कि इसे ब्राह्मण को दे देना !

जब ब्राह्मण आया तो ब्राह्मण की पत्नी ने वह टका ब्राह्मण को दिया और ब्राह्मण ने उस टका को जमीन पर फेंक दिया तभी एक आश्चर्यजनक घटना हुई ब्राह्मण ने जहां टका फेंका था वहां गड्ढा हो गया ब्राह्मण ने उस गढ्ढे को और खोदा तो उसमें से सोने का एक रथ निकला तथा आसमान में चला गया।

इसके पश्चात ब्राह्मण ने और खोदा तो दूसरा सोने का रथ निकला और आसमान की तरफ चला गया इसी प्रकार से नौ सोने के रथ निकले और आसमान की तरफ चले गए और जब दसवाँ रथ निकला तो उस पर एक बालक था।

और वह रथ जमीन पर आकर ठहर गया !

ब्राह्मण उस बालक को लेकर राजा अज के दरबार में पहुंचे और कहा राजन - इस पुत्र को स्वीकार कीजिए यह आपका ही पुत्र है जो एक टका से उत्पन्न हुआ है।

तथा इसके साथ में सोने के नौ रथ निकले जो आसमान में चले गए जबकि यह बालक दसवें रथ पर निकला इसलिए यह रथ तथा पुत्र आपका है इस प्रकार से दशरथ जी का जन्म हुआ था !

महाराज दशरथ का असली नाम मनु था और ये दसों दिशाओं में अपना रथ लेकर जा सकते थे इसीलिए दशरथ नाम से प्रसिद्ध हुये !!
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 #ईश्वर का  #शुक्रिया अदा करने के लिए 10 श्रेष्ठ  #कारण:----1.  #टायर_चलने पर  #घिसते हैं, लेकिन  #पैर_के_तलवे  #जीवनभर_...
30/12/2025

#ईश्वर का #शुक्रिया अदा करने के लिए 10 श्रेष्ठ #कारण:----

1. #टायर_चलने पर #घिसते हैं, लेकिन #पैर_के_तलवे #जीवनभर_दौड़ने के बाद भी #नए जैसे रहते हैं।

2. #शरीर 75% पानी से बना है, फिर भी लाखों #रोमकूपों के बावजूद एक #बूंद भी #लीक नहीं होती।

3. कोई भी वस्तु #बिना_सहारे नहीं खड़ी रह सकती, लेकिन यह #शरीर खुद को #संतुलित रखता है।

4. कोई #बैटरी_बिना_चार्जिंग के #नहीं_चलती, लेकिन #हृदय जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके #धड़कता है।

5. कोई #पंप हमेशा नहीं चल सकता, लेकिन #रक्त पूरे #जीवनभर बिना #रुके शरीर में बहता रहता है।

6. दुनिया के सबसे महंगे #कैमरे भी सीमित हैं, लेकिन #आंखें हजारों #मेगापिक्सल की #गुणवत्ता में हर दृश्य कैद कर सकती हैं।

7. कोई #लैब हर #स्वाद टेस्ट नहीं कर सकती, लेकिन #जीभ बिना किसी उपकरण के हजारों स्वाद पहचान सकती है।

8. सबसे #एडवांस्ड सेंसर भी सीमित होते हैं, लेकिन #त्वचा हर हल्की-से-हल्की #संवेदना को #महसूस कर सकती है।

9. कोई भी #यंत्र हर ध्वनि नहीं निकाल सकता, लेकिन #कंठ से हजारों #फ्रीक्वेंसी की आवाजें पैदा हो सकती हैं।

10. कोई #डिवाइस पूरी तरह ध्वनियों को #डिकोड नहीं कर सकती, लेकिन कान हर ध्वनि को समझकर अर्थ निकाल लेते हैं।

ईश्वर ने हमें जो #अमूल्य वस्तुएं दी हैं, उनके लिए उसका #आभार मानिए और उससे #शिकायत करने का हमें कोई #अधिकार नहीं है।

#अच्छा_लिखना ही सब कुछ
नहीं होता #जनाब ,

#पढ़ने वाले भी तो
#दिलदार होने चाहिएं...!!

जय जय श्री राम
जय बजरंग बली की

❤️‍🩹🥀😶🙏

.                       ईश्वर का न्यायएक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले. गुरुजी को ज्यादा इध...
20/12/2025

. ईश्वर का न्याय

एक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले. गुरुजी को ज्यादा इधर-उधर की बातें करना पसंद नहीं था, कम बोलना और शांतिपूर्वक अपना कर्म करना ही गुरू को प्रिय था. परन्तु शिष्य बहुत चपल था, उसे हमेशा इधर-उधर की बातें ही सूझती, उसे दूसरों की बातों में बड़ा ही आनंद आता था.

चलते हुए जब वो तालाब से होकर गुजर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि एक झींवर नदी में जाल डाले हुए है. शिष्य यह सब देख खड़ा हो गया और झींवर को ‘अहिंसा परमोधर्म’ का उपदेश देने लगा.

लेकिन झींवर कहाँ समझने वाला था, पहले उसने टालमटोल करनी चाही और बात जब बहुत बढ़ गयी तो शिष्य और झींवर के बीच झगड़ा शुरू हो गया. यह झगड़ा देख गुरूजी जो उनसे बहुत आगे बढ़ गए थे, लौटे और शिष्य को अपने साथ चलने को कहा एवं शिष्य को पकड़कर ले चले.

गुरूजी ने अपने शिष्य से कहा- “बेटा हम जैसे साधुओं का काम सिर्फ समझाना है, लेकिन ईश्वर ने हमें दंड देने के लिए धरती पर नहीं भेजा है!” शिष्य ने पुछा- “महाराज को न तो बहुत से दण्डों के बारे में पता है और न ही हमारे राज्य के राजा बहुतों को दण्ड देते हैं. तो आखिर इसको दण्ड कौन देगा?”

शिष्य की इस बात का जवाब देते हुए गुरूजी ने कहा- “बेटा! तुम निश्चिंत रहो इसे भी दण्ड देने वाली एक अलौकिक शक्ति इस दुनिया में मौजूद है जिसकी पहुँच सभी जगह है… ईश्वर की दृष्टि सब तरफ है और वो सब जगह पहुँच जाते हैं.

इसलिए अभी तुम चलो, इस झगड़े में पड़ना गलत होगा, इसलिए इस झगड़े से दूर रहो..! शिष्य गुरुजी की बात सुनकर संतुष्ट हो गया और उनके साथ चल दिया.

इस बात को ठीक दो वर्ष ही बीते थे कि एक दिन गुरूजी और शिष्य दोनों उसी तालाब से होकर गुजरे, शिष्य भी अब दो साल पहले की वह झींवर वाली घटना भूल चूका था.. उन्होंने उसी तालाब के पास देखा कि एक चुटीयल साँप बहुत कष्ट में था उसे हजारों चीटियाँ नोच-नोच कर खा रही थीं. शिष्य ने यह दृश्य देखा और उससे रहा नहीं गया, दया से उसका ह्रदय पिघल गया था. वह सर्प को चींटियों से बचाने के लिए जाने ही वाला था कि गुरूजी ने उसके हाथ पकड़ लिए और उसे जाने से मना करते हुए कहा-“ बेटा! इसे अपने कर्मों का फल भोगने दो.. यदि अभी तुमने इसे रोकना चाहा तो इस बेचारे को फिर से दुसरे जन्म में यह दुःख भोगने होंगे क्योंकि कर्म का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है..

शिष्य ने गुरूजी से पुछा- “गुरूजी इसने कौन-सा कर्म किया है जो इस दुर्दशा में यह फँसा है?”

गुरू महाराज बोले- “यह वही झींवर है जिसे तुम पिछले वर्ष इसी स्थान पर मछली न मारने का उपदेश दे रहे थे और वह तुम्हारे साथ लड़ने के लिए आग-बबूला हुआ जा रहा था. वे मछलियाँ ही चींटी है जो इसे नोच-नोचकर खा रही है..”

यह सुनते ही बड़े आश्चर्य से शिष्य ने कहा- गुरूजी, यह तो बड़ा ही विचित्र न्याय है.

गुरुजी ने कहा- “बेटा! इसी लोक में स्वर्ग-नरक के सारे दृश्य मौजूद हैं, हर क्षण तुम्हें ईश्वर के न्याय के नमूने देखने को मिल सकते हैं. चाहे तुम्हारे कर्म शुभ हो या अशुभ उसका फल तुम्हें भोगना ही पड़ता है. इसलिए ही वेद में भगवान ने उपदेश देते हुए कहा है- अपने किये कर्म को हमेशा याद रखो, यह विचारते रहो कि तुमने क्या किया है, क्योंकि ये सच है कि तुमको वहाँ भोगना पड़ेगा.. जीवन का हर क्षण कीमती है इसलिए इसे बुरे कर्म के साथ व्यर्थ जाने मत दो. अपने खाते में हमेशा अच्छे कर्मों की बढ़ोत्तरी करो क्योंकि तुम्हारे अच्छे कर्मों का परिणाम बहुत सुखद रूप से मिलेगा इसका उल्टा भी उतना ही सही है, तुम्हारे बुरे कर्मों का फल भी एक दिन बुरे तरीके से भुगतना पड़ेगा. इसलिए कर्मों पर ध्यान दो क्योंकि वो ईश्वर हमेशा न्याय ही करता है..”

शिष्य गुरुजी की बात स्पष्ट रूप से समझ चूका था…

दोस्तों, हम चाहे इस बात पर विश्वास करें या नहीं लेकिन यह शत्-प्रतिशत सच है कि ईश्वर हमेशा सही न्याय करते हैं. और उनके न्याय करने का सीधा सम्बन्ध हमारे अपने कर्मों से है. यदि हमने अपने जीवन में बहुत अच्छे कर्म किये हैं या अच्छे कर्म कर रहे हैं तो उसी के अनुरूप ईश्वर हमारे साथ न्याय करेंगे. यह जीवन हमें इसलिए मिला है ताकि हम कुछ ऐसे कार्य करें जिसको देखकर ईश्वर की आँखों में भी हमारे प्रति प्रेम छलक उठे!!!

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19/12/2025

. 1. सत्य कथा

(पढ़ने के बाद आप सब भी अपनी ज़िंदगी जीने का अंदाज़ बदल देंगे)

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद ऐक बार नेल्सन मांडेला अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ एक रेस्तरां में खाना खाने गए। सबने अपनी अपनी पसंद का खाना आर्डर किया और खाना आने का इंतजार करने लगे।
उसी समय मांडेला की सीट के सामने वाली सीट पर एक व्यक्ति अपने खाने का इंतजार कर रहा था। मांडेला ने अपने सुरक्षा कर्मी से कहा कि उसे भी अपनी टेबल पर बुला लो। ऐसा ही हुआ। खाना आने के बाद सभी खाने लगे, *वो आदमी भी अपना खाना खाने लगा, पर उसके हाथ खाते हुए कांप रहे थे।
खाना खत्म कर वो आदमी सिर झुका कर रेस्तरां से बाहर निकल गया। उस आदमी के जाने के बाद मंडेला के सुरक्षा अधिकारी ने मंडेला से कहा कि वो व्यक्ति शायद बहुत बीमार था, खाते वख़्त उसके हाथ लगातार कांप रहे थे और वह ख़ुद भी कांप रहा था।
मांडेला ने कहा नहीं ऐसा नहीं है। वह उस जेल का जेलर था, जिसमें मुझे कैद रखा गया था। जब कभी मुझे यातनाएं दी जाती थीं और मै कराहते हुए पानी मांगता था तो ये मेरे ऊपर पेशाब करता था।

मांडेला ने कहा मै अब राष्ट्रपति बन गया हूं, उसने समझा कि मै भी उसके साथ शायद वैसा ही व्यवहार करूंगा। पर मेरा चरित्र ऐसा नहीं है। मुझे लगता है बदले की भावना से काम करना विनाश की ओर ले जाता है। वहीं धैर्य और सहिष्णुता की मानसिकता हमें विकास की ओर ले जाती है।
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2. सत्य कथा

(पढ़ने के बाद आप सब भी अपनी ज़िंदगी जीने का अंदाज़ बदल देंगे)

मुंबई से बैंगलुरू जा रही ट्रेन में सफ़र के दौरान टीसी ने सीट के नीचे छिपी लगभग तेरह/चौदह साल की ऐक लड़की से कहा

टीसी "टिकट कहाँ है?"
काँपती हुई लडकी "नहीं है साहब।"
टी सी "तो गाड़ी से उतरो।"

इसका टिकट मैं दे रही हूँ।............पीछे से ऐक सह यात्री ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई जो पेशे से प्रोफेसर थी ।

ऊषा जी - "तुम्हें कहाँ जाना है ?"
लड़की - "पता नहीं मैम!"
ऊषा जी - "तब मेरे साथ चलो, बैंगलोर तक!"
ऊषा जी - "तुम्हारा नाम क्या है?"
लड़की - "चित्रा"

बैंगलुरू पहुँच कर ऊषाजी ने चित्रा को अपनी जान पहचान की ऐक स्वंयसेवी संस्था को सौंप दिया और ऐक अच्छे स्कूल में भी एडमीशन करवा दिया। जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली हो गया जिसके कारण चित्रा से संपर्क टूट गया, कभी-कभार केवल फोन पर बात हो जाया करती थी।

करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को (अमरीका) बुलाया गया । लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्सन पर गईं तो पता चला पीछे खड़े एक खूबसूरत दंपत्ति ने बिल चुका दिया था।

ऊषाजी "तुमने मेरा बिल क्यों भरा?"

मैम, यह मुम्बई से बैंगलुरू तक के रेल टिकट के सामने कुछ भी नहीं है ।

ऊषाजी "अरे चित्रा!" ...

चित्रा और कोई नहीं बल्कि इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन सुधा मुर्ति थीं जो इंफोसिस के संस्थापक श्री नारायण मूर्ति की पत्नी हैं।
यह लघु कथा उन्ही की लिखी पुस्तक "द डे आई स्टाॅप्ड ड्रिंकिंग मिल्क" से ली गई है।

कभी कभी आपके द्वारा की गई किसी की सहायता, किसी का जीवन बदल सकती एमहै।
यदि जीवन में कुछ कमाना है तो पुण्य अर्जित कीजिये, क्योंकि यही वो मार्ग है जो स्वर्ग तक जाता है....
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कभी भी अपने भाग्य को मत कोसिएसदैव याद रखिए कि.. आपके भाग्य से भी ऊंचा आपका कर्म है  जो आपके हाथों में है।               ...
02/12/2025

कभी भी अपने भाग्य को मत कोसिए
सदैव याद रखिए कि..
आपके भाग्य से भी ऊंचा आपका कर्म है
जो आपके हाथों में है।
हर समस्या के तीन समाधान होते हैं
स्वीकार करना, बदल देना
या फिर छोड़ देना !
🧡🩶❤️🩷💛
जय जय श्री राम
जय बजरंग बली
सुप्रभात

02/12/2025

जिसका घर हनुमान जी की कृपा से चलता है, वो इस खाली जगह को पुरी करो ।
जय श्री......॥
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Sawai Madhopur
322701

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