Pt udit keshore

Pt udit keshore अचार्य पंडित उदित किशोरे,,

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श्री सिद्ध लक्ष्मी सहित महागणपति मंदिर ग्राम ढकलगांव में दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ मात श्री नर्मदे हर जय हिंद🚩🚩🚩...
15/08/2022

श्री सिद्ध लक्ष्मी सहित महागणपति मंदिर ग्राम ढकलगांव में दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ मात श्री नर्मदे हर
जय हिंद
🚩🚩🚩🚩

08/08/2022

रुद्राभिषेक 😍🙏

https://www.newspositive.online/archives/5054
30/07/2022

https://www.newspositive.online/archives/5054

श्री गणेश एवम माँ भगवती महामाया के आशीर्वाद से “श्री हरि हर शक्ति मठ” (Shri Hari Har Shakti Math, Atoot) ग्राम अटूट खास जिला खण्डवा में .....

28/07/2022
मात श्री नर्मदे हरपुण्या कनखले गंगा कुरुक्षेत्रे सरस्वती। ग्रामेवा यदि वारण्ये पुण्या सर्वत्र नर्मदा। त्रिभि:सारस्वतं पु...
02/06/2022

मात श्री नर्मदे हर
पुण्या कनखले गंगा कुरुक्षेत्रे सरस्वती। ग्रामेवा यदि वारण्ये पुण्या सर्वत्र नर्मदा। त्रिभि:सारस्वतं पुण्यं सप्ताहेनतुयामुनम्। सद्य:पुनातिगाङ्गेयंदर्शनादेवनर्मदाम्।
👏👏👏👏👏👏👏👏👏

" एक दिवसीय शनि साधना प्रयोग"        30 मई समोवती अमावस्या 'शनि जयंती'    प्रत्येक ग्रह का , चाहे वह अच्छा ग्रह हो अथवा ...
25/05/2022

" एक दिवसीय शनि साधना प्रयोग"
30 मई समोवती अमावस्या 'शनि जयंती'

प्रत्येक ग्रह का , चाहे वह अच्छा ग्रह हो अथवा बुरा, उसका एक विशेष प्रभाव अवश्य पड़ता है और प्रत्येक ग्रह जीवन में महत्त्वपूर्ण है !
उन्नति युक्त जीवन के लिये तथा कार्यों में पूर्ण सफ़लता प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि अच्छे ग्रहों के प्रभाव को बढ़ाया जाये तथा खराब ग्रहों के दुष्प्रभाव को शान्त किया जाये ! इसलिये विध्वजनों का मानना है, की गृह गोचर, नक्षत्रों के हिसाब से जब भी कोई श्रेष्ठ महुर्तों का सद उपयोग हर व्यक्ति को लेना चाहिये ..!!

शनि सूर्य पुत्र है और उग्र प्रकृति का क्रूर ग्रह है !
गोचर में विपरीत प्रभाव से एक्सीडेंट, कर्जा चढ़ना, कोर्ट केस, तान्त्रिक प्रयोग, मृत्यु, झूठी बदनामी, जेल जाना, नशा करना, बर्बाद होना, धन हानि, शत्रु से नुकसान, चोरी होना, दु:ख, चिन्ता, दुर्भाग्य, पैसा फँसना, समय पर काम न होना, घर में क्लेश बना रहना, पारिवारिक झगड़े, अगर स्त्री हो तो उसकी शादी लेट होना, अच्छा पति न मिलना, पति का शराब पीना, लड़ाई-झगड़े करना, अपनी इच्छा से विवाह न होना, घर से भाग जाना, सन्तान कष्ट, पुत्र प्राप्ति न होना, अपमान, तनाव, आर्थिक तंगी, गरीबी, नौकरी न लगना, प्रमोशन न होना, व्यापार न चलना, बच्चों से नुकसान अर्थात बच्चे का बिगड़ना, शिक्षा प्राप्त न होना, परीक्षा में फेल होना, गुप्त शत्रु होना, गुप्त स्थानों के रोग, जोड़ों के दर्द होना, साँस की समस्या, पेट के रोग, शरीर में मोटापा, बीमारियों पर पैसा खर्चा होना, जीवन में असफलता आदि सब शनि की महादशा, अन्तर्दशा, गोचर या शनि के अनिष्ट योग होने पर होता है !

शनि जीवन में आकस्मिकता की स्थिति लाता है और जीवन में जो अकस्मात् घटनाएँ होती है, चाहे वे अच्छे फल की तरफ हों अथवा बुरे फल की ओर उनका मूल कारक शनि ही है !

वैसे मेरा तो विश्वास है कि शनि की पूजा, जाप साधना और मन्त्र द्वारा इसे तीव्रता से अनुकूल बनाया जा सकता है। और जब यह अनुकूल होता है तो व्यक्ति को रंक से राजा बना देता है, और शनि नकारात्मक प्रतिकूल हो तो राजा से रंक भी बना देता है !
जितने भी लोग राजनीति में उच्च स्थान पर पहुँचते हैं, उनका शनि प्रबल होता है। परिवार में भी शनि प्रधान व्यक्ति का ही वर्चस्व रहता है !

यदि आपके ऊपर शनि की ढईया, साढ़ेसाती ग्रह का समय चल रहा है या इस तरह की कोई समस्या आ रही है तो कहीं न कहीं शनि ग्रह आपको अशुभ फल दे रहा है ! शनि ग्रह के अशुभ फल से बचने के लिए अन्य बहुत से उपाय है, पर सभी उपायों में मन्त्र का उपाय सबसे अच्छा माना जाता है। इन मन्त्रों का कोई नुकसान भी नहीं होता और इसके माध्यम से शनि ग्रह के अनिष्ट प्रभाव से पूर्णतः बचा जा सकता है। इसका प्रभाव शीघ्र ही देखने को मिलता है !

शनि की पूर्ण साधना करनी चाहिए यदि किसी कारण वश आप शनि की पूर्ण साधना न कर सके तो 1 दिवसीय साधना से शनि ग्रह का विपरीत प्रभाव शीघ्र समाप्त होने लग जाता है ! ये साधना गुरू मार्गदर्शन मे करनी चाहिए और गुरूद्वारा शक्तिपक लेकर ही साधना करें

जिसको भी यह साधना करनी है अपनी निम्न जानकारी हमारे watsup पर भेजे-
अपना नाम-
पिता का नाम-
गोत्र या सर नेम-
और अपना फ़ोटो-

1 दिवसीय शनि साधना
(ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः.)

Note - दुर्लभः मंत्रों से सिद्ध प्राणप्रतिष्ठा युक्त शनि माला साधना करने वाले माला व्यक्तियों को भेजी जाएगी

अचार्य पंडित उदित केशोरे
पता ~ श्री हरी हर शक्ति मठ अटूट खास खण्डवा मध्यप्रदेश
मोबाइल no 7692868476
🚩मात श्री नर्मदे हर 🚩
👏ॐ शं शनैश्चराय नमः.👏

तंत्रत्यादिवाधशब्देषु दीध्रेरषु कर्मसंस्थिते ।अनन्यचेताः प्रत्यंते  पर   ब्योमवपुभ्रवेत ।।तंतु वाद्य आदि विभिन्न वाद्य य...
15/05/2022

तंत्रत्यादिवाधशब्देषु दीध्रेरषु कर्मसंस्थिते ।
अनन्यचेताः प्रत्यंते पर ब्योमवपुभ्रवेत ।।

तंतु वाद्य आदि विभिन्न वाद्य यंत्रों से आरोह अवरोह के साथ जो ध्वनि निकलती है। वह अपनी क्रमिकता के आधार पर दिर्घ काल तक कानो में गूंजती रहती है।

उसी में अपने चित्त की विर्त्ति डाल देता है। तो उसी से चित्त की एकाग्रता परमाकाश स्वरूप हो जाती है।

अर्थात इन वाधों से पैदा हुवे स्वरों में लय सम ताल आदि से मन लगाकर एकाग्रता पूर्वक अभ्याश कर उसके साथ अपनी चित्त वृत्ति को लीन कर देने वाला साधक परम् ब्योम शरीर हो जाता है।

अर्थात परब्रह्म दशा में समविष्ठ हो जाता है। अर्थात संगीत शास्त्र में प्रवीण ब्यक्ति अनायाश ही मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।

मात श्री नर्मदे हर
🚩🚩🚩🚩🚩🚩

आज का विषय  शाक्त दर्शन    आगमोक्त रात्री सूक्त व्याख्यान प्रथम भागब्रह्मोवाच । -ब्रह्मा ने कहा ।व्याख्या - ब्रह्मा ने च...
07/05/2022

आज का विषय शाक्त दर्शन
आगमोक्त रात्री सूक्त व्याख्यान प्रथम भाग

ब्रह्मोवाच । -ब्रह्मा ने कहा ।

व्याख्या -
ब्रह्मा ने चिदचित्-स्वरूपिणी परा-शक्ति की वन्दना की।

विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं, स्थिति-संहार-कारिणीम् ।
स्तौमि निद्रां भगवतीं, विष्णोरतुल - तेजसः ॥ १

- (मैं) विश्व की स्वामिनी, जगत् की जननी, पालिका और लय-कारिका, अद्वितीय तेजस्वी विष्णु की भगवती निद्रा की वन्दना करता हूँ ।

व्याख्या- 'विश्वेश्वरी' से विश्व-व्यापिका चित्-शक्ति परा सत्ता का बोध होता है ।

'धात्री,' से यहाँ जननी से तात्पर्य है, न कि पालनेवाली से, जो स्थिति-कारिणी से बोध होता है । 'धातृ' शब्द, सृष्टि-कर्तृळे वचन है । ऐसा मेदिनी 'कोष' भी कहता है- 'धात्री जनन्यामलकी वसुमत्युपमातृष्विति' । पुनः 'धाताब्जयो निर्द्रुहिण इति'-'कोशान्तरे' । 'स्थिति-कारिणी' से तात्पर्य उस 'धर्म-शक्ति' से है, जिससे पदार्थ की धारणा या स्थिति है। 'ध्रियते अनेन सः धर्मः' ।

'संहार' का अर्थ है- सम्यक प्रकार से हरण अर्थात् निःशेष रूप का लय । इन तीनों विशेषणों से, १ इच्छा, २ ज्ञान और ३ क्रिया शक्ति-वय-समन्विता भगवती अर्थात् षडैश्वर्य-शालिनी का बोध होता है। छः प्रकार के ऐश्वर्य या सामर्थ्य - १ समग्रता, २ धर्म ३ यश, ४ श्रेय, ५ ज्ञान और ६ विज्ञान हैं- ऐश्वर्यस्य समग्रस्य, धर्मस्य यशसः श्रियः । ज्ञान-विज्ञानयोश्चैव, षण्णां भग इतीरणा ॥

यही सप्त-धर्मी शक्ति अर्थात् अनुपहिता चेतनता की परा-धर्म शक्ति अर्थात् (अपर - रूपिणी) उपहित चेतनता की परा धर्म-शक्ति अर्थात् अपर-रूपिणी उप-हित चेतनता - रूपा है। इसी को तुरीय ब्रह्म' कहते हैं। अनुपहित चेतनता को 'तुरीयातीत ब्रह्म' कहते हैं । 'अतुल' से तात्पर्य है अद्वितीय या निर्द्वन्द्व से अर्थात् कोई दूसरी शक्ति या सत्ता नहीं है, जो इसकी तुलना कर सके ।'ब्रह्म' के सोने का तात्पर्य 'महाभारत' के इस बचन से भी ज्ञात होता है-'अव्यक्तके पुरे शेते, पुरुषस्तेन कथ्यते' । पुरुष ही, अव्यक्ता प्रकृति या विलक्षण प्रकृति (सांख्य-मत से) है। निद्रा की अवस्था का तात्पर्य, 'ब्रह्म' में और 'ब्रह्म'- भावापन्न जीवन्मुक्तात्माओं में धात्म-रति से है, जिसको 'समाधि' भी कहते हैं- 'ख्या तोऽयं पुरुषः श्रेष्ठः, सर्वदात्म-रति-प्रियः' । 'शिव-मानस-पूजा' में भी 'निद्रा' का अर्थ समाधि दिया है-- पूजा ते विषयोपभोग-रचना, निद्रा समाधि स्थितिः ।

'स्तौमि' अर्थात् स्तवन करता हूँ। यह 'स्तवन' केवल वचन (वाणी) ही से सम्पादित नहीं होता। जन-साधारण ऐसा ही इसका तात्पर्य लेते हैं परन्तु 'स्तवन' का अन्तस्तात्पर्य यथार्थ रूप में १ परा, २ पश्यन्ती, ३ मध्यमा और ४ वैखरी-चारों प्रकार के शब्द-रूपों में, 'नाद' द्वारा ब्रह्मैक्य चिन्तन से है। 'श्रुति', इसकी ऐसे ही अर्थ में इस प्रकार परिभाषा देती है - 'परा पश्यन्त्यादि-निखिल - शब्दानां नाब द्वारा ब्रह्मण्युप-संहार-चिन्तनेन स्तोत्रम्' - (भावनोपनिषद् ) ।

इसी तात्पर्य से मण्डल ब्राह्मणोपनिषत् में, 'स्तुति' का लक्ष्यार्थ मौन कहा है- 'मौनं स्तुतिः' । 'मौन' की परिभाषा, ब्रह्मकता या अखण्डाकार चित्तवृत्ति की बोधिका है। 'कठोपनिषत् (१।३।१३) मैं कहा है

यच्छेद् वाङ् - मनसी प्रानस्तद् यच्छेत् ज्ञानं आत्मनि । ज्ञानप्रात्मनि महति नियच्छेत् तद् यच्छेच्छान्त आत्मनि ॥

🌷🌷श्रीककारादि काली सहस्रनामावली🌷🌷🌷ॐ अस्य श्रीसर्वसाम्राज्यमेधाकालीस्वरूप-ककारात्मकसहस्रनामस्तोत्रमन्त्राधारनामावलिः महाक...
04/05/2022

🌷🌷श्रीककारादि काली सहस्रनामावली🌷🌷🌷

ॐ अस्य श्रीसर्वसाम्राज्यमेधाकालीस्वरूप-ककारात्मकसहस्रनामस्तोत्रमन्त्राधारनामावलिः महाकाल-ऋषिरुष्णिक्छन्दः, श्रीदक्षिणकाली देवता, ह्रीं बीजम्, ह्रूँ शक्तिः, क्रीं कीलकं, कालीवरदानादिस्वेष्टार्थे जपे विनियोगः ।
ध्यान-शवारूढ़, महाभीम, घोरदंष्ट्रावाली, हँसते हुए मुखवाली, चार भुजाओंवाली (और चारों) हाथों में खड्ग, मुण्ड, वर और अभयमुद्रा धारण करनेवाली। मुण्डमाला धारण करनेवाली, लपलपाती जीभवाली, दिगम्बर, श्मशानालयवासिनी इस प्रकार (के स्वरूपोंवाली) शिवादेवी काली का चिन्तन करना चाहिए ॥

अथ सहस्रनामावलिः ।

ॐ क्रीं काल्यै नमः । ॐ क्रूं कराल्यै नमः । ॐ कल्याण्यै नमः। ॐ कमलायै नमः। ॐ कलायै नमः ।

ॐ कलावत्यै नमः । ॐ कलाढ्यै नमः । ॐ कलापूज्यायै नमः । ॐ कलात्मिकायै नमः ।

ॐ कलाहृष्टायै नमः । ॐ कलापुष्टायै नमः । ॐ कलामस्तायै नमः । ॐ कलाधरायै नमः ।

ॐ कलाकोटिसमाभासायै नमः । ॐ कलाकोटिप्रपूजितायै नमः । ॐ कलाकर्मकलाधरायै नमः ।

ॐ कलापरायै नमः । ॐ कलागमायै नमः । ॐ कलाधारायै नमः । ॐ कमलिन्यै नमः ।

ॐ ककारायै नमः । ॐ करुणायै नमः । ॐ कव्यै नमः । ॐ ककारवर्णसर्वाङ्ग्यै नमः ।

ॐ कलाकोटिप्रभूषितायै नमः । ॐ ककारकोटिगुणितायै नमः । ॐ ककारकोटिभूषणायै नमः ।

ॐ ककारवर्णहृदयायै नमः । ॐ ककारमनुमण्डितायै नमः । ॐ ककारवर्णनिलयायै नमः ।

ॐ काकशब्दपरायणायै नमः । ॐ ककारवर्णमुकुटायै नमः । ॐ ककारवर्णभूषणायै नमः ।

ॐ ककारवर्णरूपायै नमः । ॐ काकशब्दपरायणायै नमः । ॐ ककवीरास्फालरतायै नमः ।

ॐ कमलाकरपूजितायै नमः । ॐ कमलाकरनाथायै नमः । ॐ कमलाकररूपधृषे नमः ।

ॐ कमलाकरसिद्धिस्थायै नमः । ॐ कमलाकरपारदायै नमः । ॐ कमलाकरमध्यस्थायै नमः ।

ॐ कमलाकरतोषितायै नमः । ॐ कथङ्कारपरालापायै नमः । ॐ कथङ्कारपरायणायै नमः ।

ॐ कथङ्कारपदान्तस्थायै नमः । ॐ कथङ्कारपदार्थभुवे नमः । ॐ कमलाक्ष्यै नमः ।

ॐ कमलजायै नमः । ॐ कमलाक्षप्रपूजितायै नमः । ॐ कमलाक्षवरोद्युक्तायै नमः ।

ॐ ककारायै नमः । ॐ कर्बूराक्षरायै नमः । ॐ करतारायै नमः । ॐ करच्छिन्नायै नमः ।

ॐ करश्यामायै नमः । ॐ करार्णवायै नमः । ॐ करपूज्यायै नमः । ॐ कररतायै नमः ।

ॐ करदायै नमः । ॐ करपूजितायै नमः । ॐ करतोयायै नमः । ॐ करामर्षायै नमः ।

ॐ कर्मनाशायै नमः । ॐ करप्रियायै नमः । ॐ करप्राणायै नमः । ॐ करकजायै नमः ।

ॐ करकायै नमः । ॐ करकान्तरायै नमः । ॐ करकाचलरूपायै नमः ।

ॐ करकाचलशोभिन्यै नमः । ॐ करकाचलपुत्र्यै नमः । ॐ करकाचलतोषितायै नमः ।

ॐ करकाचलगेहस्थायै नमः । ॐ करकाचलरक्षिण्यै नमः । ॐ करकाचलसम्मान्यायै नमः ।

ॐ करकाचलकारिण्यै नमः । ॐ करकाचलवर्षाढ्यायै नमः । ॐ करकाचलरञ्जितायै नमः ।

ॐ करकाचलकान्तारायै नमः । ॐ करकाचलमालिन्यै नमः । ॐ करकाचलभोज्यायै नमः ।

ॐ करकाचलरूपिण्यै नमः । ॐ करामलकसंस्थायै नमः । ॐ करामलकसिद्धिदायै नमः ।

ॐ करामलकसम्पूज्यायै नमः । ॐ करामलकतारिण्यै नमः । ॐ करामलककाल्यै नमः ।

ॐ करामलकरोचिन्यै नमः । ॐ करामलकमात्रे नमः । ॐ करामलकसेविन्यै नमः ।

ॐ करामलकवद्ध्येयायै नमः । ॐ करामलकदायिन्यै नमः । ॐ कञ्जनेत्रायै नमः ।

ॐ कञ्जगत्यै नमः । ॐ कञ्जस्थायै नमः । ॐ कञ्जधारिण्यै नमः । ॐ कञ्जमालाप्रियकर्यै नमः ।

ॐ कञ्जरूपायै नमः । ॐ कञ्जनायै नमः । ॐ कञ्जजात्यै नमः । ॐ कञ्जगत्यै नमः ।

ॐ कञ्जहोमपरायणायै नमः । ॐ कञ्जमण्डलमध्यस्थायै नमः । ॐ कञ्जाभरणभूषितायै नमः ।

ॐ कञ्जसम्माननिरतायै नमः । ॐ कञ्जोत्पत्तिपरायणायै नमः । ॐ कञ्जराशिसमाकारायै नमः ।

ॐ कञ्जारण्यनिवासिन्यै नमः । ॐ करञ्जवृक्षमध्यस्थायै नमः । ॐ करञ्जवृक्षवासिन्यै नमः ।

ॐ करञ्जफलभूषाढ्यायै नमः । ॐ करञ्जारण्यवासिन्यै नमः । ॐ करञ्जमालाभरणायै नमः ।

ॐ करवालपरायणायै नमः । ॐ करवालप्रहृष्टात्मने नमः । ॐ करवालप्रियागत्यै नमः ।

ॐ करवालप्रियाकन्थायै नमः । ॐ करवालविहारिण्यै नमः । ॐ करवालमय्यै नमः ।

ॐ कर्मायै नमः । ॐ करवालप्रियङ्कर्यै नमः । ॐ कबन्धमालाभरणायै नमः ।

ॐ कबन्धराशिमध्यगायै नमः । ॐ कबन्धकूटसंस्थानायै नमः । ॐ कबन्धानन्तभूषणायै नमः ।

ॐ कबन्धनादसन्तुष्टायै नमः । ॐ कबन्धासनधारिण्यै नमः । ॐ कबन्धगृहमध्यस्थायै नमः ।

ॐ कबन्धवनवासिन्यै नमः । ॐ कबन्धकाञ्च्यै नमः । ॐ करण्यै नमः ।

ॐ कबन्धराशिभूषणायै नमः । ॐ कबन्धमालाजयदायै नमः । ॐ कबन्धदेहवासिन्यै नमः ।

ॐ कबन्धासनमान्यायै नमः । ॐ कपालमाल्यधारिण्यै नमः । ॐ कपालमालामध्यस्थायै नमः ।

ॐ कपालव्रततोषितायै नमः । ॐ कपालदीपसन्तुष्टायै नमः । ॐ कपालदीपरूपिण्यै नमः ।

ॐ कपालदीपवरदायै नमः । ॐ कपालकज्जलस्थितायै नमः । ॐ कपालमालाजयदायै नमः ।

ॐ कपालजपतोषिण्यै नमः । ॐ कपालसिद्धिसंहृष्टायै नमः । ॐ कपालभोजनोद्यतायै नमः ।

ॐ कपालव्रतसंस्थानायै नमः । ॐ कपालकमलालयायै नमः । ॐ कवित्वामृतसारायै नमः ।

ॐ कवित्वामृतसागरायै नमः । ॐ कवित्वसिद्धिसंहृष्टायै नमः । ॐ कवित्वादानकारिण्यै नमः ।

ॐ कविपूज्यायै नमः । ॐ कविगत्यै नमः । ॐ कविरूपायै नमः । ॐ कविप्रियायै नमः ।

ॐ कविब्रह्मानन्दरूपायै नमः । ॐ कवित्वव्रततोषितायै नमः । ॐ कविमानससंस्थानायै नमः ।

ॐ कविवाच्छाप्रपूरिण्यै नमः । ॐ कविकण्ठस्थितायै नमः । ॐ कंह्रींकंकंकंकविपूर्तिदायै नमः ।

ॐ कज्जलायै नमः । ॐ कज्जलादानमानसायै नमः । ॐ कज्जलप्रियायै नमः ।

ॐ कपालकज्जलसमायै नमः । ॐ कज्जलेशप्रपूजितायै नमः । ॐ कज्जलार्णवमध्यस्थायै नमः ।

ॐ कज्जलानन्दरूपिण्यै नमः । ॐ कज्जलप्रियसन्तुष्टायै नमः । ॐ कज्जलप्रियतोषिण्यै नमः ।

ॐ कपालमालाभरणायै नमः । ॐ कपालकरभूषणायै नमः । ॐ कपालकरभूषाढ्यायै नमः ।

ॐ कपालचक्रमण्डितायै नमः । ॐ कपालकोटिनिलयायै नमः । ॐ कपालदुर्गकारिण्यै नमः ।

ॐ कपालगिरिसंस्थायै नमः । ॐ कपालचक्रवासिन्यै नमः । ॐ कपालपात्रसन्तुष्टायै नमः ।

ॐ कपालार्घ्यपरायणायै नमः । ॐ कपालार्घ्यप्रियप्राणायै नमः । ॐ कपालार्घ्यवरप्रदायै नमः ।

ॐ कपालचक्र रूपायै नमः । ॐ कपालरूपमात्रगायै नमः । ॐ कदल्यै नमः ।

ॐ कदलीरूपायै नमः । ॐ कदलीवनवासिन्यै नमः । ॐ कदलीपुष्पसम्प्रीतायै नमः ।

ॐ कदलीफलमानसायै नमः । ॐ कदलीहोमसन्तुष्टायै नमः । ॐ कदलीदर्शनोद्यतायै नमः ।

ॐ कदलीगर्भमध्यस्थायै नमः । ॐ कदलीवनसुन्दर्यै नमः । ॐ कदम्बपुष्पनिलयायै नमः ।

ॐ कदम्बवनमध्यगायै नमः । ॐ कदम्बकुसुमामोदायै नमः । ॐ कदम्बवनतोषिण्यै नमः ।

ॐ कदम्बपुष्पसम्पूज्यायै नमः । ॐ कदम्बपुष्पहोमदायै नमः । ॐ कदम्बपुष्पमध्यस्थायै नमः ।

ॐ कदम्बफलभोजिन्यै नमः । ॐ कदम्बकाननान्तस्थायै नमः । ॐ कदम्बाचलवासिन्यै नमः ।

ॐ कक्षपायै नमः । ॐ कक्षपाराध्यायै नमः । ॐ कक्षपासनसंस्थितायै नमः ।

ॐ कर्णपूरायै नमः । ॐ कर्णनासायै नमः । ॐ कर्णाढ्यायै नमः । ॐ कालभैरव्यै नमः ।

ॐ कलहप्रीतायै नमः । ॐ कलहदायै नमः । ॐ कलहायै नमः । ॐ कलहातुरायै नमः ।

ॐ कर्णयक्ष्यै नमः । ॐ कर्णवार्त्कथिन्यै नमः । ॐ कर्णसुन्दर्यै नमः । ॐ कर्णपिशाचिन्यै नमः ।

ॐ कर्णमञ्जर्यै नमः । ॐ कविकक्षदायै नमः । ॐ कविकक्षविरूपाढ्यायै नमः ।

ॐ कविकक्षस्वरूपिण्यै नमः । ॐ कस्तूरीमृगसंस्थानायै नमः । ॐ कस्तूरीमृगरूपिण्यै नमः ।

ॐ कस्तूरीमृगसन्तोषायै नमः । ॐ कस्तूरीमृगमध्यगायै नमः । ॐ कस्तूरीरसनीलाङ्ग्यै नमः ।

ॐ कस्तूरीगन्धतोषितायै नमः । ॐ कस्तूरीपूजकप्राणायै नमः । ॐ कस्तूरीपूजकप्रियायै नमः ।

ॐ कस्तूरीप्रेमसन्तुष्टायै नमः । ॐ कस्तूरीप्राणधारिण्यै नमः । ॐ कस्तूरीपूजकानन्दायै नमः ।

ॐ कस्तूरीगन्धरूपिण्यै नमः । ॐ कस्तूरीमालिकारूपायै नमः । ॐ कस्तूरीभोजनप्रियायै नमः ।

ॐ कस्तूरीतिलकानन्दायै नमः । ॐ कस्तूरीतिलकप्रियायै नमः । ॐ कस्तूरीहोमसन्तुष्टायै नमः ।

ॐ कस्तूरीतर्पणोद्यतायै नमः । ॐ कस्तूरीमार्जनोद्युक्तायै नमः । ॐ कस्तूरीचक्रपूजितायै नमः ।

ॐ कस्तूरीपुष्पसम्पूज्यायै नमः। ॐ कस्तूरीचर्वणोद्यातायै नमः। ॐ कस्तूरीगर्भमध्यस्थायै नमः।

ॐ कस्तूरीवस्त्रधारिण्यै नमः। ॐ कस्तूरीकामोदरतायै नमः। ॐ कस्तूरीवनवासिन्यै नमः।

ॐ कस्तूरीवनसंरक्षायै नमः। ॐ कस्तूरीप्रेमधारिण्यै नमः। ॐ कस्तूरीशक्तिनिलयायै नमः।

ॐ कस्तूरीशक्तिकुण्डगायै नमः । ॐ कस्तूरीकुण्डसंस्नातायै नमः। ॐ कस्तूरीकुण्डमज्जनायै नमः।

ॐ कस्तूरीजीवसन्तुष्टायै नमः । ॐ कस्तूरीजीवधारिण्यै नमः । ॐ कस्तूरीपरमामोदायै नमः ।

ॐ कस्तूरीजीवनक्षमायै नमः । ॐ कस्तूरीजातिभावस्थायै नमः । ॐ कस्तूरीगन्धचुम्बनायै नमः ।

ॐ कस्तूरीगन्धसंशोभाविराजितकपालभुवे नमः । ॐ कस्तूरीमदनान्तस्थायै नमः ।

ॐ कस्तूरीमदहर्षदायै नमः । ॐ कस्तूर्यै नमः । ॐ कवितानाढ्यायै नमः ।

ॐ कस्तूरीगृहमध्यगायै नमः । ॐ कस्तूरीस्पर्शकप्राणायै नमः । ॐ कस्तूरीविन्दकान्तकायै नमः ।

ॐ कस्तूर्यामोदरसिकायै नमः । ॐ कस्तूरीक्रीडनोद्यतायै नमः । ॐ कस्तूरीदाननिरतायै नमः ।

ॐ कस्तूरीवरदायिन्यै नमः । ॐ कस्तूरीस्थापनाशक्तायै नमः । ॐ कस्तूरीस्थानरञ्जिन्यै नमः ।

ॐ कस्तूरीकुशलप्रश्नायै नमः । ॐ कस्तूरीस्तुतिवन्दितायै नमः । ॐ कस्तूरीवन्दकाराध्यायै नमः ।

ॐ कस्तूरीस्थानवासिन्यै नमः । ॐ कहरूपायै नमः । ॐ कहाढ्यायै नमः । ॐ कहानन्दायै नमः ।

ॐ कहात्मभुवे नमः । ॐ कहपूज्यायै नमः । ॐ कहेत्याख्यायै नमः । ॐ कहहेयायै नमः ।

ॐ कहात्मिकायै नमः। ॐ कहमालायै नमः। ॐ कण्ठभूषायै नमः। ॐ कहमन्त्रजपोद्यतायै नमः।

ॐ कहनामस्मृतिपरायै नमः । ॐ कहनामपरायणायै नमः । ॐ कहपरायणरतायै नमः ।

ॐ कहदेव्यै नमः । ॐ कहेश्वर्यै नमः । ॐ कहहेत्वै नमः । ॐ कहानन्दायै नमः ।

ॐ कहनादपरायणायै नमः । ॐ कहमात्रे नमः । ॐ कहान्तस्थायै नमः । ॐ कहमन्त्रायै नमः ।

ॐ कहेश्वरायै नमः । ॐ कहगेयायै नमः। ॐ कहाराध्यायै नमः। ॐ कहध्यानपरायणायै नमः।

ॐ कहतन्त्रायै नमः । ॐ कहकहायै नमः । ॐ कहचर्य्यापरायणायै नमः। ॐ कहाचारायै नमः।

ॐ कहगत्यै नमः । ॐ कहताण्डवकारिण्यै नमः । ॐ कहारण्यायै नमः । ॐ कहगत्यै नमः ।

ॐ कहशक्तिपरायणायै नमः । ॐ कहराज्यरतायै नमः । ॐ कर्मसाक्षिण्यै नमः ।

ॐ कर्मसुन्दर्यै नमः । ॐ कर्मविद्यायै नमः । ॐ कर्मगत्यै नमः । ॐ कर्मतन्त्रपरायणायै नमः ।

ॐ कर्ममात्रायै नमः । ॐ कर्मगात्रायै नमः । ॐ कर्मधर्मपरायणायै नमः ।

ॐ कर्मरेखानाशकर्त्र्यै नमः । ॐ कर्मरेखाविनोदिन्यै नमः । ॐ कर्मरेखामोहकर्यै नमः ।

ॐ कर्मकीर्तिपरायणायै नमः । ॐ कर्मविद्यायै नमः । ॐ कर्मसारायै नमः ।

ॐ कर्माधारायै नमः । ॐ कर्मभुवे नमः । ॐ कर्मकार्यै नमः । ॐ कर्महार्यै नमः ।

ॐ कर्मकौतुकसुन्दर्यै नमः । ॐ कर्मकाल्यै नमः । ॐ कर्मतारायै नमः । ॐ कर्मछिन्नायै नमः ।

ॐ कर्मदायै नमः । ॐ कर्मचाण्डालिन्यै नमः । ॐ कर्मवेदमात्रे नमः । ॐ कर्मभुवे नमः ।

ॐ कर्मकाण्डरतानन्तायै नमः । ॐ कर्मकाण्डानुमानितायै नमः । ॐ कर्मकाण्डपरीणाहायै नमः ।

ॐ कमठ्यै नमः । ॐ कमठाकृत्यै नमः । ॐ कमठाराध्यहृदयायै नमः । ॐ कमठायै नमः ।

ॐ कण्ठसुन्दर्यै नमः । ॐ कमठासनसंसेव्यायै नमः । ॐ कमठ्यै नमः । ॐ कर्मतत्परायै नमः ।

ॐ करुणाकरकान्तायै नमः । ॐ करुणाकरवन्दितायै नमः । ॐ कठोरायै नमः ।

ॐ करमालायै नमः । ॐ कठोरकुचधारिण्यै नमः । ॐ कपर्दिन्यै नमः । ॐ कपटिन्यै नमः ।

ॐ कठिन्यै नमः । ॐ कङ्कभूषणायै नमः । ॐ करभोर्वै नमः । ॐ कठिनदायै नमः ।

ॐ करभायै नमः । ॐ करभालयायै नमः । ॐ कलभाषामय्यै नमः । ॐ कल्पायै नमः ।

ॐ कल्पनायै नमः । ॐ कल्पदायिन्यै नमः । ॐ कमलस्थायै नमः । ॐ कलामालायै नमः ।

ॐ कमलास्यायै नमः । ॐ क्वणत्प्रभायै नमः । ॐ ककुद्मिन्यै नमः । ॐ कष्टवत्यै नमः ।

ॐ करणीयकथार्चितायै नमः । ॐ कचार्चितायै नमः । ॐ कचतन्वै नमः ।

ॐ कचसुन्दरधारिण्यै नमः । ॐ कठोरकुचसंलग्नायै नमः । ॐ कटिसूत्रविराजितायै नमः ।

ॐ कर्णभक्षप्रियायै नमः । ॐ कन्दायै नमः । ॐ कथायै नमः । ॐ कन्दगत्यै नमः ।

ॐ कल्यै नमः । ॐ कलिघ्नयै नमः । ॐ कलिदूत्यै नमः । ॐ कविनायकपूजितायै नमः ।

ॐ कणकक्षानियन्त्र्यै नमः । ॐ कश्चित्कविवरार्चितायै नमः । ॐ कर्त्र्यै नमः ।

ॐ कर्तृकाभूषायै नमः । ॐ करिण्यै नमः । ॐ कर्णशत्रुपायै नमः । ॐ करणेश्यै नमः ।

ॐ करणपायै नमः । ॐ कलवाचायै नमः । ॐ कलानिध्यै नमः । ॐ कलनायै नमः ।

ॐ कलनाधारायै नमः । ॐ कलनायै नमः । ॐ कारिकायै नमः । ॐ कारायै नमः ।

ॐ कलगेयायै नमः । ॐ कर्कराश्यै नमः । ॐ कर्कराशिप्रपूजितायै नमः ।

ॐ कन्याराश्यै नमः । ॐ कन्यकायै नमः । ॐ कन्यकाप्रियभाषिण्यै नमः ।

ॐ कन्यकादानसन्तुष्टायै नमः । ॐ कन्यकादानतोषिण्यै नमः । ॐ कन्यादानकरानन्दायै नमः ।

ॐ कन्यादानग्रहेष्टदायै नमः । ॐ कर्षणायै नमः । ॐ कक्षदहनायै नमः । ॐ कामितायै नमः ।

ॐ कमलासनायै नमः । ॐ करमालानन्दकर्त्र्यै नमः । ॐ करमालाप्रतोषितायै नमः ।

ॐ करमालाशयानन्दायै नमः । ॐ करमालासमागमायै नमः । ॐ करमालासिद्धिदात्र्यै नमः ।

ॐ करमालायै नमः । ॐ करप्रियायै नमः । ॐ करप्रियाकररतायै नमः ।

ॐ करदानपरायणायै नमः । ॐ कलानन्दायै नमः । ॐ कलिगत्यै नमः । ॐ कलिपूज्यायै नमः ।

ॐ कलिप्रस्वै नमः । ॐ कलनादनिनादस्थायै नमः । ॐ कलनादवरप्रदायै नमः ।

ॐ कलनादसमाजस्थायै नमः । ॐ कहोलायै नमः । ॐ कहोलदायै नमः ।

ॐ कहोलगेहमध्यस्थायै नमः । ॐ कहोलवरदायिन्यै नमः । ॐ कहोलकविताधारायै नमः ।

ॐ कहोलऋषिमानितायै नमः। ॐ कहोलमानसाराध्यायै नमः। ॐ कहोलवाक्यकारिण्यै नमः।

ॐ कर्तृरूपायै नमः । ॐ कर्तृमय्यै नमः । ॐ कर्तृमात्रे नमः । ॐ कर्त्तर्यै नमः । ॐ कनीयायै नमः ।

ॐ कनकाराध्यायै नमः । ॐ कनीनकमय्यै नमः । ॐ कनीयानन्दनिलयायै नमः ।

ॐ कनकानन्दतोषितायै नमः । ॐ कनीयककरायै नमः । ॐ काष्ठायै नमः ।

ॐ कथार्णवकर्यै नमः । ॐ कर्यै नमः । ॐ करिगम्यायै नमः । ॐ करिगत्यै नमः ।

ॐ करिध्वजपरायणायै नमः । ॐ करिनाथप्रियायै नमः । ॐ कण्ठायै नमः ।

ॐ कथानकप्रतोषितायै नमः । ॐ कमनीयायै नमः । ॐ कमनकायै नमः ।

ॐ कमनीयविभूषणायै नमः । ॐ कमनीयसमाजस्थायै नमः । ॐ कमनीयव्रतप्रियायै नमः ।

ॐ कमनीयगुणाराध्यायै नमः । ॐ कपिलायै नमः । ॐ कपिलेश्वर्यै नमः ।

ॐ कपिलाराध्यहृदयायै नमः । ॐ कपिलाप्रियवादिन्यै नमः । ॐ कहचक्रमन्त्रवर्णायै नमः ।

ॐ कहचक्रप्रसूनकायै नमः । ॐ क ए ईल्ह्रींस्वरूपायै नमः । ॐ क ए ईल्ह्रींवरप्रदायै नमः ।

ॐ क ए ईल्ह्रींसिद्धिदात्र्यै नमः। ॐ क ए ईल्ह्रींस्वरूपिण्यै नमः। ॐ क ए ईल्ह्रींमन्त्रवर्णायै नमः।

ॐ क ए ईल्ह्रींप्रसूकलायै नमः । ॐ कवर्गायै नमः । ॐ कपाटस्थायै नमः ।

ॐ कपाटोद्घाटनक्षमायै नमः । ॐ कङ्काल्यै नमः । ॐ कपाल्यै नमः ।

ॐ कङ्कालप्रियभाषिण्यै नमः । ॐ कङ्कालभैरवाराध्यायै नमः ।

ॐ कङ्कालमानसंस्थितायै नमः । ॐ कङ्कालमोहनिरतायै नमः ।

ॐ कङ्कालमोहदायिन्यै नमः । ॐ कलुषघ्न्यै नमः । ॐ कलुषहायै नमः ।

ॐ कलुषार्त्तिविनाशिन्यै नमः । ॐ कलिपुष्पायै नमः । ॐ कलादानायै नमः ।

ॐ कशिप्वै नमः । ॐ कश्यपार्चितायै नमः । ॐ कश्यपायै नमः । ॐ कश्यपाराध्यायै नमः ।

ॐ कलिपूर्णकलेवरायै नमः । ॐ कलेवरकर्यै नमः । ॐ काञ्च्यै नमः । ॐ कवर्गायै नमः ।

ॐ करालकायै नमः । ॐ करालभैरवाराध्यायै नमः । ॐ करालभैरवेश्वर्यै नमः ।

ॐ करालायै नमः । ॐ कलनाधारायै नमः । ॐ कपर्दीशवरप्रदायै नमः ।

ॐ कपर्दीशप्रेमलतायै नमः । ॐ कपर्दिमालिकायै नमः । ॐ कपर्दिजपमालाढ्यायै नमः ।

ॐ करवीरप्रसूनदायै नमः । ॐ करवीरप्रियप्राणायै नमः । ॐ करवीरप्रपूजितायै नमः ।

ॐ कर्णिकारसमाकारायै नमः । ॐ कर्णिकारप्रपूजितायै नमः । ॐ करिषाग्निस्थितायै नमः ।

ॐ कर्षायै नमः । ॐ कर्षमात्रसुवर्णदायै नमः । ॐ कलशायै नमः । ॐ कलशाराध्यायै नमः ।

ॐ कषायायै नमः । ॐ करिगानदायै नमः । ॐ कपिलायै नमः । ॐ कलकण्ठ्यै नमः ।

ॐ कलिकल्पलतायै नमः । ॐ कल्पमात्रे नमः । ॐ कल्पलतायै नमः । ॐ कल्पकार्यै नमः ।

ॐ कल्पभुवे नमः । ॐ कर्पूरामोदरुचिरायै नमः । ॐ कर्पूरामोदधारिण्यै नमः ।

ॐ कर्पूरमालाभरणायै नमः । ॐ कर्पूरवासपूर्त्तिदायै नमः । ॐ कर्पूरमालाजयदायै नमः ।

ॐ कर्पूरार्णवमध्यगायै नमः । ॐ कर्पूरतर्पणरतायै नमः । ॐ कटकाम्बरधारिण्यै नमः ।

ॐ कपटेश्वरसम्पूज्यायै नमः । ॐ कपटेश्वररूपिण्यै नमः । ॐ कट्वै नमः ।

ॐ कविध्वजाराध्यायै नमः । ॐ कलापपुष्परूपिण्यै नमः । ॐ कलापपुष्परुचिरायै नमः ।

ॐ कलापपुष्पपूजितायै नमः । ॐ क्रकचायै नमः । ॐ क्रकचाराध्यायै नमः ।

ॐ कथंब्रूमायै नमः । ॐ करलतायै नमः । ॐ कथङ्कारविनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ काल्यै नमः । ॐ कालक्रियायै नमः । ॐ क्रत्वै नमः । ॐ कामिन्यै नमः ।

ॐ कामिनीपूज्यायै नमः । ॐ कामिनीपुष्पधारिण्यै नमः । ॐ कामिनीपुष्पनिलयायै नमः ।

ॐ कामिनीपुष्पपूर्णिमायै नमः । ॐ कामिनीपुष्पपूजार्हायै नमः । ॐ कामिनीपुष्पभूषणायै नमः ।

ॐ कामिनीपुष्पतिलकायै नमः। ॐ कामिनीकुण्डचुम्बनायै नमः। ॐ कामिनीयोगसन्तुष्टायै नमः।

ॐ कामिनीयोगभोगदायै नमः। ॐ कामिनीकुण्डसम्मग्नायै नमः। ॐ कामिनीकुण्डमध्यगायै नमः।

ॐ कामिनीमानसाराध्यायै नमः । ॐ कामिनीमानतोषितायै नमः ।

ॐ कामिनीमानसञ्चारायै नमः। ॐ कालिकायै नमः । ॐ कालकालिकायै नमः ।

ॐ कामायै नमः । ॐ कामदेव्यै नमः । ॐ कामेश्यै नमः । ॐ कामसम्भवायै नमः ।

ॐ कामभावायै नमः । ॐ कामरतायै नमः । ॐ कामार्त्तायै नमः । ॐ काममञ्जर्यै नमः ।

ॐ काममञ्जीररणितायै नमः । ॐ कामदेवप्रियान्तरायै नमः । ॐ कामकाल्यै नमः ।

ॐ कामकलायै नमः । ॐ कालिकायै नमः । ॐ कमलार्चितायै नमः । ॐ कादिकायै नमः ।

ॐ कमलायै नमः । ॐ काल्यै नमः । ॐ कालानलसमप्रभायै नमः । ॐ कल्पान्तदहनायै नमः ।

ॐ कान्तायै नमः । ॐ कान्तारप्रियवासिन्यै नमः । ॐ कालपूज्यायै नमः । ॐ कालरतायै नमः ।

ॐ कालमात्रे नमः । ॐ कालिन्यै नमः । ॐ कालवीरायै नमः । ॐ कालघोरायै नमः ।

ॐ कालसिद्धायै नमः । ॐ कालदायै नमः । ॐ कालाञ्जनसमाकारायै नमः ।

ॐ कालञ्जरनिवासिन्यै नमः । ॐ कालऋद्ध्यै नमः । ॐ कालवृद्ध्यै नमः ।

ॐ कारागृहविमोचिन्यै नमः । ॐ कादिविद्यायै नमः । ॐ कादिमात्रे नमः ।

ॐ कादिस्थायै नमः । ॐ कादिसुन्दर्यै नमः । ॐ काश्यै नमः । ॐ काञ्च्यै नमः ।

ॐ काञ्चीशायै नमः । ॐ काशीशवरदायिन्यै नमः । ॐ क्रींबीजायै नमः ।

ॐ क्रींबीजाहृदयायै नमः । ॐ काम्यायै नमः । ॐ काम्यगत्यै नमः ।

ॐ काम्यसिद्धिदात्र्यै नमः । ॐ कामभुवे नमः । ॐ कामाख्यायै नमः ।

ॐ कामरूपायै नमः । ॐ कामचापविमोचिन्यै नमः । ॐ कामदेवकलारामायै नमः ।

ॐ कामदेवकलालयायै नमः । ॐ कामरात्र्यै नमः । ॐ कामदात्र्यै नमः ।

ॐ कान्ताराचलवासिन्यै नमः । ॐ कामरूपायै नमः । ॐ कालगत्यै नमः ।

कामरूपायै नमः । ॐ कामचापविमोचिन्यै नमः । ॐ कामदेवकलारामायै नमः ।

ॐ कामदेवकलालयायै नमः । ॐ कामरात्र्यै नमः । ॐ कामदात्र्यै नमः ।

ॐ कान्ताराचलवासिन्यै नमः । ॐ कामरूपायै नमः । ॐ कालगत्यै नमः ।

ॐ कामयोगपरायणायै नमः । ॐ कामसम्मर्दनरतायै नमः । ॐ कामगेहविकाशिन्यै नमः ।

ॐ कालभैरवभार्यायै नमः । ॐ कालभैरवकामिन्यै नमः । ॐ कालभैरवयोगस्थायै नमः ।

ॐ कालभैरवभोगदायै नमः । ॐ कामधेन्वै नमः । ॐ कामदोग्ध्र्यै नमः । ॐ काममात्रे नमः ।

ॐ कान्तिदायै नमः। ॐ कामुकायै नमः। ॐ कामुकाराध्यायै नमः। ॐ कामुकानन्दवर्द्धिन्यै नमः।

ॐ कार्त्तवीर्यायै नमः । ॐ कार्त्तिकेयायै नमः । ॐ कार्त्तिकेयप्रपूजितायै नमः ।

ॐ कार्यायै नमः । ॐ कारणदायै नमः । ॐ कार्यकारिण्यै नमः । ॐ कारणान्तरायै नमः ।

ॐ कान्तिगम्यायै नमः । ॐ कान्तिमय्यै नमः । ॐ कात्यायै नमः । ॐ कात्यायन्यै नमः ।

ॐ कायै नमः । ॐ कामसारायै नमः । ॐ काश्मीरायै नमः । ॐ काश्मीराचारतत्परायै नमः ।

ॐ कामरूपाचाररतायै नमः । ॐ कामरूपप्रियंवदायै नमः । ॐ कामरूपाचारसिद्ध्यै नमः ।

ॐ कामरूपमनोमय्यै नमः । ॐ कार्त्तिक्यै नमः । ॐ कार्त्तिकाराध्यायै नमः ।

ॐ काञ्चनारप्रसूनभुवे नमः । ॐ काञ्चनारप्रसूनाभायै नमः । ॐ काञ्चनारप्रपूजितायै नमः ।

ॐ काञ्चरूपायै नमः । ॐ काञ्चभूम्यै नमः । ॐ कांस्यपात्रप्रभोजिन्यै नमः ।

ॐ कांस्यध्वनिमय्यै नमः । ॐ कामसुन्दर्यै नमः । ॐ कामचुन्बनायै नमः ।

ॐ काशपुष्पप्रतीकाशायै नमः । ॐ कामद्रुमसमागमायै नमः । ॐ कामपुष्पायै नमः ।

ॐ कामभूम्यै नमः । ॐ कामपूज्यायै नमः । ॐ कामदायै नमः । ॐ कामदेहायै नमः ।

ॐ कामगेहायै नमः । ॐ कामबीजपरायणायै नमः । ॐ कामध्वजसमारूढायै नमः ।

ॐ कामध्वजसमास्थितायै नमः । ॐ काश्यप्यै नमः । ॐ काश्यपाराध्यायै नमः ।

ॐ काश्यपानन्ददायिन्यै नमः । ॐ कालिन्दीजलसंकाशायै नमः ।

ॐ कालिन्दीजलपूजितायै नमः । ॐ कादेवपूजानिरतायै नमः । ॐ कादेवपरमार्थदायै नमः ।

ॐ कार्मणायै नमः । ॐ कार्मणाकारायै नमः । ॐ कामकार्मणकारिण्यै नमः ।

ॐ कार्मणत्रोटनकर्यै नमः । ॐ काकिन्यै नमः । ॐ कारणाह्वनायै नमः ।

ॐ काव्यामृतायै नमः । ॐ कालिङ्गायै नमः । ॐ कालिङ्गमर्द्दनोद्यतायै नमः ।

ॐ कालागुरुविभूषाढ्यायै नमः । ॐ कालागुरुविभूतिदायै नमः । ॐ कालागुरुसुगन्धायै नमः ।

ॐ कालागुरुप्रतर्पणायै नमः । ॐ कावेरीनीरसम्प्रीतायै नमः । ॐ कावेरीतीरवासिन्यै नमः ।

ॐ कालचक्रभ्रमाकारायै नमः । ॐ कालचक्रनिवासिन्यै नमः । ॐ काननायै नमः ।

ॐ काननाधारायै नमः । ॐ कार्व्यै नमः । ॐ कारुणिकामय्यै नमः। ॐ काम्पिल्यवासिन्यै नमः।

ॐ काष्ठायै नमः । ॐ कामपत्न्यै नमः । ॐ कामभुवे नमः । ॐ कादम्बरीपानरतायै नमः ।

ॐ कादम्बर्य्यै नमः । ॐ कलायै नमः । ॐ कामवन्द्यायै नमः । ॐ कामेश्यै नमः ।

ॐ कामराजप्रपूजितायै नमः । ॐ कामराजेश्वरीविद्यायै नमः । ॐ कामकौतुकसुन्दर्य्यै नमः ।

ॐ काम्बोजायै नमः । ॐ काञ्चिनदायै नमः । ॐ कांस्यकाञ्चनकारिण्यै नमः ।

ॐ काञ्चनाद्रिसमाकारायै नमः । ॐ काञ्चनाद्रिप्रदानदायै नमः । ॐ कामकीर्त्यै नमः ।

ॐ कामकेश्यै नमः । ॐ कारिकायै नमः । ॐ कान्ताराश्रयायै नमः । ॐ कामभेद्यै नमः ।

ॐ कामार्तिनाशिन्यै नमः । ॐ कामभूमिकायै नमः । ॐ कालनिर्णाशिन्यै नमः ।

ॐ काव्यवनितायै नमः । ॐ कामरूपिण्यै नमः । ॐ कायस्थाकामसन्दीप्त्यै नमः ।

ॐ काव्यदायै नमः । ॐ कालसुन्दर्यै नमः । ॐ कामेश्यै नमः । ॐ कारणवरायै नमः ।

ॐ कामेशीपूजनोद्यतायै नमः । ॐ काञ्चीनूपुरभूषाढ्यायै नमः ।

ॐ कुङ्कुमाभरणान्वितायै नमः । ॐ कालचक्रायै नमः । ॐ कालगत्यै नमः ।

ॐ कालचक्रमनोभवायै नमः । ॐ कुन्दमध्यायै नमः । ॐ कुन्दपुष्पायै नमः ।

ॐ कुन्दपुष्पप्रियायै नमः । ॐ कुजायै नमः । ॐ कुजमात्रे नमः । ॐ कुजाराध्यायै नमः ।

ॐ कुठारवरधारिण्यै नमः । ॐ कुञ्जरस्थायै नमः । ॐ कुशरतायै नमः ।

ॐ कुशेशयविलोचनायै नमः । ॐ कुनठ्यै नमः । ॐ कुरर्य्यै नमः । ॐ क्रुद्धायै नमः ।

ॐ कुरङ्ग्यै नमः । ॐ कुटजाश्रयायै नमः । ॐ कुम्भीनसविभूषायै नमः ।

ॐ कुम्भीनसवधोद्यतायै नमः । ॐ कुम्भकर्णमनोल्लासायै नमः । ॐ कुलचूडामण्यै नमः ।

ॐ कुलायै नमः । ॐ कुलालगृहकन्यायै नमः । ॐ कुलचूडामणिप्रियायै नमः ।

ॐ कुलपूज्यायै नमः । ॐ कुलाराध्यायै नमः । ॐ कुलपूजापरायणायै नमः ।

ॐ कुलभूषायै नमः । ॐ कुक्ष्यै नमः । ॐ कुररीगणसेवितायै नमः । ॐ कुलपुष्पायै नमः ।

ॐ कुलरतायै नमः । ॐ कुलपुष्पपरायणायै नमः । ॐ कुलवस्त्रायै नमः । ॐ कुलाराध्यायै नमः ।

ॐ कुलकुण्डसमप्रभायै नमः । ॐ कुलकुण्डसमोल्लासायै नमः । ॐ कुण्डपुष्पपरायणायै नमः ।

ॐ कुण्डपुष्पप्रसन्नास्यायै नमः । ॐ कुण्डगोलोद्भवात्मिकायै नमः ।

ॐ कुण्डगोलोद्भवाधारायै नमः । ॐ कुण्डगोलमय्यै नमः । ॐ कुह्व्यै नमः ।

ॐ कुण्डगोलप्रियप्राणायै नमः । ॐ कुण्डगोलप्रपूजितायै नमः । ॐ कुण्डगोलमनोल्लासायै नमः ।

ॐ कुण्डगोलबलप्रदायै नमः । ॐ कुण्डदेवरतायै नमः । ॐ क्रुद्धायै नमः ।

ॐ कुलसिद्धिकरापरायै नमः । ॐ कुलकुण्डसमाकारायै नमः । ॐ कुलकुण्डसमानभुवे नमः ।

ॐ कुण्डसिद्ध्यै नमः । ॐ कुण्डऋद्ध्यै नमः । ॐ कुमारीपूजनोद्यतायै नमः ।

ॐ कुमारीपूजकप्राणायै नमः । ॐ कुमारीपूजकालयायै नमः । ॐ कुमार्यै नमः ।

ॐ कामसन्तुष्टायै नमः । ॐ कुमारीपूजनोत्सुकायै नमः । ॐ कुमारीव्रतसन्तुष्टायै नमः ।

ॐ कुमारीरूपधारिण्यै नमः । ॐ कुमारीभोजनप्रीतायै नमः । ॐ कुमार्यै नमः ।

ॐ कुमारदायै नमः । ॐ कुमारमात्रे नमः । ॐ कुलदायै नमः । ॐ कुलयोन्यै नमः ।

ॐ कुलेश्वर्यै नमः । ॐ कुललिङ्गायै नमः । ॐ कुलानन्दायै नमः । ॐ कुलरम्यायै नमः ।

ॐ कुतर्कधृषे नमः । ॐ कुन्त्यै नमः । ॐ कुलकान्तायै नमः । ॐ कुलमार्गपरायणायै नमः ।

ॐ कुल्लायै नमः । ॐ कुरुकुल्लायै नमः । ॐ कुल्लुकायै नमः । ॐ कुलकामदायै नमः ।

ॐ कुलिशाङ्ग्यै नमः । ॐ कुब्जिकायै नमः । ॐ कुब्जिकानन्दवर्द्धिन्यै नमः ।

ॐ कुलीनायै नमः । ॐ कुञ्जरगत्यै नमः । ॐ कुञ्जरेश्वरगामिन्यै नमः ।

ॐ कुलपाल्यै नमः । ॐ कुलवत्यै नमः । ॐ कुलदीपिकायै नमः । ॐ कुलयोगेश्वर्यै नमः ।

ॐ कुण्डायै नमः । ॐ कुङ्कुमारुणविग्रहायै नमः । ॐ कुङ्कुमानन्दसन्तोषायै नमः ।

ॐ कुङ्कुमार्णववासिन्यै नमः । ॐ कुसुमायै नमः । ॐ कुसुमप्रीतायै नमः ।

ॐ कुलभुवे नमः । ॐ कुलसुन्दर्यै नमः । ॐ कुमुद्वत्यै नमः । ॐ कुमुदिन्यै नमः ।

ॐ कुशलायै नमः । ॐ कुलटालयायै नमः । ॐ कुलटालयमध्यस्थायै नमः ।

ॐ कुलटासङ्गतोषितायै नमः । ॐ कुलटाभवनोद्युक्तायै नमः । ॐ कुशावर्त्तायै नमः ।

ॐ कुलार्णवायै नमः । ॐ कुलार्णवाचाररतायै नमः । ॐ कुण्डल्यै नमः । ॐ कुण्डलाकृत्यै नमः ।

ॐ कुमत्यै नमः । ॐ कुलश्रेष्ठायै नमः । ॐ कुलचक्रपरायणायै नमः । ॐ कूटस्थायै नमः ।

ॐ कूटदृष्ट्यै नमः । ॐ कुन्तलायै नमः । ॐ कुन्तलाकृत्यै नमः । ॐ कुशलाकृतिरूपायै नमः ।

ॐ कूर्चवीजधरा यै नमः । ॐ क्वै नमः । ॐ कुं कुं कुं कुं शब्दरतायै नमः ।

ॐ क्रुं क्रुं क्रुं क्रुं परायणायै नमः । ॐ कुं कुं कुं शब्दनिलयायै नमः । ॐ कुक्कुरालयवासिन्यै नमः ।

ॐ कुक्कुरासङ्गसंयुक्तायै नमः । ॐ कुक्कुरानन्तविग्रहायै नमः । ॐ कूर्चारम्भायै नमः ।

ॐ कूर्चबीजायै नमः । ॐ कूर्चजापपरायणायै नमः । ॐ कुलिन्यै नमः । ॐ कुलसंस्थानायै नमः ।

ॐ कूर्चकण्ठपरागत्यै नमः । ॐ कूर्चवीणाभालदेशायै नमः । ॐ कूर्चमस्तकभूषितायै नमः ।

ॐ कुलवृक्षगतायै नमः । ॐ कूर्मायै नमः । ॐ कूर्माचलनिवासिन्यै नमः । ॐ कुलबिन्द्वै नमः ।

ॐ कुलशिवायै नमः । ॐ कुलशक्तिपरायणायै नमः । ॐ कुलबिन्दुमणिप्रख्या नमः ।

ॐ कुङ्कुमद्रुमवासिन्यै नमः । ॐ कुचमर्दनसन्तुष्टायै नमः । ॐ कुचजापपरायणायै नमः ।

ॐ कुचस्पर्शनसन्तुष्टायै नमः । ॐ कुचालिङ्गनहर्षदायै नमः । ॐ कुगतिघ्न्यै नमः ।

ॐ कुबेरार्च्यायै नमः । ॐ कुचभुवे नमः । ॐ कुलनायिकायै नमः । ॐ कुगायनायै नमः ।

ॐ कुचधरायै नमः । ॐ कुमात्रे नमः । ॐ कुन्ददन्तिन्यै नमः । ॐ कुगेयायै नमः ।

ॐ कुहराभाषायै नमः । ॐ कुगेयाकुघ्नदारिकायै नमः । ॐ कीर्त्यै नमः । ॐ किरातिन्यै नमः ।

ॐ क्लिन्नायै नमः । ॐ किन्नरायै नमः । ॐ किन्नर्यै नमः । ॐ क्रियायै नमः ।

ॐ क्रीङ्कारायै नमः । ॐ क्रींजपासक्तायै नमः । ॐ क्रींह्वूंस्त्रींमन्त्ररूपिण्यै नमः ।

ॐ कीर्मिरितदृशापाङ्ग्यै नमः । ॐ किशोर्यै नमः । ॐ किरीटिन्यै नमः । ॐ कीटभाषायै नमः ।

ॐ कीटयोन्यै नमः । ॐ कीटमात्रे नमः । ॐ कीटदायै नमः । ॐ किंशुकायै नमः ।

ॐ कीरभाषायै नमः । ॐ क्रियासारायै नमः । ॐ क्रियावत्यै नमः । ॐ कींकींशब्दपरायै नमः ।

ॐ क्लींक्लींक्लूंक्लैंक्लौंमन्त्ररूपिण्यै नमः । ॐ कांकींकूंकैंस्वरूपायै नमः ।

ॐ कःफट्मन्त्रस्वरूपिण्यै नमः । ॐ केतकीभूषणानन्दायै नमः । ॐ केतकीभरणान्वितायै नमः ।

ॐ कैकदायै नमः । ॐ केशिन्यै नमः । ॐ केशीसूदनतत्परायै नमः । ॐ केशरूपायै नमः ।

ॐ केशमुक्तायै नमः । ॐ कैकेय्यै नमः । ॐ कौशिक्यै नमः । ॐ केरवायै नमः ।

ॐ कैरवाह्लादायै नमः । ॐ केशरायै नमः । ॐ केतुरूपिण्यै नमः ।

ॐ केशवाराध्यहृदयायै नमः । ॐ केशवासक्तमानसायै नमः । ॐ क्लैव्यविनाशिन्यै क्लैं नमः ।

ॐ क्लैंबीजजपतोषितायै नमः । ॐ कौशल्यायै नमः । ॐ कोशलाक्ष्यै नमः । ॐ कोशायै नमः ।

ॐ कोमलायै नमः । ॐ कोलापुरनिवासायै नमः । ॐ कोलासुरविनाशिन्यै नमः ।

ॐ कोटिरूपायै नमः । ॐ कोटिरतायै नमः । ॐ क्रोधिन्यै नमः । ॐ क्रोधरूपिण्यै नमः ।

ॐ केकायै नमः । ॐ कोकिलायै नमः । ॐ कोट्यै नमः । ॐ कोटिमन्त्रपरायणायै नमः ।

ॐ कोट्यनन्तमन्त्रयुतायै नमः । ॐ कैरूपायै नमः । ॐ केरलाश्रयायै नमः ।

ॐ केरलाचारनिपुणायै नमः । ॐ केरलेन्द्रगृहस्थितायै नमः । ॐ केदाराश्रमसंस्थायै नमः ।

ॐ केदारेश्वरपूजितायै नमः । ॐ क्रोधरूपायै नमः । ॐ क्रोधपदायै नमः । ॐ क्रोधमात्रे नमः ।

ॐ कौशिक्यै नमः । ॐ कोदण्डधारिण्यै नमः । ॐ क्रौंञ्चायै नमः । ॐ कौशल्यायै नमः ।

ॐ कौलमार्गगायै नमः । ॐ कौलिन्यै नमः । ॐ कौलिकाराध्यायै नमः ।

ॐ कौलिकागारवासिन्यै नमः । ॐ कौतुक्यै नमः । ॐ कौमुद्यै नमः । ॐ कौलायै नमः ।

ॐ कौमार्यै नमः । ॐ कौरवार्चितायै नमः । ॐ कौण्डिन्यायै नमः । ॐ कौशिक्यै नमः ।

ॐ क्रोधज्वालाभासुररूपिण्यै नमः । ॐ कोटिकालानलज्वालायै नमः ।

ॐ कोटिमार्तण्डविग्रहायै नमः । ॐ कृत्तिकायै नमः । ॐ कृष्णवर्णायै नमः ।

ॐ कृष्णायै नमः । ॐ कृत्यायै नमः । ॐ क्रियातुरायै नमः । ॐ कृशाङ्ग्यै नमः ।

ॐ कृतकृत्यायै नमः । ॐ क्रःफट्स्वाहास्वरूपिण्यै नमः । ॐ क्रौंक्रौंहूंफट्मन्त्रवर्णायै नमः ।

ॐ क्रींह्रींह्रूंफट्नमःस्वधायै नमः । ॐ क्रींक्रींह्रींह्रीं तथा ह्रूंह्रूं फट्स्वाहामन्त्ररूपिण्यै नमः । १०००

इति ककारादिकालीसहस्त्रनामस्तोत्रम् सहस्रनामावली
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आचार्य पंडित उदित केशोरे
अटूट खास खण्डवा
मात श्री नर्मदे हर

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