Shri Ram Panchaitan Siddh Peeth

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About 500 years old Sri Ram Panchaitan Siddh Peeth is the only sanctum in Bharat Varsh where Bhagwan Ram, Sita, Bharat, Lakshman, Shatrughn with all the five prominent sewaks Hanuman, Angad, Sugreev, Vibhishan and Jambvan are in one vigrah (idol).

कल हकीकत नगर बड़ा मंदिर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित होने एवं अपने विचार रखने का सुअवसर प्राप्त हुआ।आयोजन...
04/02/2026

कल हकीकत नगर बड़ा मंदिर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित होने एवं अपने विचार रखने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

आयोजन समिति के सभी सक्रिय कार्यकर्ताओं को भव्य एवं सफल आयोजन के लिए बहुत-बहुत बधाई।

आज जे वी जैन डिग्री कॉलेज में आयोजित हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित होने का एवं अपने विचार व्यक्त करने का सुअवसर प्राप्त हुआ...
01/02/2026

आज जे वी जैन डिग्री कॉलेज में आयोजित हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित होने का एवं अपने विचार व्यक्त करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

आज गणतंत्र दिवस के परम पावन अवसर पर टीवीएस कंपनी के कपिल टीवीएस शोरूम पर ध्वजारोहण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। इसके पश्च...
26/01/2026

आज गणतंत्र दिवस के परम पावन अवसर पर टीवीएस कंपनी के कपिल टीवीएस शोरूम पर ध्वजारोहण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। इसके पश्चात कंपनी द्वारा आयोजित बाइक रैली को रवाना किया।

सभी भारतवासियों के लिए अनंत मंगलकामनाएं।

आज श्रीधाम वृंदावन में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। और इसमें भी सबसे विशेष बात यह है कि मेरे अनुज...
08/01/2026

आज श्रीधाम वृंदावन में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।
और इसमें भी सबसे विशेष बात यह है कि मेरे अनुज एवं परम स्नेही कथा व्यास आचार्य श्री मिथिलेश नंदन कौशिक जी अपने सहारनपुर के ही हैं।

वर्तमान समय में अधिकांश नव दंपत्ति वैवाहिक जीवन में वैचारिक मतभेद के कारण होने वाले संभावित अलगाव की स्थिति से जूझ रहे ह...
01/01/2026

वर्तमान समय में अधिकांश नव दंपत्ति वैवाहिक जीवन में वैचारिक मतभेद के कारण होने वाले संभावित अलगाव की स्थिति से जूझ रहे हैं।

वैसे तो किसी भी समस्या का समाधान आपसी संवाद, परिपक्व बुद्धि एवं स्वस्थ मानसिकता के समन्वय के साथ संभव है परंतु यदि इन सब के साथ छोटे-छोटे ज्योतिषीय उपाय का भी सहारा ले लिया जाए तो परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना का प्रतिशत और बढ़ जाता है।

ज्योतिष में शुक्र प्रेम एवं आकर्षण का कारक है जब शुक्र पीड़ित अथवा निर्बल होता है तभी ऐसी समस्याएं देखने में आती हैं।

छोटे-छोटे उपाय जीवन को शांतिमय बना सकते हैं

1- यदि शुक्र निर्बल हो तो 20 ग्राम छोटी इलायची एवं 50 ग्राम बड़ी इलायची को मिला कर कूट कर उबाल लें व इस जल को सफेद कांच की बोतल मे भर लें।
जब भी स्नान करें अपने नहाने के पानी की बाल्टी में इस मिश्रण की 5-6 बूंद डालकर स्नान करें। कुछ सप्ताह ऐसा करके देखें सकारात्मक बदलाव अवश्य दिखाई देंगे।

2-कोई भी अच्छी सी सुगंध का इत्र ले आइये उसको सफेद रुमाल मे लगाकर अपने पास रखिये।

3-देवी के मंदिर में शुक्रवार को जाइये वहाँ दुर्गा चालीसा का पाठ कीजिए।

4-सफेद गाय को मिश्री मिलाकर रोटी खिलायें अथवा हरी घास में दही मिलाकर गौ माता को खिलाएं।अत्यंत सटीक उपाय है।

5-छोटी छोटी देवी स्वरूपा कन्याओं को कुछ ना कुछ अवश्य दें।

प्रथम प्रयास तो आपसी संवाद ही है। परंतु यदि जीवनसाथी समझने को तैयार ना हो तब इस प्रकार के उपाय का सहारा अवश्य लेना चाहिए एवं लाभ भी प्राप्त होता है।

ग्रहों के सरल उपायसूर्य - अपना चरित्र ठीक रखें एवं पिता का सम्मान करें।चंद्रमा - जलाशय के किनारे कुछ समय बिताएं एवं माता...
23/12/2025

ग्रहों के सरल उपाय

सूर्य - अपना चरित्र ठीक रखें एवं पिता का सम्मान करें।

चंद्रमा - जलाशय के किनारे कुछ समय बिताएं एवं माता का सम्मान करें।

मंगल - व्यायाम करें एवं भाइयों से विवाद न करें।

बुध - नित्य प्रति अपनी रुचि के अनुरूप कुछ भी विषय पढ़ने की आदत डालें एवं बुआ, बहन का सम्मान करें।

बृहस्पति - अपने धर्म सिद्धांतों के प्रति दृढ़ रहें एवं अड़िग आस्था रखें व गुरु अथवा गुरु तुल्य व्यक्तित्व का सम्मान करें।

शुक्र - अपने आप को नित्य प्रति स्वच्छ रखें एवं इत्र आदि का प्रयोग नित्य करें इसके अतिरिक्त स्त्रियों का और उसमें भी विशेष रूप से यदि विवाहित हैं तो अपनी धर्म पत्नी का पूरा सम्मान करें।

शनि - घिसे हुए चप्पल अथवा जूते कभी भी ना पहनें एवं अपने अधीनस्थ कर्मचारियों अथवा मजदूर वर्ग का सम्मान करें।

राहु - सफाई कर्मचारियों का विशेष रूप से सम्मान करें एवं दुर्गा मंदिर में माता के विग्रह की नित्यप्रति परिक्रमा अवश्य करें।

केतु - पशुओं की सेवा करें एवं ध्यान, योग के साथ-साथ नित्य प्रति मंदिर में भगवान गणपति के दर्शन करने हेतु सर्दियों का मौसम छोड़कर अन्य मौसम में नंगे पांव जा सकें तो अवश्य जाएं।

ग्रहों की गोपनीय ज्योति सुलभता और दुर्लभता से जन्मा मिट्टी-हीरा मूल्य किसी भी व्यक्ति की , वस्तु की सहज उपलब्धता उस व्यक...
15/12/2025

ग्रहों की गोपनीय ज्योति
सुलभता और दुर्लभता से जन्मा मिट्टी-हीरा मूल्य

किसी भी व्यक्ति की , वस्तु की सहज उपलब्धता उस व्यक्ति या वस्तु का भाव गिरा देता है । स्वर्ण कितना ही सुंदर क्यों न हो , हीरा कितना ही सुंदर क्यों न हो , अगर वह सहज और हर जगह प्राप्त होने लगे तो तुरंत उसकी कीमत और उसके मूल्य में अवमूल्यन आ जायेगा ।

आपको पता है कि संसार की सबसे मूल्यवान वास्तु क्या है ? उत्तर है संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु मिट्टी है।

मिट्टी जीवन का आधार है । इसी से सब अन्न, जल, भोजन सब प्राप्त होता है । इसी से प्रत्येक धातुओं का निर्माण होता है । मिट्टी न मिले तो लोग पानी के अभाव से मर जायेंगे क्योंकि गढ्ढा तो जमीन में ही खोद कर पानी निकलेगा। भोजन ना मिले तो दुनिया कैसे जी पाएगी परंतु मिट्टी का कोई मोल नहीं।

और वहीं प्लेटिनम धातु, हीरा आदि यदि हमारे पास ना भी हों तो भी हमारे जीवन पर कोई संकट नहीं है। यह देश की कम से कम आधी आबादी के लिए किसी काम का नहीं, इन दोनों में आप कोई वनस्पति या किसी भी फसल का उत्पादन नहीं कर सकते। कोई उपयोगिता नहीं लेकिन इनका मूल्य है।

जानते हैं क्यों ? क्योंकि यह बहुत ही विरले स्थान पर प्राप्त हैं, अनुपलब्ध हैं, और इनको प्राप्त करने के लिए मनुष्य को बहुत ही उद्योग करना पड़ता है।

यही मनुष्य की प्रवृत्ति है । जो सहज रूप से उपलब्ध होगा भले उसकी उपयोगिता उच्चतम हो, फिर भी उसका कोई मूल्य नहीं करते। किसी को भी कोई वस्तु या व्यक्ति भी सहज रूप से नहीं प्राप्त होना चाहिए। मनुष्य उसकी कोई कीमत नहीं करता जो सहज रूप से प्राप्य हो ।

अतः हर जगह अपनी सहज उपलब्धता अपनी ही हानि करने करने के बराबर है और साथ ही साथ आप उस गुण का भी अवमूल्यन करते हैं जो हर किसी के लिए सहज सरल रूप से उपलब्ध नहीं होना चाहिए ।

अतिपरिचयादवज्ञा सन्ततगमनादनादरो भवति ।
मलये भिल्लपुरन्ध्री चन्दनतरुकाष्ठमिन्धनं कुरुते ॥

अर्थात किसी के वहाँ हर रोज़ जाने से और सहज उपलब्धता से मानहानि होती है। जिस तरह मलय पर्वत पर असंख्य चंदन के वृक्ष होने पर वहाँ की भील औरतें उसी चंदन को ईंधन बनाती हैं।

इसी प्रकार कुंडली में स्थित सूर्य सभी को यश एवं प्रतिष्ठा देना प्रारंभ कर दें तो प्रतिष्ठा का क्या मूल्य रह जाएगा। फिर तो समाज में हर व्यक्ति यशस्वी और प्रतिष्ठित होगा।
यश एवं प्रतिष्ठा के लिए सही दिशा में धर्म समाज एवं राष्ट्र के उन्नयन हेतु संघर्ष एवं उद्योग करना पड़ता है तब प्रतिष्ठा का मूल्य बनता है।

इसीलिए नवग्रह हमें अपने से संबंधित किसी न किसी गुण, व्यक्ति एवं वस्तु से वंचित करके रखते हैं जिससे कि हमें उनका महत्व बार-बार याद आता रहे और जब हम अपने कठोर परिश्रम से उस वस्तु को प्राप्त करते हैं तो उसके मूल्य को कभी भूलें नहीं।

सनातन धर्म के अभिन्न अंग ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों की पीड़ा निवारण हेतु यदि कोई एक निश्चित एवं अकाट्य समाधान कहा गय...
10/12/2025

सनातन धर्म के अभिन्न अंग ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों की पीड़ा निवारण हेतु यदि कोई एक निश्चित एवं अकाट्य समाधान कहा गया है तो वह है गंगा स्नान।
जय मां गंगा।।

|| गंगा स्तोत्र ||
|| देवी! सुरेश्वरी भगवती गंगे ||

देवि! सुरेश्वरि! भगवति! गंगे!
त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे।
शंकरमौलिविहारिणि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥1 ॥

हे देवी! सुरेश्वरी! भगवती गंगे! आप तीनों लोकों को तारने वाली हैं। शुद्ध तरंगों से युक्त, महादेव शंकर के मस्तक पर विहार करने वाली हे मां! मेरा मन सदैव आपके चरण कमलों में केंद्रित है।


भागीरथीसुखदायिनि मातस्तव
जलमहिमा निगमे ख्यातः ।
नाहं जाने तव महिमानं
पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ 2 ॥

हे मां भागीरथी! आप सुख प्रदान करने वाली हो। आपके दिव्य जल की महिमा वेदों ने भी गाई है। मैं आपकी महिमा से अनभिज्ञ हूं। हे कृपामयी माता! आप मेरी रक्षा करें।

हरिपदपाद्यतरंगिणी गंगे
हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे।
दूरीकुरुमम दुष्कृतिभारं
कुरु कृपया भवसागरपारम् ॥ 3 ॥

हे देवी! आपका जल श्री हरि के चरणामृत के समान है। आपकी तरंगें बर्फ, चंद्रमा और मोतियों के समान धवल हैं। कृपया मेरे सभी पापों को नष्ट कीजिए और इस संसार सागर के पार होने में मेरी सहायता कीजिए।

तव जलममलं येन निपीतं
परमपदं खलु तेन गृहीतम्।
मातर्गंग त्वयि यो भक्तः किल
तं द्रष्टुं न यमः शक्तः ॥ 4 ॥

हे माता! आपका दिव्य जल जो भी ग्रहण करता है, वह परम पद पाता है। हे मां गंगे! यमराज भी आपके भक्तों का कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

पतितोद्धारिणि जाह्नवि गंगे
खंडित गिरिवरमंडित भंगे।
भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये !
पतितनिवारिणि त्रिभुवन धन्ये ॥ 5 ॥

हे जाह्नवी गंगे! गिरिवर हिमालय को खंडित कर निकलता हुआ आपका जल आपके सौंदर्य को और भी बढ़ा देता है। आप भीष्म की माता और ऋषि जह्नु की पुत्री हो। आप पतितों का उद्धार करने वाली हो। तीनों लोकों में आप धन्य हो।

कल्पलतामिव फलदां लोके
प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके।
पारावारविहारिणिगंगे
विमुखयुवति कृततरलापंगे॥ 6 ॥

हे मां! आप अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली हो। आपको प्रणाम करने वालों को शोक नहीं करना पड़ता। हे गंगे! आप सागर से मिलने के लिए उसी प्रकार उतावली हो, जिस प्रकार एक युवती अपने प्रियतम से मिलने के लिए होती है।

तव चेन्मातः स्रोतः स्नातः
पुनरपि जठरे सोपि न जातः।
नरकनिवारिणि जाह्नवि गंगे
कलुषविनाशिनि महिमोत्तुंगे। ॥ 7 ॥

हे मां! आपके जल में स्नान करने वाले का पुनर्जन्म नहीं होता। हे जाह्नवी! आपकी महिमा अपार है। आप अपने भक्तों के समस्त कलुषों को विनष्ट कर देती हो और उनकी नरक से रक्षा करती हो।

पुनरसदंगे पुण्यतरंगे
जय जय जाह्नवि करुणापांगे ।
इंद्रमुकुटमणिराजितचरणे
सुखदे शुभदे भक्तशरण्ये ॥ 8 ॥

हे जाह्नवी! आप करुणा से परिपूर्ण हो। आप अपने दिव्य जल से अपने भक्तों को विशुद्ध कर देती हो। आपके चरण देवराज इंद्र के मुकुट के मणियों से सुशोभित हैं। शरण में आने वाले को आप सुख और शुभता प्रदान करती हो।

रोंगं शोकं तापं पापं हर मे
भगवति कुमतिकलापम्।
त्रिभुवनसारे वसुधाहारे
त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे ॥ 9 ॥

हे भगवती! मेरे समस्त रोग, शोक, ताप, पाप और कुमति को हर लो आप त्रिभुवन का सार हो और वसुधा का हार हो,हे देवी! इस समस्त संसार में मुझे केवल आपका ही आश्रय है।

अलकानंदे परमानंदे कुरु
करुणामयि कातरवंद्ये ।
तव तटनिकटे यस्य निवासः
खलु वैकुंठे तस्य निवासः ॥ 10 ॥

हे गंगे! प्रसन्नता चाहने वाले आपकी वंदना करते हैं। हे अलकापुरी के लिए आनंद-स्रोत हे परमानंद स्वरूपिणी! आपके तट पर निवास करने वाले वैकुंठ में निवास करने वालों की तरह ही सम्मानित हैं।

वरमिह नीरे कमठो मीनः
किं वा तीरे शरटः क्षीणः ।
अथवाश्वपचो मलिनो दीनस्तव
न हि दूरे नृपतिकुलीनः ॥ 11 ॥

हे देवी! आपसे दूर होकर एक सम्राट बनकर जीने से अच्छा है आपके जल में मछली या कछुआ बनकर रहना अथवा आपके तीर पर निर्धन चंडाल बनकर रहना।

भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये
देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये ।
गंगा स्तवमिमममलं नित्यं पठति
नरे यः स जयति सत्यम् ॥ 12 ॥

हे ब्रह्मांड की स्वामिनी! आप हमें विशुद्ध करें। जो भी यह गंगा स्तोत्र प्रतिदिन गाता है, वह निश्चित ही सफल होता है।

येषां हृदये गंभक्तिस्तेषां
भवति सदा सुखमुक्तिः ।
मधुराकंता पञ्झटिकाभिः
परमानन्दकलितललिताभिः ॥ 13 ॥

जिनके हृदय में गंगा जी की भक्ति है। उन्हें सुख और मुक्ति निश्चित ही प्राप्त होते हैं। यह मधुर लययुक्त गंगा स्तुति आनंद का स्रोत है।

गंगा स्तोत्रमिदं भवसारं
वांछितफलदं विमलं सारम् ।
शंकरसेवक शंकर रचितं पठति
सुखीः तव इति च समाप्तः ॥ 14 ॥

भगवत चरण आदि जगद्गुरु द्वारा रचित यह स्तोत्र हमें शुद्ध-विशुद्ध और पवित्र कर वांछित फल प्रदान करे।

गंगा मैया की जय

जीवन के 77 वें वर्ष में प्रवेशपूज्य पिताजी के लिए जन्मदिवस के शुभ अवसर पर अनंत शुभकामनाएं।
06/12/2025

जीवन के 77 वें वर्ष में प्रवेश

पूज्य पिताजी के लिए जन्मदिवस के शुभ अवसर पर अनंत शुभकामनाएं।

हमारे कर्म एवं ग्रहों का संबंधकभी-कभी हम परेशान होकर कहते हैं हे भगवान यह सैकड़ो चीटियां यहां कहां से आ गई और क्यों आ गई...
26/11/2025

हमारे कर्म एवं ग्रहों का संबंध

कभी-कभी हम परेशान होकर कहते हैं हे भगवान यह सैकड़ो चीटियां यहां कहां से आ गई और क्यों आ गई और तब हमारी दृष्टि पड़ती है एक लड्डू के टुकड़े पर जो गलती से रसोई के एक कोने में गिर गया होगा और वहीं पड़ा रह गया।

यदि हम साफ सुथरे फर्श पर भी एक लड्डू रख दें चींटी कहां से आ जाएंगी समझ में ही नही आएगा ।।

लड्डू या मीठी सामग्रियों को एकांत में खुला छोड़ना चीटियों को निमंत्रण देना है।

इसी प्रकार से शराब पीना, व्याभिचार करना, तेज वाहन चलाना, झूठ बोलना, मक्कारी करना, धोखेबाजी करना, चरित्र खराब करना, अपशब्द कहना

राहु और शनि के दुष्परिणामों को अपनी और आकर्षित करने हेतु निमंत्रण देना है।

शराब पीकर तेज गति से वाहन चलाइए और दुर्घटना होने के बाद सारा ठीकरा मंगल, राहु और शनि के सिर पर फोड़ दीजिए।

चरित्र को खराब कीजिए और फंसने के बाद राहु को जिम्मेदार कहिए।

लाख रुपए मासिक वेतन, सरकारी गाड़ी, सरकारी आवास, सरकारी नौकर होने के बावजूद भी छोटे से छोटे काम करने के लिए भी रिश्वत आप लीजिए, गरीब आदमी को आप सताइए और उसके बाद परिवार में किसी की आकस्मिक मृत्यु, अकाल मृत्यु, शरीर में गंभीर रोग, चिंता, अवसाद होने पर दोष राहु, शनि को दीजिए।

बस एक बात गांठ बांध लीजिए आपके द्वारा किए गए शुभ और अशुभ कर्म ही आपकी कुंडली के राजयोग बनाते हैं और साढ़ेसाती एवं अन्य दुर्योग का निर्माण करते हैं।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस में स्पष्ट रूप से लिखा है

करम प्रधान बिस्व करि राखा।
जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥

भावार्थ
परमात्मा ने संपूर्ण विश्व में कर्म को ही प्रधान कर रखा है। जो जैसा करता है, वह वैसा ही फल भोगता है॥

शुभेच्छु
राघवेन्द्र स्वामी

हरि अनंत हरि कथा अनंता।।पंत विहार में श्रीजी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में परम श्रद्धेय आचार्य श्री सुभाष जी...
15/11/2025

हरि अनंत हरि कथा अनंता।।
पंत विहार में श्रीजी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में परम श्रद्धेय आचार्य श्री सुभाष जी महाराज के मुखारविंद से भागवत कथा श्रवण करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ एवं इस आयोजन के मुख्य प्रेरक श्रद्धेय आचार्य श्री संजय शास्त्री जी का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ।

ज्योतिष में एवं व्यावहारिक जीवन में गुरु का महत्वएक उदाहरण से समझिए —एक व्यक्ति किसी मार्ग पर चला जा रहा है। रास्ते में ...
14/11/2025

ज्योतिष में एवं व्यावहारिक जीवन में गुरु का महत्व

एक उदाहरण से समझिए —

एक व्यक्ति किसी मार्ग पर चला जा रहा है। रास्ते में एक खाई आती है — बहुत गहरी, सामने से थोड़ी ऊँची, ढलान लिए हुए और लगभग 2-3 फ़ीट चौड़ी।
अब यहीं से शुरू होता है जीवन का असली खेल...

जब वह व्यक्ति उस खाई को देखता है, तो राहु उसे उसकी गहराई, ऊँचाई और ढलान दिखाता है — अर्थात भय और भ्रम उत्पन्न करता है।
फिर वही भ्रम उसे केतु की दिशा में मोड़ देता है — जो मस्तिष्कहीन, बिना दिशा का प्रतीक है।
अब व्यक्ति डरकर दूसरा रास्ता खोजने लगता है।

वहीं पास में कर्मदेव शनि महाराज मुस्कुराते हुए खड़े हैं,
और मौन संकेत देते हैं —

“अरे पागल! गहराई, ऊँचाई, ढलान सब देख ली... पर चौड़ाई भी तो देख,
जो केवल 2-3 फ़ीट है।”

परंतु जब मन पर राहु का असर हो, तब समझ कहाँ आती है।

यहीं पर गुरु का आगमन होता है।
जिसके जीवन में गुरु होता है, उनका मार्गदर्शन राहु-केतु के भ्रम से बाहर निकाल देता है।

गुरु की कृपा से मन पहले शांत होता है — यही चंद्र का संतुलन है।
फिर वही गुरु कृपा मंगल की ऊर्जा जगाती है —

“अब तो इसे पार कर ही लूँगा।”

और जैसे ही व्यक्ति उस खाई को पार करता है,
सामने सूर्य का यश और शुक्र की समृद्धि उसका स्वागत करते हैं।

परंतु यह सब सम्भव हुआ केवल एक कारण से —
गुरु की कृपा से।

जय जय सियाराम

शुभेच्छु
स्वामी राघवेंद्र

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