26/11/2025
हमारे कर्म एवं ग्रहों का संबंध
कभी-कभी हम परेशान होकर कहते हैं हे भगवान यह सैकड़ो चीटियां यहां कहां से आ गई और क्यों आ गई और तब हमारी दृष्टि पड़ती है एक लड्डू के टुकड़े पर जो गलती से रसोई के एक कोने में गिर गया होगा और वहीं पड़ा रह गया।
यदि हम साफ सुथरे फर्श पर भी एक लड्डू रख दें चींटी कहां से आ जाएंगी समझ में ही नही आएगा ।।
लड्डू या मीठी सामग्रियों को एकांत में खुला छोड़ना चीटियों को निमंत्रण देना है।
इसी प्रकार से शराब पीना, व्याभिचार करना, तेज वाहन चलाना, झूठ बोलना, मक्कारी करना, धोखेबाजी करना, चरित्र खराब करना, अपशब्द कहना
राहु और शनि के दुष्परिणामों को अपनी और आकर्षित करने हेतु निमंत्रण देना है।
शराब पीकर तेज गति से वाहन चलाइए और दुर्घटना होने के बाद सारा ठीकरा मंगल, राहु और शनि के सिर पर फोड़ दीजिए।
चरित्र को खराब कीजिए और फंसने के बाद राहु को जिम्मेदार कहिए।
लाख रुपए मासिक वेतन, सरकारी गाड़ी, सरकारी आवास, सरकारी नौकर होने के बावजूद भी छोटे से छोटे काम करने के लिए भी रिश्वत आप लीजिए, गरीब आदमी को आप सताइए और उसके बाद परिवार में किसी की आकस्मिक मृत्यु, अकाल मृत्यु, शरीर में गंभीर रोग, चिंता, अवसाद होने पर दोष राहु, शनि को दीजिए।
बस एक बात गांठ बांध लीजिए आपके द्वारा किए गए शुभ और अशुभ कर्म ही आपकी कुंडली के राजयोग बनाते हैं और साढ़ेसाती एवं अन्य दुर्योग का निर्माण करते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस में स्पष्ट रूप से लिखा है
करम प्रधान बिस्व करि राखा।
जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥
भावार्थ
परमात्मा ने संपूर्ण विश्व में कर्म को ही प्रधान कर रखा है। जो जैसा करता है, वह वैसा ही फल भोगता है॥
शुभेच्छु
राघवेन्द्र स्वामी