Shri. Badri Vishal Ji Temple, Kamroo

Shri. Badri Vishal Ji Temple, Kamroo बुशैहर रियासत के संस्थापक व कुल-इष्ट देवता "भगवान श्री बद्री विशाल जी" (कामरू) का मंदिर भवन।
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11/07/2024
15/01/2024

🙏"जय मां भगवती आस्तङचे देवी जी"🙏
🙏"जय मां अन्नपुर्णा देवी जी"🙏
🙏"जय श्री श्री श्री नारायण बद्रीनाथ जी"🙏
🙏"जय देवगुरु मां भीमाकाली जी"🙏
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आज इस पोस्ट के माध्यम से हम समस्त किन्नौर, रामपुर, रोहरू एवम कुल्लू के देव समाज व देव प्रतिनिधियों को एक महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहते है।
जैसा कि आप सभी जानते है, बहुत वर्षों से देव इतिहास और देवताओं के नाम से काफी छेड़-छाड़ हो रही है। जो एक गंभीर विषय है। कुछ घटिया मानसिकता वाले लोग अपने देवता को बड़ा बनाने व दिखाने के लिए झूठ का सहारा ले रहे है। सोशल मीडिया पर दूसरे देवताओं के इतिहास को अपना बता कर प्रस्तुत व झूठा प्रचार कर रहे है।
जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा रियास्तकालीन समय से ही "नारायण बद्रीनाथ जी, कामरू" का नाम बुशहर रियासत के मोहर व गद्दी पे स्वर्ण अक्षरों से अंकित है।
इतिहास मैं आजादी से पूर्व व आजादी के बाद भू-व्यवस्था के दस्तावेजों के अनुसार पूरे हिमाचल मैं "बद्री नारायण" नाम के एक मात्र देव "नारायण बद्रीनाथ जी, कामरू" है। लेकिन आज कई जगहों मैं लोग अपने अपने देवताओं को #बद्री नारायण नाम से संबोधित कर रहे है। जैसे:- बटसेरी, शौङ, किल्बा, उरनी।
जिस कारण देव इतिहास का भी हेर फेर हो रहा है।
बटसेरी वाले तो अपने देवता के नाम के आगे (तिश खुनङ मालिक) तक का प्रयोग कर रहे है। तिश खुनङ यानी सात खुंद (परगना) जिसमे बुशहर रियासत के सात बड़े क्षेत्र आते है। इस संदर्भ में कहा जाता है की नारायण बद्रीनाथ जी ने स्वयं शोनितपुर (सराहन बुशहर) जाकर श्री कृष्ण अवतार में बाणासुर को हराया और उसे वहीं पर दफना दिया। आज भी बखान (चिरोनीङ) के माध्यम से "सराहन कुलाे नेस दूगे, कुलो लो लानोक... बानासुरू दफनाएक" अपनी देव वाणी में देवगुरु मां भीमकाली जी इसका वृत्तांत सुनाते है। बाणासुर के अंत के बाद नारायण ने पीढ़ी का निर्माण किया और साथ ही कई अन्य राक्षसों, दानवों, ठाकुरों का राज शासन खत्म कर खुंदो की स्थापना की। इसे शासित करने के लिए सात देवगत सात खुंदो में बिठाए। जिसमे प्रथम व ज्येष्ठ खुंद टुकपा उन्होंने अपने अधीन ही रखा। इन खुंदो की स्थापना में देवगुरु मां भीमकाली जी और श्री श्री श्री नारायण बद्रीनाथ जी की अहम भूमिका रही। जिस कारण श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी सात खुंद मालिक और मां भीमाकाली जी देवगुरु की उपाधि से सुशोभित हुए। "इसीलिए नारायण बद्रीनाथ जी को तीश खुनङ मालिक भी कहा जाता है।"
बीथो नारायण जी बटसेरी और श्री श्री श्री नारायण बद्रीनाथ जी कामरू का आपस में एक दूसरे से धर्मभाई का रिश्ता है। क्योंकि बटसेरी नारायण टुक्पा घाटी के पुरातन देवों में से एक है। जो नारायण बद्रीनाथ जी से भी पहले यहां विराजित थे। इसी कारण बटसेरी नारायण जी को बड़े भाई का और नारायण बद्रीनाथ जी को छोटे भाई का दर्जा दिया जाता है। लेकिन ओहदे में बड़े रायसी के शिर और गद्दी के मालिक श्री श्री श्री नारायण बद्रीनाथ जी कामरू है।
नारायण बद्रीनाथ जी अपने बखान में भी कहते हैं:- "सिमोन परोल थोमेमू ज्येष्ठस बोसेरीङ"।
"उरा डाबरा थोमेमू उरा नारेणस"।
"शोंग खाडलङ आटङरा थोमेमू शाेंग नारेणस"।
इस पोस्ट के माध्यम से हम ये बताना चाहते है की श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी और उपरोक्त देवों का आपस में बहुत गहरा संबंध है। सभी देव हमारे लिए भी उतने ही पुजनीय है जितने आप लोगो के लिए। हम सबकी एक समान इज्जत करते हैं। हमारा मकसद किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं है। हम सिर्फ सच को सबके सामने लाना चाहते है और आप सभी किन्नौर-बुशहर-कुल्लु देव समाज से जुड़े लोगो को रायसी के शिर और गद्दी के मालिक सात खुंद के अधिपति "श्री श्री श्री नारायण बद्रीनाथ जी" के इतिहास के बारे में जानकारी देना चाहते है। कामरू बद्रीनाथ जी और उत्तराखंड बद्रीनाथ जी एक ही रूप है। वहां तप रूप में विराजमान है और यहां देव रूप में। इसका प्रमाण स्वर्ण पट्टों तथा बईयों में भी लिखित है। उत्तराखंड बद्रीनाथ जी को तपपुर्ण और कामरू बद्रीनाथ जी को देवपुर्ण भी बोला जाता है। इसका प्रमाण (कामरू व उत्तराखंड) दोनो जगह है। इनका एक रूप राजपुर्ण भी है जो टिहरी गडवाल के राजा बने ये सब लिखित में है। इसीलिए श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी 5 या 7 वर्ष उपरांत बद्रीधाम अपने स्थान में जाते है और वहां गर्भ गृह में दूरे (आगे) बैठते है। और भी कई प्रमाण है जो बईयों में लिखित है। कृपया आप सभी देव समाज के लोगो से अनुरोध है की आप लोग गलत पोस्टों और वीडियो में जो लोग गाटिया मानसिकता से श्री श्री श्री बद्रीनाथ जी का नाम और सात खूंद मालिक लिखते है वो सब झूठे है। श्री श्री श्री नारायण बद्रीनाथ जी 7 खुंद, 12 रायसी, 18 ठकुराइयों के भी मालिक है। श्री श्री श्री नारायण बद्रीनाथ जी की बईयों के आधार पर बुशहर की वंशावली को श्री कृष्ण जी की वंशावली मानी जाती है। प्रथम राजा प्रद्युमन सिंह जी को देवगद्दी केसे दी यह सब लिखित में है। आज वर्तमान में टीका साहब श्री विक्रमादित्य जी राजमाता श्रीमति प्रतिभा सिंह जी और कुंवर श्री रिपूदमन जी है। हम आप सभी लोगों से बिनती करते है की कृपया देव इतिहास के साथ किसी भी प्रकार की छेड़ छाड़ न करे। और देव दोष के भागीदार बनने से बचे।.. धन्यवाद। ...
[[ देवता मंदिर कमेटी, कामरू (सांगला) किन्नौर। ]]
मोहतमिम:- श्री भीष्म सिंह दुध्यान (94185-04234)
कमेटी प्रधान:- श्री धनवीर सिंह टोंग्चयान (98162-99081)
कमेटी उप प्रधान:- श्री उमा सरण चाङकुम (98161-53775)
सचिव:- श्री सिद्धार्थ याम्बुर (98052-89039)
जी
"कृपया इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा Share करे और सभी तक पहुंचाए।"

25/04/2023

भगवान श्री हरि नारायण बद्रीनाथ जी के मंदिर में आज से चलने वाले कथा महायज्ञ के लिए तैयार किए गए पंडाल की एक झलक।
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दर्शन हेतु आप सभी सह परिवार सादर आमंत्रित है। 🙏🚩

🙏"जय श्री हरि नारायण बद्रीनाथ जी"🙏-हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भगवान बद्रीनाथ जी के मंदिर प्रांगण में 25 अप्रैल से देवता म...
18/04/2023

🙏"जय श्री हरि नारायण बद्रीनाथ जी"🙏
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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भगवान बद्रीनाथ जी के मंदिर प्रांगण में 25 अप्रैल से देवता मंदिर कमिटी (कामरू) द्वारा श्रीमद् भगवत कथा ज्ञान महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
अत: आप सभी सह परिवार आमंत्रित है।
१. कथा प्रारंभ एवम घटस्थापना। (25 अप्रैल 2023)
२. कथा संपूर्ण, हवन पूजन एवम भंडारा। (2 मई 2023)

11/01/2023

Must visit:-
Shri. Badri Vishal Ji Temple, Kamroo - 700 Mtr.
KAMRU FORT - 800 Mtr.

🙏"जय बद्री विशाल जी, कामरू"🙏-श्री हरि नारायण बद्रीनाथ जी मंदिर परिसर। 🛕
11/03/2022

🙏"जय बद्री विशाल जी, कामरू"🙏
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श्री हरि नारायण बद्रीनाथ जी मंदिर परिसर। 🛕

22/12/2021

Address

Shri. Badri Vishal Ji Temple, Kamroo
Sangla
172106

Opening Hours

Monday 7am - 8pm
Tuesday 7am - 8pm
Wednesday 7am - 8pm
Thursday 7am - 8pm
Friday 7am - 8pm
Saturday 7am - 8pm
Sunday 7am - 8pm

Telephone

+917807275145

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