20/03/2026
‘इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।’🥹
*अलविदा: दरगाह शरीफ के अज़ीम खिदमतगार ‘पागबंध कव्वाल’ अब्दुल सत्तार चितलवाना साहब*🌹
आज बड़े ही भारी मन से सूचित करना पड़ रहा है कि *हमारी दरगाह शरीफ के चहेते पागबंध कव्वाल साहब अब हमारे बीच नहीं रहे।* आज *20 मार्च 2026* को जहाँ एक ओर *सालाना उर्स* का आगाज़ हुआ, वहीं दूसरी ओर उनके *इंतकाल* की खबर ने हम सबको गमगीन कर दिया है।
*उनकी यादें और खिदमत:*
• 40 वर्षों का सफर: चार दशकों से हर जुमेरात (गुरुवार) दरगाह पर हाजिरी देना उनका अटूट नियम था।
• उर्स की शान: सालाना उर्स के पूरे 10 दिनों तक वे दिन-भर कव्वाली पेश कर अपनी अक़ीदत का नज़राना पेश करते थे।
• अटूट रिश्ता: मौसम कोई भी हो, उनकी आवाज़ दरगाह के रूहानी माहौल की पहचान बन गई थी।
हमें उम्मीद है कि उनके परिवार से कोई इस रूहानी विरासत और खिदमत के सिलसिले को आगे बढ़ाएगा।
दुआ:
अल्लाह तआला उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए और *हज़रत मख़दूम दादा अब्बनशाह* के वसीले उनके तमाम गुनाह माफ फरमाए।
आमीन। 🤲