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जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधि मंडल ने मस्जिद अल-मतीन, बरहमपुरी  का दौरा कियाजनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और सांप्रदा...
20/03/2025

जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधि मंडल ने मस्जिद अल-मतीन, बरहमपुरी का दौरा किया
जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील Jamiat Ulama I Hind Uttar Pardesh Jamiat Ulama Uttar Pradesh

नई दिल्ली, 19 मार्च 2025: जमीयत उलमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधि मंडल ने आज महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी की नेतृत्व में बरहमपुरी , दिल्ली की गली नंबर 12 स्थित मस्जिद अल-मतीन का दौरा किया और मस्जिद प्रबंधन से मुलाकात की। इस प्रतिनिधि मंडल में मौलाना आबिद कासमी (अध्यक्ष, जमीयत उलमा-ए-दिल्ली), मौलाना मुफ्ती ज़कावत हुसैन कासमी (नायब अमीर-ए-शरीअत, दिल्ली), एडवोकेट मिर्ज़ा आकिब बेग और केंद्रीय कार्यालय से मौलाना अज़ीमुल्लाह सिद्दीकी शामिल थे।

यह दौरा हाल के दिनों में मस्जिद अल-मतीन को लेकर चल रही अफवाहों के मद्देनज़र किया गया, जिनमें मस्जिद के विस्तार और एक नए द्वार के निर्माण की बातें कही जा रही थीं। इसी बीच, एमसीडी द्वारा मस्जिद प्रशासन को एक नोटिस जारी कर अवैध निर्माण का आरोप लगाया गया है ।

मस्जिद प्रशासन ने जमीयत के प्रतिनिधियों को स्पष्ट किया कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, जिससे जनता में गलतफहमियां फैल रही हैं, जबकि हकीकत यह है कि स्थानीय लोग वर्षों से सौहार्दपूर्ण वातावरण में रह रहे हैं। मस्जिद के विस्तार की कोई योजना नहीं है, बल्कि मस्जिद से सटे एक अतिरिक्त भूखंड को अल-मतीन वेलफेयर सोसायटी ने खरीदा है, जहां एक अलग निर्माण किया जा रहा है।

एमसीडी के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए, मस्जिद प्रशासन ने बताया कि संबंधित भूमि के सभी कानूनी दस्तावेज पहले ही एमसीडी शाहदरा कार्यालय में जमा कर दिए गए हैं और एक महीने पहले ही नोटिस का उत्तर दिया जा चुका है। इसके साथ ही, स्ट्रक्चरल इंजीनियर का लाइसेंस भी संलग्न किया गया था।

इस अवसर पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि सामाजिक सद्भाव और आपसी एकता समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। भारत में हिंदू-मुस्लिम सदियों से साथ रहते आए हैं और यही हमारे देश की साझा संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि किसी भी कृत्य से पड़ोसियों को कष्ट पहुँचाना इस्लाम में अनुचित माना गया है और अल्लाह के निकट इसके लिए जवाबदेही होगी, जबकि मस्जिद की रक्षा भी हमारी ज़िम्मेदारी है। मौलाना कासमी ने मस्जिद प्रशासन को आश्वासन दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो जमीयत उलमा-ए-हिंद हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है।

इस अवसर पर मस्जिद प्रशासन के प्रमुख सदस्य, जिनमें जनाब नईम अहमद, याकूब भाई, अमजद साहब और इमाम व खतीब मुफ्ती फ़ुरक़ान साहब शामिल थे,

संपादक महोदय, कृपया इस प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित कर अनुग्रहित करें।

नियाज़ अहमद फारूकी
सचिव, जमीयत उलमा-ए-हिंद
Maulana Mahmood Madani Hakimuddin Qasmi Jamiat Ulama E Hind Jamiat Ulama i Hind Jalna

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23/08/2023

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इमारत-ए-शरिया हिंद की मजलिस शूरा का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित रिपोर्ट - जमीयत उलेमा ए उत्तर प्रदेश - इमारत कांफ्रेंस के आ...
16/05/2023

इमारत-ए-शरिया हिंद की मजलिस शूरा का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित
रिपोर्ट - जमीयत उलेमा ए उत्तर प्रदेश

- इमारत कांफ्रेंस के आयोजन और सोशल मीडिया के माध्यम से निमंत्रण एवं समाज सुधार की गतिविधियों को जारी रखने के प्रस्ताव पारित

नई दिल्ली, 15 मई, 2023। इमारत-ए-शरिया हिंद की मजलिस-ए-शूरा का एक दिवसीय सम्मेलन आज जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अमीर-उल-हिंद हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित जमीअत उलमा-ए-हिंद मुख्यालय के मुफ्ती किफायतुल्ला मीटिंग हॉल में आयोजित हुआ। इसमें देशभर से इमारत के शूरा सदस्य और शरियत के अमीरों ने भाग लिया। सम्मेलन में विशेषकर शरिया विभागों की प्रणाली के विस्तार, संविधान के आलोक में इमारत के कार्यक्षेत्र के विस्तार, समाज में धार्मिक जागरूकता और पारिवारिक मामलों का धर्म के आलोक में समाधान करने को प्रोत्साहन देने के साथ केंद्रीय कार्यालय की प्रणाली को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर नायब अमीर-उल-हिंद हजरत मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी ने पिछली कार्यवाही को प्रस्तुत किया और इमारत-ए-शरिया हिंद की वर्तमान गतिविधियों का एक संक्षिप्त विवरण भी प्रस्तुत किया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय शरिया विभागों, उनसे संबंधित प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन, रूयते हिलाल कमेटी, समाज सुधार एवं विधवाओं को दी जाने वाली सहायता राशि इत्यादि पर प्रकाश डाला और भविष्य की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की।

अमीरुल हिंद हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इमारत-ए-शरिया हिंद की स्थापना और पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में इमारत की समकालीन प्रासंगिकता पर काफी ज्ञानवर्धक चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे पूवर्जों ने इस देश की परिस्थितियों को सामने रख कर इसका स्थापना की योजना बनाई थी। अगर हम वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा करें तो हमारे बुजुर्गों की दूरदर्शिता और परिपक्वता का अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ जाती है कि सामाजिक सुधार और धार्मिक चेतना की जागरूकता के साथ-साथ पारिवारिक मामलों को शरीयत के आलोक में समाधान करने की व्यवस्था को जगह-जगह स्थापित किया जाए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अगर लोगों का ऐसा वैचारिक निर्माण होगा तो कई तरह के भ्रम और चिंता से मुक्ति मिल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने इमारत-ए-शरिया के कार्यों को और बढ़ाने का भी आह्वान किया।

दारुल उलूम देवबंद के कुलपति हजरत मौलाना अबुल क़ासिम नोमानी ने इमारत-ए-शरिया हिंद के दान कोष विभाग द्वारा जरूरतमंदों की सहायता में बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया और कहा कि जिस फंड में जो भी राशि प्राप्त हो, उसे जल्द से जल्द उसके उद्देश्यों पर खर्च किया जाए।
जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हजरत मौलाना महमूद असद मदनी ने युवा पीढ़ी में बढ़ती हुई सामाजिक बुराईयों और अधर्म पर चिंता व्यक्त करते हुए उनके सुधार की तरफ विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मजलिस-ए-शूरा ने विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया कि सामाजिक मामलों और पारिवारिक विवादों से संबंधित शरीयत के आदेशों पर समाज सुधार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसके साथ ही प्रसारण एवं प्रकाशन विभाग द्वारा सुधारात्मक और सामाजिक पुस्तिकाएं तैयार की जाएं और देश की क्षेत्रीय भाषाओं में इनके प्रकाशन की व्यवस्था की जाए। मजलिस शूरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से शरई मार्गदर्शन की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए निर्णय लिया कि सोशल मीडिया पर छोटी ऑडियो-वीडियो क्लिप्स द्वारा इस्लाम विरोधियों को तर्कसंगत ठोस जवाब देने का प्रयास किया जाए। इसलिए मुफ्ती सैयद मासूम साक़िब क़ासमी को अधिकृत किया गया कि वह इस मैदान में कार्य करने वाले उलमा से संपर्क करके जल्द ही एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

म्जलिस-ए-शूरा ने इमारत के कार्यों का परिचय और शरिया विभागों के संरक्षकों और पदाधिकारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए एक ’इमारत काफ्रेंस’ आयोजित करने का भी फैसला किया, जो 4-5 अक्टूबर 2023 (18-19 रबीउल अव्वल 1445 हिजरी) बुधवार-गुरुवार को दिल्ली में आयोजित की जाएगी। मजलिस-ए-शूरा ने इस अवसर पर यह निर्णय लिया कि फतवा लेखन के कार्य के लिए एक प्रशिक्षित मुफ्ती और केंद्रीय कार्यालय के मामलों को चलाने के लिए एक सक्रिय प्रशासक नियुक्त किया जाए। इसके अतिरिक्त मजलिस-ए-शूरा में निकाह से पूर्व दम्पति के सामाजिक प्रशिक्षण पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन में हजरत अमीर-उल-हिंद के अलावा जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हजरत मौलाना महमूद मदनी, हजरत मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी मोहतमिम और शेखुल-हदीस दारुल उलूम देवबंद, हजरत मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी नायब अमीर-उल-हिंद, हज़रत मौलाना नेमतुल्लाह आज़मी, हदीस दारुल उलूम देवबंद के प्रोफेसर, हज़रत मौलाना अब्दुल अलीम फ़ारूक़ी अमीर शरीयत उत्तर प्रदेश, हज़रात मौलाना अशहद रशीदी, हज़रत मौलाना याहया बासकांडी अमीर शरीयत नॉर्थ ईस्ट, हज़रत मौलाना मोहम्मद फारूक़ अमीर शरीयत ओडिशा, हज़रत मौलाना अब्दुल मजीद अमीर शरीयत तमिलनाडु, हज़रत मौलाना ज़ैनुल आबिदीन, हज़रत मौलाना शमीम अहमद कासमी अमीर शरीयत दिल्ली, हज़रत मौलाना अब्दुल्ला नासिर अध्यक्ष जमीअत उलमा बनारस, हज़रत मौलाना अबुल हसन याकूब नायब अमीर शरीयत तमिलनाडु, हज़रत मौलाना इफ्तिखार अध्यक्ष जमीअत उलमा कर्नाटक, हज़रत मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी महासचिव जमीअत उलमा-ए-हिंद, हज़रत मौलाना मुफ्ती मासूम साक़िब क़ासमी महासचिव जमीअत उलमा-ए-हिंद, हज़रत मौलाना मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी अध्यक्ष जमीअत उलमा पश्चिमी बंगाल, हज़रत मौलाना कारी मोहम्मद अमीन अध्यक्ष जमीअत उलमा राजस्थान, मौलाना कारी मोहम्मद शौकत अली कोषाध्यख जमीअत उलमा-ए-हिंद, हज़रत मौलाना सैयद अजहर मदनी सचिव जमीअत उलमा-ए-हिंद सम्मिलित रहे।
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10/05/2023

🌴 तकबीर ए मुसलसल 🌴

🎯 आने वाली नस्लों की हिफ़ाज़त कीजिए!

आख़िरी बात यह है कि आने वाली नस्लों की हिफ़ाज़त कीजिए, मकतब क़ायम कीजिए, दीनी तालीम को रिवाज दीजिए, क़रीब मदरसा है वहाँ अपने बच्चों को भेजिए कि मोहल्ला है मोहल्ले के बच्चे, बिरादरी है बिरादरी के बच्चे और वह इस क़ाबिल हो जाएं कि क़ुरआन को पढ़ने लगेंगे, दीनी किताबों को समझने लगेंगे, अक़ाइद व फ़राइज़ और अहकाम से वाकिफ़ हो जाएंगे।
इस वक़्त बहुत ख़तरनाक योजना चल रही है, मुसलमानों के ज़हनों से, जिनको अल्लाह तआला ने औलाद दी है या जिनके ज़ेर-ए-असर नई नस्ल है, उन्हें बिल्कुल इसकी फ़िक्र न रहे, उनका अक़ीदा क्या होगा, किस शरीयत को मानेंगे, पैग़म्बर को मानेंगे, उसके हुक्म को मानेंगे, उसकी पैरवी करेंगे, दीनदार बनेंगे, अल्लाह को राज़ी करने और नाराज़ करने का फ़र्क़ पहचानेंगे या नहीं, तो आपके लिये फ़र्ज़ है और सारी चीज़ों से ज़्यादा ज़रूरी है कि आप मकतब क़ायम करें, मदरसा क़ायम करें, और घर में भी ऐसा माहौल बनायें, बीवियों से कह दीजिए, ख़्वातीन, मस्तूरात से कह दीजिए कि घर में दीन की बातें किया करें, बच्चों को नबियों के वाक़्यात, सहाबा के वाक़्यात, नेक लोगों की हिकायत बयान किया करें, हज़रत इब्राहीम अलैह सलाम का किस्सा सुनाएं कि उन्होंने तौहीद का क्या नमूना पेश किया, और किस तरह से बता दिया कि जिनको आप लोग पूजते हैं, उनके क़ब्ज़े में कुछ नहीं है, जिनकी आप पूजा करते हैं वह कुछ भी नहीं है कर सकते, मैंने उनके साथ क्या किया, वह अपने को भी नहीं बचा सकते तो आपको क्या बचाएंगे? अम्बिया (अलैहिमुस्सलाम) के किस्से, सैय्यदना इब्राहीम अलैह सलाम, सैय्यदना मूसा अलैह सलाम और फिर सरवर ए कायनात हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किस्से सुनाना और उन से वाकिफ़ कराना और मुहब्बत पैदा करना
मिन्जानिब जमीयत उलेमा ए सहारनपुर

06/05/2023
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर जमीयत उलमा ए हिन्द का जवाब
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर जमीयत उलमा ए हिन्द का जवाब

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नई दिल्ली: जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने राजस्थान के उदयपुर में एक गैर-मुस्लिम दर्जी मास्ट.....

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