JAI BADRI Vishal JI Kamroo DISTT Kinnaur H.P

JAI BADRI Vishal JI Kamroo DISTT Kinnaur H.P बुशहर रियासत के संस्थापक "भगवान श्री हरि नारायण बद्रीनाथ जी" कामरू (किन्नौर) ही. प्र।
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बुशहर रियासत के संस्थापक भगवान श्री हरी नारायण बद्रीनाथ जी मंदिर, कामरू (किन्नौर) का आधिकारिक पेज।

23/04/2026

भगवान श्री बदरीनाथ जी के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए

॥ जय बदरीविशाल ॥

पौराणिक दस्तावेज व परंपरा जिस में श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी के किसी भी बड़े कार्य विशेष पूजा, या कोठी खंडन (नवनिर्मित) ...
15/04/2026

पौराणिक दस्तावेज व परंपरा जिस में श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी के किसी भी बड़े कार्य विशेष पूजा, या कोठी खंडन (नवनिर्मित) कार्य के समय परगना टुकपा के समस्त गांव में आलीलङ रखा जाता है। तो आप सभी को सहर्ष सूचित करते है कि देवता साहब श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी के आदेश अनुसार देव मन्दिर पुनर्निर्माण के लिए कोठी खंडन 20 अप्रैल 2026 सोमवार का दिन निश्चत हुआ है। इस दिन आलीलङ रखा जाएगा।
जिस में शौंग से छितकुल व बारंग गांव में आलीलङ होगा।
अतः आप से निवेदन है कि मेट व हलमंदी के द्वारा अपने ग्रामवासियों को सूचित करवाने की कृपा करे।

।।धन्यवाद।।
🙏जय बद्री विशाला 🚩 🙏🏻

03/04/2026

28/03/2026

तीश ख़ुनांग़ मालिक के मंदिर प्रांगण में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ आयोजन पर मालिक श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी के निरोल माता देवी जी की प्रजा छितकुल से आज मंदिर प्रांगण कामरू में आए व भागवत महात्मय रसपान कर नारायण जी माता देवी जी का किन्नौर बोली में इस भावुक पलो का गुणगान करते हुए, धन्यवाद करते हुए 🙏🏻की ऐसे पुण्यमय अवसर में आने का मौका मिला व आगे भी जिंदगी रहेगी तो एसे पुण्य आयोजन में आने का मौका देना नारायण जी से आशीर्वाद लेते हुए 🙏🏻
श्रीमद्भगवत महापुराण की जय
बद्री विशाल लाल की जय
माता देवी जी की जय
कल्याण सिंह महाराज जी की जय

24/03/2026


नारायण जी का इस नव वर्ष पर पहला दर्शन 🙏🏻
19/03/2026

नारायण जी का इस नव वर्ष पर पहला दर्शन 🙏🏻

कीर्तिमुख (कीर्ति + मुख) हिंदू धर्म में एक अत्यंत रहस्यमय और तांत्रिक प्रतीक माना जाता है। यह मुख्यतः मंदिरों के द्वार, ...
14/03/2026

कीर्तिमुख (कीर्ति + मुख) हिंदू धर्म में एक अत्यंत रहस्यमय और तांत्रिक प्रतीक माना जाता है। यह मुख्यतः मंदिरों के द्वार, शिखर और तोरणों पर स्थापित किया जाता है। पुराणों के अनुसार यह भगवान शिव की उग्र शक्ति से उत्पन्न हुआ दिव्य रक्षक है, जिसे स्वयं शिव ने देवालयों का प्रहरी बना दिया।

पुराणों में वर्णन मिलता है कि एक समय असुर जालंधर ने भगवान शिव के पास अपना दूत राहु को भेजा। उस दूत ने शिव के समक्ष अत्यंत अहंकारपूर्ण वचन कहे। यह सुनकर शिव के भ्रूमध्य से एक अत्यंत भयानक और उग्र प्राणी प्रकट हुआ। वह इतना विकराल और भूखा था कि उसने राहु को ही भक्षण करने के लिए दौड़ लगा दी। भयभीत राहु ने शिव की शरण ली। शिव ने उस प्राणी को राहु को छोड़ने की आज्ञा दी।
परंतु वह प्राणी अत्यंत भूखा था। तब शिव ने उसे आदेश दिया कि वह अपने ही शरीर का भक्षण करे। शिव की आज्ञा का पालन करते हुए उसने अपने समस्त शरीर को खा लिया और अंत में केवल उसका मुख शेष रह गया। उसके अद्वितीय आज्ञापालन और भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उसे “कीर्तिमुख” नाम दिया और वरदान दिया कि वह सदा मंदिरों के द्वार पर स्थित होकर देवालय की रक्षा करेगा।
इसी कारण प्राचीन मंदिरों के द्वारों और शिखरों के ऊपर जो उग्र मुख दिखाई देता है उसे कीर्तिमुख कहा जाता है। यह दुष्ट शक्तियों को दूर रखने वाला और देवालय की रक्षा करने वाला दिव्य प्रतीक माना जाता है।

इसका उल्लेख स्कन्द पुराण, शिव पुराण और पद्म पुराण में प्राप्त होता है। आगम शास्त्र और मंदिर वास्तुशास्त्र में भी कीर्तिमुख को देवालय का अनिवार्य रक्षक माना गया है।

तांत्रिक परंपरा में कीर्तिमुख को भैरव और शिव की उग्र शक्ति का प्रतीक माना जाता है। कई तांत्रिक और भैरव साधक इसे यंत्रों, मंदिरों और साधना स्थलों के प्रवेश द्वार पर स्थापित करते हैं ताकि नकारात्मक शक्तियां भीतर प्रवेश न कर सकें।

शास्त्रों में कीर्तिमुख की स्तुति का एक श्लोक भी कहा गया है

उग्रं मुखं महाघोरं सर्वभूतभयङ्करम्।
कीर्तिमुखं नमस्यामि रक्ष रक्ष नमोऽस्तु ते॥

अर्थात उस उग्र और अत्यंत भयानक मुख को नमस्कार है जो समस्त दुष्ट शक्तियों को भयभीत करता है। हे कीर्तिमुख, हमारी रक्षा कीजिए,

जयतु बद्री विशाला 🚩🙏

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Jai Badri Vishal Ji Kamru Distt Kinnaur
Sangla
172106

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