Sabr Ki Roshni

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27/12/2025

फेसबुक के लिए आपकी इस गहरी और भावुक कहानी को मैंने एक प्रभावशाली पोस्ट के रूप में तैयार किया है। इसे पढ़कर लोग न केवल रुकेंगे, बल्कि जीवन के इस बड़े सच पर सोचने को मजबूर भी होंगे।
आप नीचे दिए गए कंटेंट को कॉपी करके पोस्ट कर सकते हैं:
फेसबुक पोस्ट ड्राफ्ट:
शीर्षक: "किताबी ज्ञान और असल जिंदगी का तजुर्बा: एक कड़वा सच"
आज मन बहुत भारी है, पर चाहती हूँ कि मेरी यह बात हर उस जोड़े तक पहुँचे जो आज अपनी 'आजादी' के नाम पर कुदरत के नियमों से खेल रहे हैं।
एक स्त्री का शरीर... जिसे कुदरत ने सृजन की शक्ति दी है। माहवारी का वो असहनीय दर्द, शरीर का अकड़ना, और समाज की घटिया मानसिकता को झेलना—यह सब एक औरत के लिए कोई 'चॉइस' नहीं, बल्कि उसकी नियति है। प्रसव के समय 20 हड्डियां टूटने जैसा दर्द सहना और माँ बनने के बाद अपनी नींद और शरीर को दाँव पर लगा देना... यह सब एक पुरुष शायद ही कभी समझ पाए।
लेकिन मेरी कहानी यहाँ से अलग है...
जब मेरी शादी हुई, हम बहुत खुश थे। प्यार, रोमांस और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना ही हमारा मकसद था। लोग कहते थे "अब बच्चा दे दो", पर हमें लगता था कि ये सब पुराने ख्याल हैं। हम पढ़े-लिखे थे, तो हमने तय किया कि पहले 2 साल सिर्फ एन्जॉय करेंगे।
गर्मी और जोश में कई बार बिना प्रोटेक्शन के संबंध बने, और मैंने बिना सोचे-समझे बार-बार 'गर्भनिरोधक गोलियां' (I-pill) खाईं। बाद में डॉक्टर की सलाह पर रेगुलर गोलियां भी शुरू कर दीं। हमें लगा हम बहुत 'स्मार्ट' हैं।
पर अंजाम क्या हुआ?
आज जब 2 साल बाद हम सच में माँ-बाप बनना चाहते हैं, तो पता चला कि:
* अत्यधिक दवाओं की वजह से मेरी नली (Tubes) प्रभावित हुईं।
* मेरे पति के वीर्य (S***m) की क्वालिटी भी खराब हो चुकी है।
आज जब उम्र है, तब हम डॉक्टरों के चक्कर काट रहे हैं। आज समझ आया कि चंद किताबें पढ़कर हम 'हीरो-हीरोइन' तो बन सकते हैं, लेकिन वो ज्ञान कभी नहीं पा सकते जो बुजुर्गों के तजुर्बे में था।
सीख जो मैंने सीखी:
आजादी जरूरी है, रोमांस जरूरी है, लेकिन कुदरत की 'बायोलॉजिकल क्लॉक' किसी का इंतजार नहीं करती। हर चीज का एक सही समय होता है। अगर समय पर सही फैसला न लिया जाए, तो बाद में सिर्फ पछतावा और अस्पतालों के चक्कर रह जाते हैं।
औरतों की इज्जत करना सीखिए, क्योंकि वो सिर्फ उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि वो 'शक्ति' है जो अपना पूरा अस्तित्व मिटाकर एक नई जिंदगी को जन्म देती है।

पोस्ट के लिए कुछ सुझाव:
* फोटो: आप अपनी और अपने पति की एक मुस्कुराती हुई फोटो लगा सकते हैं या फिर एक प्रतीकात्मक फोटो (जैसे एक छोटा बच्चा या घड़ी) लगा सकते हैं।
* प्राइवेसी: फेसबुक पर अक्सर लोग कमेंट्स में सलाह देने लगते हैं, अगर आप सहज न हों तो कमेंट्स को 'Friends' तक सीमित रख सकते हैं।
क्या आप चाहते हैं कि मैं इस पोस्ट के लिए एक आकर्षक 'कैप्शन' या 'इमेज प्रॉम्ट' भी तैयार करूँ?

26/12/2025

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23/12/2025
22/12/2025

पुरुष का वीर्य और औरत का गर्भ.!!!

लेकिन रुकिए ...सिर्फ गर्भ ???

नहीं... नहीं...!!!

एक ऐसा शरीर जो इस क्रिया के लिए तैयार हो ।।

जबकि वीर्य के लिए 13 साल और 70 साल का

वीर्य भी चलेगा।

लेकिन गर्भाशय का मजबूत होना अति आवश्यक है,

इसलिए सेहत भी अच्छी होनी चाहिए।

एक ऐसी स्त्री का गर्भाशय

जिसको बाकायदा हर महीने समयानुसार

माहवारी (Period) आती हो।

जी हाँ.!!

वही माहवारी जिसको सभी स्त्रियाँ

हर महीने बर्दाश्त करती हैं ।।

बर्दाश्त इसलिए क्योंकि

महावारी (Period) उनका Choice नहीं है ।।

यह कुदरत के द्वारा दिया गया एक नियम है ।।

वही माहवारी जिसमें शरीर पूरा अकड़ जाता है,

कमर लगता है टूट गयी हो,

पैरों की पिण्डलियाँ फटने लगती हैं,

लगता है पेड़ू में किसी ने पत्थर ठूँस दिये हों,

दर्द की हिलोरें सिहरन पैदा करती हैं ।।

ऊपर से लोगों की घटिया मानसिकता की वजह से

इसको छुपा छुपा के रखना अपने आप में

किसी जंग से कम नहीं ।।

बच्चे को जन्म देते समय

असहनीय दर्द को बर्दाश्त करने के लिए

मानसिक और शारीरिक दोनो रूप से तैयार हों ।।

बीस हड्डियाँ एक साथ टूटने जैसा दर्द

सहन करने की क्षमता से परिपूर्ण हों ।।

गर्भधारण करने के बाद शुरू के 3 से 4 महीने

जबरदस्त शारीरिक और हार्मोनल बदलाव के चलते

उल्टियाँ, थकान, अवसाद के लिए

मानसिक रूप से तैयार हों ।।

5वें से 9वें महीने तक अपने बढ़े हुए पेट और

शरीर के साथ सभी काम यथावत करने की शक्ति हो ।।

गर्भधारण के बाद कुछ

विशेष परिस्थितियों में तरह तरह के

हर दूसरे तीसरे दिन इंजेक्शन लगवानें की

हिम्मत रखती हों ।।

(जो कभी एक इंजेक्शन लगने पर भी

घर को अपने सिर पर उठा लेती थी।)

प्रसव पीड़ा को दो-चार, छः घंटे के अलावा,

दो दिन, तीन दिन तक बर्दाश्त कर सकने की क्षमता हो । और अगर फिर भी बच्चे का आगमन ना हो तो

गर्भ को चीर कर बच्चे को बाहर निकलवाने की

हिम्मत रखती हों ।।

अपने खूबसूरत शरीर में Stretch Marks और

Operation का निशान ताउम्र अपने साथ ढोने को तैयार हों । कभी-कभी प्रसव के बाद दूध कम उतरने या ना उतरने की दशा में तरह-तरह के काढ़े और दवाई पीने का साहस

रखती हों ।।

जो अपनी नींद को दाँव पर लगा कर

दिन और रात में कोई फर्क ना करती हो।

3 साल तक सिर्फ बच्चे के लिए ही जीने की शर्त पर गर्भधारण के लिए राजी होती हैं।

एक गर्भ में आने के बाद

एक स्त्री की यही मनोदशा होती है

जिसे एक पुरुष शायद ही कभी समझ पाये।

औरत तो स्वयं अपने आप में एक शक्ति है,

बलिदान है।

इतना कुछ सहन करतें हुए भी वह

तुम्हारें अच्छे-बुरे, पसन्द-नापसन्द का ख्याल रखती है।

अरे जो पूजा करनें योग्य है जो पूजनीय है

उसे लोग बस अपनी उपभोग समझते हैं।

उसके ज़िन्दगी के हर फैसले,

खुशियों और धारणाओं पर

अपना अँकुश रख कर खुद को मर्द समझते हैं।

इस घटिया मर्दानगी पर अगर इतना ही घमण्ड है

तो बस एक दिन खुद को उनकी जगह रख कर देखें

अगर ये दो कौड़ी की मर्दानगी

बिखर कर चकनाचूर न हो जाये तो कहना।

याद रखें

जो औरतों की इज्ज़त करना नहीं जानते🙏🙏🙏

जब मेरी शादी हुई तो, मजे के लिए दिन रात प्यार करती थी अपने पति से, हमेशा मन करता की उन्ही के साथ लिपटी रहूं, उन्हें अपने बगल में देख मैं खुद के ऊपर से कंट्रोल खो देती थी

लेकिन जैसे ही 1 2 हफ्ता बीता, जो भी हमारे सामने आता एक ही बात करता,

अब जल्दी से बच्चा देदो, दूधो नहाओ फूलो फलो, ये बात सुन सुन कर ऐसा लग रहा था मानो की लोगो ने हमारी शादी सिर्फ इसी लिए कराई है की उन्हें एक बच्चे की जरूरत है

पर मैं और मेरे पति पढ़े लिखे थे, हमे पता है बच्चे की जिम्मेदारी एक बड़ी जिम्मेदारी है, इस लिए हम दोनों ने पहले ही सोच लिया था की पहले 2 साल तो अपनी शादी का फेस एंजॉय करेंगे उसके बाद बच्चे के बारे में सोचा जाएगा

मेरे पति काफी रोमांटिक मूड के हैं, और मैं उनसे भी 4 गुना ज्यादा रोमांटिक हूं

तो दोनो का मूड बनाते देर नही लगती थी, कई बार तो ऐसा हुआ की मूड बन गया है लेकिन हमारे पास प्रोटेक्शन नही होता था,

लेकिन गर्म जोशी में हमने बिना किसी प्रोटेक्शन के सब कर लिया

सुबह होती तो इस बात की चिंता सताने लगती की अब क्या होगा कल रात तो बिना प्रोटेक्शन के सब हो गया

गर्भ निरोधक गोली खा ली मैंने, लेकिन हम किसी भी कीमत पर बच्चे के लिए तैयार नहीं थे

मेरी 3 सहेलियां थी, 3 के बच्चे शादी के डेढ़ साल के भीतर हो गए थे,

लेकिन हमे पता था, की ज्यादा समय तक गर्भनिरोधक दवाई जैसे i pill लेना ठीक नही है, डॉक्टर को दिखाया, तो उन्होंने प्रतिदिन खाने वाली एक दवा दे दी

और बोला जब भी बच्चा करना हो इस 23 दिन पहले ओस दावा को बंद कर देना

हम पूरे 2 साल इस दावा का सेवन किए और अपनी शादी शुदा जिंदगी को एंजॉय किया

अब 2 साल बाद जब बच्चा पैदा करने की स्थिति आई तो हम लोगो ने बहुत ट्राई किया पर मैं गर्भ से नही हो पाए

जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला मेरी नली सुख चुकी है इस वजह से मैं अभी बच्चा कंसीव नही कर पाऊंगी

1 साल इलाज के बाद मेरी रिपोर्ट आती है, और मैं स्वास्थ्य रहती हूं लेकिन लेकिन फिर भी बच्चा नहीं होने पर इस बार पति की भी जांच होती है,

उसकी रिपोर्ट में निकला की अत्याधिक संबंध बनाने से वीर्य की क्वालिटी खराब है, फिर दुबारा उनके इलाज में 1 साल का समय चला गया

कुल मिलाकर जब हमारी उम्र थी बच्चा पैदा करने की तो पढ़े लिखे हीरो हीरोइन को देख कर हमने फैसला लिया

लेकिन अब जरूरत है तो हर कोशिश के बाद भी मैं मां नही बन पा रही हूं

आज मुझे समझ में आ रहा है की चंद किताब पढ़ लेने से वो ज्ञान कभी नहीं मिल सकता जो ज्ञान आप को तजुर्बा देता है

बड़े बुजुर्ग की बात मानकर अगर मैने पहले ही बच्चा किया होता तो आज मुझे ये दिन देखना नही पड़ता

इस लिए हर चीज अपने समय से होना sbse jyada महत्त्वपूर्ण है

अगर फॉलो नही किये हैं तो फॉलो कर लीजिये

08/12/2025

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