20/10/2024
श्री सीता राम ट्रस्ट कैलाशपुर, सहारनपुर उत्तर प्रदेश Post : 013 (20.10.2024)
विषय : एक साधक की कहानी (माँ कैसे मिलती है )
Step 1: सबसे पहले सुबह मे स्नान करके पति और पत्नी सबसे पहले अपने अपने माता पिता के चरण स्पर्श करे। पत्नी याद रखे कि उसके सास ससुर ही उसे के माता पिता होते है।
नीचे दिये गए सिमरन को करे।
• माता पिता को कोटि कोटि प्रणाम।
• सभी पितरो को कोटि कोटि प्रणाम।
• कुल देवी को कोटि कोटि प्रणाम।
• कुल देवता को कोटि कोटि प्रणाम।
• नगर खेड़े को कोटि कोटि प्रणाम।
Part 1 (एक पुत्र को माँ कैसे मिलती है)
1) एक साधक जो अपने इष्ट से बहुत प्रेम करता था, 24 घंटे श्री कृष्ण -श्री कृष्ण करता रहता था। उसके सिमरन से ख़ुश हो कर श्री कृष्ण अपने एक गण को उस साधक के पास भेजते है। और श्री कृष्ण उस गण से कहते है आप उस साधक से कहना कि मै उस से मिलना चाहता हु। लेकिन तुम्हें पहले अपने माता पिता, पितरों, कुलदेवी, कुल देवता और खेड़ा महाराज का सिमरन करना होगा क्योंकि मै इनको बिना बताए तुम से नहीं मिल सकता।
2 ) वो गण श्री कृष्ण सभी बाते उस साधक को बता देता है और कहते है कि पहले अपनो का सिमरन करो। वो साधक उस गण की बात मान जाता है। अब वो पहले अपनो को सिमरन करता है उसके बाद श्री कृष्ण का सिमरन करता है।
एक दिन श्री कृष्ण उसके सपने मे आते है और कहते है हम जल्दी मिलेंगे, मुझे भी अपने माता पिता को मनाना होगा। जब सभी मान जाएँगे तब हम जल्दी मिलेंगे। और तुम अपनी कुल देवी और कुल देवता के मंदिर मे जा कर उन से कहो कि मै श्री कृष्ण के दर्शन करना चाहता हु, कृपया मुझे दर्शन करा दो ।
वो साधक अगले दिन कुल देवी और कुल देवता के मंदिर मे जा कर श्री कृष्ण के सपने के बारे में कुल देवी- कुल देवता को बता देता है। कुल देवी -कुल देवता साधक को आशीर्वाद देते है और कहते है कि तुम्हें दर्शन हो जाएँगे।
साधक प्रतिदिन सभी का सिमरन करने के बाद श्री कृष्ण का सिमरन करता रहा।
3) जन्मस्टमी के कुछ दिन पहले महादेव के गण आए और उस साधक को कहा कि तुम्हें जल्दी ही श्री कृष्ण के दर्शन होंगे। साधक को लगने लगा कि जन्मस्टमी को श्री कृष्ण जी के दर्शन होंगे। और वो प्रतीक्षा करने लगा।
लेकिन श्री कृष्ण जन्मस्टमी को नहीं आए वो साधक रोने लगा कहने लगा कि मैंने वो सब किया जो आपने कहा , लेकिन फिर भी आप नहीं आए और ये कह कर वो सो गया। अगले दिन महादेव के गण उस साधक के पास आए, और पूछने लगे क्यू रो रहे हो।
4) साधक ने कहा कि श्री कृष्ण नहीं आए। गण ने कहा कि वो तो आना चाहते है लेकिन अभी तुम मे एक कमी है वो कमी दूर करनी पड़ेगी। तुम्हारी कमी ये है कि तुम किसी चीज़ की इच्छा रखते हो। साधक ने कहा मुझे किसी चीज़ की इच्छा नहीं है। गण ने कहा श्री कृष्ण के दर्शन भी एक इच्छा है। ये इच्छा छोड़ दो। भगवान उसकी इच्छा पूरी नहीं करते जो इच्छा रखता है। जिस दिन तुम सभी इच्छा से मुक्त हो जाओगे , भगवान तुम्हें दर्शन देंगे।
महादेव के गण की बात मान कर वो साधक श्री कृष्ण के दर्शन की इच्छा छोड़ देता है। और अपने प्रतिदिन के काम मे लग जाता है।
5) कुछ दिनो के बाद श्री कृष्ण अपना रूप बदलकर उस साधक के पास आते है और उसे कहते है कि मै श्री कृष्ण के दर्शन करने जा रहा हु तुम भी चलो। वो साधक कहता है कि मेरी श्री कृष्ण से मिलने की कोई इच्छा नहीं है, यदी तुम्हें मिलते है तो उन्हें मेरी और से “हर हर महादेव” कह देना, क्यूँकि उन्हें मै पसंद नहीं हु, उनकी इच्छा महादेव से मिलने की है। और जब तक श्री कृष्ण इच्छा रखोगे, श्री कृष्ण इच्छा पूरी नहीं होगी।
श्री कृष्ण उस साधक के चरण पकड़ लेते है और उस साधक को कहते मै ये सभी बाते श्री कृष्ण को कह दूँगा।
6) साधक कहता है कि एक बात और कहना यदी संसार मे सभी की इच्छायें खतम हो गयी तो इस संसार का रहना या ना रहना का कोई मतलब नहीं है और इस संसार में कर्म को कोई मतलब ही नहीं रहेगा। मै जानता हु कि तुम कौन हो, सेवा करने से पहले सेवा करवानी ज़रूरी है। “ हर हर महदेव “।
श्री कृष्ण के जाने के बाद, उस साधक ने उनके चरणो की धूल अपने माथे पर लगाई और बोला “जय श्री कृष्ण”।
जैसे ही जय श्री कृष्ण साधक ने बाला, श्री कृष्ण सामने आ गए। उस साधक ने श्री कृष्ण के पैर पकड़ लिए और बोला भगवान आपने बहुत प्रतीक्षा करायी। श्री कृष्ण बोले मै हमेशा से ही तुम्हारे साथ था, मेरे गण,महादेव के गण भी श्री कृष्ण और शिव ही है।
7) श्री कृष्ण कहते है कि मै तुमसे बहुत ख़ुश हु, बोलो तुम्हें क्या चाहिए। साधक कहता मेरी इच्छा तुम्हारे दर्शन कि थी वो हो गयी। अब मेरी कोई इच्छा नहीं है। श्री कृष्ण कहते है मेरी एक इच्छा पूरी करोगे, साधक कहता आपकी इच्छा मेरी इच्छा, आप कहिए। श्री कृष्ण कहते है इष्ट का मतलब माँ नहीं होता,इष्ट का मतलब माँ की तरह प्रेम करने वाला। मेरी इच्छा कि मै तुम्हारी माँ बनाना चाहता हु। वो साधक कहता आपकी इच्छा मेरी इच्छा यदी मेरे हाँ करने से आपकी इच्छा पूरी होती है तो मेरी हाँ है। श्री कृष्ण कहते है कि अपने माता पिता की सेवा करो मै उन मे ही बसता हु।
8) अगले जन्म मे श्री कृष्ण एक स्त्री के रूप ले कर आते और हो साधक उनके पुत्र के रूप मे जन्म लेता। माँ पाने के लिए पुत्र को इतनी मेहनत करनी होती है। वो साधक अपनी माँ से बहुत प्रेम करने लगा, रात दिन माँ -माँ करता था।
Part 2 (एक पति को पत्नी कैसे मिलती है)
धन्यवाद
जय श्री सरस्वती-ब्रह्मा ,लक्ष्मी-नारायण ,गौरा-शंकर
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