02/04/2021
में गवाही देता हूँ, ये हज़रत मखदूम साबिर पाक की तस्वीर नही है, क्योंकि उस दौर में कोई कैमरा नही था, और हज़रत के पास कोई तसवीर बनाने वाला भी नही आता जाता था, हज़रत अपने इल्म में इतने मुब्तला रहते थे के कम ही लोगो से मिलते थे।
ये तसवीर किसी ने एलिस्टेटर और फ़ोटो शॉप की मदद से बनाई और इसको हज़रत साबिर बोल दिया औऱ अनजान मुस्लिम औऱ नॉन मुस्लिम इसको शेयर करने में अपना वक़्त गवाने लगे है।
सभी दोस्त अहबाब ये जानले इस्लाम मे किसी वाली किसी साहबा किसी गाज़ी की कोई तसवीर मौजूद नही है। सिर्फ आपको उनके कब्र या रोजे मुबारक की तसवीर ही मिल सकती है, इस्लाम मे कोई शक्ल मौजूद नही जिसको आप वाली तस्लीम कर रहे हो।