Bhaluni Dham

Bhaluni Dham भलुनिधाम

दिनारा प्रखंड मुख्यालय से सात किलोमीटर पूरब भलुनी स्थित यक्षिणी भवानी धाम अति प्राचीन व प्रसिद्ध शक्तिपीठ हैं। मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। श्रीमद देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण के अलावे वाल्मीकि रामायण में भी यक्षिणी भवानी का वर्णन मिलता है। मान्यता के अनुसार देवासुर संग्राम के बाद अहंकार से भरे इंद्र को यक्षिणी देवी ने यहीं सत्य का पाठ पढ़ाया था। इंद्र ने देवी दर्शन के पश्चात उनकी स्थापना की

थी। कहा गया है कि हंस पृष्ठे सुरज्जेष्ठा सर्पराज्ञाहिवाहना, इन्द्रस्यच तपो भूमिरू शक्तिपीठ कंचन तीरे। यक्षिणी नाम विख्याता त्रिशक्तिश्च समन्विता।
पुराणों व अन्य धर्म ग्रंथों के अनुसार देवी अति प्राचीन हैं। यक्षिणी मां दुर्गा का ही एक नाम है। मंदिर में देवी की प्रतिमा के अलावे भगवान शंकर व कुबेर की प्राचीन प्रतिमा भी स्थापित है, जो पूर्व मध्यकालीन है। मंदिर का पुनर्निर्माण आधुनिक काल में हुआ है। हालांकि देवी की प्रतिमा सहित मंदिर में स्थापित अन्य प्रतिमाएं पूर्वमध्यकालीन हैं। मंदिर के बाहर एक अति प्राचीन व विशाल तालाब है। आसपास में वन के अवशेष आज भी विद्यमान हैं। जिसमें काफी संख्या में बंदर रहते हैं।
मंदिर परिसर की देख भाल एवं पूजा पाठ भलुनी, खरिका व बडीहां के पंडा द्वारा किया जाता है।

https://youtu.be/4ggEajh26Z4?si=IoYJO0ZDLLiUSOXR
17/02/2024

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या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युत शं.....

https://youtu.be/sxkDpKymB0M?feature=shared
17/02/2024

https://youtu.be/sxkDpKymB0M?feature=shared

ॐ सरस्वती नमो नमः, मां सरस्वती नमो नमः। विद्या दायिनी नमो नमः, हंस वाहिनी नमो नम:।।

ॐ महादेव्यै विह्महे दुर्गायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।।जय मईया यक्षिणी भवानी🙏🙏
19/04/2021

ॐ महादेव्यै विह्महे दुर्गायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।।
जय मईया यक्षिणी भवानी
🙏🙏

कल से शुरु हो रहें है चैत्र नवरात्रि ऐसें करें कलश स्थापना जानें शुभ मुहूर्त,और पूजा विधि हिंदू धर्म में शक्ति की देवी म...
12/04/2021

कल से शुरु हो रहें है चैत्र नवरात्रि ऐसें करें कलश स्थापना जानें शुभ मुहूर्त,और पूजा विधि

हिंदू धर्म में शक्ति की देवी मां दुर्गा की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल दिन मंगलवार से प्रारंभ हो रहा हैं। हिंदू पंचांग में चैत्र मास को हिंदू नववर्ष का प्रथम मास माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है और मां दुर्गा के भक्त इस दिन पूरी आस्था के साथ घटस्थापना और जवारे बो कर नौ दिनों तक श्रद्धापूर्वक माता की पूजा करते हैं।

नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां भगवती के एक स्वरुप (श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कुष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री) की पूजा की जाती है । यह क्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को प्रात: काल शुरू होता है । सर्वप्रथम कलश स्थापना की जाती है । आइए जानते हैं कैसे करते हैं घट स्थापना-

घटस्थापना शुभ मुहूर्त:
घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 05:58 से 10:14 Am तक
घटस्थापना का अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:56 Am से 12:47 Pm

घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 12, 2021 को 08:00 Am
प्रतिपदा तिथि समाप्त – अप्रैल 13, 2021 को 10:16 Am

घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्त्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करें। कार्यरत शक्ति तत्त्व के कारण वास्तु में विद्यमान कष्टदायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं ।

सामग्री:
जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र
जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिटटी
पात्र में बोने के लिए जौ
घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश
कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल
मोली (Sacred Thread)
इत्र
साबुत सुपारी
दूर्वा
कलश में रखने के लिए कुछ सिक्के
पंचरत्न
अशोक या आम के 5 पत्ते
कलश ढकने के लिए ढक्कन
ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल
पानी वाला नारियल
नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपड़ा
फूल माला

विधि
सबसे पहले जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लें । इस पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाएं । अब एक परत जौ की बिछाएं । इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं । अब फिर एक परत जौ की बिछाएं । जौ के बीज चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे न दबे । इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं । अब कलश के कंठ पर मोली बांध दें । कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें । कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें । कलश में थोड़ा सा इत्र डाल दें ।

कलश में पंचरत्न डालें । कलश में कुछ सिक्के रख दें । कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें । अब कलश का मुख ढक्कन से बंद कर दें । ढक्कन में चावल भर दें । इसके बाद नारियल पर लाल कपड़ा लपेट कर मोली लपेट दें । अब नारियल को कलश पर रखें । शास्त्रों में उल्लेख मिलता है: “अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय,ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै। प्राचीमुखं वित विनाशनाय,तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं”। अर्थात् नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है । नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं, जबकि पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है । इसलिए नारियल की स्थापना सदैव इस प्रकार करनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहें । ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है ।

अब कलश को उठाकर जौ के पात्र में बीचों बीच रख दें । अब कलश में सभी देवी देवताओं का आवाहन करें । "हे सभी देवी देवता और माँ दुर्गा आप सभी नौ दिनों के लिए इस में पधारें ।" अब दीपक जलाकर कलश का पूजन करें । धूपबत्ती कलश को दिखाएं । कलश को माला अर्पित करें । कलश को फल मिठाई अर्पित करके कलश को इत्र समर्पित करें । कलश स्थापना के साथ ही भक्त मां की पूजा-अर्चना प्रारंभ कर देता है ।

घटस्थापना का महत्व
नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। ये नवरात्रि का पहला दिन होता है और इस दिन से नवरात्रि का आरंभ होता है सनातन धर्म में किसी शुभ कार्य को करने से पहले कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है और इसी कलश को शास्त्रों में भगवान गणेश की संज्ञा दी गई है। इस लिए हर पूजा या मंगल कार्य की शुरुआत सर्वप्रथम गणेश जी की वंदना से की जाती है, जिसमें कलश की स्थापना पूरे विधि-विधान करने के बाद ही कोई शुभ कार्य किया जाता है।
चैत्र नवरात्रि शक्ति देवी मां दुर्गा का पर्व है। नौ दिनों तक अलग-अलग माताओं की पूजन विभिन्न तरीको से जैसे – अखंड दीप साधना, व्रत उपवास, दुर्गा सप्तशती व नवार्ण मंत्र का जाप करें। अष्टमी को हवन व नवमी को नौ कन्याओं का पूजन करें।

श्रीमन्नारायण
22/01/2021

श्रीमन्नारायण

Jay Bhawani
10/01/2021

Jay Bhawani

 #जय  #श्रीमन  #नारायण🙏
17/06/2020

#जय #श्रीमन #नारायण
🙏

परम पूज्य संत श्री लक्ष्मी प्रपन जीयर स्वामी जी महाराज 🙏
10/04/2020

परम पूज्य संत श्री लक्ष्मी प्रपन जीयर स्वामी जी महाराज
🙏

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