21/05/2026
मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर प्रतिभागियों को दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कृषि विज्ञान केंद्र, ग्रामोत्थान विद्यापीठ, संगरिया द्वारा “समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर खुदरा उर्वरक विक्रेताओं हेतु अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करने के उद्देश्य से आयोजित 15 दिवसीय प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में तहसीलदार संगरिया मोनिका बंसल उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसानों तक सही जानकारी पहुँचाने में उर्वरक विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि विक्रेता वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर किसानों का मार्गदर्शन करेंगे तो इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भूमि की उर्वराशक्ति भी बनी रहेगी।
कृषि विज्ञान केंद्र संगरिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अनूप कुमार सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया और बताया कि प्रशिक्षण में कुल 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया। 15 दिन तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक कृषि, हनुमानगढ़ डॉ. प्रमोद यादव तथा कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों उमेश कुमार, महावीर प्रसाद कस्वां, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. कुलदीप सिंह व रघुवीर सिंह नैण तथा भाकृअनुप- केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान व स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के वैज्ञानिक डॉ. रूपचंद बलाई तथा डॉ. बी.डी.एस. नाथावत ने प्रतिभागियों को समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी प्रदान की। पाठ्यक्रम के दौरान आवश्यक पोषक तत्वों की सूची एवं पौधों के पोषण में उनकी भूमिका, पोषक तत्वों की कमी के प्रभाव एवं लक्षण, विषाक्तता की पहचान, खाद एवं उर्वरकों की पहचान, उनके मानक, रख-रखाव तथा उपयोग विधियों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को मृदा परीक्षण, उर्वरकों की गणना, उर्वरक नियंत्रण आदेश, मृदा, जल एवं पादप नमूना लेने की विधि, परीक्षण एवं विश्लेषण संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
पाठ्यक्रम के कोर्स कोर्डिनेटर डॉ. चंद्र शेखर शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं को तकनीकी एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान कर उन्हें किसानों के लिए बेहतर मार्गदर्शक बनाना है।
अंत में डॉ. अनूप कुमार ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा प्रशिक्षण को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष महानुभावों विभागों का आभार व्यक्त किया।