Pitambra Adhyatm Peeth

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जन्माष्टमीपूर्णिमा के बाद भादो का महीना लग गया है। भादो के महीने की षष्ठी को बलराम और अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ थ...
11/08/2020

जन्माष्टमी

पूर्णिमा के बाद भादो का महीना लग गया है। भादो के महीने की षष्ठी को बलराम और अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस माह में भगवान विष्णु का खास पूजा करनी चाहिए। इस दिन पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है। जन्माष्टमी पर राहुकाल दोपहर 12:27 बजे से 02:06 बजे तक रहेगा। इस बार जन्माष्टमी पर कृतिका नक्षत्र रहेगा, उसके बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा, जो 13 अगस्त तक रहेगा। पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक कर पंचामृत अर्पित करना चाहिए। माखन मिश्री का भोग लगाएं।
हर बार की तरह इस बार भी जन्माष्टमी दो दिन मनाई जा रही है। 11 और 12 अगस्त दोनों दिन जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। लेकिन 12 अगस्त को जन्माष्टमी मानना श्रेष्ठ है। मथुरा और द्वारिका में 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। ।

आपको बता दें कि श्रीमद्भागवत दशम स्कंध में कृष्ण जन्म प्रसंग में उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि जिस समय पृथ्वी पर अर्धरात्रि में कृष्ण अवतरित हुए ब्रज में उस समय पर घनघोर बादल छाए थे, लेकिन चंद्रदेव ने दिव्य दृष्टि से अपने वंशज को जन्म लेते दर्शन किए। आज भी कृष्ण जन्म के समय अर्धरात्रि में चंद्रमा उदय होता है। उस समय धर्मग्रंथ में अर्धरात्रि का जिक्र है।

आचार्य
पीताम्बरा आध्यात्म पीठ,
भरसही, संडी, रावर्ट्सगंज-सोनभद्र।

05/07/2020
03/07/2020

#विष्णु_सहस्रनाम के लाभ -

विष्णु सहस्रनाम में विष्णु को शम्भु, शिव, ईशान और रुद्र के नाम से सम्बोधित किया है, जो इस तथ्य को प्रतिपादित करता है कि शिव और विष्णु एक ही है। विष्णु सहस्रानम में प्रत्येक नाम के एक सौ अर्थ से कम नहीं हैं, इसलिए यह एक बहुत प्रकांड और शक्तिशाली मंत्र है ।।

#विष्णु_सहस्रनाम_उद्ग्म_स्रोत

विष्णु सहस्रनम की उत्पत्ति महाकाव्य महाभारत से मानी जाती है, जब पितामह भीष्म, पांडवों से घिरे मौत के बिस्तर पर अपनी मृत्यु का इंतजार कर रहे थे, उस समय युधिष्ठिर ने उनसे पूछा, "पितामह! कृपया हमें बताएं कि सभी के लिए सर्वोच्च आश्रय कौन है? जिससे व्यक्ति को शांति प्राप्त हो सके, वह नाम कोनसा है जिससे इस भवसागर से मुक्ति प्राप्त हो सके, इस सवाल के जबाब में भीष्म ने कहा की वह नाम विष्णु सहस्रनाम है ।

#ज्योतिषीय_लाभ :-

यह नकारात्मक ज्योतिषीय प्रभावों को वश में करने में मदद करता है, इनमें उन दोषों को शामिल किया जाता है जो जन्म समय की ग्रहों की खराब स्थिति से उत्पन्न होते हैं, विष्णु सहस्त्रनाम बुरी किस्मत और श्राप से दूर कर सकता है। आपका कोई भी ग्रह अशुभ हो, विष्णु सहस्रनाम आपके हर ग्रहदोष को दूर करता है ।। जो व्यक्ति विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करता है उसका भाग्य हमेशा उसका साथ देता है।

#रक्षात्मक कवच

भगवान विष्णु का नाम दुर्भाग्य, खतरों, काला जादू, दुर्घटनाओं और बुरी नज़रों से व्यक्ति की रक्षा करने के लिए एक बहुत शक्तिशाली कवच की तरह कार्य करता है और दुश्मनों की बुरी योजनाओं से मन और शरीर की सुरक्षा करता है।

#सन्तति_के_सहायक

विष्णु सहस्रनाम इतना प्रभावशाली है की यह बांझपन को भी दूर कर सकता है ।।

अगर आप विष्णु सहस्रनाम पढ़ नही सकते, तो उसे सुने । यह श्रवण मात्र से भी लाभ देता है ।।

इस मंत्र के जाप से श्री हरि की कृपा मिलती हैं सारे काम आसानी से बनने लगते हैं ।। इस मंत्र का जाप कभी भी किया जा सकता हैं परन्तु गुरुवार से करना शुभ माना जाता हैं।। यदि संस्कृत भाषा में पाठ कठिन हो तो हिंदी में भी भगवान के नामों का जाप किया जा सकता है ।। इस पाठ को प्रातः में करने भगवान विष्णु का ध्यान करने से बहुत लाभ होता हैं.जितने भी दिन भवन विष्णु का सहस्त्रनाम का पाठ करें , सात्विक वैष्णव भोजन ग्रहण करें. इस पाठ को करने के लिए प्रातः उठकर स्नानादि के पश्चात् पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु को चने गुड या पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए तथा बृहस्पतिवार की रात्रि में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए ।।

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