17/06/2026
प्रभु के प्रिय हे पुरषोत्तम मास🙏तुमको प्रणाम🙏 तुम जा तो रहे हो पर तुम्हारे आने से मन मे जो अचानक भक्ति भाव बढ़ा था ,उसे मत ले जाना हमारे पास ही छोड़ जाना🙏
तुम्हारे आने से मंदिरों में रोज दर्शन करने की जो लत लगी हैं उसे लगी रहने देना ,घरो में जो धर्ममय वातावरण बना है वह धर्ममय माहौल भी बने रहने देना क्योंकि तुम अकेले नहीं आये थे साथ मे लाये थे भक्ति भाव जो सभी के हृदय में तुम्हारे साथ साथ बना रहा, प्रभु सेवा का भाव जो सब के मन मे बना रहा, वैष्णवो के मन मष्तिष्क ओर शरीर के आलस्य का हरण करने की शक्ति जिसनें सभी के आलस्य का हरण कर के जागने का क्रम बदल दिया ,मन में हवेळी में एक दर्शन का संकल्प दिला दिया, बड़ो की बात तो छोड़ो कई छोटे बच्चों को भी घर से बाहर अन्नग्रहण करने से अपने को रोक लिया।जो सेवा से दूर थे वे प्रभु सेवा में जुड़ने लगे हैं। जिन्होंने कभी हवेली का रास्ता नही देखा था उन्होंने दर्शनों का समय याद कर लिया दर्शन का नियम बना लिया🙏ओर क्या कुछ लिखु लिखने को बहुत है जितना लिखू कम है ।
तुम तो जाने ही वाले हों पर इतनी विनती है ,तुम्हारा जाना जरूरी हैं तुम अकेले भले चले जाना पर तुम अपने साथ जो यह सब लाए थे उन्हें मत ले जाना🙏 अगली बार तुम्हारे आने तक हम इन्हें सहज कर रखेंगे तुम्हें याद करते रहेंगे।
हे पुरषोंत्तम मास जा तो रहे हो पर बहुत याद आओगे, जैसे आप प्रभु के अत्यंत प्रिय हो ऐसी कृपा करना हम भी प्रभु के आपकी तरह ही प्रिय बने रहे,सभी के ह्रदय मे भक्ति भाव, सेवा भाव बनाये रखना यहीं विनती है, सभी आपके भक्तों की🙏🙏😊