Baba Matshwar Dham

Baba Matshwar Dham महादेव मंदिर

यह चित्र अत्यंत भक्तिपूर्ण क्षण को दर्शाता है — माता पार्वती, भगवान शिव और उनके पुत्र गणेशजी का एक सुंदर मिलन दृश्य। यह ...
14/07/2025

यह चित्र अत्यंत भक्तिपूर्ण क्षण को दर्शाता है — माता पार्वती, भगवान शिव और उनके पुत्र गणेशजी का एक सुंदर मिलन दृश्य। यह दृश्य गणेशजी की जन्मकथा से जुड़ा है, जब भगवान शिव ने बालक का मस्तक काट दिया था और फिर उसे हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया।

🌺 भक्तिपूर्ण संदेश 🌺

"माता-पिता के आशीर्वाद से ही जन्म लेते हैं गणपति – बुद्धि, भक्ति और सिद्धि के अधिपति। संकट के समय जो सहारा बनते हैं, वही श्रीगणराज सब पर कृपा करते हैं। भक्त की पुकार पर वे सदैव दौड़े चले आते हैं।"

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"जहाँ माता पार्वती का ममत्व है,
जहाँ महादेव की कृपा है,
वहाँ गणराय का चैतन्य सदा जाग्रत रहता है।"

🕉️✨

#गणेशजी #शिवपार्वती #गणराज #भक्तिभाव #गणेशकथा #सनातनधर्म #हिन्दूसंस्कार

हर हर महादेव
13/07/2025

हर हर महादेव

राजकीय मटेश्वर  महोत्सव में आपसभी सादर आमंत्रित हैं।
18/03/2025

राजकीय मटेश्वर महोत्सव में आपसभी सादर आमंत्रित हैं।

आज_मटेश्वर_धाम में  #महाशिवरात्रि मेला को लेकर अनुमंडल प्रशासन की मौजदूगी में बैठक हुई, बैठक में मेला कमेटी अध्यक्ष डाक्...
15/02/2025

आज_मटेश्वर_धाम में #महाशिवरात्रि मेला को लेकर अनुमंडल प्रशासन की मौजदूगी में बैठक हुई, बैठक में मेला कमेटी अध्यक्ष डाक्टर #अरूण_यादव , उपाध्यक्ष #सत्यनारायण_सिंह , सचिव:- ादव व्यवस्थापक:- #रामोतार_यादव कोषाध्यक्ष :- #जितेन्द्र_सिंह_बघेल विवाह पदाधिकारी :- #अरविंद_यादव सहित स्थानीय #जनप्रतिनिधिगण, मंदिर से आस्था रखने वाले #प्रबुद्ध_नागरिक उपस्थित रहें।

20/09/2024

यह वीडियो पूरा देखिए, आपको भगवान पर विश्वास हो जाएगा।

01/09/2024

आज संध्या 7 बजे 28वां श्रावणी मटेश्वर महोत्सव 2024 का उद्घाटन उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम होना सुनिश्चित है, आप लोग जरूर आएं

17/07/2022

देख नजारा मौसम,का ये मन को कितना भाता है जब सावन खुद महादेव को जल चढ़ाने आता है “ ादेव“🙏

हर हर महादेव 🙏
17/07/2022

हर हर महादेव 🙏

13/07/2022

कर्पूरगौरं करुणावतारं,
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे,
भवं भवानीसहितं नमामि ॥

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले, गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं, चकारचण्डताण्डवं ...
12/07/2022

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले, गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं, चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिवो शिवम्‌ ॥१॥

जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिंपनिर्झरी, विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके, किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥२॥

धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुरस्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥

जटाभुजंगपिंगलस्फुरत्फणामणिप्रभा-कदंबकुंकुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे।
मदांधसिंधुरस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूतभर्तरि ॥४॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर-प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालयानिबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिङ्गभा-निपीतपंचसायकंनमन्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वलद्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनीकुचाग्रचित्रपत्रकप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥७॥

नवीनमेघमंडलीनिरुद्धदुर्धरस्फुरत्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥८॥

प्रफुल्लनीलपंकजप्रपंचकालिमप्रभा-विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥

अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजंगमस्फुरद्धगद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदंगतुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥११॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंगमौक्तिकमस्रजोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुञ्जकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥१३॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥१४॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥१५॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१६॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं यः शम्भूपूजनपरम् पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥१७॥

॥ इति शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥

सादर आमंत्रण
11/07/2022

सादर आमंत्रण

09/07/2022

मोरी गोरी

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Balwahat/Bhagwa Road, Chapram
Saharsa
852106

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