23/01/2017
जय गौमाता जय गोपाल
सनातन धर्म में गीता गंगा गौ गायत्री इन सब के महत्व से सभी धर्म प्रेमी भाई बहन भली भांति परिचित है। पूजनीय गौमाता की दुर्दशा देख कर किस सह्रदय सज्जन का हृदय व्यथित नहीं होता है। भगवान् राम, कृष्णा की प्यारी गौमाता आज सडको पर असहाय भोजन, पानी के लिए चारो ओर घूमती फिर रही है। हम लोग प्रायः देखते है कि गोमाता रास्तो में , रेलवे स्टेशन , बस अड्डे , सार्वजनिक स्थानों पे आवारा घूमती रहती है। धन के कुछ लोभी और स्वार्थी लोग इनका दूध निकालने के बाद या अनुपयोगी समझ के अज्ञानता और लोभवश इन्हें खुला छोड़ देते है और इन्हें कष्ट पाने के लिए मजबूर करते है। कितनी ही गौमाता रोज कसाईयो के हाथो काट दी जा रही है कितनी ही घायल , असहाय डंडे खाती हुई सड़को पर देखी जा सकती है। ऐसे तमाम वीभत्स्य द्रश्यो को देख के हम सब के मन में गौमाता के लिए कुछ करने की चाह उठती है पर अपनी व्यस्ततम जीवनशैली में हम कोई भी ऐसा मौका शीघ्रता से नहीं ढून्ढ पाते है। भगवद्कृपा से कुछ ऐसा संयोग बना है की हम अपने अपने कार्यक्षेत्र में रहते हुए ही इन गौमाता की सेवा में योगदान कर सकते है।
ऐसी ही निराश्रित और असहाय गौमाता के लिए हमारे पूजनीय हनुमान दास जी महाराज ने भगवद प्रेरणा से मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागोद कस्बे के पास रहिकवारा नामक गाव में गोशाला का निर्माण प्रारम्भ किया है। इस पावन स्थान पर करीब २ km की चहारदीवारी में गायो के रहने के लिए अत्यंत ही सुन्दर स्थान को चुना गया है। ये गौशाला अपने प्रारम्भ के ही दिनों में करीब सात हज़ार पाँच सौ (7500 ) गोवंश के लिए आश्रय स्थान बनी हुई है।
यहाँ पर ये गौवंश निर्भय हो कर विचरण करते है। इस महान और पुनीत कार्य के लिए बृहत मात्रा में श्रमबल, धनबल की आवश्यकता हुई है। गौवंश के प्रतिदिन के भोजन के लिए अत्यधिक मात्रा में चारे की आवश्यकता हो रही है। अनेको ट्राली भूसा ,चारा की व्यवस्था प्रतिदिन करनी पड़ रही है। इनके अलावा गायो के रहने के लिए शेड , पानी सबकी व्यवस्था के लिए आप सभी के सहयोग की नितांत आवश्यक्ता है। इस पुनीत कार्य में IIT Roorkee के कई छात्र महाराज जी का सहयोग कर रहे है। आप सभी से अनुरोध है की इस पुनीत सेवा कार्य में तन मन धन सबसे सहयोग करके गोमाता के लिए अपने कर्त्तव्य को निभाए। जिस व्यक्ति के पास जिस भी प्रकार की सामर्थ्य है उससे सहयोग करे और हो सके तो यहाँ पर एक बार दर्शन के लिए जा कर स्वयं गौमाता का सेवानंद ले।