14/09/2026
🔰गायत्री की शक्ति और सिद्धि🔰
गायत्री का जप करने वाला अभीष्ट लोकों को प्राप्त होता है और उसकी अभीप्सित कामनायें पूर्ण होती है। गायत्री वैद जननी है, पापों का नाश करने वाली है। इससे बड़ी पवित्र करने वाली शक्ति न इस लोक में है न स्वर्ग लोक में। नरक रूपी समुद में गिरे हुए को वह हाथ का सहारा देकर उबारती है।
🙏अतएव गायत्री की नित्य उपासना करनी चाहिए और हवन करना चाहिए। गायत्री जप करने वाला कमलपत्रवत रहता है। इसके ऊपर पाप नहीं चढ़ सकता। गायत्री जप से निःसन्देह समस्त सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं । अन्य कोई साधना न भी करे तो भी ब्राह्मण गायत्री का आश्रय लेकर पार हो जाता है। इस उपासना से स्वर्ग भी मिलता है और मोक्ष भी। अतएव नित्य नियमित रूप से गायत्री भक्ति पूर्वक जप साघना करनी चाहिए।
🙏गायत्री मन्त्र में जिस प्रज्ञा को घियः शब्द से संबोधित किया है और अन्तः चेतना के कण-कण में ओत-प्रोत करने की घोषणा की है, उसी की शास्त्रकारों ने अन्यत्र ऋृतम्भरा प्रज्ञा 'भूमा' आदि नामों से चर्चा की है। यह शब्द सामान्य व्यवहार बुद्धि के लिए प्रयुक्त नहीं होता । चतुरता, कुशलता एवं जानकारी की जो शिक्षा स्कूलों, कारखानों एवं बाजारों में सीखने को मिलती है, 'प्रज्ञा' उससे सर्वथा भिन्न है।
🙏जिस विद्या के आधार पर आत्म-बोध होता है-जीवन का महत्व, स्वरूप, लक्ष्य एवं उपयोग विदित होता है, सत-असत का उचित-अनुचित का भेद कर सकने वाली नीर-क्षीर विवेचनी वृत्ति विकसित होती है, उसी को गायत्री कहा जा सकता है।
🙏गायत्री उपासना के द्वारा प्रज्ञा शक्ति प्रप्त करने के साथ-साथ
साधक को सभी विशिष्ट क्षमताएँ प्राप्त होती है, जिनका वर्णन ब्रह्मविद्या
के अवगाहन तथा योग-तप आदि के साधना-विधान के साथ जुड़ा हुआ
है।
🙏गायत्री उपासक की आत्मिक पूँजी निरन्तर बढ़ती चली जाती है
और वह यदि धैर्य और साहस के साथ आत्म संशोधन करते हुए अपने
मार्ग पर बढ़ता ही चले तो एक दिन नर से नारायण स्तर पर पहुँचा
हुआ सिद्ध पुरुष बन कर रहता है।
Awgp, युवा प्रकोष्ठ, सागर
DIYA Youth Cell Sagar
बाल संस्कार शाला - गायत्री गुरुकुल