Shakti Peeth Shakumbhari Devi

Shakti Peeth Shakumbhari Devi According to legend, she appeared to end a severe drough

Shakumbhari Devi is a Hindu goddess of nourishment and abundance, a form of Mahadevi, who is depicted with fruits and vegetables symbolizing fertility and the provision of sustenance for all beings.

जय मां चंद्रघंटा🙏आज नवरात्रि का तीसरा दिन है. तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. मां चं...
21/03/2026

जय मां चंद्रघंटा🙏

आज नवरात्रि का तीसरा दिन है. तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की सच्ची निष्ठा से पूजा-अर्चना करने से जीवन में शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन आता है. ऐसे में आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र, मां का भोग, शुभ रंग और कथा और आरती.

मां चंद्रघंटा का स्वरूप :-

मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र की आकृति होती है, जो घंटी के आकार जैसी दिखाई देती है. इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. देवी का यह स्वरूप शांति और वीरता का प्रतीक माना जाता है. माता सिंह की सवारी करती हैं. मां की 10 भुजाएं हैं, जिनमें वे खड्ग, धनुष, बाण और त्रिशूल जैसे अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं.

मां चंद्रघंटा पूजा विधि :-

मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय श्रद्धा और भक्ति का भाव रखना बेहद जरूरी है. सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें. पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें.
मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर स्थापित करें.
रोली, अक्षत, धूप, दीपक, फूल, मिठाई और गंगाजल रखें.
ऊं देवी चंद्रघंटायै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें.
पूजा होने के बाद मां की आरती करनी चाहिए.
माता को खीर, दूध से बनी मिठाईयां और फल का भोग लगाएं.

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग :-

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. खासकर खीर, दूध से बने पेड़े या सफेद मिठाई अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं.

पूजा में चढ़ाने वाले फूल :-

मां चंद्रघंटा को गेंदा (मैरीगोल्ड) के फूल अति प्रिय माने जाते हैं. इसके अलावा कमल या सफेद पुष्प भी अर्पित किए जा सकते हैं. फूल अर्पित करते समय सच्चे मन से प्रार्थना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

शुभ रंग :-

नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ रंग ग्रे माना जाता है. इस रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में स्थिरता आती है.

पूजा का महत्व :-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक के अंदर साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता का विकास होता है. साथ ही जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है.

मां चंद्रघंटा का मंत्र :-

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

ध्यान मंत्र :-

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्.
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्.
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्.
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्.
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

मां चंद्रघंटा की आरती :-

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योति जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
काचीपुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटूं महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।

जय मां ब्रह्मचारिणी🙏आज यानी 20 मार्च, शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है. नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी...
20/03/2026

जय मां ब्रह्मचारिणी🙏

आज यानी 20 मार्च, शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है. नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में जलपात्र होता है. मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करने से मनचाहा वरदान मिलता है. मां भक्तों के दुखों को हरने वाली और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं. आइए जानते हैं नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने की विधि, शुभ मुहूर्त, मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र, कथा और आरती, साथ ही जानेंगे मां को किस चीज का भोग लगाया जाता है और उन्हें कौन सा रंग प्रिय है.

मां ब्रह्मचारिणी का ऐसा है स्वरूप :-

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है, जो विद्या और ज्ञान की देवी हैं। माता की कृपा से भक्तों को सफलता और विजय प्राप्त होती है। मां ब्रह्मचारिणी सफेद रंग के वस्त्र धारण किए हुए हैं और उनके एक हाथ में अष्टदल की माला तो दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित है। देवी का रूप बहुत सशक्त, सुंदर और सरल है। मां ब्रह्माचारिणी को तपस्या, ज्ञान और वैराग्य अधिष्ठात्री कहा जाता है। देवी के हाथों में जो अक्षयमाला और कंमडल है उन्हें शास्त्रों, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक माना गया है। मान्यता है की मां जल्दी प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा अपने भक्तों पर हमेशा बनी रहती है। देवी का स्वभाव बहुत दयालु और शांत है। सच्चे मन से और विधि पूर्वक मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। साथ ही, ज्ञान और विद्या के क्षेत्र में तरक्की मिलती है।

मां ब्रह्मचारिणी के भोग :-

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है की देवी को यह भोग लगाने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसके अलावा, साधक मां ब्रह्मचारिणी को पीले रंग के फल भी अर्पित कर सकते हैं क्योंकि, इस दिन पीले रंग का बहुत खास महत्व होता है। चीनी और मिश्री का भोग लगाने से जीवन में सकारात्मकता आती है और इससे स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि :-

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात, गंगाजल से पूजा घर को शुद्ध कर लें।
नवरात्रि में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना अत्यंत उत्तम माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग पीला माना गया है। ऐसे में पीले रंग के वस्त्र धारण करके माता की पूजा करनी चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी को सबसे पहले पंचामृत से स्नान कराएं। इसके लिए दही, दूध, घी, चीनी और शहद का प्रयोग किया जाता है। फिर, देवी को पीले रंग के फूल, वस्त्र, फल आदि अर्पित करें।
माता को रोली, कुमकुम से तिलक करें और पूजा में धूप व दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। इसके बाद, माता को पंखा, दूध से बने मिष्ठान, बताशे आदि का भोग लगाएं।
हवन और आहुति के लिए आप अपनी श्रद्धा अनुसार लौंग, बताशे व हवन सामग्री अग्नि में अर्पित कर सकते हैं।
देवी की पूजा करने के साथ-साथ 'मां ब्रह्मचारिणी की जय' के जयकारे पूरे परिवार के साथ अवश्य लगाने चाहिए और मंत्रों का जाप भी करें।
व्रत कथा का पाठ और आरती के साथ-साथ माता को पान का पत्ता व सुपारी चढ़ाएं। इस दिन दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
नवरात्रि के दूसरे दिन कलश देवता और नवग्रह की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए। इसके पश्चात, शाम के समय नवग्रह की पूजा भी जरूर करें।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र :-

दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू,
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
ओम ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:,
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती :-

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।

जय मां शैलपुत्री🙏चैत्र नवरात्रि का पर्व आज से शुरू हो रहा है। चैत्र नवरात्रि का पर्व हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में...
19/03/2026

जय मां शैलपुत्री🙏

चैत्र नवरात्रि का पर्व आज से शुरू हो रहा है। चैत्र नवरात्रि का पर्व हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। नवरात्रि के 9 दिन विधि-विधान से मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। मां के रूप नौ देवियों की दिव्य शक्ति प्रदान करने वाले हैं। ये समय शक्ति की उपासना और नई ऊर्जा के संचार का प्रतीक है। मां दुर्गा जब आती हैं तो चारों ओर खुशियां लाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता रानी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है और मां दुर्गा अपना आशीर्वाद सदैव बनाए रखती हैं। पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से शुरू हो रहा है और इसका समापन 27 मार्च को राम नवमी के साथ होगा। इस चैत्र नवरात्रि पर, आइए हम इन संदेशों के माध्यम से अपने परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों को शुभकामनाएं भेजें, ताकि उन पर भी मां जगदंबा की असीम कृपा बनी रहे।

मां शैलपुत्री का स्वरूप :-

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार आदिशक्ति का यह प्रथम रूप शांत और तेजस्वी है। वृषभ पर सवार श्वेत वर्ण में मां के दाहिने हाथ में त्रिशुल है जो शक्ति का प्रतीक है। मां के बाएं हाथ में कमल का फूल पवित्रता को दर्शाता है। वहीं, मां के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा का जन्म पर्वत राज हिमालय के घर हुआ था। इस वजह से मां के इस अवतार को शैलपुत्री कहा जाता है। जिसका अर्थ होता है पर्वत की पुत्री। मां की सवारी बैल होने से उन्हें वृषारुधा के नाम से भी जाता जाता है।

मां शैलपुत्री की पूजा विधि :-

नवरात्रि के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
चौकी को गंगाजल से शुद्ध करके उस पर मां शैलपुत्री की प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद मां को सिंदूर, अक्षत और सफेद या लाल फूल अर्पित करें।
विधिपूर्वक कलश की स्थापना करें और घी का दीपक जलाएं।
मां शैलपुत्री की पूजा षोडशोपचार विधि से करें, जो 16 चरणों से होती है।
इसके बाद कपूर या घी के दीपक से मां शैलपुत्री की आरती उतारें।
इसके बाद पूजा में हुई गलती के लिए मां से क्षमा याचना करें।
पूजा के बाद पूजा के बाद दुर्गा स्तुति या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

मां शैलपुत्री का भोग :-

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को सफेद रंग की वस्तुओं का भोग लगाना अत्यंत ही शुभ माना जाता है। मां को सफेद रंग की वस्तुएं प्रिय हैं। सफेद रंग को शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता इसलिए मां को गाय के दूध से बनी खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाया जाता है। भोग बनाते समय गाय के घी का प्रयोग करना उत्तम माना गया है। मां को सफेद वस्तुओं का भोग लगाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

मां शैलपुत्री का मंत्र :-

वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्,
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता।
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुंग कुचाम्,
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्।
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:,
ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

मां शैलपुत्री की आरती :-

शैलपुत्री मां बैल पर सवार, करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी, तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे, जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू, दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी, आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो, सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के, गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं, प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अम्बे, शिव मुख चंद्र चकोरी अम्बे।
मनोकामना पूर्ण कर दो, भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
जोर से बोलो जय माता दी, सारे बोले जय माता दी।

मां शैलपुत्री व्रत कथा :-

पौराणिक कथा के अनुसार, पूर्व जन्म में मां शैलपुत्री देवी सती के रुप में प्रकट हुई थीं। देवी सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। एक बार प्रजापति दक्ष ने बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया और उसके लिए सभी देवताओं को निमंत्रित भिजवाया। बस उन्होंने भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। देवी सती पिता द्वारा किए जा रहे यज्ञ में जाना चाहती थीं। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया है, लेकिन हमें नहीं बुलाया गया। ऐसे में वहाँ जाना उचित नहीं है।
भगवान शिव के बार-बार समझाने के बाद भी देवी सती वहां जाने की जिद पर अड़ी रहीं। ऐसे में भगवान शिव ने उन्हें जाने की अनुमति दे दी। देवी सती जब अपने पिता के घर पहुंची तो मां ने उन्हें स्नेह दिया। इनकी माता को छोड़कर सभी ने उनका उपहास किया। बहनों की बातों में भी व्यंग झलक रहा था। भगवान शिव के प्रति तिरस्कार का भाव था। प्रजापति दक्ष ने भी उनके लिए सामने भगवान शिव के लिए अपशब्द कहें। अपने पिता द्वारा किए गए अपमान के चलते सती बहुत आहत हुईं। उस समय देवी सती ने खुद को अग्नि में जलाकर भस्म कर लिया।
भगवान शंकर को जब यह बात पता चली तो वह बहुत क्रोधित हो गए और और उन्होंने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया। इसके बाद, सती ने अगले जन्म में शैलराज हिमालय के घर जन्म लिया। इसीलिए उन्हें शैलपुत्री कहा गया। आगे चलकर उनका विवाह भगवान शिव से हुआ और वो दोबारा उनकी अर्धांगिनी बन गईं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
19/03/2026

चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

जय माता शक्तिपीठ शाकम्भरी देवी की जय🙏शाकुंभरी देवी हिंदू धर्म में पोषण और समृद्धि की देवी हैं, जो महादेवी का एक रूप हैं।...
19/03/2026

जय माता शक्तिपीठ शाकम्भरी देवी की जय🙏

शाकुंभरी देवी हिंदू धर्म में पोषण और समृद्धि की देवी हैं, जो महादेवी का एक रूप हैं। उन्हें फलों और सब्जियों के साथ चित्रित किया जाता है, जो उर्वरता और सभी प्राणियों के लिए जीविका प्रदान करने का प्रतीक हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, वे भीषण सूखे को समाप्त करने के लिए प्रकट हुईं।

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