Ek Sehyog Sewa Samiti

Ek Sehyog Sewa Samiti पूर्ण हिंदुत्व राष्ट्र बनाना हैं

29/10/2023

क्या आपने नास्तिक मुस्लिम या ईसाई देखा है।

07/03/2017
22/08/2016

सनातन धर्म से जुड़े किसी भी प्रश्न के उत्तर के लिए हमसे जुड़ें।

31/05/2016

सनातन धर्म- जन्म से लेकर मरण तक संस्कार:

गर्भाधान संस्कार (Garbhaadhan Sanskar) – यह ऐसा संस्कार है जिससे हमें योग्य, गुणवान और आदर्श संतान प्राप्त होती है। शास्त्रों में मनचाही संतान प्राप्त के लिए गर्भधारण संस्कार किया जाता है। इसी संस्कार से वंश वृद्धि होती है।

पुंसवन संस्कार (Punsavana Sanskar) – गर्भस्थ शिशु के बौद्धिक और मानसिक विकास के लिए यह संस्कार किया जाता है। पुंसवन संस्कार के प्रमुख लाभ ये है कि इससे स्वस्थ, सुंदर गुणवान संतान की प्राप्ति होती है।

सीमन्तोन्नयन संस्कार (Simanta Sanskar) – यह संस्कार गर्भ के चौथे, छठवें और आठवें महीने में किया जाता है। इस समय गर्भ में पल रहा बच्चा सीखने के काबिल हो जाता है। उसमें अच्छे गुण, स्वभाव और कर्म का ज्ञान आए, इसके लिए मां उसी प्रकार आचार-विचार, रहन-सहन और व्यवहार करती है।

जातकर्म संस्कार (Jaat-Karm Sansakar) – बालक का जन्म होते ही इस संस्कार को करने से शिशु के कई प्रकार के दोष दूर होते हैं। इसके अंतर्गत शिशु को शहद और घी चटाया जाता है साथ ही वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है ताकि बच्चा स्वस्थ और दीर्घायु हो।

नामकरण संस्कार (Naamkaran Sanskar)– शिशु के जन्म के बाद 11वें दिन नामकरण संस्कार किया जाता है। ब्राह्मण द्वारा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बच्चे का नाम तय किया जाता है।

निष्क्रमण संस्कार (Nishkraman Sanskar) – निष्क्रमण का अर्थ है बाहर निकालना। जन्म के चौथे महीने में यह संस्कार किया जाता है। हमारा शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जिन्हें पंचभूत कहा जाता है, से बना है। इसलिए पिता इन देवताओं से बच्चे के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। साथ ही कामना करते हैं कि शिशु दीर्घायु रहे और स्वस्थ रहे।

अन्नप्राशन संस्कार ( Annaprashana)– यह संस्कार बच्चे के दांत निकलने के समय अर्थात 6-7 महीने की उम्र में किया जाता है। इस संस्कार के बाद बच्चे को अन्न खिलाने की शुरुआत हो जाती है।

मुंडन संस्कार ( Mundan Sanskar)– जब शिशु की आयु एक वर्ष हो जाती है तब या तीन वर्ष की आयु में या पांचवे या सातवे वर्ष की आयु में बच्चे के बाल उतारे जाते हैं जिसे मुंडन संस्कार कहा जाता है। इस संस्कार से बच्चे का सिर मजबूत होता है तथा बुद्धि तेज होती है। साथ ही शिशु के बालों में चिपके कीटाणु नष्ट होते हैं जिससे शिशु को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।

विद्या आरंभ संस्कार (Vidhya Arambha Sanskar)– इस संस्कार के माध्यम से शिशु को उचित शिक्षा दी जाती है। शिशु को शिक्षा के प्रारंभिक स्तर से परिचित कराया जाता है।

कर्णवेध संस्कार (Karnavedh Sanskar)– इस संस्कार में कान छेदे जाते है । इसके दो कारण हैं, एक- आभूषण पहनने के लिए। दूसरा- कान छेदने से एक्यूपंक्चर होता है। इससे मस्तिष्क तक जाने वाली नसों में रक्त का प्रवाह ठीक होता है। इससे श्रवण शक्ति बढ़ती है और कई रोगों की रोकथाम हो जाती है।

उपनयन या यज्ञोपवित संस्कार (Yagyopaveet Sanskar) – उप यानी पास और नयन यानी ले जाना। गुरु के पास ले जाने का अर्थ है उपनयन संस्कार। आज भी यह परंपरा है। जनेऊ यानि यज्ञोपवित में तीन सूत्र होते हैं। ये तीन देवता- ब्रह्मा, विष्णु, महेश के प्रतीक हैं। इस संस्कार से शिशु को बल, ऊर्जा और तेज प्राप्त होता है।

वेदारंभ संस्कार (Vedaramba Sanskar) – यह संस्कार व्यक्ति के पाठन और पढ़न के लिए ही है। इसके अंतर्गत व्यक्ति को वेदों का ज्ञान दिया जाता है।

केशांत संस्कार (Keshant Sanskar) – केशांत संस्कार अर्थ है केश यानी बालों का अंत करना, उन्हें समाप्त करना। विद्या अध्ययन से पूर्व भी केशांत किया जाता है। मान्यता है गर्भ से बाहर आने के बाद बालक के सिर पर माता-पिता के दिए बाल ही रहते हैं। इन्हें काटने से शुद्धि होती है। शिक्षा प्राप्ति के पहले शुद्धि जरूरी है, ताकि मस्तिष्क ठीक दिशा में काम करें। पुराने में गुरुकुल से शिक्षा प्राप्ति के बाद केशांत संस्कार किया जाता था।

समावर्तन संस्कार (Samavartan Sanskar)– समावर्तन संस्कार अर्थ है फिर से लौटना। आश्रम या गुरुकुल से शिक्षा प्राप्ति के बाद व्यक्ति को फिर से समाज में लाने के लिए यह संस्कार किया जाता था। इसका आशय है ब्रह्मचारी व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक रूप से जीवन के संघर्षों के लिए तैयार किया जाना।

विवाह संस्कार (Vivah Sanskar) – यह धर्म का साधन है। विवाह संस्कार सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। इसके अंतर्गत वर और वधू दोनों साथ रहकर धर्म के पालन का संकल्प लेते हुए विवाह करते हैं। विवाह के द्वारा सृष्टि के विकास में योगदान दिया जाता है। इसी संस्कार से व्यक्ति पितृऋण से मुक्त होता है।

अंत्येष्टी संस्कार (Antyesti Sanskar)– अंत्येष्टि संस्कार इसका अर्थ है अंतिम संस्कार। शास्त्रों के अनुसार इंसान की मृत्यु यानि देह त्याग के बाद मृत शरीर अग्नि को समर्पित किया जाता है। आज भी शवयात्रा के आगे घर से अग्नि जलाकर ले जाई जाती है। इसी से चिता जलाई जाती है। आशय है विवाह के बाद व्यक्ति ने जो अग्नि घर में जलाई थी उसी से उसके अंतिम यज्ञ की अग्नि जलाई जाती है।

09/05/2016
08/04/2016

एक सहयोग सेवा समिति की और से नव वर्ष की बधाई। इस वर्ष सौम्य नाम का संवत्सर है। इसका अर्थ है की जो व्यक्ति इस वर्ष सौम्य बनकर रहेगा वह सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त करेगा सौम्य का अर्थ है सरल सहज मधुर इस वर्ष के राजा शुक्र देव व मंत्री बुध है। इस वर्ष जो व्यक्ति अपनी माँ, पत्नी, बहन या किसी भी नारी का सम्मान करेगा वो अधिक सुखी होगा। इस वर्ष अपने आप को अधिक सुन्दर बनाकर रखे। अपने घर पर नया रंग कराने से धन, यश, रूप व बल बढ़ेगा। अगर किसी को भूमि, भवन, वाहन आदि लेना हो तो माँ, पत्नी के नाम से ले। अधिक लाभ होगा। हरा चारा, हरी सब्ज़ी जानवरो को खिलाएं पुरे वर्ष लाभः होगा। .................. आचार्य अरुण।

31/03/2016

अगर ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है तो हनुमान जी को मीठा पान चढ़ाने से रक्तचाप ठीक हो जाता है महीने में एक बार ऐसा करने से दोबारा से रक्तचाप न बढेगा और न घटेगा : आचार्य अरुण

25/01/2016

31 जनवरी को जन चेतना यात्रा में शामिल होकर अभियान को सफल बनाये। जिसमे हिन्दू देवी देवताओ के चित्र या नाम किसी भी उत्पाद पर इस्तेमाल ना करने के लिए जागरूक किया जायेगा। ज्यादा से ज्यादा संख्या में सम्मिलित होकर यात्रा और उद्देश्य को सफल बनाये। हरी ॐ ।

23/12/2015

अगर कोई मित्र सनातन धर्म से सम्बन्धित कोई प्रश्न पूछना चाहता हो या धर्म से सम्बन्धित कोई शंका हो तो निसंकोच प्रश्न पूछ सकता है। उनकी शंका का समाधान किया जायेगा। प्रश्न धर्म से सम्बन्धित ही हो। हरी ॐ ।

तुलसी पूजन और वितरण
23/08/2015

तुलसी पूजन और वितरण

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