16/07/2020
🌷।।जय सच्चिदानंद जी।।🌷
श्रावण मास पर श्री सदगुरुदेव जी का आशीर्वाद।
सावन - सावन बरसेया सब हरयाले खेत।
गुरु वचनों का मेह ज्यों, प्रेमी को सुख देत।।
गुरु पूर्ण माह चांद हो, सेवक बने चकोर।
देख-देख मन हर्ष हो, जो नाचत है मोर।।
गुरु सेवक के प्रेम को, जाने गुरु का सिख।
मन मूरख मुग्ध जो, इनको मिले ना भिख।।
सद्ग्रंथों का कथन है, कहता "दासनदास"।
तन मन वारूं गुरु पर,.चरण कंवल की आस।।
।।बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज की जय।।
श्रावण के इस शुभ पवित्र दिवस पर श्री महाराज जी की परम पवित्र प्रेरणा से संगत के प्रति ऐसा उपदेश है सबके समक्ष, सबको पता है, सब देख रहे हैं कि इस महीने आजकल की वर्षा ऋतु में बारिशों में हर एक सूखी हुई डाली भी हरी हो जाती है। कब के सूखे खेत हरे हो जाते हैं। पत्ते-पत्ते ने रंग बदल लिया हर जगह हरियाली नज़र आती है।
इसी प्रकार जैसे गुरु के वचन गुरु का शब्द गुरु का कथन प्रेमी जन को सुख देता है। जिसके हृदय में प्रेम नहीं, यह कभी हो ही नहीं सकता कि उसका खेत हरा हो..। जिसका खेत है ही नहीं तो हरा कैसे होगा? अर्थात जिसके अंदर शुभ भावना, शुभ वासना, शुभ कर्तव्य रूपी खेत नहीं वह भला सतगुरु प्राप्ति कैसे कर सकता है?
यह तब ही संभव है जैसे मोर बादल को देखकर नाचता है,
इसी प्रकार से सद्गुरु का दर्शन करके मन नाचे।
जिसने गुरु दीक्षा धारण की है वह गुरु का सिख अर्थात शिष्य है, जिसने गुरु शिक्षा ली है, मन की शिक्षा नहीं ली, लोगों की शिक्षा नहीं ली तथा किसी और की पढ़ाई या किसी ओर को guider नही बनाया, अतः वह ही गुरु का सच्चा शिष्य हैं तथा सतगुरु अपने इस शिष्य के हमेशा अंग संग सहाय रहते हैं।
अंत में श्री सार प्रभु यह कथन कहते हैं कि मैं एक गुरु पर, गुरु के चरणों पर तन मन वारता हूं, जो कुछ है न्योछावर है सतगुरु के चरणों में।
ऐसे गुरु पर मैं बलिहारी जाऊं कुछ भी हासिल हो तो वह सब सतगुरु पर बलिहार जाएं।
श्री सार प्रभु के दिए इसी उपदेश के तहत हम भी अपना सब कुछ गुरु चरणों पर न्यौछावर कर, अपना तन-मन-धन सतगुरु को अर्पण करके, गुरु को सच्ची निष्ठा से ध्यावें तथा सदैव उनके चरण कमलों का ध्यान करके अपना जीवन सार्थक करें।
🌷।।जय सच्चिदानंद जी।।🌷
आज का संदेश यहां तक ही।
।।बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज की जय।।
🌹।।श्री नंगली निवासी भगवान की जय।।🌹
☘️🍀अति पवित्र शुभ श्रावण महीने की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।🍀☘️