04/04/2025
जय मां कात्यायनी🙏
मां दुर्गा का छठा रूप मां कात्यायनी हैं। आज नवरात्रि के छठवें दिन उनकी पूजा होती है। ऋषि कात्यायन के घर जन्म होने से उनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी की पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चारों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। नवरात्रि में देवी कात्यायनी की पूजा का खास महत्व होता है। मान्यता है कि नवरात्रि में देवी कात्यायनी की पूजा करने से माता भक्तों को साहस और शक्ति देती हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि कुंवारे लड़के और लड़कियां मां कात्यायिनी की पूजा पूरे विधि विधान से करते हैं, तो उन्हें सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं मां कात्यायिनी का स्वरूप कैसा है, जानें उनकी पूजा का महत्व, पूजाविधि, भोग, मंत्र और आरती।
मां कात्यायनी की पूजा का महत्व :
ब्रजभूमि में देवी कात्यायनी की पूजा होती है। ब्रज की कन्याओं ने श्रीकृष्ण के प्रेम के लिए इनकी आराधना की। श्रीकृष्ण ने भी देवी कात्यायनी की पूजा की थी। देवी कात्यायनी को मधु वाला पान बहुत पसंद है। उन्हें फल, मिठाई और शहद वाला पान प्रसाद के रूप में चढ़ाना चाहिए। गीता में भी बताया गया है कि राधारानी और गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी पीठ में पूजा की थी। माता ने उन्हें वरदान दिया, लेकिन, भगवान कृष्ण एक थे और गोपियां अनेक, इसलिए, यह संभव नहीं था। भगवान कृष्ण ने देवी के इस वरदान को पूरा करने के लिए सभी गोपियों के लिए महारास किया।
मां कात्यायनी का स्वरूप :
मां कात्यायनी सुनहरे वर्ण वाली चमत्कारिक देवी हैं। उनकी चार भुजाएं हैं और वे रत्नों से सजी हैं। वह शेर पर सवार रहती हैं और हमेशा हमला करने के लिए तैयार रहती हैं। उनका तेज सभी देवताओं के तेज से मिलकर बना है। देवी कात्यायनी भक्तों को अभय और वरदान देती हैं। मां कात्यायनी दाहिनी ओर ऊपर वाले हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। नीचे वाले हाथ से वे उन्हें वरदान देती हैं। बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में उन्होंने चंद्रहास नाम की तलवार पकड़ी है। नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है।
मां कात्यायनी का भोग :
मां कात्यायनी को पीला रंग बहुत पसंद है, इसलिए भक्त उन्हें पीले रंग की मिठाई अर्पित करते हैं। यह माना जाता है कि ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही, मां को शहद से बने हलवे का भोग भी लगाया जाता है। आप सूजी का हलवा बनाकर उसमें शहद मिलाकर भी मां को अर्पित कर सकते हैं, ऐसा करने से मां कात्यायनी की कृपा प्राप्त होती है।
मां कात्यायनी का मंत्र :
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
स्तुति मंत्र :
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां कात्यायनी की पूजाविधि :
आज मां कात्यायनी की पूजा का दिन है। भक्त सूर्योदय से पहले स्नान करके, पीले या लाल वस्त्र पहनकर मां की आराधना करते हैं और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके, कलश का पूजन किया जाता है। मां कात्यायनी को वस्त्र अर्पित करके, घी का दीपक जलाया जाता है। रोली का तिलक, अक्षत, धूप और पीले फूल मां को चढ़ाए जाते हैं। उसके बाद पान के पत्ते पर शहद और बताशे में लौंग रखकर मां का भोग लगाया जाता है। अंत में कपूर जलाकर मां कात्यायनी की आरती की जाती है।
मां कात्यायनी की आरती :
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।