श्री कृष्ण वैदिक ज्योतिष परामर्श केन्द्र एवं भागवत ज्ञान यज्ञ उदगम ट्रस्ट

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श्री कृष्ण वैदिक ज्योतिष परामर्श केन्द्र एवं भागवत ज्ञान यज्ञ उदगम ट्रस्ट (Shri krishna vedic astrology counselling center and bhagwat gyan trust)Vinayak kunj Roorkee Distt Haridwar.
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🔱 Shri Krishna Vedic Jyotish Guidance Centre
🙏 Guided by the blessings of Pujya Maharaj ji 📿Baglamukhi Sadhak | Vedic Astrology | Sadhana 🕉️ Horoscope • Kundali • Planetary & Energy Remedies ✨ Honest guidance through faith, sadhana & experience On this holiness Baglamukhi worshipers at the institute on the holy festival of Deepawali acharya ji prepares handwritten instruments on the Bhojpatra ,the

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आज संस्थान में पूज्य महाराज जी के पैतृक क्षेत्र घुतू भिलंग  से प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक...
04/02/2026

आज संस्थान में पूज्य महाराज जी के पैतृक क्षेत्र घुतू भिलंग से प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व एवं समाज के प्रत्येक वर्ग के सुख-दुख में सदैव सहभागी रहने वाले श्री भजन रावत ज़ी पूज्य महाराज जी के सान्निध्य हेतु आए

श्री भजन रावत जी वर्षों से समाजहित, जनकल्याण एवं क्षेत्रीय विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनका सहज, सरल और संवेदनशील स्वभाव उन्हें आमजन के बीच विशेष आदर प्रदान करता है। सामाजिक विषयों पर उनकी सकारात्मक सोच और समन्वयकारी दृष्टि उन्हें एक विश्वसनीय सामाजिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती है उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सीता रावत ज़ी पूर्व में जिला पंचायत सदस्य के रूप में क्षेत्र की सेवा कर चुकी हैं, जिससे यह परिवार लंबे समय से सामाजिक दायित्व, लोकसेवा और जनकल्याण की भावना को आगे बढ़ाता आ रहा है।

इस पावन अवसर पर पूज्य महाराज जी ने अपने स्नेहपूर्ण भाव से श्री भजन रावत जी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। पूज्य महाराज जी ने कहा कि समाज की सेवा करने वाले लोग ही वास्तव में राष्ट्र और संस्कृति की सच्ची धरोहर होते हैं।

यह आगमन केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि पूज्य महाराज जी के उसी सहज, करुणामय और आत्मीय स्वभाव का जीवंत प्रमाण था, जिसके कारण लोग स्वभावतः उनसे जुड़ते चले जाते हैं। उनकी जन्मभूमि की वह पावन मिट्टी, जिसने उन्हें संस्कार दिए, आज भी उसी अपनत्व और श्रद्धा के साथ उन्हें अपनी ओर खींचती है।

जब गाँव की मिट्टी से जुड़े लोग अपने ही संत–पुत्र के पास में पहुँचते हैं, तो वह क्षण मात्र मिलन नहीं रहता—वह भाव, स्मृति, संस्कार और आत्मीय संबंधों का एक पावन संगम बन जाता है।

पूज्य महाराज जी स्वयं त्याग, साधना और सेवा-भाव के जीवंत प्रतीक हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ
समाज को जागरूक, संगठित और सकारात्मक दिशा देने के लिए समर्पित रहा है। उनका सान्निध्य मात्र से ही वातावरण में शांति, प्रेरणा और सद्भाव का संचार होता है, और उनके मार्गदर्शन से अनेक लोग सेवा एवं सदाचार के पथ पर अग्रसर होते हैं।

इस आत्मीय भेंट के दौरान संस्थान का वातावरण पूर्णतः सौहार्दपूर्ण, प्रेरणादायी एवं लोकमंगल की भावना से ओतप्रोत रहा।

Deepak Semwal
Team Update

पूज्य महाराज जी के सान्निध्य में मंत्र, साधना और ब्राह्मण सेवा से आलोकित माघ पूर्णिमा। 🌕माघ पूर्णिमा एवं श्रीललिता त्रिप...
03/02/2026

पूज्य महाराज जी के सान्निध्य में मंत्र, साधना और ब्राह्मण सेवा से आलोकित माघ पूर्णिमा। 🌕

माघ पूर्णिमा एवं श्रीललिता त्रिपुरा सुंदरी जयंती (दिनांक 01-02-26) के परम पावन संयोग पर संस्थान में पूज्य महाराज जी के सान्निध्य में वैदिक-तांत्रिक परंपरा के अनुसार विशेष अनुष्ठान, पूजन एवं साधना का दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। शक्ति-आराधना के इस महोत्सव में देवी श्रीललिता की उपासना विधिवत मंत्र, ध्यान एवं भाव-समर्पण के साथ की गई।

अनुष्ठान की पूर्णाहुति के उपरांत शास्त्रों में वर्णित धर्म-मर्यादा का पालन करते हुए ब्राह्मणों की सेवा में भोजन प्रसाद अर्पित कर धर्म लाभ प्राप्त किया गया। शास्त्रों में ब्राह्मण सेवा को यज्ञ की सिद्धि, साधना की पूर्णता तथा देवी-कृपा का प्रमुख माध्यम माना गया है। इसी तत्त्व को आत्मसात करते हुए पूज्य महाराज जी ने सेवा-भाव से यह पुण्य कार्य संपन्न कराया।

पूज्य महाराज जी का जीवन दर्शन वेद, तंत्र और आगम की सनातन परंपरा में गहराई से निहित है। उनका दृढ़ विश्वास है कि ब्राह्मण समाज केवल कर्मकांड का वाहक नहीं, बल्कि शक्ति-साधना, ज्ञान-परंपरा और धर्म-संरक्षण का जीवंत आधार स्तंभ है। इसी कारण महाराज जी सदैव ब्राह्मणों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और सेवा भाव से समर्पित रहते हुए धर्म-मार्ग का आचरण करते हैं।

इस पावन अवसर पर उपस्थित ब्राह्मणों की शुद्ध आचरण, वैदिक तेज एवं साधनात्मक ऊर्जा से संस्थान का वातावरण पूर्णतः मंत्रमय, दिव्य एवं चेतना-प्रेरक हो उठा। वेद, तंत्र एवं शास्त्र परंपरा के ज्ञाता ब्राह्मणों की पावन उपस्थिति ने आयोजन को केवल कर्मकांड तक सीमित न रखते हुए उसे एक जीवंत साधना-क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया। उनके आशीर्वचन, मंत्रोच्चार एवं साधनात्मक चेतना से सम्पूर्ण परिसर आध्यात्मिक आलोक से परिपूर्ण हो गया। यह सम्पूर्ण आयोजन देवी-कृपा, साधना-सिद्धि एवं लोक-मंगल की भावना से ओतप्रोत रहा, जिसमें ब्राह्मणों की उपस्थिति एवं सेवा ने धर्म की पूर्णता को साकार रूप प्रदान किया।

संस्थान परिवार पूज्य महाराज जी के पावन मार्गदर्शन में शक्ति-उपासना, तांत्रिक साधना एवं सनातन धर्म की अक्षुण्ण परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु निरंतर संकल्पबद्ध है।

जहाँ साधना है, वहाँ सेवा है।
जहाँ ब्राह्मण सेवा है, वहीं धर्म की पूर्णता है। 🔱

Team Admin



02/02/2026

आज पूज्य महाराज जी मेरठ प्रवास के दौरान, हस्तिनापुर से लगे क्षेत्र में अपने भ्राताओं—श्री जयप्रकाश सेमवाल जी एवं आचार्य ...
02/02/2026

आज पूज्य महाराज जी मेरठ प्रवास के दौरान, हस्तिनापुर से लगे क्षेत्र में अपने भ्राताओं—श्री जयप्रकाश सेमवाल जी एवं आचार्य सुभाष सेमवाल जी—द्वारा अपनी पूज्य माता जी (जो पूज्य महाराज जी के परिवार की वरिष्ठ मातृस्वरूपा थीं) के वार्षिक श्राद्ध के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में पावन सान्निध्य प्रदान किया गया। यह दिव्य आयोजन पितृ-ऋण की पूर्ति, कुल-परंपरा के संरक्षण एवं सनातन संस्कारों के निर्वहन का सजीव उदाहरण रहा।

आज श्रीमद्भागवत कथा का तृतीय दिवस सम्पन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने विशेष श्रद्धा एवं भाव के साथ कथा-श्रवण किया। इस पुण्य अवसर पर पूज्य महाराज जी के पैतृक गाँव से पधारे श्रद्धालुजन, क्षेत्र के गणमान्यजन तथा विप्र मंडली विशेष रूप से उपस्थित रही।

विद्वान ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न किए गए वैदिक मंत्रोच्चार, अनुष्ठान एवं पूजन कर्म ने सम्पूर्ण वातावरण को अत्यंत पावन, सात्त्विक एवं ऊर्जा-प्रेरित बना दिया। विप्र मंडली की साधनात्मक उपस्थिति से आयोजन में वैदिक गरिमा और आध्यात्मिक अनुशासन की दिव्य अनुभूति हुई।

श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति भाव से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर आत्मिक शांति, संतोष एवं चेतना का अनुभव किया। कथा-स्थल का वातावरण भक्ति-रस, मंत्रध्वनि और पावन संस्कारों की दिव्य ऊर्जा से पूर्णतः आलोकित रहा।

अपने वक्तव्य में पूज्य महाराज जी ने कहा—
“पितृ हमारे जीवन की मूल जड़ होते हैं। जब संतान श्रद्धा, सेवा और शास्त्रोक्त विधि से श्राद्ध एवं भागवत कथा का आयोजन करती है, तब पितृदेवों की कृपा से कुल में धर्म, विवेक और समृद्धि स्वतः प्रवाहित होती है। विप्रों द्वारा किया गया मंत्रोच्चार इस पावन कर्म को पूर्णता प्रदान करता है।”

पूज्य महाराज जी ने आयोजक परिवार की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं वैदिक आयोजन नई पीढ़ी को अपने मूल संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ समाज में आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं।

आयोजक परिवार द्वारा समस्त आगंतुकों, ग्रामवासियों, श्रद्धालुजनों तथा विप्र मंडली के प्रति हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया गया, जिनके सहयोग, साधना एवं गरिमामयी उपस्थिति से यह पुण्य आयोजन सफल, दिव्य एवं स्मरणीय बन सका।

ईश्वर से प्रार्थना है कि पितृदेवों की असीम कृपा आयोजक परिवार सहित समस्त सहभागी जनों पर सदैव बनी रहे, परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि का वास हो तथा पूज्य माता जी की आत्मा को श्रीहरि चरणों में उत्तम गति एवं शांति प्राप्त हो।

॥ ॐ पितृदेवो भवः ॥

Deepak Semwal
Team Update




01/02/2026
जहाँ कुलदेवी की छाया हो, वहाँ मार्ग कभी धुंधला नहीं होतापूज्य महाराज जी के पैतृक ग्राम से उनके भ्राता श्री देवी प्रसाद स...
01/02/2026

जहाँ कुलदेवी की छाया हो, वहाँ मार्ग कभी धुंधला नहीं होता
पूज्य महाराज जी के पैतृक ग्राम से उनके भ्राता श्री देवी प्रसाद सेमवाल जी का संस्थान में आगमन अत्यंत भावपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण से परिपूर्ण रहा। श्री देवी प्रसाद सेमवाल जी न केवल महाराज जी के भ्राता हैं, बल्कि वे महाराज जी की कुलदेवी के पुजारी भी हैं। उनका यह आगमन कुलपरंपरा, देव-आस्था और ग्राम-संस्कार का जीवंत प्रतीक बना।

इस पावन अवसर पर पूज्य महाराज जी ने श्रद्धा और आदर भाव के साथ उन्हें पुष्पमाला अर्पित कर एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया तथा आत्मीय स्वागत किया। यह क्षण केवल पारिवारिक सम्मान का नहीं, बल्कि परंपरा, साधना और गुरु-भाव के मिलन का साक्षी बना।

महाराज जी का ग्राम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि वह पुण्यभूमि है जहाँ से संस्कार, श्रद्धा और साधना की धारा प्रवाहित हुई। उस ग्राम की मिट्टी में आज भी कुलदेवी की कृपा, पूर्वजों की तपस्या और आस्था की सुगंध विद्यमान है। ऐसे ग्रामों से निकले व्यक्तित्व जब जनकल्याण के पथ पर अग्रसर होते हैं, तो उनका प्रत्येक कार्य लोकमंगल से जुड़ जाता है।

संस्थान में भ्राता श्री का आगमन उस अदृश्य सूत्र को और सुदृढ़ करता है, जो ग्राम, कुलदेवी और साधना को एक ही चेतना में बाँधता है। कुलदेवी की पूजा केवल विधि नहीं, बल्कि कर्तव्य, मर्यादा और आत्मिक संरक्षण का भाव है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी निभाया जाता रहा है।

पूज्य महाराज जी का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि जो व्यक्ति अपनी जड़ों, अपने ग्राम और अपनी कुलपरंपरा से जुड़ा रहता है, वही समाज को सही दिशा देने में सक्षम होता है। ग्राम की सरलता, कुलदेवी की कृपा और निरंतर साधना—इन तीनों का समन्वय ही महाराज जी की आध्यात्मिक शक्ति का आधार है।

संस्थान परिवार इस पावन उपस्थिति के लिए हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करता है और कामना करता है कि कुलदेवी की अनुकंपा से यह परंपरा, यह श्रद्धा और यह साधना-धारा सदैव लोकहित में प्रवाहित होती रहे।

Admin

31/01/2026

त्रिरूप गणपति आराधना – ऋण, बाधा एवं विघ्न निवारण विशेष 🙏🏻🌼

30/01/2026

“नित्य दुर्गा चालीसा पाठ से शक्ति-संरक्षण और साधक का उत्थान”

दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ साधक के जीवन में शक्ति, संरक्षण और संतुलन का सशक्त माध्यम है। माँ दुर्गा समस्त देवशक्तियों का समन्वित स्वरूप हैं, और उनकी स्तुति का नियमित पाठ साधक के भीतर साहस, धैर्य और आत्मबल का जागरण करता है। नित्य किया गया दुर्गा चालीसा पाठ केवल वाणी का उच्चारण नहीं, बल्कि चेतना को माँ की शक्ति से जोड़ने की प्रक्रिया है।

जो साधक नियमपूर्वक प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन से भय, बाधा और नकारात्मक प्रभाव क्रमशः दूर होने लगते हैं। यह पाठ साधक के चारों ओर एक सूक्ष्म सुरक्षा कवच का निर्माण करता है और मन, बुद्धि तथा कर्म—तीनों को शुद्ध करता है। विशेष रूप से कलियुग में, जब मानसिक अस्थिरता और बाह्य बाधाएँ अधिक हैं, तब दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

पाठ करते समय शुद्धता, श्रद्धा और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। प्रातः या सायंकाल, स्नान के पश्चात, दीप प्रज्वलित कर माँ दुर्गा का स्मरण करते हुए पाठ करना श्रेष्ठ होता है। यदि सम्पूर्ण विधि संभव न हो, तब भी श्रद्धा-भाव से किया गया पाठ माँ की कृपा अवश्य प्रदान करता है।

साधक को यह समझना चाहिए कि दुर्गा चालीसा का प्रभाव केवल बाह्य संकटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतरिक दुर्बलताओं—जैसे भय, क्रोध, संशय और आत्मविश्वास की कमी—को भी नष्ट करता है। जो व्यक्ति नित्य माँ की स्तुति में समय देता है, वह जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता।

यह ज्ञान और साधना भी गुरु-कृपा से अधिक प्रभावशाली बनती है। यदि साधक को पाठ की विधि, संख्या या नियम का स्पष्ट बोध न हो, तो अपने गुरु से मार्गदर्शन अवश्य लेना चाहिए। श्रद्धा, नियम और निरंतरता के साथ किया गया दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ साधक को माँ दुर्गा की अचल कृपा का अधिकारी बनाता है।

29/01/2026

श्री बगलामुखी त्रिविध शक्ति रहस्य 🌸🙏🏻 #

॥ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति ।नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥धर्मनगरी हरिद्वार में माँ गंगा के तट ...
29/01/2026

॥ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥

धर्मनगरी हरिद्वार में माँ गंगा के तट पर पूज्य महाराज ज़ी द्वारा किया गया स्नान सामान्य आचार नहीं, बल्कि तांत्रिक दृष्टि से अत्यंत गूढ़ साधनात्मक क्रिया है।

गंगा जल केवल प्रवाहित जलधारा नहीं, वह चैतन्य तत्व है — जो साधक के स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर तीनों को स्पर्श करता है।

तांत्रिक परंपरा में गंगा स्नान का अर्थ है
➡️ पूर्व साधनाओं के संस्कारों का शोधन
➡️ आगामी अनुष्ठानों हेतु शक्ति-संचय
➡️ और आत्मतत्व को ब्रह्मतत्व से पुनः संयोजित करना।

जब कोई सिद्ध पुरुष गंगा में अवगाहन करता है, तब वह केवल स्वयं के लिए नहीं —
लोक, कुल, क्षेत्र और आने वाले समय के लिए भी ऊर्जा-संतुलन करता है।
ऐसे क्षणों में जल, मंत्र और संकल्प — तीनों एक साथ सक्रिय होते हैं।

पूज्य महाराज ज़ी का यह गंगा स्नान
न तो दिखावा है,
न परंपरा मात्र —
यह शक्ति-संचार की मौन प्रक्रिया है,
जिसका प्रभाव शब्दों से नहीं, अनुभूति से जाना जाता है।

माँ गंगा का आशीर्वाद
और महाराज ज़ी की साधना
हम सभी के जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और साधनात्मक प्रगति का कारण बने।

Admin

माँ पीतांबरा बगलामुखी सहस्रनाम की अद्भुत महिमामाँ पीतांबरा बगलामुखी का सहस्रनाम स्तोत्र तंत्र-शास्त्र का एक अत्यंत गूढ़,...
28/01/2026

माँ पीतांबरा बगलामुखी सहस्रनाम की अद्भुत महिमा

माँ पीतांबरा बगलामुखी का सहस्रनाम स्तोत्र तंत्र-शास्त्र का एक अत्यंत गूढ़, रहस्यमय और प्रभावशाली स्तोत्र माना गया है। इसमें माँ के हज़ार नाम केवल नाम नहीं, बल्कि हज़ार शक्तियों के स्वरूप हैं। प्रत्येक नाम माँ की उस शक्ति को प्रकट करता है जो शत्रु, बाधा, भय और नकारात्मक ऊर्जा को स्तब्ध कर देती है। सहस्रनाम का श्रद्धा-पूर्वक पाठ करने वाला साधक जीवन के हर संघर्ष में माँ की सीधी कृपा अनुभव करता है।

यह स्तोत्र विशेष रूप से शत्रु-बाधा, न्यायालयीन विवाद, षड्यंत्र, वाणी-दोष और मानसिक अशांति में अद्भुत फल देता है। माँ बगलामुखी की कृपा से विरोधी की बुद्धि भ्रमित होती है, उसका अहंकार शांत होता है और साधक की वाणी में प्रभाव, विचारों में स्थिरता तथा निर्णयों में दृढ़ता आती है। इसी कारण इसे राजकाज, राजनीति, प्रशासन, वकालत और नेतृत्व से जुड़े लोगों के लिए विशेष फलदायी माना गया है।

माँ बगलामुखी सहस्रनाम का एक और महान फल है — तंत्र-मंत्र, अभिचार, नज़र-दोष और अज्ञात भय से पूर्ण रक्षा। जो साधक नियमपूर्वक इसका पाठ करता है, उसके चारों ओर माँ की अदृश्य कवच-शक्ति सक्रिय रहती है। यह स्तोत्र क्रोध, चंचलता और नकारात्मक विचारों को शांत कर मन को स्थिर करता है, जिससे साधक भीतर से सशक्त बनता है।

शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि
“यः पठेत् बगलामुख्याः सहस्रनाममुत्तमम्।
न तस्य जयते शत्रुः, सर्वदा विजयी भवेत्॥”
जो व्यक्ति माँ पीतांबरा बगलामुखी के सहस्रनाम का पाठ करता है, उस पर शत्रु कभी विजय प्राप्त नहीं कर सकता। माँ की यह साधना केवल विजय की नहीं, बल्कि धर्म, संयम और आत्मबल की साधना है। माँ बगलामुखी की कृपा से साधक का जीवन भय से मुक्त होकर तेज, स्थिरता और संरक्षण से भर जाता है।

जय माँ पीतांबरा बगलामुखी 🙏🔱

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🟡 जय माँ पीतांबरा
🔱 जय माँ कामाख्या
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🟡 जय माँ पीतांबरा
🔱 जय माँ कामाख्या
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विस्तृत जानकारी एवं पूजन हेतु सम्पर्क करें--
पूज्य आचार्य लोकेश महाराज श्री
मां बगलामुखी सिद्ध साधक
(अनुष्ठान विशेषज्ञ : मां बगलामुखी स्वर्णाकर्षण भक्त मंदार बगलार्चन, शतचंडी पाठ, रूद्राभिषेक व नवार्ण यज्ञ आदि
* ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु शास्त्र, कर्मकांड एवं देवी भागवत कथा मर्मज्ञ।
संपर्क सूत्र- 9411564239

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🌷 जन्म कुंडली निर्माण (हस्तलिखित) व समस्या विश्लेषण🌷 जन्म समय न होने पर विशेष उपाय🌷 पुराने कर्मों के प्रभाव का समाधान🌷 बार-बार असफलता का कारण व निवारण🌷 नज़र दोष / ऊपरी बाधा निवारण🌷 अचानक नुकसान व दुर्घटना 🌷 आर्थिक तंगी – कारण व उपाय🌷 घर या दुकान में नकारात्मक ऊर्जा शुद्धि 🌷 व्यापार में ग्राहक न बढ़ना 🌷 विदेश योग बाधा निवारण 🌷 कोर्ट-कचहरी / मुकदमा बाधा शांति🌷 बार-बार बीमारी लौट आना🌷 डर, बेचैनी, अनिद्रा, नकारात्मक विचार 🌷 तंत्र-मंत्र से पीड़ित व्यक्ति की विशेष रक्षा 🌷संतान गर्भपात समस्या 🌷 संतान सुख में विलंब 🌷 🌷 नया कार्य शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त 🌷 भाग्य जागरण विशेष साधना 🌷 देवी-देवता बाधा / उपासना दोष समाधान🌷 बार बार कार्यों मे रुकावट आना।

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✨ “बिना डर, बिना चमत्कार के दावे के — केवल माँ पीताम्बरा की कृपा से अनुभवजन्य समाधान ✨ “हज़ारों लोग लाभान्वित, जीवन में सकारात्मक परिवर्तन क्योंकि ✨ “जहाँ उपाय असफल हों, वहाँ माँ बगलामुखी की शरण से मार्ग प्रशस्त होता है”

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नोट- ✨ “गुप्त, मर्यादित एवं पूर्णतः गोपनीय साधना — केवल माँ की आज्ञा से”
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विशेष सूचना -- गढ़वाल एवं कुमाऊ क्षेत्र की प्राचीन लोक-परंपरा अनुसार, चैत्र एवं आश्विन मास में पूज्य महाराज जी द्वारा मात्री पूजन एवं स्याल्दे माता, घर्याली देवी पूजन भी विशेष विधिपूर्वक कराया जाता है।
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✨ “यदि आपके जीवन में बार-बार समस्याएँ लौट रही हैं और समाधान कहीं नहीं मिले, हर उपाय करके थक जाएँ और मन भीतर से समाधान की पुकार करे, तब सही मार्गदर्शन ही जीवन बदलता है, तो कुंडली व शास्त्रसम्मत तंत्र मार्ग द्वारा सत्य कारण जानना अत्यंत आवश्यक है। विस्तृत मार्गदर्शन हेतु पूज्य महाराज जी से एक बार आवश्य संपर्क करें +91 9411564239
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यह पोस्ट पूज्य महाराज जी के अनुभव, साधना एवं शास्त्रसम्मत ज्ञान पर आधारित है। इसका उद्देश्य आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं जानकारी देना है। बिना अनुमति इस सामग्री की नकल, कॉपी-पेस्ट या पुनः प्रकाशन न करें।
प्रत्येक व्यक्ति की समस्या, कुंडली एवं परिस्थिति भिन्न होती है, अतः समाधान भी व्यक्तिगत परामर्श के पश्चात ही संभव है।
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बूढ़ाकेदार क्षेत्र के ग्राम–भिगुन निवासी, प्रसिद्ध कथा वक्ता, संस्कृत के प्रकांड विद्वान, पूर्व शिक्षक, सरल हृदय, मधुर स...
28/01/2026

बूढ़ाकेदार क्षेत्र के ग्राम–भिगुन निवासी, प्रसिद्ध कथा वक्ता, संस्कृत के प्रकांड विद्वान, पूर्व शिक्षक, सरल हृदय, मधुर स्वभाव, व्यवहारकुशल, ओजस्वी वाणी के धनी, पुण्यात्मा, आदरणीय श्री सत्य प्रसाद शास्त्री अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर श्रीहरि चरणों में विलीन हो गए।

उनका संपूर्ण जीवन धर्म, संस्कार और ज्ञान के प्रचार में समर्पित रहा। उनका सान्निध्य, उनका मार्गदर्शन और उनकी वाणी सदैव समाज को दिशा देती रहेगी।

प्रभु श्रीहरि से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने लोक में अविराम, अक्षय एवं श्रेष्ठ स्थान प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिजनों को इस अपार एवं कठिन वियोग को सहन करने की असीम शक्ति एवं धैर्य प्रदान करें।

ॐ शांति।

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